Anantam IASPost · 5 October 2026

पद परिचय: नियम, हर शब्द-भेद का ढाँचा और 39 हल किए उदाहरण

Study Notes · Hindi - Compulsory

पद परिचय सीखिए: Pad Parichay में हर शब्द-भेद का क्या लिखना है, 39 हल किए उदाहरण, बोर्ड की अंक योजना वाला ढाँचा और वे चूकें जिनसे अंक कटते हैं।

पद परिचय का मतलब है वाक्य में आए किसी शब्द का पूरा व्याकरणिक परिचय देना: वह कौन-सा शब्द-भेद है, उसका उपभेद क्या है, लिंग, वचन, कारक या काल क्या है, और वाक्य के किस दूसरे शब्द से उसका रिश्ता है। “बच्चों ने पतंग उड़ाई” में “बच्चों ने” का पद परिचय होगा: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक, “उड़ाई” क्रिया का कर्ता। कामताप्रसाद गुरु इसे व्याकरण के सिद्धांतों का व्यावहारिक उपयोग कहते हैं, यानी यहाँ पूरा व्याकरण एक साथ परखा जाता है।

ज्यादातर अंक दो वजहों से कटते हैं। पहली, सिर्फ शब्द-भेद लिखकर छोड़ देना (“संज्ञा”), जबकि पूछा पूरा परिचय गया है। दूसरी, शब्दकोश वाला भेद लिख देना, जबकि भेद वाक्य में शब्द के काम से तय होता है। यह नोट हर शब्द-भेद का तय ढाँचा देता है और फिर 39 उदाहरण हल करता है, जिनमें बोर्ड के नमूना प्रश्नपत्र वाले वाक्य भी हैं।

पद परिचय एक नजर में

नीचे की तालिका पूरे अध्याय का सार है। हर शब्द-भेद का ढाँचा अगले खंडों में उदाहरण के साथ है।

बिंदुविवरण
परिभाषावाक्य में आए पद का शब्द-भेद, उपभेद, रूप और दूसरे पदों से संबंध बताना
दूसरे नामपद-निर्देश, व्याख्या; राजा शिवप्रसाद ने इसे अन्वय कहा
शब्द और पदवाक्य से बाहर “शब्द”, वाक्य में प्रयुक्त होकर “पद”
कितने शब्द-भेद8: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, और चार अव्यय
पहला कदमक्रिया ढूँढिए, फिर उससे बाकी पदों का रिश्ता देखिए
लिखने का तरीकापद के बाद कोलन या डैश, फिर हर बात अल्पविराम से अलग
बोर्ड मेंCBSE हिंदी A, कक्षा 10: 4 अंक, पाँच में से चार प्रश्न

शब्द और पद में फर्क

शब्द जब वाक्य से बाहर अकेला होता है, तो वह सिर्फ शब्द है। जैसे ही वह वाक्य में आता है और व्याकरण के नियमों से बँध जाता है, उस पर लिंग, वचन, कारक या काल का असर पड़ता है, तो वह पद बन जाता है। “लड़का” एक शब्द है। “लड़के ने खाना खाया” में “लड़के ने” एक पद है, क्योंकि अब उसमें कर्ता कारक की विभक्ति लगी है और उसका रूप बदल गया है।

इसीलिए पद परिचय हमेशा वाक्य के भीतर होता है। एक ही शब्द दो वाक्यों में दो अलग पद हो सकता है। “कल छुट्टी है” में “कल” कालवाचक क्रिया विशेषण की तरह है, पर “कल का दिन अच्छा था” में वह संज्ञा है।

यह विचार संस्कृत से आया है। पाणिनि की अष्टाध्यायी का सूत्र 1.4.14 कहता है सुप्तिङन्तं पदम्, यानी जिस शब्द के अंत में सुप् (संज्ञा वाले विभक्ति प्रत्यय) या तिङ् (क्रिया वाले प्रत्यय) लगे हों, वही पद है।

हर शब्द-भेद के पद परिचय में क्या लिखें

गुरु ने हर शब्द-भेद के लिए तय किया है कि परिचय में कौन-सी बातें आएँगी। आज की पाठ्यपुस्तकें और बोर्ड की अंक योजना भी लगभग यही क्रम मानती हैं। इसे याद कर लिया, तो आधा अध्याय हो गया।

शब्द-भेदपद परिचय में क्या लिखें
संज्ञाभेद, लिंग, वचन, कारक, क्रिया या दूसरे पद से संबंध
सर्वनामभेद (पुरुषवाचक हो तो पुरुष भी), लिंग, वचन, कारक, संबंध
विशेषणभेद, लिंग, वचन, विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई)
क्रियाभेद (सकर्मक, अकर्मक आदि), लिंग, वचन, पुरुष, काल, वाच्य, कर्ता या कर्म
क्रिया विशेषणभेद, जिस क्रिया या शब्द की विशेषता बताई
संबंधबोधकभेद, किस संज्ञा या सर्वनाम का संबंध किससे जोड़ा
समुच्चयबोधकभेद, किन शब्दों या वाक्यों को जोड़ा
विस्मयादिबोधकभेद, कौन-सा भाव (हर्ष, शोक, आश्चर्य आदि)

हर शब्द-भेद के उपभेद अलग नोट्स में हैं: संज्ञा के भेद, सर्वनाम के भेद, विशेषण के भेद और अव्यय के चार भेद। पद परिचय इन सबको एक जगह जोड़ता है, इसलिए जिस शब्द-भेद के उपभेद कच्चे हों, पहले वही दोहरा लीजिए।

पद परिचय करने का तरीका, चार कदम में

हर वाक्य पर एक ही क्रम चलाइए। इससे लिंग और कारक जैसी चीजें अपने आप साफ होती जाती हैं:

  1. क्रिया ढूँढिए। वाक्य का केंद्र क्रिया है। काल, वाच्य और कर्ता यहीं से पता चलते हैं।
  2. कर्ता और कर्म पहचानिए। “किसने” और “क्या या किसको” पूछिए। “ने”, “को”, “से” जैसी विभक्ति कारक का संकेत देती है।
  3. लिंग क्रिया या विशेषण से पक्का कीजिए। “मैं जाऊँगा” और “मैं जाऊँगी” में “मैं” का लिंग क्रिया बताती है।
  4. उसी क्रम में लिखिए जो तालिका में है। हर बात अल्पविराम से अलग, और आखिर में संबंध।

कारक की पहचान ही सबसे ज्यादा उलझाती है, इसलिए आठों कारक और उनकी विभक्तियाँ हिंदी कारक वाले नोट में एक बार देख लीजिए।

हल किए उदाहरण: संज्ञा

संज्ञा के पद परिचय में पाँच बातें आती हैं। सबसे आम चूक कारक छोड़ देना है, इसलिए हर उदाहरण में कारक और संबंध दोनों लिखे गए हैं।

उदाहरण 1. गंगा हिमालय से निकलती है।

गंगा: व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक, “निकलती है” क्रिया का कर्ता।

उदाहरण 2. गंगा हिमालय से निकलती है।

हिमालय से: व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अपादान कारक (अलग होने का भाव)।

उदाहरण 3. बच्चों ने पतंग उड़ाई।

बच्चों ने: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक, “उड़ाई” क्रिया का कर्ता।

उदाहरण 4. बच्चों ने पतंग उड़ाई।

पतंग: जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्म कारक, “उड़ाई” क्रिया का कर्म।

उदाहरण 5. ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।

ईमानदारी: भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक।

उदाहरण 6. सेना सीमा पर तैनात है।

सेना: समूहवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक।

उदाहरण 7. माँ ने बेटी को मिठाई दी।

बेटी को: जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, संप्रदान कारक (जिसे कुछ दिया गया)।

उदाहरण 8. राम का घर पास में है।

राम का: व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, संबंध कारक, संबंधी पद “घर”।

उदाहरण 9 (CBSE नमूना प्रश्नपत्र). शीला अग्रवाल को कॉलेज वालों ने नोटिस थमा दिया।

शीला अग्रवाल: व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्म कारक। यही उत्तर CBSE की 2025-26 की अंक योजना में है।

उदाहरण 7 और 9 दोनों में “को” है, पर एक को संप्रदान और दूसरे को कर्म लिखा गया है। फर्क क्रिया से आता है: “देना” में पाने वाला संप्रदान माना जाता है, जबकि अंक योजना ने “थमा दिया” में “शीला अग्रवाल को” कर्म माना है। बोर्ड परीक्षा में अंक योजना वाला उत्तर ही सुरक्षित है।

हल किए उदाहरण: सर्वनाम

सर्वनाम में पुरुषवाचक हो तो पुरुष (उत्तम, मध्यम, अन्य) लिखना जरूरी है। लिंग अक्सर सर्वनाम से नहीं, क्रिया से पता चलता है।

उदाहरण 10. मैं कल बाजार जाऊँगा।

मैं: पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष), पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, “जाऊँगा” क्रिया का कर्ता।

उदाहरण 11. उसने मुझे पुस्तक दी।

उसने: पुरुषवाचक सर्वनाम (अन्य पुरुष), एकवचन, कर्ता कारक, “दी” क्रिया का कर्ता। यहाँ लिंग वाक्य से तय नहीं होता, क्योंकि “दी” कर्म “पुस्तक” के हिसाब से स्त्रीलिंग है, कर्ता के हिसाब से नहीं।

उदाहरण 12. उसने मुझे पुस्तक दी।

मुझे: पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष), एकवचन, संप्रदान कारक।

उदाहरण 13. कोई दरवाजे पर खड़ा है।

कोई: अनिश्चयवाचक सर्वनाम, पुल्लिंग (“खड़ा” से), एकवचन, कर्ता कारक।

उदाहरण 14. जो मेहनत करता है, वह सफल होता है।

जो: संबंधवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, “करता है” क्रिया का कर्ता।

उदाहरण 15. जो मेहनत करता है, वह सफल होता है।

वह: निश्चयवाचक सर्वनाम, “जो” की ओर संकेत करता है, अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, “होता है” क्रिया का कर्ता। गुरु ने अपने हल किए उदाहरण में ऐसे “वह” को इसी तरह लिखा है।

हल किए उदाहरण: विशेषण

विशेषण के पद परिचय में विशेष्य लिखना सबसे जरूरी है, यानी वह संज्ञा जिसकी विशेषता बताई गई। विशेषण का लिंग और वचन उसी विशेष्य से आता है।

उदाहरण 16 (CBSE नमूना प्रश्नपत्र). खीरे की पनियाली फाँकें बहुत स्वादिष्ट थीं।

पनियाली: गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, बहुवचन, विशेष्य “फाँकें”।

उदाहरण 17. खीरे की पनियाली फाँकें बहुत स्वादिष्ट थीं।

स्वादिष्ट: गुणवाचक विशेषण (विधेय विशेषण, क्योंकि विशेष्य के बाद और क्रिया से पहले आया है), स्त्रीलिंग, बहुवचन, विशेष्य “फाँकें”।

उदाहरण 18. खीरे की पनियाली फाँकें बहुत स्वादिष्ट थीं।

बहुत: प्रविशेषण (परिमाणवाचक क्रिया विशेषण), विशेषण “स्वादिष्ट” की विशेषता बताता है।

उदाहरण 19. चार लड़के मैदान में खेल रहे हैं।

चार: निश्चित संख्यावाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, विशेष्य “लड़के”।

उदाहरण 20. थोड़ा दूध बचा है।

थोड़ा: अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, विशेष्य “दूध”।

उदाहरण 21. यह किताब पुरानी है।

यह: सार्वनामिक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, विशेष्य “किताब”। अकेला “यह आया” होता तो सर्वनाम होता, यहाँ संज्ञा से पहले आकर विशेषण बन गया है।

हल किए उदाहरण: क्रिया

क्रिया का पद परिचय सबसे लंबा होता है। वाच्य और काल की पहचान के लिए हिंदी वाच्य और लिंग, वचन और काल वाले नोट काम आएँगे।

उदाहरण 22 (CBSE नमूना प्रश्नपत्र). शुक्ल पक्ष में चाँद निरंतर बढ़ता है।

बढ़ता है: अकर्मक क्रिया, वर्तमान काल, पुल्लिंग, एकवचन, अन्य पुरुष, कर्तृवाच्य, कर्ता “चाँद”।

उदाहरण 23. सीता ने पत्र लिखा।

लिखा: सकर्मक क्रिया, सामान्य भूतकाल, पुल्लिंग, एकवचन, कर्तृवाच्य, कर्म “पत्र”। कर्ता स्त्रीलिंग होकर भी क्रिया पुल्लिंग है, क्योंकि “ने” लगने पर क्रिया कर्म के अनुसार चलती है।

उदाहरण 24. बच्चे बगीचे में खेल रहे हैं।

खेल रहे हैं: अकर्मक क्रिया, अपूर्ण (तात्कालिक) वर्तमान काल, पुल्लिंग, बहुवचन, अन्य पुरुष, कर्तृवाच्य, कर्ता “बच्चे”।

उदाहरण 25. माँ बच्चे को दूध पिलाती है।

पिलाती है: प्रेरणार्थक सकर्मक क्रिया (“पीना” से), वर्तमान काल, स्त्रीलिंग, एकवचन, अन्य पुरुष, कर्तृवाच्य, कर्ता “माँ”, कर्म “दूध”।

उदाहरण 26. मुझसे अब चला नहीं जाता।

चला जाता: अकर्मक क्रिया, भाववाच्य, वर्तमान काल, पुल्लिंग, एकवचन। भाववाच्य में क्रिया हमेशा पुल्लिंग, एकवचन, अन्य पुरुष में रहती है।

उदाहरण 27. यह पत्र कल भेजा जाएगा।

भेजा जाएगा: सकर्मक क्रिया, कर्मवाच्य, भविष्यत् काल, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म “पत्र”।

हल किए उदाहरण: क्रिया विशेषण और बाकी अव्यय

अव्ययों का रूप नहीं बदलता, इसलिए इनमें लिंग, वचन या कारक नहीं लिखा जाता। लिखा जाता है भेद और वह पद जिससे इनका रिश्ता है।

उदाहरण 28 (CBSE नमूना प्रश्नपत्र). उनकी अँगुलियाँ खँजड़ी पर लगातार चल रही थीं।

लगातार: रीतिवाचक क्रिया विशेषण, “चल रही थीं” क्रिया की विशेषता बताता है।

उदाहरण 29. वह धीरे-धीरे चलता है।

धीरे-धीरे: रीतिवाचक क्रिया विशेषण, “चलता है” क्रिया की विशेषता।

उदाहरण 30. पक्षी ऊपर उड़ रहे हैं।

ऊपर: स्थानवाचक क्रिया विशेषण, “उड़ रहे हैं” क्रिया की विशेषता।

उदाहरण 31. पुस्तक मेज के ऊपर रखी है।

के ऊपर: संबंधबोधक अव्यय, “मेज” का संबंध “रखी है” क्रिया से जोड़ता है। उदाहरण 30 से तुलना कीजिए: वहाँ “ऊपर” अकेला था, यहाँ संज्ञा के साथ “के” लगा है।

उदाहरण 32. राम और श्याम भाई हैं।

और: समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय, “राम” और “श्याम” को जोड़ता है।

उदाहरण 33. मैं नहीं आया क्योंकि बीमार था।

क्योंकि: व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय (कारणसूचक), “मैं नहीं आया” और “बीमार था” उपवाक्यों को जोड़ता है।

उदाहरण 34 (CBSE नमूना प्रश्नपत्र). शाबाश! तुमने कितना अच्छा कार्य किया।

शाबाश: विस्मयादिबोधक अव्यय, प्रसन्नता (हर्ष) सूचक।

एक पूरे वाक्य का पद परिचय

परीक्षा में कभी-कभी पूरे वाक्य के सभी पदों का परिचय माँगा जाता है। तरीका वही है, बस हर पद अलग पंक्ति में। वाक्य: “वाह! छोटी बहन ने आज सुंदर चित्र बनाया।“

उदाहरण 35. वाह: विस्मयादिबोधक अव्यय, हर्षसूचक।

उदाहरण 36. छोटी: गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, विशेष्य “बहन”।

उदाहरण 37. बहन ने: जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक, “बनाया” क्रिया का कर्ता।

उदाहरण 38. आज: कालवाचक क्रिया विशेषण, “बनाया” क्रिया की विशेषता। सुंदर: गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, विशेष्य “चित्र”। चित्र: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक, “बनाया” क्रिया का कर्म।

उदाहरण 39. बनाया: सकर्मक क्रिया, सामान्य भूतकाल, पुल्लिंग, एकवचन, कर्तृवाच्य, कर्म “चित्र” (कर्ता के साथ “ने” होने से क्रिया कर्म के अनुसार)।

पद परिचय में होने वाली आम गलतियाँ

ये चूकें उत्तर पुस्तिकाओं में बार-बार दिखती हैं, और हर एक का सुधार सीधा है:

संस्कृत में पद परिचय कैसे होता है

संस्कृत में भी तरीका यही है, बस ढाँचा पाणिनि के सूत्र से आता है। पद दो तरह के हैं: सुबंत (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, जिनमें सुप् विभक्ति लगती है) और तिङंत (क्रिया, जिसमें तिङ् प्रत्यय लगता है)। इसलिए सुबंत पद में मूल शब्द, उसका अंत (अकारांत आदि), लिंग, विभक्ति और वचन लिखे जाते हैं, और तिङंत पद में धातु, लकार, पुरुष और वचन।

वाक्य “रामः वनं गच्छति” का संस्कृत पद परिचय:

हिंदी और संस्कृत में एक बड़ा फर्क है। संस्कृत में कारक विभक्ति शब्द के भीतर जुड़ी रहती है, जबकि हिंदी में “ने”, “को”, “से” अलग लिखे जाते हैं। इसलिए हिंदी में कारक विभक्ति देखकर पहचाना जाता है, और संस्कृत में शब्द के अंत को देखकर।

परीक्षा में पद परिचय

CBSE के 2025-26 के हिंदी A पाठ्यक्रम में कक्षा 10 के व्यावहारिक व्याकरण खंड में पद परिचय पर 4 अंक हैं। पाँच वाक्यों में रेखांकित पद दिए जाते हैं और चार का परिचय लिखना होता है, हर एक का एक अंक। नमूना प्रश्नपत्र के पाँचों पद (संज्ञा, विशेषण, क्रिया, क्रिया विशेषण, विस्मयादिबोधक) ऊपर के उदाहरणों में हल किए गए हैं, जिससे दिखता है कि एक ही प्रश्न में पाँच अलग शब्द-भेद आ सकते हैं।

सिविल सेवा के अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में पद परिचय सीधे नहीं पूछा जाता, पर वाक्य शुद्धि और अनुवाद में लिंग, वचन और कारक की वही समझ काम आती है। पूरे व्याकरण का क्रम अनिवार्य हिंदी व्याकरण गाइड में है। इस अध्याय को रटने की जरूरत नहीं: रोज पाँच वाक्यों के सभी पदों का परिचय लिखिए। एक हफ्ते में ढाँचा हाथ में बैठ जाता है, और फिर पूरा व्याकरण एक साथ दोहराया जाता है।

अभ्यास प्रश्न

नीचे दिए वाक्यों में मोटे अक्षरों वाले पद का पद परिचय लिखिए। उत्तर इस खंड के अंत में हैं।

  1. दिल्ली भारत की राजधानी है।
  2. मोहन ने भिखारी को रोटी दी।
  3. हम कल मेला देखने जाएँगे।
  4. वे लड़के मेरे मित्र हैं।
  5. उसने दस आम खरीदे।
  6. लड़कियाँ गीत गा रही हैं।
  7. बचपन सबसे सुंदर समय होता है।
  8. पेड़ से पत्ते गिर रहे हैं। (यहाँ “पेड़ से” का परिचय दीजिए)
  9. तुम जल्दी घर लौटो।
  10. अरे! तुम कब आए?
  11. वह बीमार था, इसलिए स्कूल नहीं गया।
  12. मुझसे हँसा नहीं गया।
  13. अपना काम खुद करो।

उत्तर

  1. दिल्ली: व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
  2. भिखारी को: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, संप्रदान कारक (जिसे कुछ दिया गया)।
  3. हम: पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष), पुल्लिंग (“जाएँगे” से), बहुवचन, कर्ता कारक, “जाएँगे” क्रिया का कर्ता।
  4. वे: सार्वनामिक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, विशेष्य “लड़के”।
  5. दस: निश्चित संख्यावाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, विशेष्य “आम”।
  6. गा रही हैं: सकर्मक क्रिया, अपूर्ण वर्तमान काल, स्त्रीलिंग, बहुवचन, अन्य पुरुष, कर्तृवाच्य, कर्ता “लड़कियाँ”, कर्म “गीत”।
  7. बचपन: भाववाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
  8. पेड़ से: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अपादान कारक।
  9. जल्दी: रीतिवाचक क्रिया विशेषण, “लौटो” क्रिया की विशेषता।
  10. अरे: विस्मयादिबोधक अव्यय, आश्चर्यसूचक।
  11. इसलिए: समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय (परिणामसूचक), दोनों उपवाक्यों को जोड़ता है।
  12. हँसा गया: अकर्मक क्रिया, भाववाच्य, भूतकाल, पुल्लिंग, एकवचन।
  13. अपना: निजवाचक सर्वनाम, संबंध कारक, पुल्लिंग, एकवचन, संबंधी पद “काम”। कुछ पाठ्यपुस्तकें इसे सार्वनामिक विशेषण भी लिखती हैं, क्योंकि यह “काम” संज्ञा से पहले आया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद परिचय किसे कहते हैं?

वाक्य में आए किसी पद का शब्द-भेद, उपभेद, लिंग, वचन, कारक या काल और दूसरे पदों से उसका संबंध बताना पद परिचय कहलाता है। जैसे ‘बच्चों ने पतंग उड़ाई’ में बच्चों ने: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक, ‘उड़ाई’ क्रिया का कर्ता। इसे पद-निर्देश और व्याख्या भी कहते हैं।

शब्द और पद में क्या अंतर है?

वाक्य से बाहर अकेला शब्द सिर्फ शब्द होता है, और वाक्य में आकर व्याकरण के नियमों से बँधने पर वह पद बन जाता है। ‘लड़का’ शब्द है, पर ‘लड़के ने खाना खाया’ में ‘लड़के ने’ पद है। इसीलिए पद परिचय हमेशा वाक्य के भीतर किया जाता है।

संज्ञा के पद परिचय में क्या लिखा जाता है?

संज्ञा के पद परिचय में उसका भेद, लिंग, वचन, कारक और क्रिया या दूसरे पद से उसका संबंध लिखा जाता है। जैसे ‘गंगा हिमालय से निकलती है’ में गंगा: व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘निकलती है’ क्रिया का कर्ता। कारक छोड़ देना सबसे आम चूक है।

क्रिया के पद परिचय में क्या लिखते हैं?

क्रिया के पद परिचय में उसका भेद (सकर्मक या अकर्मक), लिंग, वचन, पुरुष, काल, वाच्य और कर्ता या कर्म लिखे जाते हैं। जैसे ‘चाँद निरंतर बढ़ता है’ में बढ़ता है: अकर्मक क्रिया, वर्तमान काल, पुल्लिंग, एकवचन, कर्तृवाच्य। ‘ने’ वाले वाक्यों में क्रिया का लिंग कर्म से लिया जाता है।

अव्यय के पद परिचय में लिंग और वचन क्यों नहीं लिखते?

अव्यय अविकारी शब्द हैं, यानी उनका रूप लिंग, वचन या कारक से नहीं बदलता। इसलिए उनके पद परिचय में सिर्फ भेद और वह पद लिखा जाता है जिससे उनका संबंध है। जैसे ‘और’ के परिचय में लिखेंगे कि वह समानाधिकरण समुच्चयबोधक है और किन दो शब्दों को जोड़ता है।

संस्कृत में पद परिचय कैसे करते हैं?

संस्कृत में पाणिनि के सूत्र ‘सुप्तिङन्तं पदम्’ के अनुसार पद दो तरह के हैं: सुबंत और तिङंत। सुबंत पद में मूल शब्द, लिंग, विभक्ति और वचन लिखे जाते हैं, जैसे रामः: अकारांत पुल्लिंग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन। तिङंत पद में धातु, लकार, पुरुष और वचन, जैसे गच्छति: गम् धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन।

यह और वह कब सर्वनाम होते हैं और कब विशेषण?

अकेले आएँ तो सर्वनाम, संज्ञा से ठीक पहले आएँ तो सार्वनामिक विशेषण। ‘यह आया’ में ‘यह’ सर्वनाम है, जबकि ‘यह किताब पुरानी है’ में वह ‘किताब’ की विशेषता बताता है, इसलिए विशेषण है। पद परिचय में विशेषण होने पर विशेष्य भी लिखिए।

बोर्ड परीक्षा में पद परिचय कितने अंक का होता है?

CBSE के 2025-26 के हिंदी A पाठ्यक्रम में कक्षा 10 में पद परिचय 4 अंक का है। पाँच रेखांकित पदों में से चार का परिचय लिखना होता है और हर एक का एक अंक है। नमूना प्रश्नपत्र में संज्ञा, विशेषण, क्रिया, क्रिया विशेषण और विस्मयादिबोधक, पाँचों अलग शब्द-भेद पूछे गए थे।