Anantam IASHindi Note · 14 September 2026

भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP): LAC की रखवाली, हिमालय में बचाव और कैलाश यात्रा

ITBP को समझिए: 1962 में जन्म, 3,488 किलोमीटर लंबी LAC की रखवाली, ITBPF अधिनियम 1992, हिमालय में बचाव की भूमिका और BSF, SSB और सेना से इसका फर्क।

भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) वह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) है, जो चीन से लगी भारत की सीमा की रखवाली करता है। यह सीमा लद्दाख के कराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक 3,488 किलोमीटर लंबी है। ITBP का गठन 24 अक्टूबर 1962 को हुआ, जब चीन के साथ युद्ध अभी चल ही रहा था। यह गृह मंत्रालय (MHA) के तहत काम करती है। लेकिन इसका दायरा सीमा से कहीं आगे तक जाता है, क्योंकि गृह मंत्रालय ने इसे हिमालय में आपदाओं के समय का फर्स्ट रिस्पॉन्डर (first responder), यानी सबसे पहले पहुँचने वाला बल बनाया है।

ज्यादातर पाठक दो में से कोई एक गलत तस्वीर लेकर आते हैं। पहली तस्वीर में चीन वाली सीमा अकेले सेना संभालती है। दूसरी में ITBP एक छोटी सेना है, जो वही काम करती है। दोनों ही सही नहीं हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सेना और ITBP दोनों की जिम्मेदारी है। लेकिन ITBP एक पुलिस बल है, जिसका अपना कानून है और अपनी कमान की कड़ी है। इसके काम ऊँचाई पर गश्त से लेकर बाढ़ में बचाव तक फैले हैं। यह नोट दो बातें साफ करता है: चीन वाली सीमा की रखवाली कौन करता है, और ITBP उन बलों से कैसे अलग है, जिनसे इसे सबसे ज्यादा मिला दिया जाता है।

ITBP क्या है?

MHA की वार्षिक रिपोर्ट जिन पाँच बलों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के रूप में गिनाती है, ITBP उनमें से एक है। शांति के समय इसका मुख्य काम भारत-चीन सीमा की रखवाली है। ITBP का फुल फॉर्म Indo-Tibetan Border Police है, यानी भारत तिब्बत सीमा पुलिस। इसका अधिनियम इसे भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल कहता है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों वाला नोट इसे पूरे परिवार के साथ रखकर दिखाता है। उस परिवार में असम राइफल्स और NSG भी हैं, जिन्हें कई किताबें इस सूची में जोड़ देती हैं।

तथ्यविवरण
फुल फॉर्मIndo-Tibetan Border Police (ITBP), यानी भारत तिब्बत सीमा पुलिस
गठन24 अक्टूबर 1962, 4 बटालियनों के साथ
मंत्रालयगृह मंत्रालय
कानूनभारत तिब्बत सीमा पुलिस बल अधिनियम, 1992 (1992 का अधिनियम संख्या 35), 30 मई 1994 से लागू
रखवाली वाली सीमाभारत-चीन सीमा के 3,488 किलोमीटर, कराकोरम दर्रा (लद्दाख) से जाचेप ला (अरुणाचल प्रदेश) तक
सीमा चौकियाँ209, जो 9,000 से 18,750 फुट की ऊँचाई के बीच हैं
स्वीकृत संख्या1,03,622 कर्मी (MHA वार्षिक रिपोर्ट 2024-25)
मुख्यालय और प्रमुखमहानिदेशालय CGO कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली में है; प्रमुख IPS से आने वाले महानिदेशक होते हैं
आदर्श वाक्यशौर्य, दृढ़ता, कर्मनिष्ठा (बहादुरी, मजबूती और कर्तव्य के प्रति लगन)

ITBP का गठन 1962 में क्यों हुआ?

ITBP का गठन 1962 के चीन युद्ध के सीधे जवाब में हुआ। इसकी शुरुआत 4 बटालियनों से हुई। MHA इसके पहले ढाँचे को एक एकीकृत “गुरिल्ला-सह-खुफिया-सह-लड़ाकू बल” बताता है, जो पहाड़ों में अपने बूते टिका रह सके। आसान शब्दों में कहें तो इसका काम था सीमा के उस पार नजर रखना, और मैदानों से मदद का इंतजार किए बिना अपनी जमीन पर डटे रहना।

यह ढाँचा ज्यादा समय तक मुख्य भूमिका नहीं रहा। MHA के शब्दों में, यह बल “समय के साथ एक पारंपरिक सीमा रक्षक बल में बदल गया”। बदलाव का पैमाना साफ दिखता है। 1962 में 4 बटालियनें थीं, और MHA की 2024-25 की रिपोर्ट में 62 सर्विस बटालियनें और 4 विशेष बटालियनें दर्ज हैं।

उसी युद्ध से SSB भी निकला

1962 के युद्ध से एक नहीं, दो बल निकले। आज के सशस्त्र सीमा बल (SSB) की जड़ स्पेशल सर्विस ब्यूरो में है, जो 1963 की शुरुआत में बना। इसका मकसद था “तोड़फोड़ और बहकावे के खतरों के खिलाफ सीमा पर रहने वाली आबादी का मनोबल और क्षमता बढ़ाना”। ITBP को सीमा पर डटे रहने के लिए बनाया गया था। ब्यूरो को सीमा के पीछे रहने वाले लोगों के साथ काम करने के लिए बनाया गया। जन्म का यही फर्क बताता है कि आज ये दोनों बल बिल्कुल अलग-अलग सीमाओं पर क्यों तैनात हैं। इसी वजह से 1962 को इनमें से सिर्फ एक से जोड़ना आधी कहानी सुनाने जैसा है।

तीन दशक बाद अपना कानून

अपने पहले तीन दशकों तक ITBP का अपना कोई अधिनियम नहीं था। संसद ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल अधिनियम, 1992 (1992 का अधिनियम संख्या 35) पारित किया, जिस पर 1 सितंबर 1992 की तारीख है। लेकिन सरकार ने 28 मई 1994 की एक अधिसूचना के जरिए इसे 30 मई 1994 से ही लागू किया। ITBP नियम, 1994 भी उसी दिन अधिसूचित हुए।

इन दोनों वर्षों को अलग-अलग याद रखिए। 1992 में कानून बना, और 1994 में वह लागू होना शुरू हुआ। यह लिख देना कि अधिनियम “1992 में लागू हुआ” एक आम चूक है। और ठीक यही वह बारीकी है, जिसे एक सावधान पाठक को पकड़ लेना चाहिए।

LAC क्या है और इसकी रखवाली कौन करता है?

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) वह रेखा है, जो हिमालयी सीमा पर उन इलाकों को अलग करती है जो भारत और चीन के असल कब्जे में हैं। यह कोई तय हो चुकी सीमा नहीं है। दोनों सरकारें आज भी अपने विशेष प्रतिनिधियों के जरिए सीमा के सवाल पर बात करती हैं। इस बातचीत का 25वाँ दौर 25 अगस्त 2026 के लिए तय था, जैसा कि विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता वाला नोट बताता है। शांति के समय इस रेखा की रखवाली ITBP करती है, और MHA दर्ज करता है कि सेना भी ITBP के साथ LAC की रखवाली करती है।

एक उदाहरण से बात समझ आती है, पर एक चेतावनी के साथ। दो पड़ोसियों की कल्पना कीजिए, जिनके जमीन के कागजों पर अब भी विवाद है। ऐसे में काम चलाने वाली रेखा बस वहीं है, जहाँ आज हर एक की बाड़ खड़ी है। जमीन पर कब्जे वाली बात यह उदाहरण ठीक पकड़ता है। लेकिन एक जगह यह टूट जाता है। LAC पर कई जगह दोनों पक्ष खुद रेखा की स्थिति को ही अलग-अलग मानते हैं। इसीलिए बातचीत बार-बार डिसएंगेजमेंट (सैनिकों का पीछे हटना) और डी-एस्केलेशन (तनाव घटाना) जैसे शब्दों पर लौट आती है। इस बड़े रिश्ते की पूरी तस्वीर भारत-चीन संबंध वाले नोट में है।

इन 3,488 किलोमीटर को आम तौर पर तीन सेक्टरों में बाँटकर बताया जाता है, और ITBP तीनों पर तैनात है:

MHA की 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक ITBP यह रेखा 9,000 से 18,750 फुट की ऊँचाई पर बनी 209 सीमा चौकियों से संभालती है। एक साल पहले की रिपोर्ट में यह संख्या 197 थी। सीमा चौकी (border outpost), यानी BOP, एक आत्मनिर्भर चौकी होती है, जिसके जिम्मे सीमा का अपना एक हिस्सा होता है। इसके जवान वहीं रहते हैं और वहीं से गश्त पर निकलते हैं। सबसे ऊँची चौकी उत्तरी सिक्किम की OP डोरजीला है, जो 18,750 फुट, यानी करीब 5,700 मीटर पर है। तुलना के लिए देखिए, औली की जिन ढलानों पर बल की ट्रेनिंग होती है, वे 2,500 से 3,050 मीटर पर हैं। यानी सबसे ऊपर की चौकियाँ लगभग दोगुनी ऊँचाई पर हैं। बल की अपनी वेबसाइट इस ऊपरी सीमा को गोल करके 18,800 फुट लिखती है, और बताती है कि सर्दियों में पारा माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है।

यह काम नाटकीय कम और लगातार चलने वाला ज्यादा है। MHA के मुताबिक, सिर्फ अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच ITBP ने भारत-चीन सीमा पर 4,503 गश्तें कीं।

एक सीमा, एक बल

पूरी चीन सीमा एक ही बल के पास क्यों है? भारत में सीमा प्रबंधन एक सीमा, एक सीमा रक्षक बल (One Border, One Border Guarding Force) के सिद्धांत पर चलता है। इसके तहत हर जमीनी सीमा एक ही बल को सौंपी जाती है। MHA का बँटवारा इस तरह है:

इसके पीछे का तर्क है जवाबदेही। जब एक सीमा एक ही बल की होती है, तो कोई ऐसा हिस्सा नहीं बचता जिसके बारे में दो बल यह मान लें कि उस पर दूसरा नजर रख रहा है। दो सक्रिय रेखाओं पर सेना इसका अपवाद है। MHA बताता है कि सेना BSF के साथ LoC की, और ITBP के साथ LAC की रखवाली करती है। सीमा पर सड़कों और चौकियों समेत पूरी व्यवस्था सीमा प्रबंधन वाले नोट में समझाई गई है।

ITBPF अधिनियम, 1992 क्या कहता है?

यह अधिनियम अनुशासन पर लंबा है और मिशन पर छोटा। इसका सार तीन धाराओं में है। हर धारा बल के आज के किसी न किसी काम की वजह बताती है, इसलिए इन्हें अधिनियम के मूल पाठ में ही पढ़ना फायदेमंद है:

धारा 4 का दूसरा हिस्सा ध्यान से पढ़िए। “ऐसे दूसरे काम” वाला हिस्सा ही ITBP को सीमा से दूर ले जाता है। MHA के मुताबिक छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद वाले इलाकों में इसकी 8 बटालियनें हैं, और 11 बटालियनें राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में लगी हैं। धारा 7 की वजह से यह बल विदेश में भी सेवा दे सकता है। MHA के अनुसार काबुल में भारतीय दूतावास की सुरक्षा का जिम्मा ITBP के पास है।

अधिनियम की परिभाषाओं में एक और काम की बात छिपी है। इसमें सक्रिय ड्यूटी के दायरे में वह यूनिट आती है, जो दुश्मन के खिलाफ अभियान में लगी हो। भारत की सीमाओं पर किसी पिकेट पर तैनात, गश्त पर निकली या पहरे पर लगी यूनिट भी इसी में आती है। यानी कानून की नजर में सीमा पर रोज की गश्त भी सक्रिय ड्यूटी है।

बल के अपने कर्तव्यों की सूची यह पूरा काम चार पंक्तियों में बताती है:

सीमा के आगे ITBP क्या करती है?

ITBP के सार्वजनिक रिकॉर्ड का अच्छा-खासा हिस्सा चौकियों से दूर के काम से बनता है। तीन भूमिकाएँ सबसे अलग दिखती हैं, और हर एक किसी सरकारी रिकॉर्ड पर टिकी है, सिर्फ साख पर नहीं।

हिमालय की आपदाओं में फर्स्ट रिस्पॉन्डर

MHA ने ITBP को हिमालयी क्षेत्रों में आपदाओं के लिए फर्स्ट रिस्पॉन्डर नामित किया है। यह फैसला नक्शे को देखकर लिया गया है। जिन ऊँची घाटियों में बाढ़ और हिमस्खलन आते हैं, वहाँ यह बल पहले से तैनात है। इस भूमिका के पीछे का नेटवर्क कदम-दर-कदम बढ़ा है:

ITBP राष्ट्रीय आपदा मोचन बल को भी 4 बटालियनें देती है, और इन दोनों भूमिकाओं को आपस में मिलाना नहीं चाहिए। NDRF देश का विशेषज्ञ बल है, जो CAPF की बटालियनों से बना है। लेकिन हिमालय में फर्स्ट रिस्पॉन्डर का दर्जा खुद ITBP के पास है। 7 अगस्त 2026 को गृह मामलों पर राज्यसभा की स्थायी समिति ने आपदा प्रबंधन पर अपनी 261वीं रिपोर्ट पेश की। इसमें समिति ने ITBP को उन एजेंसियों में गिना, जो उत्तराखंड के राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की मदद करती हैं। समिति ने लिखा कि रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान दूसरों के साथ ITBP के जवानों को भी हिमस्खलन से बचाव और उसके समय की कार्रवाई की ट्रेनिंग देता है। समिति ने यह भी कहा कि दूर-दराज के ऊँचे इलाकों में बंद सड़कें और आखिरी छोर तक कमजोर संपर्क आज भी बचाव में देरी करते हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा

यह यात्रा विदेश मंत्रालय आयोजित करता है, और जमीन पर इसे चलाने वाली एजेंसियों में ITBP भी है। तीर्थयात्री दो दर्रों से तिब्बत में दाखिल होते हैं: उत्तराखंड का लिपुलेख और सिक्किम का नाथु ला। पाँच साल के अंतराल के बाद यह यात्रा 2025 में फिर शुरू हुई।

ऑल इंडिया रेडियो ने 2 जून 2025 को बताया कि सेना और ITBP के तालमेल से नाथु ला वाले जत्थों की सुरक्षा और आपात मदद पक्की की जाएगी। 8 अगस्त 2025 को उसने बताया कि ITBP के जवानों ने गंगटोक में नाथु ला के दसवें और आखिरी जत्थे को जरूरी जानकारी दी। इसके बाद तीर्थयात्री शेराथांग और 17 माइल के पड़ावों की ओर बढ़े, जहाँ शरीर को ऊँचाई के हिसाब से ढलने का समय मिलता है। रास्ते का इतिहास और 2026 के आँकड़े कैलाश मानसरोवर वाले नोट में हैं।

पर्वतारोहण और औली में ट्रेनिंग

MHA, ITBP को “मूल रूप से पहाड़ों में प्रशिक्षित बल” कहता है, और रिकॉर्ड इस बात की गवाही देता है। इसके पर्वतारोही 225 चोटियों पर चढ़ चुके हैं, जिनमें चार बार माउंट एवरेस्ट भी शामिल है। बल के मुताबिक एवरेस्ट की ये चढ़ाइयाँ 1992, 1996, 2006 और 2012 में हुईं। बल के साहसिक गतिविधियों वाले पेज के अनुसार ITBP के 13 पर्वतारोहियों को तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार मिला है, और 7 को पद्म श्री।

ट्रेनिंग उत्तराखंड के औली में ITBP पर्वतारोहण और स्कीइंग संस्थान में होती है, जो 2,500 से 3,050 मीटर की ऊँचाई पर है। राष्ट्रीय अंटार्कटिक और समुद्री अनुसंधान केंद्र की 2015 की एक एडवाइजरी बताती है कि यहाँ क्या-क्या सिखाया जाता है:

यह संस्थान बल के बाहर के लोगों को भी ट्रेनिंग देता है। इनमें भारतीय अंटार्कटिक अभियानों के सदस्य भी हैं, जिनका बर्फ और हिम के माहौल में ढलने का कोर्स यहीं होता है। जिस बल की चौकियाँ महीनों बर्फ में दबी रहती हैं, उसके लिए ये शौक नहीं, रोज के काम के हुनर हैं।

ITBP, SSB, BSF और सेना से कैसे अलग है?

तीनों सीमा बल गृह मंत्रालय के पुलिस बल हैं, और हर एक कुछ खास पड़ोसियों से जुड़ा है। सेना रक्षा मंत्रालय का बल है, जो युद्ध के लिए बना है, और दो सक्रिय रेखाओं पर वह इनके साथ खड़ी है। नीचे की तालिका चारों को साथ-साथ रखती है। जहाँ भी कोई संख्या है, वह MHA के आँकड़ों से ली गई है।

बिंदुITBPSSBBSFसेना
मंत्रालयगृह मंत्रालयगृह मंत्रालयगृह मंत्रालयरक्षा मंत्रालय
शुरुआत24 अक्टूबर 1962 को गठनस्पेशल सर्विस ब्यूरो, 1963 की शुरुआत में बना1965 में 25 बटालियनों के साथ गठनस्थायी सेना, किसी एक सीमा के लिए नहीं बनी
शांति के समय रखवाली वाली सीमाभारत-चीन (3,488 किलोमीटर)भारत-नेपाल (1,751 किलोमीटर) और भारत-भूटान (699 किलोमीटर)भारत-पाकिस्तान (3,323 किलोमीटर) और भारत-बांग्लादेश (4,096.7 किलोमीटर)BSF के साथ LoC की और ITBP के साथ LAC की रखवाली
प्रमुखमहानिदेशक, एक IPS अधिकारीमहानिदेशक, एक IPS अधिकारीमहानिदेशक, एक IPS अधिकारीथल सेनाध्यक्ष
MHA के रिकॉर्ड में संख्या1,03,622 स्वीकृत31 दिसंबर 2024 तक 94,2022,72,450 स्वीकृत, 31 दिसंबर 2024MHA का बल नहीं
सीमा के आगे खास भूमिकाहिमालयी आपदाओं में फर्स्ट रिस्पॉन्डरशुरुआत सीमा के समुदायों के साथ काम से हुईवॉटर विंग, एयर विंग और तोपखानायुद्ध लड़ना और भारत की रक्षा करना

दो पंक्तियों पर दोबारा नजर डालिए। ‘शुरुआत’ वाली पंक्ति दिखाती है कि ITBP और SSB दोनों 1962 की संतान हैं, इसीलिए इन्हें अक्सर आपस में बदल दिया जाता है। ‘सीमा’ वाली पंक्ति यह उलझन सुलझा देती है: एक के सामने चीन है, दूसरे के सामने नेपाल और भूटान। ‘प्रमुख’ वाली पंक्ति बताती है कि ITBP सेना की कोई यूनिट क्यों नहीं है। इसका नेतृत्व गृह मंत्रालय के तहत एक पुलिस अधिकारी करता है, तब भी जब यह LAC पर सेना के बगल में खड़ी होती है। BSF की अपनी कहानी और उसकी विंग्स के बारे में जानने के लिए सीमा सुरक्षा बल वाला नोट पढ़िए।

आज की ITBP: बढ़ता आकार और नए नियम

पिछले कुछ सालों में ITBP का आकार बढ़ा है, और उसके आसपास के नियम भी बदले हैं। MHA की दो ताजा वार्षिक रिपोर्टें यह बढ़त साफ दिखाती हैं। मौजूदा आँकड़ों के लिए 2024-25 की रिपोर्ट का ही हवाला दीजिए।

पैमानाMHA रिपोर्ट 2023-24MHA रिपोर्ट 2024-25
सर्विस बटालियनें6062
सीमा चौकियाँ197209
स्वीकृत संख्या96,2221,03,622

यानी एक ही रिपोर्टिंग चक्र में 12 चौकियाँ ज्यादा हुईं, और स्वीकृत पद ठीक 7,400 बढ़े। बल से जुड़े तारीखवार बदलाव ये हैं:

बल के सामने खड़े सवाल

यह सारी बढ़त मुश्किल सवालों को हल नहीं करती। सार्वजनिक रिकॉर्ड में चार सवाल सबसे अलग दिखते हैं:

परीक्षा के लिए ITBP कैसे पढ़ें

ITBP, GS पेपर III के सिलेबस की दो पंक्तियों के तहत आती है। पहली है सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा की चुनौतियाँ और उनका प्रबंधन। दूसरी है अलग-अलग सुरक्षा बल, एजेंसियाँ और उनका अधिदेश। यह भारत-चीन संबंधों पर GS पेपर II के जवाबों में भी काम आती है, और आपदा प्रबंधन पर GS पेपर III के जवाबों में भी।

मुख्य परीक्षा में सीमा प्रबंधन को आम तौर पर एक पूरी व्यवस्था के रूप में पूछा गया है, जिसमें हर बल एक उदाहरण होता है। उत्तरी सीमा का उदाहरण ITBP है। मुख्य परीक्षा 2016 के GS पेपर III में पूछा गया: “कठिन भूभाग और कुछ देशों के साथ शत्रुतापूर्ण संबंधों की वजह से सीमा प्रबंधन एक जटिल काम है। प्रभावी सीमा प्रबंधन की चुनौतियों और रणनीतियों को स्पष्ट कीजिए।” मुख्य परीक्षा 2013 के GS पेपर III में पूछा गया: “दक्षिण एशिया के ज्यादातर देशों और म्यांमार के साथ लंबी और खुली सीमाओं को देखते हुए, भारत की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ सीमा प्रबंधन से किस हद तक जुड़ी हैं?

ये तथ्य तब तक दोहराइए, जब तक ये जुबान पर न चढ़ जाएँ:

वे उलझनें जिनसे नंबर कटते हैं, और उन्हें अलग रखने का तरीका:

रेखापड़ोसी और इलाकारखवाली कौन करता है
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)चीन, लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तकITBP, सेना के साथ
नियंत्रण रेखा (LoC)पाकिस्तान, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख मेंसेना, BSF के साथ
अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB)LoC के बाहर पाकिस्तान, और बांग्लादेशBSF

ITBP को ठीक से पढ़ना इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि एक ही बल में सीमा के कई सबक एक साथ मिल जाते हैं। इसका जन्म बताता है कि SSB क्यों है। इसकी चौकियाँ दिखाती हैं कि LAC को पुलिस के पहरे और सेना, दोनों की जरूरत क्यों है। जो जवाब इन तथ्यों से पूरी व्यवस्था तक पहुँच सके, वह रटा हुआ नहीं, समझा हुआ लगता है।

सामान्य प्रश्न

ITBP का फुल फॉर्म क्या है?

ITBP का फुल फॉर्म Indo-Tibetan Border Police है, यानी भारत तिब्बत सीमा पुलिस। जो कानून इसे गठित करता है, यानी 1992 का ITBPF अधिनियम, वह इसे भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल कहता है। यह गृह मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है।

ITBP की स्थापना कब हुई?

ITBP का गठन 24 अक्टूबर 1962 को, चीन के साथ युद्ध के दौरान, 4 बटालियनों के साथ हुआ। इसकी शुरुआत गुरिल्ला और खुफिया काम वाले एक पहाड़ी बल के रूप में हुई, और समय के साथ यह एक पारंपरिक सीमा रक्षक बन गई। इसका अपना कानून, 1992 का ITBPF अधिनियम, 30 मई 1994 को लागू हुआ।

ITBP किस सीमा की रखवाली करती है?

ITBP 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की रखवाली करती है, जो लद्दाख के कराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक जाती है। MHA की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक इसकी 209 सीमा चौकियाँ 9,000 से 18,750 फुट की ऊँचाई पर हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा की जिम्मेदारी में सेना भी इसके साथ है।

क्या ITBP भारतीय सेना का हिस्सा है?

नहीं। ITBP गृह मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, और इसका नेतृत्व भारतीय पुलिस सेवा से आने वाले महानिदेशक करते हैं। सेना रक्षा मंत्रालय के तहत है। दोनों वास्तविक नियंत्रण रेखा पर साथ-साथ काम करते हैं, लेकिन दोनों अलग बल हैं, और दोनों के कानून भी अलग हैं।

ITBP अधिनियम 1992 क्या है?

भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल अधिनियम, 1992 असल में 1992 का अधिनियम संख्या 35 है। यह ITBP को संघ के एक सशस्त्र बल के रूप में गठित करता है, जो भारत की सीमाओं की सुरक्षा के लिए है, और उन दूसरे कामों के लिए भी जो केंद्र इसे सौंपे। यह बल को केंद्र सरकार के अधीन रखता है और कमान एक महानिदेशक को देता है। इसकी धारा 7 के तहत बल के सदस्यों को भारत के बाहर भी सेवा देनी पड़ सकती है। यह अधिनियम 30 मई 1994 को लागू हुआ।

ITBP और SSB में अंतर क्या है?

दोनों बलों की जड़ें 1962 के युद्ध में हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग सीमाओं की रखवाली करते हैं। ITBP भारत-चीन सीमा पर है, जबकि सशस्त्र सीमा बल नेपाल और भूटान से लगी खुली सीमाओं पर है। SSB 1963 की शुरुआत में स्पेशल सर्विस ब्यूरो के रूप में बना था। इसका मकसद सीमा के समुदायों में मनोबल और क्षमता बढ़ाना था।

कैलाश मानसरोवर यात्रा में ITBP क्या करती है?

यह यात्रा विदेश मंत्रालय आयोजित करता है, और जमीन पर इसे सहारा देने वाली एजेंसियों में ITBP भी है। ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक, 2025 में नाथु ला वाले रास्ते पर ITBP और सेना ने मिलकर सुरक्षा और आपात मदद का तालमेल बिठाया। ITBP के जवानों ने गंगटोक में तीर्थयात्रियों को जरूरी जानकारी भी दी। पाँच साल के अंतराल के बाद यह यात्रा 2025 में फिर शुरू हुई।

ITBP को हिमालय में फर्स्ट रिस्पॉन्डर क्यों कहा जाता है?

गृह मंत्रालय ने ITBP को हिमालयी क्षेत्रों में आपदाओं के लिए फर्स्ट रिस्पॉन्डर नामित किया है, क्योंकि इसकी यूनिटें पहले से ही उस पूरे इलाके में फैली हैं। इस काम के लिए यह क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र चलाती है, और MHA की 2024-25 की रिपोर्ट इनकी संख्या 8 बताती है। यह NDRF को भी 4 बटालियनें देती है।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसका गठन 24 अक्टूबर 1962 को हुआ था। 2. ITBPF अधिनियम, 1992 उसी वर्ष लागू हो गया, जिस वर्ष इसे बनाया गया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (a) ITBP का गठन 24 अक्टूबर 1962 को हुआ था, लेकिन 1 सितंबर 1992 का अधिनियम 30 मई 1994 को जाकर लागू हुआ।

2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए (सीमा : सीमा की रखवाली करने वाला बल): 1. भारत-भूटान : सशस्त्र सीमा बल 2. भारत-म्यांमार : असम राइफल्स 3. भारत-चीन : भारत तिब्बत सीमा पुलिस। ऊपर दिए गए युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?

उत्तर: (c) ‘एक सीमा, एक सीमा रक्षक बल’ के सिद्धांत के तहत तीनों युग्म MHA के बँटवारे से मेल खाते हैं।

3. भारत-चीन सीमा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. MHA इसकी लंबाई 3,488 किलोमीटर बताता है। 2. ITBP लद्दाख के कराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक इसकी रखवाली करती है। 3. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सेना की कोई भूमिका नहीं है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (a) MHA दर्ज करता है कि सेना ITBP के साथ LAC की रखवाली करती है, इसलिए कथन 3 गलत है।

4. ITBP के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं के लिए फर्स्ट रिस्पॉन्डर नामित किया गया है। 2. यह राष्ट्रीय आपदा मोचन बल को बटालियनें देती है। 3. इसके सदस्यों को भारत के बाहर सेवा के लिए भेजा जा सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कितने सही हैं?

उत्तर: (c) MHA इसे हिमालय का फर्स्ट रिस्पॉन्डर मानता है, यह NDRF को 4 बटालियनें देती है, और इसके अधिनियम की धारा 7 भारत के बाहर सेवा की इजाजत देती है।

5. ITBP का पर्वतारोहण और स्कीइंग संस्थान कहाँ स्थित है?

उत्तर: (b) यह संस्थान उत्तराखंड के औली में है, जहाँ भारतीय अंटार्कटिक अभियानों के सदस्य भी ट्रेनिंग लेते हैं।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. भारत की चीन और पाकिस्तान के साथ लंबी और अशांत सीमा है, जो विवादित मुद्दों से भरी है। सीमा पर टकराव वाले मुद्दों और सुरक्षा चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। साथ ही, सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) और सीमा पर बुनियादी ढाँचा और प्रबंधन (BIM) योजना के तहत इन इलाकों में हो रहे विकास के बारे में भी बताइए। (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2024, GS पेपर III।
  2. ITBP की शुरुआत एक गुरिल्ला-सह-खुफिया-सह-लड़ाकू बल के रूप में हुई, और यह आगे चलकर एक पारंपरिक सीमा रक्षक बल बन गई। इस बदलाव का क्रम बताइए, और मूल्यांकन कीजिए कि क्या आंतरिक सुरक्षा और आपदा से जुड़ी भूमिकाएँ इसके मूल काम पर बोझ डालती हैं। (15 अंक, 250 शब्द)
  3. ‘एक सीमा, एक सीमा रक्षक बल’ के सिद्धांत को समझाइए। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर, जहाँ सेना और ITBP जिम्मेदारी बाँटती हैं, यह सिद्धांत कैसे लागू होता है? (10 अंक, 150 शब्द)
  4. हिमालयी राज्यों में बार-बार बादल फटने, अचानक बाढ़ और हिमस्खलन की घटनाएँ होती हैं। ITBP के संदर्भ में, ऐसे इलाके में किसी सीमा रक्षक बल को फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनाने के पक्ष में तर्कों की चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  5. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 ने CAPF में IPS प्रतिनियुक्ति और कैडर के नेतृत्व के बीच की बहस फिर से छेड़ दी है। ITBP जैसे सीमा रक्षक बलों के संदर्भ में इस मुद्दे का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)