UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

हिंदी संज्ञा: परिभाषा, भेद और उदाहरण (UPSC अनिवार्य हिंदी)

संज्ञा क्या है, उसके भेद, भाववाचक संज्ञा का निर्माण और लिंग-वचन-कारक से संबंध — UPSC अनिवार्य हिंदी के लिए उदाहरण-सहित गहन अध्ययन-नोट।

हिंदी संज्ञा: परिभाषा, भेद और उदाहरण (UPSC अनिवार्य हिंदी)

किसी वस्तु, व्यक्ति, स्थान, प्राणी, गुण, भाव या दशा के नाम को संज्ञा कहते हैं। ‘राम’, ‘गंगा’, ‘पुस्तक’, ‘मिठास’, ‘बचपन’ — ये सब संज्ञाएँ हैं, क्योंकि इनसे किसी न किसी का नाम जाना जाता है। संज्ञा व्याकरण का सबसे आधारभूत विकारी शब्द-वर्ग है; वाक्य में कर्ता और कर्म प्रायः संज्ञा ही होते हैं, और इन्हीं के अनुसार क्रिया का रूप बदलता है।

UPSC अनिवार्य हिंदी (Indian Language) के व्याकरण-खंड में संज्ञा से जुड़े प्रश्न प्रायः दो रूपों में आते हैं — एक, दिए गए शब्द का भेद पहचानना (व्यक्तिवाचक/जातिवाचक/भाववाचक), और दूसरा, किसी विशेषण या क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाना। इसलिए केवल परिभाषा रट लेना पर्याप्त नहीं; भेदों की सूक्ष्म पहचान और भाववाचक संज्ञा के निर्माण-नियम अच्छी तरह आने चाहिए। यह नोट इन्हीं बिंदुओं को उदाहरणों के साथ क्रम से समझाता है।

संज्ञा की परिभाषा और पहचान

जिस विकारी शब्द से किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, गुण, भाव या क्रिया-व्यापार के नाम का बोध हो, उसे संज्ञा कहते हैं। संक्षेप में — हर ‘नाम’ संज्ञा है।

पहचान का सरल सूत्र यह है कि वाक्य में जिस शब्द के विषय में कुछ कहा जा रहा हो या जिसका नाम लिया जा रहा हो, वह संज्ञा होती है। जैसे —

  • मोहन विद्यालय जाता है। → यहाँ ‘मोहन’ (व्यक्ति का नाम) संज्ञा है।
  • दिल्ली में लालकिला है। → ‘दिल्ली’ और ‘लालकिला’ दोनों संज्ञाएँ हैं।
  • उसकी ईमानदारी सबको प्रिय है। → ‘ईमानदारी’ (गुण/भाव का नाम) संज्ञा है।

ध्यान दें कि संज्ञा सदैव कोई ठोस वस्तु ही नहीं होती; ‘क्रोध’, ‘मित्रता’, ‘दौड़’, ‘सुंदरता’ जैसे अमूर्त गुण और भाव भी संज्ञा हैं, क्योंकि ये भी किसी न किसी अवस्था या गुण के नाम हैं।

संज्ञा के भेद

परंपरागत रूप से संज्ञा के तीन प्रमुख भेद माने जाते हैं — व्यक्तिवाचक, जातिवाचक और भाववाचक। अनेक व्याकरण-ग्रंथ जातिवाचक के अंतर्गत आने वाली दो उपश्रेणियों — द्रव्यवाचक और समूहवाचक (समुदायवाचक) — को अलग गिनकर पाँच भेद बताते हैं। नीचे की तालिका सभी पाँच भेदों को एक साथ स्पष्ट करती है।

भेदकिसका बोधपहचानउदाहरण
व्यक्तिवाचककिसी एक विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु काविशिष्ट नाम; गिना नहीं जाताराम, गांधी, गंगा, हिमालय, रामायण, सोमवार
जातिवाचककिसी पूरी जाति/वर्ग कासामान्य नाम; अनेक पर लागूलड़का, नदी, पर्वत, पशु, नगर, पुस्तक
भाववाचककिसी गुण, भाव, दशा या क्रिया-व्यापार काअमूर्त; प्रायः गिना नहीं जातामिठास, बचपन, क्रोध, लंबाई, दौड़, मित्रता
द्रव्यवाचककिसी द्रव्य/पदार्थ का जिसे नापा-तौला जाएमात्रा में; एकवचन प्रायःसोना, चाँदी, तेल, जल, दूध, गेहूँ
समूहवाचकव्यक्तियों/वस्तुओं के समूह काएक नाम, बहुतों का समुच्चयसेना, सभा, भीड़, गुच्छा, झुंड, परिवार

व्यक्तिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी एक निश्चित व्यक्ति, स्थान, वस्तु या प्राणी का बोध कराए, वह व्यक्तिवाचक संज्ञा है। इसका कोई दूसरा ‘जाति-रूप’ नहीं होता — ‘गंगा’ एक ही है, ‘ताजमहल’ एक ही है। दिन-महीनों के नाम (सोमवार, चैत्र), पर्व (दीवाली), पुस्तकों के नाम (गीता) भी व्यक्तिवाचक माने जाते हैं। उदाहरण — अकबर एक प्रतापी सम्राट था। जयपुर गुलाबी नगर कहलाता है। महाभारत एक महाकाव्य है।

जातिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी संपूर्ण जाति, वर्ग या समूह के प्रत्येक सदस्य के लिए समान रूप से प्रयुक्त हो, वह जातिवाचक संज्ञा है। ‘लड़का’ किसी भी लड़के के लिए, ‘नदी’ किसी भी नदी के लिए चलता है। उदाहरण — हर नदी समुद्र की ओर बहती है। अध्यापक विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। यह गाय दूध देती है।

भाववाचक संज्ञा

जिस शब्द से किसी गुण, दशा, भाव या क्रिया-व्यापार का बोध हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। ये अमूर्त होती हैं — इन्हें छुआ या गिना नहीं जा सकता, अनुभव किया जाता है। उदाहरण — परिश्रम से सफलता मिलती है। उसका बचपन गाँव में बीता। सच्चाई की सदा जीत होती है।

द्रव्यवाचक संज्ञा

जिन शब्दों से नापे-तौले जाने योग्य पदार्थों/द्रव्यों का बोध हो, वे द्रव्यवाचक संज्ञाएँ हैं। ये प्रायः एकवचन में प्रयुक्त होती हैं और इन्हें गिना नहीं, बल्कि मात्रा में मापा जाता है। उदाहरण — सोना महँगा हो गया है। दूध में जल मिला है।

समूहवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी समुदाय या समूह का एक नाम से बोध कराए, वह समूहवाचक संज्ञा है। ‘सेना’ अनेक सैनिकों का, ‘भीड़’ अनेक लोगों का समूह है। उदाहरण — सेना सीमा पर तैनात है। मंच पर सभा शुरू हुई। अंगूर का एक गुच्छा लाओ।

भाववाचक संज्ञा का निर्माण

परीक्षा-दृष्टि से सबसे महत्त्वपूर्ण बिंदु यही है — भाववाचक संज्ञाएँ चार स्रोतों से बनती हैं: (1) जातिवाचक संज्ञा से, (2) विशेषण से, (3) क्रिया से और (4) सर्वनाम से। इनमें प्रायः -त्व, -पन, -ता, -आई, -आहट, -इमा, -आवट, -आव आदि प्रत्यय जुड़ते हैं। नीचे की तालिका मूल शब्द और बनी हुई भाववाचक संज्ञा को साथ-साथ देती है।

स्रोतमूल शब्दप्रत्ययभाववाचक संज्ञा
जातिवाचक संज्ञा सेमनुष्य-तामनुष्यता
जातिवाचक संज्ञा सेबच्चा-पनबचपन
जातिवाचक संज्ञा सेमित्र-तामित्रता
जातिवाचक संज्ञा सेगुरु-त्वगुरुत्व
विशेषण सेमीठा-आसमिठास
विशेषण सेसुंदर-तासुंदरता
विशेषण सेलंबा-आईलंबाई
विशेषण सेवीर-तावीरता
विशेषण सेबूढ़ा-आपाबुढ़ापा
क्रिया सेलिखना-आवटलिखावट
क्रिया सेसजाना-आवटसजावट
क्रिया सेघबराना-आहटघबराहट
क्रिया सेदौड़नादौड़
क्रिया सेचढ़ना-आईचढ़ाई
सर्वनाम सेअपना-पनअपनापन
सर्वनाम सेनिज-त्वनिजत्व
सर्वनाम सेमम (मेरा)-ताममता

संक्षेप में स्रोत और कुछ मुख्य प्रत्यय इस प्रकार याद रखें —

  • जातिवाचक से: -त्व (पशुत्व), -पन (लड़कपन), -ता (दासता)।
  • विशेषण से: -ता (कठोरता), -त्व (महत्त्व), -आई (अच्छाई), -आस (खटास), -इमा (लालिमा, गरिमा)।
  • क्रिया से: -आवट (बनावट), -आहट (चिकनाहट), -आव (बहाव), -न (लेन-देन), अथवा बिना प्रत्यय रूपांतर (मार, हार, जीत)।
  • सर्वनाम से: -पन (अपनापन), -त्व (अहंत्व), -ता (ममता)।

एक ही मूल से कभी एकाधिक भाववाचक रूप भी बनते हैं; जैसे ‘अच्छा’ से ‘अच्छाई’ और ‘मीठा’ से ‘मिठास’ व ‘मिठाई’ दोनों — पर ‘मिठाई’ अब वस्तु-नाम (जातिवाचक-सा) हो गया है, यहाँ अर्थ-भेद पर ध्यान देना चाहिए।

संज्ञा के विकारक तत्व — लिंग, वचन, कारक

संज्ञा विकारी शब्द है, अर्थात् वाक्य में इसका रूप तीन कारणों से बदलता है — लिंग, वचन और कारक। इन्हीं को संज्ञा के विकारक तत्व कहते हैं। इनका सारांश-संबंध नीचे दिया है (प्रत्येक का विस्तृत अध्ययन अलग नोट में है)।

विकारककिस आधार परसंज्ञा-रूप पर प्रभावउदाहरण
लिंगपुल्लिंग / स्त्रीलिंगशब्द-रूप व विशेषण/क्रिया का अनुरूपणलड़का → लड़की; अच्छा बालक → अच्छी बालिका
वचनएकवचन / बहुवचनप्रायः अंत्य स्वर/प्रत्यय बदलता हैपुस्तक → पुस्तकें; लड़का → लड़के
कारकवाक्य में संबंध (परसर्ग)संज्ञा के बाद विभक्ति-चिह्न लगते हैंराम ने, राम को, राम से, राम का

ध्यान देने योग्य बात यह है कि लिंग और वचन का प्रभाव केवल संज्ञा तक सीमित नहीं रहता — वाक्य के विशेषण और क्रिया भी संज्ञा के अनुसार बदलते हैं। जैसे — अच्छा लड़का जाता है, पर अच्छी लड़की जाती है (लिंग का असर); तथा लड़का जाता है, पर लड़के जाते हैं (वचन का असर)। कारक में संज्ञा के साथ ने, को, से, के लिए, का/की/के, में, पर आदि परसर्ग जुड़ते हैं, जिनसे वाक्य में उसका संबंध स्पष्ट होता है।

सामान्य अशुद्धियाँ और परीक्षा-दृष्टि

  • भाववाचक को जातिवाचक समझ लेना: ‘मिठाई’ अब वस्तु है (जातिवाचक-सा), जबकि ‘मिठास’ गुण है (भाववाचक)। संदर्भ देखकर भेद तय करें।
  • व्यक्तिवाचक का जातिवाचक प्रयोग: कभी-कभी व्यक्तिवाचक शब्द जातिवाचक अर्थ दे देता है — “वह अपने युग का कर्ण है” यहाँ ‘कर्ण’ दानवीर के अर्थ में जातिवाचक-सा हो गया।
  • द्रव्यवाचक का बहुवचन: ‘सोने’, ‘तेलों’ जैसे रूप प्रायः अशुद्ध माने जाते हैं; द्रव्यवाचक संज्ञाएँ सामान्यतः एकवचन में रहती हैं।
  • समूहवाचक के साथ क्रिया: ‘सभा’ और ‘सेना’ समूह होते हुए भी व्याकरणतः एकवचन हैं — “सभा शुरू हुई” (न कि ‘हुईं’)।
  • प्रत्यय का गलत चयन: ‘सुंदर’ से ‘सुंदरता’ (शुद्ध) बनता है, ‘सुंदरपन’ नहीं। प्रत्यय-संगति याद रखें।

परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है — “रेखांकित शब्द का संज्ञा-भेद बताइए”, “दिए गए विशेषण/क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाइए”, अथवा “निम्नलिखित में भाववाचक संज्ञा छाँटिए”। इसलिए भेद-पहचान और निर्माण-नियम दोनों पर अभ्यास आवश्यक है।

अभ्यास प्रश्न

(क) निम्नलिखित संज्ञाओं का भेद बताइए —

  1. हिमालय
  2. नदी
  3. ईमानदारी
  4. सेना
  5. सोना
  6. लड़कपन

(ख) निम्नलिखित विशेषणों/क्रियाओं से भाववाचक संज्ञा बनाइए —

  1. मीठा
  2. वीर
  3. लिखना
  4. बूढ़ा
  5. घबराना

(ग) सही विकल्प चुनिए —

  1. ‘मनुष्यता’ किस संज्ञा-भेद का उदाहरण है? (अ) व्यक्तिवाचक (ब) जातिवाचक (स) भाववाचक (द) द्रव्यवाचक
  2. ‘भीड़’ किस भेद की संज्ञा है? (अ) समूहवाचक (ब) द्रव्यवाचक (स) व्यक्तिवाचक (द) भाववाचक

(घ) रिक्त स्थान भरिए —

  1. भाववाचक संज्ञाएँ ________ (मूर्त/अमूर्त) होती हैं।
  2. द्रव्यवाचक संज्ञाएँ प्रायः ________ (एकवचन/बहुवचन) में प्रयुक्त होती हैं।

उत्तर

  1. व्यक्तिवाचक 2. जातिवाचक 3. भाववाचक 4. समूहवाचक 5. द्रव्यवाचक 6. भाववाचक
  2. मिठास 8. वीरता 9. लिखावट 10. बुढ़ापा 11. घबराहट
  3. (स) भाववाचक 13. (अ) समूहवाचक
  4. अमूर्त 15. एकवचन

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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