Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

मैंग्रोव, समुद्री जैवविविधता एवं अंटार्कटिक MPAs — यूपीएससी नोट्स

मैंग्रोव, समुद्री संरक्षित क्षेत्र, CCAMLR के अंतर्गत अंटार्कटिक MPAs, BBNJ हाई सीज़ संधि — खतरे, भारत का रुख, ब्लू इकोनॉमी और MISHTI योजना पर यूपीएससी मार्गदर्शिका।

समुद्री संरक्षण की तीन अलग किंतु परस्पर जुड़ी धाराएँ इस समय पर्यावरण नीति विमर्श पर हावी हैं: भारत के तटों पर मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र, CCAMLR के अंतर्गत अंटार्कटिक समुद्री संरक्षित क्षेत्र (Marine Protected Areas, MPAs), और UNCLOS के अंतर्गत वार्तित BBNJ (हाई सीज़) संधि। तीनों एक यूपीएससी विषय पर अभिसरित होते हैं — 21वीं सदी में समुद्री जैवविविधता शासन। यह नोट तीनों को एक ही चिर-प्रासंगिक मार्गदर्शिका में समेटता है।

महासागर पृथ्वी का 71% भाग ढके हुए हैं और प्रदूषण, अति-दोहन (overexploitation) तथा जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े आघात झेल रहे हैं। SDG 14 (जल के नीचे जीवन) इसी कारण सर्वाधिक पीछे चलने वाले लक्ष्यों में से एक है। इन तीन शासन-धाराओं को समझना यूपीएससी अभ्यर्थी के लिए केवल अकादमिक नहीं — आगामी दशक की वैश्विक नीति-राजनीति समझने का प्रवेशद्वार है।

भाग 1: मैंग्रोव — भारत के तटीय रक्षक

मैंग्रोव क्या हैं?

लवण-सहिष्णु (salt-tolerant) पौधे, या हैलोफ़ाइट्स (halophytes), जो कठोर तटीय उष्णकटिबंधीय/उपोष्णकटिबंधीय ज्वारीय क्षेत्रों के अनुकूलित होते हैं। ये सामान्यतः वहाँ उगते हैं जहाँ:

भारत में लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर मैंग्रोव क्षेत्र है (ISFR 2023), जो इंडोनेशिया और ब्राज़ील के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश-वार मैंग्रोव क्षेत्र है। मैंग्रोव की लगभग 35-40 प्रजातियाँ भारत में पाई जाती हैं, जिनमें राइज़ोफ़ोरा, एविसीनिया और सोनेरेशिया प्रमुख हैं।

भारत के प्रमुख मैंग्रोव क्षेत्र

स्थलराज्यविशेषताएँ
सुंदरबनपश्चिम बंगालपृथ्वी का सबसे बड़ा एकल मैंग्रोव वन; UNESCO विश्व धरोहर; बाघ का आवास
भितरकनिकाओडिशाभारत का दूसरा सबसे बड़ा; खारे पानी के मगरमच्छ
पिचवरमतमिलनाडुप्रायद्वीपीय भारत का बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र
गोदावरी-कृष्णा डेल्टाआंध्र प्रदेशकोरिंगा मैंग्रोव
महानदी डेल्टाओडिशा
कच्छ की खाड़ीगुजरातशुष्क क्षेत्र के मैंग्रोव
मुंबई तटमहाराष्ट्रअंतिम शहरी मैंग्रोव
अंडमान-निकोबारकेंद्रशासित प्रदेशसमृद्ध विविधता
रत्नागिरी तटमहाराष्ट्र

पारिस्थितिकीय कार्य

खतरे

भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया

भाग 2: अंटार्कटिक में समुद्री संरक्षित क्षेत्र — CCAMLR

अंटार्कटिक संधि प्रणाली

अंटार्कटिक के शासन और शांतिपूर्ण वैज्ञानिक उपयोग के लिए संरक्षण हेतु समझौतों की एक श्रृंखला:

उपकरणवर्षभूमिका
अंटार्कटिक संधि1959 (प्रभावी 1961)विसैन्यीकरण; विज्ञान की स्वतंत्रता
CCAS (सील)1972अंटार्कटिक सीलों का संरक्षण
CCAMLR (समुद्री जीव संसाधन)1980 (प्रभावी 1982)पारिस्थितिकी-तंत्र आधारित जीव संसाधन
मैड्रिड प्रोटोकॉल1991पर्यावरण सुरक्षा; खनन प्रतिबंध
ACAP (अल्बाट्रोस एवं पेट्रेल)2001प्रवासी प्रजातियाँ

CCAMLR विस्तार में

अंटार्कटिक समुद्री जीव संसाधन संरक्षण आयोग (Commission for the Conservation of Antarctic Marine Living Resources):

मौजूदा अंटार्कटिक MPAs

MPAवर्षक्षेत्रफलविशेषताएँ
दक्षिण ऑर्कनी द्वीप दक्षिणी शेल्फ़ MPA2009~94,000 वर्ग किमीविश्व का पहला हाई-सीज़ MPA
रॉस सी क्षेत्र MPA2016~15.5 लाख वर्ग किमीसबसे बड़ा MPA; 35-वर्षीय अवधि

प्रस्तावित MPAs

हाल के वर्षों में CCAMLR में सर्वसम्मति रूस और चीन द्वारा रोकी जाती रही है। भारत ने पूर्वी अंटार्कटिक और वेडेल सी के लिए EU-नीत प्रस्तावों का समर्थन किया है।

अंटार्कटिक MPAs क्यों मायने रखते हैं

भाग 3: BBNJ संधि — मानवता के लिए हाई सीज़

पृष्ठभूमि

BBNJ = "राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से परे जैवविविधता (Biodiversity Beyond National Jurisdiction)"। हाई सीज़ — किसी भी राष्ट्र के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone, 200 समुद्री मील) से परे का महासागर — महासागरीय सतह का 64% ढके हुए हैं, परंतु अब तक इन पर कोई व्यापक जैवविविधता कानून नहीं था।

UNGA (2015) ने UNCLOS के अंतर्गत एक कानूनी रूप से बाध्यकारी उपकरण विकसित करने का निर्णय लिया। वर्षों की वार्ताओं के बाद संधि का प्रारूप मार्च 2023 में सहमत हुआ और औपचारिक रूप से 19 जून 2023 को अपनाया गया।

मुख्य तत्व

  1. समुद्री आनुवंशिक संसाधन (Marine Genetic Resources, MGR) — महासागर से प्राप्त जैव-प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण से लाभों के बँटवारे सहित।
  2. क्षेत्र-आधारित प्रबंधन उपकरण (ABMTs) — हाई सीज़ पर समुद्री संरक्षित क्षेत्र सहित।
  3. पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) — राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से परे की गतिविधियों के लिए।
  4. क्षमता निर्माण और समुद्री प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण (CB&TMT) — विकासशील देशों को।

30×30 कड़ी

BBNJ कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैवविविधता ढाँचे (GBF) के 30×30 लक्ष्य को क्रियान्वित करता है — 2030 तक वैश्विक भूमि और महासागर के 30% की रक्षा

भारत का रुख

पूरक भारतीय प्रतिबद्धताएँ

तीन धाराओं की तुलना

आयाममैंग्रोवअंटार्कटिक MPAsBBNJ
स्तरराष्ट्रीय/उप-राष्ट्रीयक्षेत्रीयवैश्विक
शासन उपकरणCRZ, MISHTICCAMLRUNCLOS के अंतर्गत संधि
प्रमुख खतराविकास, झींगा खेतीक्रिल मत्स्यन, तापनगहरे समुद्र खनन, MGR दोहन
भारत की स्थितिसंरक्षण कर्ता1985 से सदस्य2024 में हस्ताक्षरित

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

अद्यतन संदर्भ: वर्तमान हस्ताक्षरकर्ता/अनुसमर्थन की संख्या UN DOALOS से सत्यापित करें।

यूपीएससी प्रासंगिकता

GS-III मैपिंग

प्रीलिम्स बिंदु

मेन्स अभ्यास प्रश्न

निबंध-कोण

त्वरित पुनरावलोकन

उपकरण / अवधारणामुख्य तथ्य
मैंग्रोवहैलोफ़ाइट्स; भारत ~5,000 वर्ग किमी
MISHTIबजट 2023 मैंग्रोव योजना
CCAMLR1982; मुख्यालय होबार्ट; 26 सदस्य
रॉस सी MPA2016; 15.5 लाख वर्ग किमी
BBNJ संधिजून 2023 अंगीकरण
30×30GBF लक्ष्य, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल
UNCLOS1982

यूपीएससी के लिए एकीकृत संरचना यह है: समुद्री जैवविविधता शासन 21वीं सदी की सबसे कम-विनियमित सीमा है। मैंग्रोव (स्थानीय), अंटार्कटिक MPAs (क्षेत्रीय), और BBNJ (वैश्विक) — भारत को संरक्षण और जलवायु नेतृत्व, दोनों एकसाथ साधने के लिए तीन-स्तरीय संलग्नता प्रदान करते हैं।

सामान्य प्रश्न

मैंग्रोव क्या होते हैं और भारत में कहाँ पाए जाते हैं?

मैंग्रोव लवण-सहिष्णु पौधे हैं जो उष्णकटिबंधीय तटीय ज्वारीय क्षेत्रों में उगते हैं। भारत में लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर का मैंग्रोव क्षेत्र है — विश्व में तीसरा सबसे बड़ा। प्रमुख क्षेत्र हैं सुंदरबन (पश्चिम बंगाल), भितरकनिका (ओडिशा), पिचवरम (तमिलनाडु), और कच्छ की खाड़ी (गुजरात)।

MISHTI योजना क्या है?

बजट 2023 में घोषित MISHTI (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes) देश के 9 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों में 540 वर्ग किलोमीटर मैंग्रोव बहाली का लक्ष्य रखती है। यह MGNREGA और CAMPA के साथ अभिसरण से क्रियान्वित होती है।

मैंग्रोव को नीला कार्बन क्यों कहा जाता है?

मैंग्रोव वन प्रति हेक्टेयर उष्णकटिबंधीय वर्षावनों की तुलना में 3-5 गुना अधिक कार्बन संग्रहित करते हैं — मुख्यतः मिट्टी और जलमग्न जैवपुंज में। चूँकि यह कार्बन तटीय/समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों में संग्रहित होता है, इसे "नीला कार्बन" कहा जाता है।

CCAMLR क्या है और भारत की भूमिका क्या है?

CCAMLR अंटार्कटिक समुद्री जीव संसाधन संरक्षण आयोग है, जो 1982 में स्थापित हुआ। मुख्यालय होबार्ट (ऑस्ट्रेलिया) में है और इसके 26 सदस्य हैं। भारत 1985 से सदस्य है और प्रस्तावित पूर्वी अंटार्कटिक तथा वेडेल सी MPA का समर्थन करता है।

BBNJ संधि क्या है?

BBNJ (Biodiversity Beyond National Jurisdiction) संधि UNCLOS के अंतर्गत हाई सीज़ की जैवविविधता की रक्षा हेतु पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता है। 19 जून 2023 को अपनाई गई। इसके चार स्तंभ हैं: समुद्री आनुवंशिक संसाधन, क्षेत्र-आधारित प्रबंधन (MPAs), EIA, और क्षमता निर्माण।

30×30 लक्ष्य का क्या अर्थ है?

2022 के कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैवविविधता ढाँचे के अंतर्गत यह प्रतिबद्धता है कि 2030 तक विश्व की कम से कम 30% भूमि, अंतर्देशीय जल, तटीय और समुद्री क्षेत्रों को प्रभावी रूप से संरक्षित किया जाए। BBNJ संधि इसी का सागरीय क्रियान्वयन है।

भारतीय मैंग्रोव के लिए सबसे बड़े खतरे क्या हैं?

झींगा जलकृषि, बाँधों के कारण मीठे पानी की कमी, औद्योगिक प्रदूषण, शहरी अतिक्रमण (विशेष रूप से मुंबई), समुद्र-स्तर वृद्धि, और ईंधन-लकड़ी हेतु अति-कटाई। 2004 की सुनामी ने सिद्ध किया कि बरकरार मैंग्रोव क्षेत्रों ने जान-माल की रक्षा की।

रॉस सी MPA क्या है?

2016 में CCAMLR द्वारा स्थापित रॉस सी क्षेत्र MPA विश्व का सबसे बड़ा समुद्री संरक्षित क्षेत्र है — लगभग 15.5 लाख वर्ग किलोमीटर। यह 35-वर्षीय अवधि का है और सम्राट पेंगुइन, वेडेल सील तथा टूथफ़िश को संरक्षण देता है।

भारत ने BBNJ पर हस्ताक्षर कब किए?

भारत ने 25 सितंबर 2024 को BBNJ संधि पर हस्ताक्षर किए। अनुसमर्थन की प्रक्रिया आंतरिक परामर्श चरण में है। संधि के प्रवर्तन के लिए कम से कम 60 देशों के अनुसमर्थन की आवश्यकता है।

मैंग्रोव बहाली में सामान्य व्यक्ति की क्या भूमिका हो सकती है?

तटीय क्षेत्रों के निवासी सामुदायिक वृक्षारोपण में भाग ले सकते हैं, MISHTI और स्थानीय वन विभाग की पहलों को समर्थन दे सकते हैं, झींगा-कृषि के टिकाऊ विकल्पों का चयन कर सकते हैं, और एकल-उपयोग प्लास्टिक से बच सकते हैं — क्योंकि अधिकांश समुद्री प्लास्टिक मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र में फँसता है।