UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

हिंदी वाच्य: कर्तृ, कर्म और भाव वाच्य

वाच्य से ज्ञात होता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से कौन प्रधान है। यहाँ तीनों भेदों की पहचान, परिवर्तन-नियम और अभ्यास उत्तर सहित दिए गए हैं।

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वाच्य (Voice) हिंदी व्याकरण में क्रिया के उस रूप को कहते हैं जिससे यह ज्ञात हो कि वाक्य में कर्ता, कर्म अथवा भाव में से कौन प्रधान है। ‘राम पत्र लिखता है’ में कर्ता प्रधान है, ‘राम से पत्र लिखा जाता है’ में कर्म, और ‘मुझसे चला नहीं जाता’ में स्वयं क्रिया (भाव) प्रधान है — क्रिया का रूप इन्हीं के अनुसार बदल जाता है।

UPSC अनिवार्य हिंदी में वाच्य-पहचान तथा वाच्य-परिवर्तन (कर्तृ से कर्म, कर्तृ से भाव) के प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। इसलिए तीनों वाच्यों की परिभाषा, उनकी पहचान का सरल सूत्र और परिवर्तन के नियम अच्छी तरह समझ लेना आवश्यक है।

वाच्य — परिभाषा और भेद

क्रिया के जिस रूपांतर से यह बोध हो कि वाक्य में क्रिया का विधान कर्ता, कर्म अथवा भाव में से किसके अनुसार हो रहा है, उसे वाच्य कहते हैं। प्रधान तत्त्व के अनुसार ही क्रिया का लिंग, वचन और पुरुष निर्धारित होता है — यही वाच्य की कुंजी है।

हिंदी में वाच्य के तीन भेद हैं:

वाच्यप्रधान तत्त्वक्रिया किसके अनुसारकर्ता का चिह्न
कर्तृवाच्यकर्ताकर्ता के लिंग-वचन-पुरुषशून्य / ‘ने’
कर्मवाच्यकर्मकर्म के लिंग-वचन‘से’ / ‘के द्वारा’
भाववाच्यभाव (क्रिया स्वयं)सदैव एकवचन, पुल्लिंग, अन्य पुरुष‘से’

1. कर्तृवाच्य

जिस वाक्य में कर्ता प्रधान हो और क्रिया कर्ता के लिंग, वचन तथा पुरुष के अनुसार चले, उसे कर्तृवाच्य कहते हैं। यह वाक्य का सबसे सहज और सामान्य रूप है।

  • राम पत्र लिखता है।
  • सीता गीत गाती है।
  • बच्चे मैदान में खेलते हैं।
  • मैं विद्यालय जाता हूँ।
  • अध्यापक छात्रों को पढ़ाते हैं।

2. कर्मवाच्य

जिसमें कर्म प्रधान हो और क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार बदले, उसे कर्मवाच्य कहते हैं। इसमें कर्ता गौण हो जाता है और उसके साथ ‘से’ या ‘के द्वारा’ लगता है। मुख्य क्रिया का भूतकालिक कृदंत रूप + ‘जाना’ (जाता है/गया/जाएगा) प्रयुक्त होता है। यह प्रायः सकर्मक क्रियाओं में बनता है।

  • राम से पत्र लिखा जाता है।
  • सीता द्वारा गीत गाया जाता है।
  • बच्चों द्वारा पुस्तकें पढ़ी जाती हैं।
  • विद्वानों द्वारा अनेक ग्रंथ रचे गए।
  • रोगी को औषधि दी गई।

3. भाववाच्य

जिसमें न कर्ता प्रधान हो, न कर्म, केवल भाव (क्रिया) प्रधान हो, उसे भाववाच्य कहते हैं। यह अकर्मक क्रियाओं से तथा अधिकतर निषेधात्मक (असमर्थता-सूचक) वाक्यों में बनता है। इसमें क्रिया सदैव एकवचन, पुल्लिंग और अन्य पुरुष में रहती है।

  • मुझसे चला नहीं जाता।
  • उससे बैठा नहीं जाता।
  • बच्चे से सोया नहीं गया।
  • धूप में मुझसे टहला नहीं जाता।
  • रोगी से उठा नहीं जाता।

अकर्मक-सकर्मक क्रिया और वाच्य का संबंध

कौन-सा वाच्य बनेगा, यह बहुत हद तक क्रिया के सकर्मक या अकर्मक होने पर निर्भर करता है। इसलिए वाच्य पढ़ने से पहले क्रिया का यह भेद पहचानना उपयोगी है।

  • सकर्मक क्रिया (जिसका कर्म हो) से कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य — दोनों बनते हैं। जैसे — ‘पढ़ना’, ‘लिखना’, ‘खाना’। “राम पुस्तक पढ़ता है” (कर्तृ) → “राम से पुस्तक पढ़ी जाती है” (कर्म)।
  • अकर्मक क्रिया (जिसका कर्म न हो) से कर्मवाच्य नहीं बनता; उसका कर्तृवाच्य और भाववाच्य ही बनता है। जैसे — ‘सोना’, ‘हँसना’, ‘चलना’, ‘रोना’। “बच्चा सोता है” (कर्तृ) → “बच्चे से सोया नहीं जाता” (भाव)।
क्रिया का प्रकारसंभव वाच्यउदाहरण
सकर्मककर्तृवाच्य, कर्मवाच्यराम पत्र लिखता है → राम से पत्र लिखा जाता है
अकर्मककर्तृवाच्य, भाववाच्यवह हँसता है → उससे हँसा नहीं जाता

इसी कारण किसी अकर्मक क्रिया का कर्मवाच्य बनाने का प्रयास सदैव अशुद्ध होता है; वहाँ केवल भाववाच्य ही उपयुक्त है। यह नियम परीक्षा में ‘अशुद्ध वाक्य पहचानिए’ प्रकार के प्रश्नों में बहुत काम आता है।

वाच्य परिवर्तन के नियम

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य

  1. कर्ता के साथ ‘से’ अथवा ‘के द्वारा’ लगाएँ।
  2. कर्म को प्रधान बनाएँ और उसकी विभक्ति (‘को’) हटा दें।
  3. मुख्य क्रिया को उसके भूतकालिक कृदंत रूप में लाकर उसमें ‘जाना’ क्रिया का उपयुक्त कालानुरूप रूप (जाता है / गया / जाएगा) जोड़ें।
  4. क्रिया को नए प्रधान कर्म के लिंग-वचन के अनुसार ढालें; काल वही रखें जो मूल वाक्य में था।
कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
राम पत्र लिखता है।राम से पत्र लिखा जाता है।
मोहन पुस्तक पढ़ता है।मोहन से पुस्तक पढ़ी जाती है।
माली ने पौधे लगाए।माली द्वारा पौधे लगाए गए।
शिक्षक छात्रों को पढ़ाएँगे।शिक्षक द्वारा छात्रों को पढ़ाया जाएगा।
सैनिकों ने दुर्ग जीता।सैनिकों द्वारा दुर्ग जीता गया।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य

  1. यह परिवर्तन प्रायः अकर्मक क्रियाओं तथा असमर्थता/निषेध के वाक्यों में होता है।
  2. कर्ता के साथ ‘से’ लगाएँ।
  3. क्रिया को एकवचन, पुल्लिंग, अन्य पुरुष में रखें और उसमें ‘जाना’ जोड़ें।
कर्तृवाच्यभाववाच्य
मैं चल नहीं सकता।मुझसे चला नहीं जाता।
वह सो नहीं सकता।उससे सोया नहीं जाता।
बच्चा हँस नहीं सकता।बच्चे से हँसा नहीं जाता।
वृद्ध दौड़ नहीं सकते।वृद्ध से दौड़ा नहीं जाता।

‘द्वारा’ और ‘से’ का सही प्रयोग

कर्मवाच्य में कर्ता के साथ कौन-सा चिह्न लगे, यह अर्थ पर निर्भर करता है:

  • ‘के द्वारा’ / ‘द्वारा’ — जब क्रिया जान-बूझकर, इच्छापूर्वक की गई हो (सजीव, सक्रिय कर्ता)। जैसे — “लेखक द्वारा पुस्तक लिखी गई”, “मंत्री द्वारा उद्घाटन किया गया”।
  • ‘से’ — मुख्यतः (1) असमर्थता/निषेध के भाववाच्य व कर्मवाच्य में — “मुझसे यह काम नहीं होता”; तथा (2) करण (साधन) के अर्थ में — “कलम से लिखा गया”।
  • सजीव कर्ता के लिए ‘से’ और ‘द्वारा’ दोनों चल जाते हैं (“राम से/राम द्वारा पत्र लिखा गया”), परंतु निर्जीव साधन के लिए केवल ‘से’ उपयुक्त है (“चाकू से फल काटा गया” — ‘चाकू द्वारा’ अशुद्ध-सा लगता है)।

वाच्य-पहचान की सरल विधि और सामान्य अशुद्धियाँ

पहचान का सूत्र — देखिए कि क्रिया किसके लिंग-वचन पर निर्भर है:

  • क्रिया कर्ता के अनुसार बदले → कर्तृवाच्य।
  • क्रिया कर्म के अनुसार बदले (और ‘जाना’ जुड़ा हो) → कर्मवाच्य।
  • क्रिया सदैव एकवचन-पुल्लिंग रहे, कर्ता-कर्म से प्रभावित न हो → भाववाच्य।

सामान्य अशुद्धियाँ:

  • कर्मवाच्य बनाते समय कर्म की विभक्ति (‘को’) न हटाना।
  • कर्ता के साथ ‘से’ / ‘के द्वारा’ लगाना भूल जाना।
  • क्रिया को कर्म के लिंग-वचन में न ढालना — “मोहन से पुस्तक पढ़ा जाता है” (अशुद्ध) → “पढ़ी जाती है” (शुद्ध)।
  • भाववाच्य की क्रिया को कर्ता के अनुसार बदल देना — “उससे सोई नहीं जाती” (अशुद्ध) → “उससे सोया नहीं जाता” (शुद्ध)।
  • अकर्मक क्रिया का कर्मवाच्य बनाने का प्रयास (अकर्मक का तो भाववाच्य ही बनता है)।

अभ्यास प्रश्न

(क) निम्नलिखित वाक्यों का वाच्य पहचानिए —

  1. बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।
  2. राम से पत्र लिखा जाता है।
  3. मुझसे उठा नहीं जाता।
  4. माली ने पौधे लगाए।
  5. रोगी से चला नहीं जाता।

(ख) कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलिए —

  1. सीता गीत गाती है।
  2. किसान खेत जोतता है।
  3. अध्यापक पाठ पढ़ाएगा।

(ग) कर्तृवाच्य से भाववाच्य में बदलिए —

  1. मैं अब चल नहीं सकता।
  2. वह रात भर सो नहीं सकता।

(घ) रिक्त स्थान में उचित क्रिया-रूप भरिए — “मोहन से पुस्तक ______ (पढ़ना) जाती है।”

उत्तर

(क) 1. कर्तृवाच्य 2. कर्मवाच्य 3. भाववाच्य 4. कर्तृवाच्य 5. भाववाच्य।

(ख) 1. सीता से गीत गाया जाता है। 2. किसान से/किसान द्वारा खेत जोता जाता है। 3. अध्यापक द्वारा पाठ पढ़ाया जाएगा।

(ग) 1. मुझसे अब चला नहीं जाता। 2. उससे रात भर सोया नहीं जाता।

(घ) पढ़ी (मोहन से पुस्तक पढ़ी जाती है)।

वाच्य के तीनों भेदों की पहचान और परिवर्तन UPSC अनिवार्य हिंदी का एक निश्चित स्कोरिंग बिंदु है। ‘क्रिया किसके अनुसार बदल रही है’ — यही प्रश्न मन में रखकर अभ्यास करने से वाच्य के सभी प्रश्न सरल हो जाते हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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