UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

हिंदी सर्वनाम: प्रकार और प्रयोग

सर्वनाम क्या है, उसके छह भेद, पुरुषवाचक सर्वनाम के रूप और प्रयोग — UPSC अनिवार्य हिंदी के लिए तालिका और उदाहरण-सहित गहन अध्ययन-नोट।

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संज्ञा की पुनरावृत्ति से बचने के लिए जिन शब्दों को उसके स्थान पर रखा जाता है, उन्हें सर्वनाम कहते हैं। “राम बाज़ार गया और राम ने राम के लिए पुस्तक खरीदी” — यह वाक्य भद्दा है; इसके स्थान पर हम कहते हैं “राम बाज़ार गया और उसने अपने लिए पुस्तक खरीदी।” यहाँ ‘उसने’ और ‘अपने’ सर्वनाम हैं, जो ‘राम’ के स्थान पर आकर वाक्य को सहज बनाते हैं।

UPSC अनिवार्य हिंदी (Indian Language) के व्याकरण-खंड में सर्वनाम से प्रायः तीन तरह के प्रश्न आते हैं — सर्वनाम का भेद पहचानना, पुरुषवाचक सर्वनाम के सही रूप (कारक-रूप) का प्रयोग, और निजवाचक ‘आप’ तथा आदरसूचक ‘आप’ में अंतर। चूँकि सर्वनाम केवल कुछ ही शब्द हैं (हिंदी में मूल सर्वनाम लगभग ग्यारह हैं), इन्हें ठीक से समझ लेना और इनके रूप-परिवर्तन का अभ्यास कर लेना पर्याप्त है। यह नोट छहों भेदों को उदाहरण और तालिकाओं के साथ क्रम से समझाता है।

सर्वनाम की परिभाषा और पहचान

जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं। ‘सर्वनाम’ का अर्थ ही है — ‘सबका नाम’, अर्थात् जो किसी भी संज्ञा के बदले आ सके।

जैसे — राम ने कहा, “मैं पढ़ूँगा।” यहाँ ‘मैं’ शब्द ‘राम’ के स्थान पर आया है, अतः सर्वनाम है। इसी प्रकार “जो परिश्रम करता है, वह सफल होता है” में ‘जो’ और ‘वह’ दोनों सर्वनाम हैं।

हिंदी के मूल सर्वनाम गिनती के हैं — मैं, तू, तुम, आप, यह, वह, जो, सो, कौन, क्या, कोई, कुछ। इन्हीं से उनके विभिन्न कारक-रूप (मुझे, उसे, जिसे, किसे आदि) बनते हैं। पहचान का सरल आधार यह है कि सर्वनाम का अपना कोई स्थिर अर्थ नहीं होता; उसका अर्थ संदर्भ की संज्ञा से ही तय होता है।

सर्वनाम के भेद

प्रयोग के आधार पर हिंदी में सर्वनाम के छह मुख्य भेद माने जाते हैं। नीचे की तालिका छहों भेदों को एक साथ स्पष्ट करती है, उसके बाद प्रत्येक का सोदाहरण विवेचन है।

भेदक्या बोध कराता हैमुख्य शब्दउदाहरण-वाक्य
पुरुषवाचकवक्ता, श्रोता या अन्य व्यक्ति कामैं, हम, तू, तुम, आप, वह, वेमैं जाऊँगा।
निश्चयवाचकनिकट/दूर की निश्चित वस्तु-व्यक्ति कायह, वह, ये, वेयह मेरी पुस्तक है।
अनिश्चयवाचकअनिश्चित वस्तु-व्यक्ति काकोई, कुछद्वार पर कोई है।
संबंधवाचकदो वाक्यों को जोड़ने वाला संबंधजो, सो, जिसे, जैसाजो करेगा, सो भरेगा।
प्रश्नवाचकप्रश्न पूछने के लिएकौन, क्या, किसे, किसनेकौन आया है?
निजवाचककर्ता का स्वयं अपने लिए प्रयोगआप, अपना, स्वयं, खुदमैं यह स्वयं करूँगा।

1. पुरुषवाचक सर्वनाम

जो सर्वनाम बोलने वाले (वक्ता), सुनने वाले (श्रोता) अथवा जिसके विषय में बात हो रही हो (अन्य) — इन तीनों में से किसी के लिए प्रयुक्त हों, वे पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। इसके तीन उपभेद हैं —

पुरुषकिसके लिएएकवचनबहुवचन
उत्तम पुरुष (प्रथम)बोलने वाला स्वयंमैंहम
मध्यम पुरुष (द्वितीय)सुनने वालातू / तुमतुम / आप
अन्य पुरुष (तृतीय)जिसकी चर्चा होवह / यहवे / ये

प्रयोग —

  • मैं प्रतिदिन पुस्तक पढ़ता हूँ। (उत्तम पुरुष, एकवचन)
  • हम विद्यालय जाते हैं। (उत्तम पुरुष, बहुवचन)
  • तू कहाँ जा रहा है? (मध्यम पुरुष — घनिष्ठता/अनादर)
  • तुम क्या कर रहे हो? (मध्यम पुरुष — सामान्य)
  • आप कब पधारेंगे? (मध्यम पुरुष — आदर)
  • वह परिश्रमी छात्र है। (अन्य पुरुष)

ध्यान दें — ‘तू’ अत्यंत घनिष्ठता या अनादर में, ‘तुम’ सामान्य व्यवहार में, और ‘आप’ आदर में प्रयुक्त होता है। यही ‘आप’ जब निज के अर्थ में आता है तो निजवाचक हो जाता है (देखें भेद 6)।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनामों से किसी निश्चित (सामने या ज्ञात) व्यक्ति या वस्तु का बोध हो, वे निश्चयवाचक सर्वनाम हैं। निकट के लिए ‘यह/ये’ और दूर के लिए ‘वह/वे’ का प्रयोग होता है। प्रयोग — यह मेरी पुस्तक है। वह सीता का घर है। ये लड़के परिश्रमी हैं। वे चित्र सुंदर हैं।

(टिप्पणी — ‘यह’, ‘वह’ पुरुषवाचक भी हैं और निश्चयवाचक भी; भेद प्रयोग से तय होता है। व्यक्ति की चर्चा में पुरुषवाचक, किसी वस्तु/व्यक्ति की ओर निश्चित संकेत में निश्चयवाचक।)

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनामों से किसी अनिश्चित (अज्ञात) व्यक्ति या वस्तु का बोध हो, वे अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं। प्राणी/व्यक्ति के लिए ‘कोई’ और वस्तु के लिए ‘कुछ’ का प्रयोग होता है। प्रयोग — द्वार पर कोई खड़ा है। मुझे कुछ खाने को दो। कोई भी यह कार्य कर सकता है। थैले में कुछ रखा है।

4. संबंधवाचक सर्वनाम

जो सर्वनाम एक वाक्य का दूसरे (उपवाक्य) से संबंध स्थापित करें, वे संबंधवाचक सर्वनाम हैं। ये प्रायः युग्म में आते हैं — ‘जो-सो’, ‘जो-वह’, ‘जैसा-वैसा’, ‘जितना-उतना’, ‘जिसकी-उसकी’। प्रयोग —

  • जो परिश्रम करता है, वह सफल होता है।
  • जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।
  • जिसकी लाठी, उसकी भैंस।
  • जो आया है, सो जाएगा।

5. प्रश्नवाचक सर्वनाम

जो सर्वनाम प्रश्न पूछने के लिए प्रयुक्त हों, वे प्रश्नवाचक सर्वनाम हैं। व्यक्ति/प्राणी के लिए ‘कौन’ और वस्तु/भाव के लिए ‘क्या’ मुख्य हैं; इनके कारक-रूप किसने, किसे, किससे, किसका आदि हैं। प्रयोग — कौन आया है? तुम्हें क्या चाहिए? यह कार्य किसने किया? मैं किसको बुलाऊँ?

6. निजवाचक सर्वनाम

जब कर्ता अपने ही लिए (‘स्वयं’, ‘खुद’, ‘अपने आप’ के अर्थ में) सर्वनाम का प्रयोग करे, तो वह निजवाचक सर्वनाम कहलाता है। इसके मुख्य रूप हैं — आप, अपना, स्वयं, खुद, अपने आप। यहाँ ‘आप’ आदर के अर्थ में नहीं, ‘निज/स्वयं’ के अर्थ में है। प्रयोग —

  • मैं यह कार्य आप ही (स्वयं) कर लूँगा।
  • वह अपना कार्य स्वयं करता है।
  • तुम अपनी पुस्तक लाओ।
  • पहले अपने आप को पहचानो।

पुरुषवाचक सर्वनाम के रूप (कारक-परिवर्तन)

सर्वनाम भी संज्ञा की भाँति विकारी होते हैं — कारक के अनुसार इनका रूप बदलता है। यही भाग परीक्षा में सर्वाधिक पूछा जाता है, क्योंकि शुद्ध रूप का प्रयोग ही वाक्य को व्याकरण-शुद्ध बनाता है। नीचे प्रमुख सर्वनामों के कर्ता, कर्म/संप्रदान और संबंध-रूप दिए हैं।

मूल रूपकर्ता (ने सहित)कर्म/संप्रदान (को)संबंध (का/की)
मैंमैं / मैंनेमुझे / मुझकोमेरा, मेरी, मेरे
हमहम / हमनेहमें / हमकोहमारा, हमारी, हमारे
तूतू / तूनेतुझे / तुझकोतेरा, तेरी, तेरे
तुमतुम / तुमनेतुम्हें / तुमकोतुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे
आपआप / आपनेआपकोआपका, आपकी, आपके
यहयह / इसनेइसे / इसकोइसका, इसकी, इसके
वहवह / उसनेउसे / उसकोउसका, उसकी, उसके
येये / इन्होंनेइन्हें / इनकोइनका, इनकी, इनके
वेवे / उन्होंनेउन्हें / उनकोउनका, उनकी, उनके

ध्यान देने योग्य —

  • एकवचन ‘मैं/तू’ का संबंध-रूप ‘मेरा/तेरा’ होता है, ‘मैंका/तूका’ नहीं।
  • ‘वह’ का कर्ता-रूप ‘ने’ के साथ ‘उसने’ हो जाता है; ‘वहने’ अशुद्ध है।
  • आदरसूचक ‘आप’ के साथ क्रिया सदा बहुवचन में आती है — “आप आइए“, “आप कहिए“।

सामान्य अशुद्धियाँ और परीक्षा-दृष्टि

  • निजवाचक ‘आप’ को आदरसूचक मान लेना: “वह अपना कार्य आप कर लेता है” में ‘आप’ = ‘स्वयं’ (निजवाचक), न कि आदर।
  • ‘तुम’ के साथ एकवचन क्रिया: “तुम जाता है” अशुद्ध; शुद्ध — “तुम जाते हो।” ‘तुम’ के साथ क्रिया बहुवचन में रहती है।
  • संबंधवाचक में जोड़ा टूटना: “जो परिश्रम करता है, सफल होता है” अधूरा-सा है; शुद्ध युग्म — “जो परिश्रम करता है, वह सफल होता है।”
  • संबंध-रूप के लिंग-वचन में भूल: ‘मेरा’, ‘मेरी’, ‘मेरे’ का चयन संज्ञा के लिंग-वचन से तय होता है — मेरा घर, मेरी पुस्तक, मेरे मित्र
  • ‘इसने/उसने’ का अशुद्ध रूप: ‘यहने’, ‘वहने’ अशुद्ध हैं; ‘ने’ लगते ही रूप बदलकर ‘इसने’, ‘उसने’ हो जाता है।
  • अनिश्चयवाचक ‘कोई/कुछ’ को निश्चयवाचक मानना: ‘कोई’ और ‘कुछ’ सदा अनिश्चित का बोध कराते हैं।

परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है — “रेखांकित सर्वनाम का भेद बताइए”, “उपयुक्त सर्वनाम-रूप से रिक्त स्थान भरिए”, अथवा “निजवाचक और आदरसूचक ‘आप’ में अंतर स्पष्ट कीजिए”। इसलिए भेद-पहचान के साथ कारक-रूपों का अभ्यास भी आवश्यक है।

अभ्यास प्रश्न

(क) निम्नलिखित में रेखांकित सर्वनाम का भेद बताइए —

  1. कोई दरवाज़े पर खड़ा है।
  2. जो बोएगा, सो काटेगा।
  3. यह मेरी कलम है।
  4. यह काम मैं स्वयं करूँगा।
  5. तुम्हें क्या चाहिए?
  6. हम कल आएँगे।

(ख) उपयुक्त सर्वनाम-रूप से रिक्त स्थान भरिए —

  1. ________ (मैं) पुस्तक मेज़ पर है। (संबंध-रूप)
  2. यह कार्य ________ (वह — कर्ता, ‘ने’ सहित) किया।
  3. कृपया ________ (तू → आदर-रूप) यहाँ बैठिए।

(ग) सही/गलत बताइए और अशुद्ध को शुद्ध कीजिए —

  1. तुम कहाँ जाता है?
  2. जो परिश्रम करता है, सफल होता है।

(घ) लघु-उत्तरीय —

  1. निजवाचक और पुरुषवाचक ‘आप’ में अंतर एक-एक उदाहरण से बताइए।
  2. ‘मैं’ के कर्म-कारक और संबंध-कारक रूप लिखिए।

उत्तर

  1. अनिश्चयवाचक 2. संबंधवाचक 3. निश्चयवाचक 4. निजवाचक 5. प्रश्नवाचक 6. पुरुषवाचक (उत्तम पुरुष)
  2. मेरी 8. उसने 9. आप
  3. अशुद्ध → शुद्ध: “तुम कहाँ जाते हो?”
  4. अशुद्ध → शुद्ध: “जो परिश्रम करता है, वह सफल होता है।”
  5. निजवाचक ‘आप’ = ‘स्वयं’ — “मैं यह काम आप (स्वयं) करूँगा।” पुरुषवाचक/आदरसूचक ‘आप’ = आदर — “आप कब आएँगे?”
  6. कर्म-कारक: मुझे / मुझको; संबंध-कारक: मेरा, मेरी, मेरे।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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