केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF): क्राउन से शुरुआत, RAF, कोबरा और जिम्मेदारियाँ
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF): 1939 की शुरुआत, CRPF अधिनियम 1949, RAF, कोबरा और महिला बटालियनें, और चुनाव, वामपंथी उग्रवाद वाले इलाकों और J&K में इसकी भूमिका।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) आंतरिक सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार का मुख्य सशस्त्र पुलिस बल है। स्वीकृत संख्या (sanctioned strength) के हिसाब से यह भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सबसे बड़ा भी है। इसका गठन 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस (Crown Representative’s Police) के नाम से हुआ था, और 28 दिसंबर 1949 को CRPF अधिनियम पारित होने पर इसे आज वाला नाम मिला। जब किसी राज्य की अपनी पुलिस अकेले कानून-व्यवस्था नहीं संभाल पाती, तो गृह मंत्रालय आम तौर पर यही बल भेजता है।
इस बल के बारे में दो गलत तस्वीरें आम हैं। एक इसे छोटी-सी सेना मान लेती है। दूसरी ‘रिजर्व’ शब्द से यह समझ लेती है कि जवान बैरकों में बैठे रहते हैं और युद्ध छिड़ने का इंतजार करते हैं। CRPF इन दोनों में से कुछ नहीं है। यह संघ का पुलिस बल है, जो राज्यों की मदद के लिए काम करता है। यहाँ ‘रिजर्व’ का मतलब है सशस्त्र पुलिस का वह भंडार, जिसे संघ हर उस राज्य के लिए तैयार रखता है जिसे अपनी पुलिस से ज्यादा ताकत चाहिए। यह बात साफ हो जाए, तो इस बल की जिम्मेदारियों की अजीब-सी दिखने वाली सूची फिर अजीब नहीं लगती।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल क्या है?
CRPF गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन संघ का सशस्त्र बल है, और यह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल अधिनियम, 1949 से चलता है। इसका काम है राज्यों की मदद में आंतरिक सुरक्षा संभालना, दंगा रोकने से लेकर उग्रवाद-रोधी अभियानों तक। यह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से एक है, और इनमें वह बल है जो किसी सीमा के लिए नहीं, बल्कि देश के भीतरी हिस्सों के लिए बना है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force, CRPF) |
| गठन | 27 जुलाई 1939, क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस के रूप में, नीमच में एक बटालियन के साथ |
| मौजूदा नाम | 28 दिसंबर 1949 से, CRPF अधिनियम, 1949 (1949 का अधिनियम संख्या 66) के तहत |
| मूल मंत्रालय | गृह मंत्रालय |
| मुख्यालय | नई दिल्ली, जैसा अधिनियम की धारा 8(2) तय करती है |
| प्रमुख | महानिदेशक (DG), जो IPS अधिकारी होते हैं; 2026 का CAPF अधिनियम यह पद सिर्फ प्रतिनियुक्ति से भरता है |
| स्वीकृत संख्या | 3,30,883, जिनमें से 2,97,604 कार्यरत, 30 सितंबर 2024 की स्थिति में |
| बटालियनें | 248, जिनमें 6 महिला, 16 रैपिड एक्शन फोर्स और 10 CoBRA बटालियनें शामिल हैं |
| खास दिन | 19 मार्च को CRPF दिवस (राष्ट्रपति ध्वज, 1950) और 9 अप्रैल को शौर्य दिवस |
आखिरी पंक्ति बहुत कुछ कह जाती है। CRPF दिवस 1950 में मिले राष्ट्रपति ध्वज (प्रेसिडेंट्स कलर) की याद है। शौर्य दिवस 1965 की याद दिलाता है, जब CRPF की कंपनियों ने नियमित सेना की एक ब्रिगेड के सामने अपनी चौकी नहीं छोड़ी। एक पुलिस बल, जो सैनिकों से लड़ चुका है: आगे की हर बात इसी धागे से जुड़ी है।
क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस CRPF कैसे बनी?
CRPF की शुरुआत 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस के रूप में हुई। तब यह सिर्फ एक बटालियन थी, जिसका गठन रियासतों में व्यवस्था बनाए रखने में मदद के लिए हुआ था। क्राउन रिप्रेजेंटेटिव यानी वायसराय, जो इन रियासतों से रिश्तों में ब्रिटिश क्राउन की ओर से काम करता था। इसलिए नाम ही बता देता है कि बल किसका था: क्राउन का, जिसे उन शासकों को उधार दिया जाता था जो अपने दम पर अशांति नहीं संभाल पाते थे। बल का अपना इतिहास इसके गठन को उस राजनीतिक आंदोलन से जोड़ता है, जो 1936 के कांग्रेस के मद्रास प्रस्ताव के बाद रियासतों में तेज हुआ।
आजादी ने मालिक बदला, सोच नहीं। संसद ने 28 दिसंबर 1949 को CRPF अधिनियम पारित किया। इस अधिनियम ने बल को नया नाम दिया और इसे संघ का सशस्त्र बल बना दिया। उस समय के गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसकी नई भूमिका का खाका तैयार किया और इसे अपना ध्वज दिया। आजादी के आसपास इस बल ने जूनागढ़ में भी व्यवस्था कायम करने में संघ की मदद की। जूनागढ़ वह रियासत थी, जो भारत में शामिल होने का विरोध कर रही थी।
इसके बाद बल की पहचान तय करने वाली तारीखें एक छोटी-सी कतार में आती हैं:
- 21 अक्टूबर 1959: लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों ने CRPF की एक गश्ती टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें 10 जवान मारे गए। आज यह दिन पूरे भारत में पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- 9 अप्रैल 1965: कच्छ की सरदार पोस्ट पर CRPF की दो कंपनियों ने पाकिस्तान की एक ब्रिगेड का हमला नाकाम कर दिया। CRPF हर साल इस तारीख को शौर्य दिवस के रूप में मनाता है।
- 1986: पहली पूरी तरह महिला बटालियन, 88 (महिला) बटालियन, का गठन दिल्ली में हुआ।
- 1987: महिलाओं की एक टुकड़ी समेत CRPF की 13 कंपनियों को विमान से श्रीलंका भेजा गया, ताकि वे भारतीय शांति सेना (IPKF) में शामिल हों।
- अक्टूबर 1992: दंगों और सार्वजनिक अशांति से निपटने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स का गठन हुआ।
- 2001: मंत्रियों के समूह की सिफारिश पर CRPF को देश का मुख्य आंतरिक सुरक्षा बल बनाया गया। उसी साल 13 दिसंबर को संसद भवन पर हुए हमले को नाकाम करने में CRPF के जवानों ने मदद की।
- 2008 से 2011: माओवादी उग्रवाद के खिलाफ जंगल में अभियानों के लिए 10 CoBRA बटालियनों का गठन हुआ।
इस पैटर्न पर ध्यान दीजिए। लगभग हर नई इकाई अपने दशक की किसी खास समस्या का जवाब है। इसीलिए CRPF कभी-कभी ऐसा लगता है, मानो कई बल एक ही नाम के नीचे रह रहे हों।
CRPF अधिनियम, 1949 क्या कहता है?
CRPF अधिनियम छोटा है, और इसका ज्यादातर वजन चार प्रावधानों पर टिका है। इसका पूरा पाठ गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है।
- धारा 3(1) कहती है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल नाम का एक सशस्त्र बल, जिसे केंद्र सरकार बनाए रखती है, ‘बना रहेगा’। यही शब्द ‘बना रहेगा’ (shall continue) असली सुराग है: अधिनियम ने कोई नया बल नहीं बनाया, बल्कि 1939 वाले बल को नए नाम के साथ आगे बढ़ा दिया।
- धारा 2(a) ‘सक्रिय ड्यूटी’ (active duty) की परिभाषा देती है: किसी स्थानीय इलाके में अशांति होने पर वहाँ व्यवस्था बहाल करने और बनाए रखने की ड्यूटी। यही एक पंक्ति छोटे रूप में इस बल का पूरा काम समेट लेती है।
- धारा 7 हर सदस्य पर यह जिम्मेदारी डालती है कि वह कानूनी आदेशों और वारंटों का पालन करे, और अपराधियों को न्याय के कटघरे तक लाए। धारा 7(2) के तहत सदस्य भारत के बाहर भी सेवा देने के लिए बाध्य हैं। इसी वजह से CRPF की टुकड़ियाँ संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में जा पाती हैं।
- धारा 8 बल की निगरानी और नियंत्रण केंद्र सरकार को सौंपती है, और मुख्यालय नई दिल्ली में तय करती है। मुख्यालय से दूर सक्रिय ड्यूटी पर बल उस प्राधिकारी के सामान्य नियंत्रण में काम करता है, जिसे केंद्र सरकार तय या नियुक्त करे।
अब वह हिस्सा, जिस पर ज्यादातर पाठक उलझ जाते हैं। पुलिस और लोक व्यवस्था सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में आते हैं। इसलिए राज्य की पुलिस राज्य के प्रति जवाबदेह है, जबकि CRPF संघ के प्रति। दोनों का मेल इसलिए होता है, क्योंकि गृह मंत्रालय CRPF को किसी राज्य की मदद में तैनात करता है। जमीन पर इसकी कंपनियाँ राज्य पुलिस की जगह नहीं लेतीं, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करती हैं।
इसे प्रशिक्षित, हथियारबंद जवानों का उधार समझिए: व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य के पास रहती है, और संघ अतिरिक्त हाथ देता है। लेकिन अनुशासन के मामले में यह उपमा टूट जाती है। उधार पर गई CRPF की कंपनी अधिनियम की अपनी संहिता से बंधी रहती है। इस संहिता के तहत सक्रिय ड्यूटी के दौरान बगावत या ड्यूटी छोड़कर भाग जाने पर 14 साल तक की जेल हो सकती है।
CRPF का संगठन कैसा है?
CRPF की कमान नई दिल्ली में बैठे महानिदेशक के हाथ में है। उनके नीचे 4 जोन हैं, जिनकी जिम्मेदारी विशेष महानिदेशकों पर है, और उनके नीचे 21 प्रशासनिक सेक्टर। बल की असली लड़ाकू ताकत उसकी बटालियनों में है, और इसकी मौजूदा सूची कुछ ऐसी है:
- 201 जनरल ड्यूटी (GD) बटालियनें, यानी सामान्य इकाइयाँ
- 16 रैपिड एक्शन फोर्स बटालियनें
- 10 CoBRA बटालियनें
- 8 VIP सुरक्षा बटालियनें, साथ में एक VIP सुरक्षा ग्रुप
- 7 सिग्नल बटालियनें
- 6 महिला बटालियनें
- 1 स्पेशल ड्यूटी ग्रुप
याद रखने लायक इकाई बटालियन है। गृह मंत्रालय इसी इकाई को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजता है। और कोई विशेष बटालियन असल में एक सामान्य बटालियन ही है, जिसे एक सीमित काम और उसके हिसाब से अलग प्रशिक्षण दे दिया गया है।
रैपिड एक्शन फोर्स
रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) का गठन अक्टूबर 1992 में दंगों और दूसरी सार्वजनिक अशांति से निपटने के लिए हुआ। सोच यह थी कि ऐसी इकाई हो, जो कम से कम समय में संकट वाली जगह पहुँच जाए। 7 अक्टूबर 2003 को इसे राष्ट्रपति ध्वज मिला। RAF के अपने पेज पर 15 बटालियनें दर्ज हैं, जिनमें से 10 की संख्या 99 से 108 तक है। दूसरी तरफ CRPF का कुल ब्योरा 16 बटालियनें गिनता है। इसलिए दोनों में से कोई भी आँकड़ा लिखें, तो उसका स्रोत साथ में बताइए।
इसकी सबसे छोटी इकाई एक टीम है, जिसका नेतृत्व एक इंस्पेक्टर करता है। यह टीम तीन हिस्सों से बनती है:
- दंगा नियंत्रण वाला हिस्सा
- आँसू गैस वाला हिस्सा
- फायर वाला हिस्सा
हर टीम एक स्वतंत्र स्ट्राइकिंग इकाई की तरह काम करती है। और RAF की हर कंपनी में एक टीम पूरी तरह महिलाओं की होती है, ताकि जहाँ प्रदर्शनकारी महिलाएँ हों, वहाँ हालात संभाले जा सकें।
CoBRA बटालियनें
CoBRA का पूरा नाम है कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (Commando Battalion for Resolute Action)। यह उस समस्या का CRPF वाला जवाब है, जिसके लिए सामान्य बटालियनें बनी ही नहीं थीं: जंगल में छापामार युद्ध। इसके जवान CRPF के भीतर से ही चुने जाते हैं, और उन्हें कमांडो और जंगल युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता है। पहली इकाइयाँ 2008 की हैं। बल के अपने रिकॉर्ड के मुताबिक सभी 10 बटालियनों का गठन 2008 से 2011 के बीच हुआ। फिर उन्हें वामपंथी उग्रवाद (LWE) या दूसरे उग्रवाद से प्रभावित 10 राज्यों में तैनात किया गया, छत्तीसगढ़ से मेघालय तक।
महिला बटालियनें
CRPF खुद को भारत का अकेला अर्धसैनिक बल बताता है, जिसके पास 6 महिला बटालियनें हैं। पहली, 88 (महिला) बटालियन, का गठन 1986 में दिल्ली में हुआ। वजह यह थी कि महिलाओं के आंदोलन संभालने वाले पुलिसकर्मियों ने पाया कि छोटी-सी चूक भी, चाहे सच में हुई हो या सिर्फ उसका आरोप लगा हो, कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या बन सकती है। इस बटालियन ने मार्च 1987 में अपना प्रशिक्षण पूरा किया। फिर इसने मेरठ के दंगों में ड्यूटी दी, और उसके बाद श्रीलंका में IPKF के साथ काम किया। बाद की महिला बटालियनें चरणों में आईं:
- 135 (महिला) बटालियन, गांधीनगर, 1995 में
- 213 बटालियन, नागपुर, 2011 में
- 232, 233 और 240 (महिला) बटालियनें, 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में
अब वह आँकड़ा, जो लोगों को चौंकाता है। 30 सितंबर 2024 को CRPF के 2,97,604 कार्यरत कर्मियों में 10,076 महिलाएँ थीं, यानी सिर्फ 3.38%। संसद को दिए गृह मंत्रालय के जवाब में शामिल छह बलों में यह हिस्सा सबसे कम था। यह BSF के 4.41% से कम था, और CISF के 7.02% से तो काफी कम। दोनों बातें एक साथ सच हैं, क्योंकि 248 बटालियनों में 6 बटालियनें बहुत छोटा हिस्सा हैं।
CRPF कहाँ तैनात होता है?
जहाँ भी किसी राज्य की पुलिस को हथियारबंद मदद चाहिए, CRPF वहाँ जाता है। इसकी जिम्मेदारियों की सरकारी सूची पूरी देखने लायक है:
- भीड़ नियंत्रण और दंगा नियंत्रण
- मिलिटेंसी-रोधी और उग्रवाद-रोधी अभियान
- वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान
- बड़े सुरक्षा इंतजाम, खासकर अशांत इलाकों में चुनावों के दौरान
- VIP सुरक्षा और अहम प्रतिष्ठानों की हिफाजत
- युद्ध के समय दुश्मन के हमले से लड़ना
- संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन
- प्राकृतिक आपदाओं में बचाव और राहत
दो छोटे आँकड़े दिखाते हैं कि सुर्खियों से परे यह बल कितना बँटा हुआ है। इसके करीब 5.68% कर्मी VIP सुरक्षा में लगे हैं। और करीब 8.5% कर्मी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सचिवालयों से लेकर जेलों तक, सरकारी ठिकानों की पहरेदारी करते हैं।
चुनाव
चुनावों के लिए गृह मंत्रालय CRPF को नोडल एजेंसी, यानी तालमेल बिठाने वाला बल बनाता है। चुनाव ड्यूटी पर केंद्रीय बलों को भेजने और तैनात करने का काम इसी के जिम्मे होता है। इस भूमिका में CRPF:
- चुनाव वाले हर राज्य के साथ राज्य-स्तरीय समन्वय समूह बनाता है
- मतदान की पूरी अवधि में चौबीसों घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम चलाता है
- चुनाव की स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम करता है, जो कंपनियों को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाती हैं
यह सब भारत निर्वाचन आयोग के तय किए कार्यक्रम के हिसाब से चलता है।
वामपंथी उग्रवाद वाले इलाके
इस सदी में CRPF की सबसे ज्यादा मेहनत LWE वाले इलाकों में लगी है। बल का अपना पेज बताता है कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में CRPF की 91 इकाइयाँ तैनात हैं, जिनमें सभी 10 CoBRA बटालियनें शामिल हैं। सरकार के 2024 के ब्योरे के मुताबिक बल का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा वहीं था। अप्रैल 2025 में गृह मंत्री ने कहा कि CRPF ने 5 साल में वहाँ 400 से ज्यादा फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाए हैं। फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस एक किलेबंद कैंप होता है, जिसे ऐसे इलाके में आगे बढ़कर बनाया जाता है जहाँ सरकार की मौजूदगी न के बराबर थी। गृह मंत्रालय हिंसा में आई गिरावट का श्रेय ऐसे कैंपों को देता है, और साथ में सड़कों और कल्याण योजनाओं को भी।
एक प्रयोग अलग से जिक्र का हकदार है। 241 बस्तरिया बटालियन 1 अप्रैल 2017 से अस्तित्व में है। इसकी ज्यादातर भर्ती बस्तर के सबसे ज्यादा प्रभावित चार जिलों से हुई। मकसद था बल में स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी बढ़ाना, और स्थानीय युवाओं को पक्की नौकरी देना। इसके 534 प्रशिक्षित रंगरूटों में 189 महिलाएँ थीं, और 21 मई 2018 को अंबिकापुर में इसकी पासिंग आउट परेड हुई।
जम्मू और कश्मीर
CRPF का एक अलग J&K जोन है। इस केंद्र शासित प्रदेश में इसकी जिम्मेदारियाँ आतंकवाद-रोधी अभियानों से लेकर अमरनाथ यात्रा और माता वैष्णो देवी मंदिर जैसी तीर्थयात्राओं की सुरक्षा तक फैली हैं। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद 2024 में वहाँ विधानसभा चुनाव हुए। गृह मंत्री ने इन चुनावों को सुरक्षित कराने का श्रेय CRPF और दूसरे बलों को दिया। उनके मुताबिक न कहीं बूथ कैप्चरिंग की खबर आई, न एक भी गोली चली।
इस बल ने वहाँ भारी नुकसान भी झेला है। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा जिले के लेथपोरा में विस्फोटकों से भरी एक कार CRPF काफिले की एक बस से टकरा दी गई। इस हमले में CRPF के 40 जवानों की जान गई। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने अगस्त 2020 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की।
CRPF के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
CRPF को लेकर होने वाली ज्यादातर बहसें असल में इस बात पर हैं कि हर मुश्किल में पहला जवाब यही बल होता है। इस भूमिका की कीमत तीन जगह दिखती है।
पहली है जरूरत से ज्यादा खिंचाव (overstretch), यानी एक ही बल को उतने कामों में लगा देना, जितने उसकी संख्या आराम से नहीं उठा सकती। कोई नियम एक ही जनरल ड्यूटी बटालियन को भीड़ नियंत्रण से उग्रवाद-रोधी अभियान में जाने से नहीं रोकता, जबकि दोनों कामों के लिए बिल्कुल अलग आदतें चाहिए। 30 सितंबर 2024 को स्वीकृत और कार्यरत संख्या में करीब 33,000 का अंतर था, जो इस दबाव को और बढ़ाता है।
दूसरी है नेतृत्व। CRPF के वरिष्ठ पद लंबे समय से कुछ हद तक प्रतिनियुक्ति (deputation) पर आए IPS अधिकारियों से भरे जाते रहे हैं। यानी भारतीय पुलिस सेवा के वे अधिकारी, जिन्हें एक तय कार्यकाल के लिए बल में भेजा जाता है। बल के अपने कैडर के अधिकारी इसके खिलाफ अदालत गए। उनकी दलील है कि इससे उनकी पदोन्नति रुकती है। 23 मई 2025 को संजय प्रकाश बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CAPF के ग्रुप A कार्यकारी कैडर के अधिकारी हर मकसद से संगठित ग्रुप A सेवाएँ (Organised Group A Services) हैं। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि महानिरीक्षक (IG) के स्तर तक IPS प्रतिनियुक्ति को दो साल में धीरे-धीरे घटाया जाए। संसद का जवाब 2026 में आया, और अब वह जवाब खुद कोर्ट के सामने है।
तीसरी है प्रतिनिधित्व। जो बल 1986 से महिला बटालियनें खड़ी कर रहा है, उसमें महिलाओं का सिर्फ 3.38% हिस्सा अटपटा लगता है।
एक नया सवाल यह है कि अगर LWE में गिरावट बनी रही, तो वहाँ लगी 91 इकाइयों का क्या होगा। वे दूसरे कामों में भेजी जाएँगी, या उग्रवाद के दोबारा उभरने के खिलाफ बीमे की तरह वहीं रहेंगी, यह अभी खुला सवाल है। सरकारी रिकॉर्ड अभी इसका जवाब नहीं देता।
2024 के बाद CRPF के लिए क्या बदला?
सबसे बड़ा बदलाव कानूनी है: अब 2026 का एक अधिनियम तय करता है कि CRPF का नेतृत्व कौन करेगा। बाकी समय की कहानी दो बातों की है। LWE का नक्शा सिकुड़ता गया, और बल ने अपने जंगल युद्ध वाले मॉडल को नई जमीन के हिसाब से ढाला।
- 17 अप्रैल 2025: मध्य प्रदेश के नीमच में CRPF दिवस परेड में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि करीब 3 लाख जवान 248 बटालियनों में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की तारीख तय की, और इस लक्ष्य में CRPF को केंद्र में रखा।
- 17 अप्रैल 2025: महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने जम्मू और कश्मीर के जंगलों में आतंकवाद-रोधी काम के लिए 11वीं CoBRA बटालियन की घोषणा की। बल के फरवरी 2026 के ब्योरे में अब भी 10 ही दर्ज हैं, इसलिए 11वीं को घोषित मानिए, गठित नहीं।
- 23 मई 2025: कैडर के दर्जे और IPS प्रतिनियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसका जिक्र ऊपर हो चुका है।
- 21 फरवरी 2026: 87वीं स्थापना दिवस परेड गुवाहाटी में हुई। पूर्वोत्तर में ऐसा पहली बार हुआ।
- 30 मार्च 2026: लोकसभा में बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि LWE प्रभावित जिले 2014 में 126 थे, जो घटकर 2 रह गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 से मार्च 2026 के बीच 706 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज किया गया।
- 9 अप्रैल 2026: राष्ट्रपति ने CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को मंजूरी दी। राज्यसभा ने इसे 1 अप्रैल को पारित किया था। यह अधिनियम महानिरीक्षक के 50% पद और अतिरिक्त महानिदेशक के कम से कम 67% पद IPS प्रतिनियुक्ति से भरता है। विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के सभी पद सिर्फ प्रतिनियुक्ति से भरे जाएँगे।
- 4 अगस्त 2026: सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम की धारा 3 और 4 को चुनौती देने वाली CAPF अधिकारियों की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।
CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 पर साइट का करेंट अफेयर्स नोट दोनों पक्षों की दलीलें सामने रखता है। असली सवाल कहना आसान है: 2025 में कोर्ट ने एक दिशा में फैसला दिया, 2026 में संसद ने दूसरी दिशा में कानून बनाया, और अगस्त 2026 के नोटिस के समय तक यह चुनौती लंबित थी।
परीक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कैसे पढ़ें
CRPF, GS पेपर III में आता है। वहाँ आंतरिक सुरक्षा का सिलेबस ‘विभिन्न सुरक्षा बल, एजेंसियाँ और उनका अधिदेश’ और ‘विकास और उग्रवाद के फैलाव के बीच संबंध’ की बात करता है। जब भी कोई सवाल लोक व्यवस्था में संघ की भूमिका पर टिका हो, तब यह राजव्यवस्था से भी जुड़ जाता है।
मुख्य परीक्षा में CRPF का नाम कम ही लिया जाता है। सवाल किसी समस्या पर होता है, और उम्मीद की जाती है कि उत्तर में सही बल आए। मुख्य परीक्षा 2020 के GS पेपर III में पूछा गया: “म्यांमार, बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमाओं पर, नियंत्रण रेखा (LoC) समेत, आंतरिक सुरक्षा के खतरों और सीमा पार अपराधों का विश्लेषण कीजिए। इस संबंध में विभिन्न सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए।” एक अच्छा उत्तर सीमा वाले बलों को सीमा पर रखता है, और CRPF को देश के भीतरी इलाकों में। प्रीलिम्स के लिए, Anantam IAS के 1,403 प्रश्नों वाले प्रीलिम्स प्रश्न बैंक में, जिसमें 2013 से 2026 तक के प्रश्न हैं, आंतरिक सुरक्षा का कोई अलग खंड नहीं है। इसलिए CRPF के तथ्य राजव्यवस्था के साथ दोहराइए, जिसके 1,403 में से 240 प्रश्न हैं।
रिवीजन के लिए साथ रखने लायक छह तथ्य:
- 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस के रूप में गठन; 28 दिसंबर 1949 को CRPF अधिनियम से नया नाम (1949 का अधिनियम संख्या 66)।
- गृह मंत्रालय के अधीन; सबसे बड़ा CAPF, 30 सितंबर 2024 को 3,30,883 स्वीकृत पदों के साथ।
- रैपिड एक्शन फोर्स का गठन अक्टूबर 1992 में दंगों से निपटने के लिए; 7 अक्टूबर 2003 को राष्ट्रपति ध्वज।
- CoBRA: वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ जंगल युद्ध के लिए 2008 से 2011 के बीच 10 बटालियनों का गठन।
- पहली महिला बटालियन, 88वीं, का गठन 1986 में; कुल 6।
- हॉट स्प्रिंग्स (21 अक्टूबर 1959) की याद में पुलिस स्मृति दिवस; सरदार पोस्ट (9 अप्रैल 1965) की याद में शौर्य दिवस।
चार उलझनें सबसे ज्यादा अंक काटती हैं:
- गठन बनाम नया नाम। 1939 गठन का साल है; 1949 अधिनियम और नाम का। अगर सवाल पूछे कि CRPF की स्थापना कब हुई, तो जवाब 1939 है।
- बल बनाम उसकी इकाइयाँ। RAF और CoBRA अलग बल नहीं हैं। ये CRPF की ही बटालियनें हैं, जिन्हें सीमित काम दिए गए हैं।
- सबसे बड़ा CAPF। कुछ सारांश यह खिताब BSF को दे देते हैं, लेकिन गृह मंत्रालय के आँकड़े बात साफ कर देते हैं: CRPF के 3,30,883 स्वीकृत पद, जबकि BSF के 2,65,808।
- CRPF बनाम CISF। दोनों देश के भीतर काम करते हैं, लेकिन CISF हवाई अड्डों और औद्योगिक इकाइयों जैसे प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है, जबकि CRPF लोक व्यवस्था और उग्रवाद से निपटता है।
2026 के अधिनियम के दायरे में अब आने वाले पाँच बलों की तुलना कुछ ऐसी है:
| बल | किस अधिनियम से चलता है | मुख्य काम | स्वीकृत संख्या (30 सितंबर 2024) |
|---|---|---|---|
| CRPF | CRPF अधिनियम, 1949 | आंतरिक सुरक्षा, दंगे और उग्रवाद-रोधी अभियान | 3,30,883 |
| BSF | BSF अधिनियम, 1968 | पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाएँ | 2,65,808 |
| CISF | CISF अधिनियम, 1968 | हवाई अड्डे, औद्योगिक और दूसरे अहम प्रतिष्ठान | 1,93,058 |
| SSB | SSB अधिनियम, 2007 | नेपाल और भूटान की सीमाएँ | 1,00,444 |
| ITBP | ITBP अधिनियम, 1992 | चीन सीमा | 98,858 |
BSF पर नोट और आंतरिक सुरक्षा बलों और एजेंसियों का ओवरव्यू बाकी बलों को ज्यादा विस्तार से समझाते हैं।
CRPF को ठीक से पढ़ना इसलिए जरूरी है, क्योंकि बस्तर से श्रीनगर तक, आंतरिक सुरक्षा के लगभग हर उत्तर में यह आता है। इसकी भूमिका सही पकड़िए, यानी राज्यों की मदद करने वाला संघ का बल, तो बाकी हर बल अपने आप इसके आसपास सही जगह बैठ जाता है। यहीं गलती की, तो सीमा या LWE वाला उत्तर गलत किरदार से शुरू होगा।
सामान्य प्रश्न
CRPF का फुल फॉर्म क्या है?
CRPF का फुल फॉर्म है Central Reserve Police Force, यानी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल। यह गृह मंत्रालय के अधीन संघ का सशस्त्र बल है, और आंतरिक सुरक्षा के लिए मुख्य केंद्रीय बल भी। ‘रिजर्व’ शब्द सशस्त्र पुलिस के उस भंडार की ओर इशारा करता है, जिसे संघ मदद माँगने वाले राज्यों में भेजने के लिए तैयार रखता है।
CRPF की स्थापना कब हुई?
CRPF का गठन 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस के रूप में हुआ था। तब नीमच में इसकी सिर्फ एक बटालियन थी। 28 दिसंबर 1949 को CRPF अधिनियम पारित होने पर इसे मौजूदा नाम मिला। यानी 1939 गठन का साल है, और 1949 अधिनियम और नए नाम का।
क्या CRPF सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है?
हाँ। गृह मंत्रालय ने लोकसभा को बताया कि 30 सितंबर 2024 की स्थिति में CRPF की स्वीकृत संख्या 3,30,883 थी। उसके बाद सबसे बड़े बल, BSF की संख्या 2,65,808 थी। बल की अपनी वेबसाइट भी इसे भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बताती है।
रैपिड एक्शन फोर्स क्या है?
रैपिड एक्शन फोर्स CRPF की एक विशेष शाखा है, जिसका गठन अक्टूबर 1992 में दंगों और दूसरी सार्वजनिक अशांति से निपटने के लिए हुआ। इसकी सबसे छोटी इकाई एक इंस्पेक्टर के नेतृत्व वाली टीम है, और हर कंपनी में एक टीम महिलाओं की होती है। 7 अक्टूबर 2003 को इसे राष्ट्रपति ध्वज मिला।
CoBRA बटालियन क्या है?
CoBRA का पूरा नाम है कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन। ये CRPF की वे बटालियनें हैं, जिन्हें माओवादी उग्रवाद के खिलाफ अभियानों के लिए कमांडो तरीकों और जंगल युद्ध का प्रशिक्षण मिला है। बल के रिकॉर्ड के मुताबिक 2008 से 2011 के बीच 10 CoBRA इकाइयों का गठन हुआ, और जम्मू और कश्मीर के लिए 11वीं बटालियन की घोषणा अप्रैल 2025 में हुई।
CRPF पर नियंत्रण किसका है और इसका प्रमुख कौन होता है?
CRPF गृह मंत्रालय के अधीन है, और CRPF अधिनियम, 1949 इसकी निगरानी और नियंत्रण केंद्र सरकार को सौंपता है। इसका प्रमुख महानिदेशक होता है, जो IPS अधिकारी होता है। 2026 का CAPF अधिनियम यह पद सिर्फ प्रतिनियुक्ति से भरता है।
21 अक्टूबर का CRPF से क्या संबंध है?
21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों ने CRPF की एक गश्ती टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें 10 जवान मारे गए। देश भर के पुलिस बल इस दिन को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं। यह ड्यूटी पर जान गँवाने वाले सभी पुलिसकर्मियों की याद का दिन है।
CRPF, CISF से कैसे अलग है?
दोनों बल देश के भीतर काम करते हैं, लेकिन उनके काम अलग हैं। CISF हवाई अड्डों और औद्योगिक इकाइयों जैसे प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है। CRPF राज्यों की मदद में लोक व्यवस्था और उग्रवाद से निपटता है।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसका गठन 1939 में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस के रूप में हुआ था। 2. इसे अपना मौजूदा नाम 1949 में पारित एक अधिनियम से मिला। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c) बल का गठन 27 जुलाई 1939 को हुआ था, और 28 दिसंबर 1949 को पारित CRPF अधिनियम से इसका नाम बदला।
2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रैपिड एक्शन फोर्स का गठन अक्टूबर 1992 में CRPF की एक शाखा के रूप में हुआ। 2. CoBRA बटालियनों में प्रतिनियुक्ति पर आए भारतीय सेना के जवान होते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) CoBRA के जवान CRPF के भीतर से ही चुने जाते हैं; सेना से प्रतिनियुक्ति वाला मॉडल NSG के स्पेशल एक्शन ग्रुप का है।
3. CRPF की महिला बटालियनों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पहली, 88 (महिला) बटालियन, का गठन 1986 में हुआ, और इसका मुख्यालय दिल्ली में था। 2. CRPF के पास छह महिला बटालियनें हैं। 3. 30 सितंबर 2024 को CRPF की कार्यरत संख्या में महिलाओं का हिस्सा 10% से ज्यादा था। ऊपर दिए गए कथनों में से कितने सही हैं?
- (a) केवल एक
- (b) केवल दो
- (c) सभी तीन
- (d) कोई भी नहीं
उत्तर: (b) कथन 1 और 2 सही हैं; महिलाओं का हिस्सा 3.38% था।
4. पूरे भारत में पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाने वाला दिन किस घटना की याद दिलाता है?
- (a) 1965 में कच्छ की सरदार पोस्ट की रक्षा
- (b) 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में CRPF की गश्ती टुकड़ी पर घात लगाकर किया गया हमला
- (c) 2001 में संसद भवन पर हमला
- (d) 1939 में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस का गठन
उत्तर: (b) 21 अक्टूबर 1959 को हॉट स्प्रिंग्स में CRPF के 10 जवान मारे गए थे; सरदार पोस्ट की याद 9 अप्रैल को शौर्य दिवस पर की जाती है।
5. CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 के तहत CRPF जैसे बलों में महानिदेशक के पद कैसे भरे जाएँगे?
- (a) केवल बल के अपने कैडर में पदोन्नति के जरिए
- (b) केवल प्रतिनियुक्ति से
- (c) आधे प्रतिनियुक्ति से और आधे पदोन्नति से
- (d) दोबारा नियुक्त किए गए सेना अधिकारियों से
उत्तर: (b) अधिनियम विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के पद सिर्फ प्रतिनियुक्ति से भरता है; 50% वाला नियम महानिरीक्षक के पदों पर लागू होता है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- भारत सरकार ने हाल ही में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (LWE) को 2026 तक खत्म कर दिया जाएगा। LWE से आप क्या समझते हैं, और लोग इससे कैसे प्रभावित होते हैं? LWE को खत्म करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं? (10 अंक, 150 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2025, GS पेपर III।
- भारत के पूर्वी हिस्से में वामपंथी उग्रवाद के निर्धारक तत्व क्या हैं? प्रभावित इलाकों में इस खतरे का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार, नागरिक प्रशासन और सुरक्षा बलों को कौन-सी रणनीति अपनानी चाहिए? (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2020, GS पेपर III।
- CRPF संघ का बल है, लेकिन पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य के विषय हैं। इसकी तैनाती इन दोनों बातों में तालमेल कैसे बिठाती है, और इससे कौन-से टकराव पैदा होते हैं, इसका परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- रैपिड एक्शन फोर्स और CoBRA जैसी विशेष इकाइयाँ दिखाती हैं कि सामान्य ड्यूटी वाला एक बल खास खतरों के हिसाब से खुद को कैसे ढालता है। चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले और CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में IPS प्रतिनियुक्ति पर चल रही बहस का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)