Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

यूपीएससी निबंध विषय 2026: 50 संभावित विषय और 2013–2025 का विश्लेषण

2013–2025 के 100 वास्तविक निबंध विषयों का विश्लेषण — 82% अब दार्शनिक हैं। विषय-वर्गवार 50 संभावित विषय, 2021–2025 के असली प्रश्न और अभ्यास कैलेंडर।

निबंध पेपर 250 अंकों का होता है और तीन घंटे में दो निबंध लिखने होते हैं — हर खंड से एक। पिछले तेरह वर्षों में पूछे गए सभी 100 विषयों को वर्गीकृत करने पर एक बात साफ़ दिखती है: 2021 से 2025 के बीच 40 में से 33 विषय दार्शनिक या अमूर्त थे, और 2025 में तो आठ के आठ। अगर आपकी तैयारी अब भी सिर्फ़ समसामयिक मुद्दों के इर्द-गिर्द है, तो आप ग़लत पेपर की तैयारी कर रहे हैं।

नीचे विषय-वर्गवार 50 संभावित यूपीएससी निबंध विषय हैं, जो इसी विश्लेषण के क्रम में रखे गए हैं — सबसे भारी वर्ग पहले। साथ में 2021 से 2025 तक के असली प्रश्न भी दिए हैं, ताकि आप अंदाज़े और तथ्य में फ़र्क़ कर सकें। कम-से-कम 20 विषयों की रूपरेखा बनाएँ और 8 पर पूर्ण निबंध लिखें।

निबंध पेपर एक नज़र में

निबंध पेपर मुख्य परीक्षा का पहला पेपर है और इसमें कोई निर्धारित पाठ्यक्रम नहीं होता। दो खंडों — खंड अ और खंड ब — में चार-चार विषय दिए जाते हैं, और हर खंड से एक निबंध लिखना अनिवार्य है। एक ही खंड से दो निबंध लिखने पर एक के शून्य अंक मिलते हैं। पूरा विवरण निबंध पेपर पैटर्न और अंकन योजना में देखा जा सकता है।

यूपीएससी निबंध पेपर की संरचना: 250 अंक, 3 घंटे, दो खंड, दो निबंध, 1000–1200 शब्द
निबंध पेपर की संरचना — दोनों खंडों से एक-एक निबंध अनिवार्य है
विवरणब्योरा
कुल अंक250
प्रति निबंध अंक125
समय3 घंटे
खंड2 (अ और ब)
प्रति खंड विषय4
लिखने हैं2 निबंध (हर खंड से एक)
शब्द-सीमा1000–1200 शब्द प्रति निबंध
माध्यमहिंदी या अंग्रेज़ी
पाठ्यक्रमकोई निर्धारित पाठ्यक्रम नहीं

2013–2025 के 100 विषय क्या बताते हैं

हमने 2013 से 2025 तक यूपीएससी मुख्य परीक्षा में पूछे गए सभी 100 निबंध विषयों को सात विषय-वर्गों में बाँटा। नतीजा एक ही दिशा में जाता है। 2013–2016 में हर तीन में से एक विषय दार्शनिक था (32%), 2017–2020 में हर दूसरा (50%), और 2021–2025 में हर पाँच में से चार (82%)। 2025 का पूरा प्रश्नपत्र अमूर्त था — एक भी सीधा नीतिगत विषय नहीं।

2013 से 2025 तक यूपीएससी निबंध विषयों में दार्शनिक विषयों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़कर 82 प्रतिशत
2021–2025 के 40 में से 33 विषय अमूर्त या दार्शनिक थे

इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि तैयारी का ज़्यादातर समय तथ्य जुटाने में नहीं, बल्कि उदाहरण और तर्क जुटाने में लगना चाहिए। ‘गंदला पानी उसे अकेला छोड़ देने से ही साफ़ होता है’ जैसे विषय पर कोई करेंट अफ़ेयर्स नोट काम नहीं आता — काम आता है वह उदाहरण-भंडार जो आपने महीनों में बनाया है।

यूपीएससी निबंध के सात विषय-वर्ग और 2013 से 2025 तक हर वर्ग से पूछे गए विषयों की संख्या
हर विषय-वर्ग का असली भार — 100 वास्तविक विषयों के आधार पर

दार्शनिक एवं अमूर्त विषय (10)

सबसे ज़्यादा समय इसी वर्ग को देना चाहिए। 2013 से 2025 तक पूछे गए 100 विषयों में से 58 इसी वर्ग से आए, और 2021 के बाद यह हिस्सा 82% तक पहुँच गया है। इन विषयों में याद रखने को कोई तथ्य नहीं होता — मौन, साहस, धैर्य, स्मृति और एकांत जैसे शब्दों को दर्शन, साहित्य, इतिहास और अपने अनुभव से जोड़कर लिखना होता है। दार्शनिक निबंध कैसे लिखें, इसका ढाँचा अलग से समझ लेना यहाँ काम आता है।

  1. मौन सत्य की जननी है
  2. साहस भय का अभाव नहीं है
  3. मेरी भाषा की सीमाएँ ही मेरी दुनिया की सीमाएँ हैं
  4. धैर्य भी एक प्रकार की क्रिया है
  5. बुद्धिमत्ता का अर्थ है — यह जानना कि किसे अनदेखा करना है
  6. बिना उद्देश्य का मन अंधेरे स्थानों में भटकता है
  7. स्वतंत्रता वह है जो आप उससे करते हैं जो आपके साथ हुआ है
  8. स्मृति आत्मा की लेखिका है
  9. एकांत वह स्थान है जहाँ हम स्वयं से मिलते हैं
  10. हम उसी से नहीं बनते जो हम पाते हैं, बल्कि उससे भी जिसे खोने को तैयार हैं

सामाजिक मुद्दे (8)

दार्शनिक विषयों के बाद यही सबसे बड़ा वर्ग है — 100 में से 13 विषय। 2023 का ‘लड़कियाँ प्रतिबंधों के बोझ तले और लड़के अपेक्षाओं के बोझ तले’ दिखाता है कि यूपीएससी सामाजिक प्रश्नों को भी अब नैतिक ढाँचे में पूछता है। जाति, जेंडर, वृद्धावस्था, मानसिक स्वास्थ्य और शहरी अकेलेपन पर जनगणना तथा NFHS के आँकड़े तैयार रखें।

  1. जाति इसलिए बनी हुई है क्योंकि अर्थशास्त्र ने उसका स्थान नहीं लिया
  2. कन्या आज भी बजट की एक पंक्ति है, नागरिक नहीं
  3. वृद्ध होता भारत: एक ऐसी समस्या जिसे हमने अभी नाम भी नहीं दिया
  4. विवाह नामक संस्था अस्वीकृत नहीं हो रही — पुनर्विचारित हो रही है
  5. नगरीय अकेलापन: एक मौन महामारी
  6. दिव्यांगजनों के लिए कल्याण: करुणा या संवैधानिक कर्तव्य?
  7. मानसिक स्वास्थ्य वस्तुतः जन-स्वास्थ्य है
  8. क्षीण होता गाँव और असंतुष्ट शहर

विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नीतिशास्त्र (8)

तकनीक से 9 विषय पूछे जा चुके हैं, पर ध्यान दें कि वे तकनीकी नहीं, नैतिक होते हैं। 2024 का ‘सोशल मीडिया युवाओं में FOMO पैदा कर रहा है’ और 2021 का ‘आत्म-खोज की प्रक्रिया अब प्रौद्योगिकी को आउटसोर्स कर दी गई है’ — दोनों में सवाल तकनीक का नहीं, मनुष्य पर उसके असर का था। एआई, निजता, डीपफेक और एल्गोरिदम पर एक-एक नैतिक तर्क तैयार रखें।

  1. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मनुष्यों की जगह नहीं लेगी; AI का उपयोग करने वाले मनुष्य उन्हें प्रतिस्थापित कर देंगे जो इसका उपयोग नहीं करते
  2. एल्गोरिदम नया प्रधान-संपादक है
  3. आनुवंशिक संपादन: ईश्वर का वह खेल जिसे भूला नहीं जा सकता
  4. अंतरिक्ष अंतिम साझी सम्पदा है; नियम कौन लिखेगा?
  5. निजता, सुविधा की पहली शहादत है
  6. डीपफेक और दृश्य-सत्य का अंत
  7. डिजिटल इंडिया की एक ग्रामीण छाया भी है
  8. प्रौद्योगिकी उन्हीं समस्याओं को सुलझाती है जिन्हें पहले स्वयं बनाती है

आर्थिक एवं विकास (8)

आर्थिक विषय 2013 से 2018 के बीच नियमित थे, पर 2020 के बाद लगभग ग़ायब हैं — 100 में से केवल 8। फिर भी इन्हें छोड़ना ठीक नहीं, क्योंकि ये किसी भी दार्शनिक निबंध में उदाहरण की तरह काम आते हैं। असमानता, रोज़गार-विहीन वृद्धि, अनौपचारिक श्रम और जनसांख्यिकीय लाभांश पर ताज़ा आँकड़े रखें।

  1. समता रहित विकास आँकड़ों में भले प्रभावशाली हो, सामाजिक रूप से ख़तरनाक है
  2. जनसांख्यिकीय लाभांश एक नीतिगत चयन है, उपहार नहीं
  3. भारत का मध्यम-आय जाल: यथार्थ या बयानबाज़ी?
  4. खेत से कारख़ाने तक: भारतीय श्रम का अधूरा प्रवास
  5. हरित विकास: विरोधाभास या अनिवार्यता?
  6. क्रिप्टोकरेंसी और मौद्रिक प्रभुसत्ता का भविष्य
  7. MSMEs भारतीय अर्थव्यवस्था का विस्मृत इंजन हैं
  8. अनौपचारिक श्रम, औपचारिक आकांक्षाएँ

शासन एवं लोकतंत्र (6)

शासन से सीधे 5 विषय ही आए हैं, और आख़िरी 2019 में — ‘पक्षपाती मीडिया भारतीय लोकतंत्र के लिए एक वास्तविक ख़तरा है’। इस वर्ग की असली उपयोगिता सहायक सामग्री की है। संघवाद, संस्थाओं का क्षरण और स्थानीय स्वशासन ऐसे उदाहरण हैं जो अमूर्त विषयों में तुरंत गहराई जोड़ देते हैं।

  1. लोकतंत्र थाल में परोसा नहीं जा सकता; उसे जीना पड़ता है
  2. संघीय ढाँचा भारत का सबसे कम आदरित नवाचार है
  3. संस्थाओं का मौन क्षरण
  4. बहुसंख्यकवाद लोकतंत्र का रोग है, उसका उपचार नहीं
  5. न्यायिक सक्रियता: संवैधानिक आवश्यकता या सीमा-उल्लंघन?
  6. स्थानीय स्वशासन संविधान का अधूरा अध्याय है

अंतर्राष्ट्रीय एवं सभ्यतागत (4)

यह सबसे कम पूछा गया वर्ग है — 100 में से केवल 4 विषय, और 2020 के बाद एक भी नहीं। इन पर पूरा निबंध लिखने का अभ्यास ज़रूरी नहीं; रूपरेखा बना लेना काफ़ी है। भारत की मृदु शक्ति, वैश्विक दक्षिण और पड़ोस-प्रथम नीति — ये तीनों किसी भी सभ्यतागत विषय में खप जाते हैं।

  1. पड़ोस पहले — पर किसी भी मूल्य पर नहीं
  2. भारत की मृदु शक्ति (Soft Power): मिथक या मांसपेशी?
  3. वैश्विक दक्षिण (Global South) बोलता तो है, पर क्या कोई सुनता है?
  4. राष्ट्र नहीं, सभ्यता: भारत का दीर्घ क्षितिज

पर्यावरण एवं संधारणीयता (6)

आँकड़ा चौंकाता है — पर्यावरण से सीधे केवल 3 विषय आए हैं। पर तीनों हाल के हैं (2018, 2022, 2024) और तीनों रूपक की तरह पूछे गए, जैसे ‘वन सभ्यताओं से पहले आते हैं और मरुस्थल उनके पीछे’। यानी पर्यावरण अब स्वतंत्र विषय नहीं, दार्शनिक विषयों तक पहुँचने का माध्यम है।

  1. वन फेफड़े नहीं हैं; वे पुस्तकालय हैं
  2. जल 21वीं सदी का तेल होगा
  3. जलवायु न्याय नया ‘गुटनिरपेक्षता’ है
  4. हिमालय एक राष्ट्र है, पृष्ठभूमि नहीं
  5. प्लास्टिक प्रदूषक बनने से पहले एक दर्शन है
  6. पुनः-वन्यीकरण (Rewilding): क्या भारत अपना खोया हुआ लौटा सकता है?

पिछले पाँच वर्षों के असली निबंध विषय (2021–2025)

ऊपर के 50 विषय संभावनाएँ हैं। नीचे वे 40 विषय हैं जो वास्तव में पूछे गए। हर विषय पर हमारा हिंदी मॉडल निबंध भी जुड़ा है — पढ़ने से पहले ख़ुद रूपरेखा बनाइए, फिर मिलाइए।

वर्षनिबंध विषयवर्ग
2021श्रेष्ठतम पद्धतियों से भी बेहतर पद्धतियाँ होती हैंदार्शनिक
2021इतिहास स्वयं को दोहराता है, पहली बार त्रासदी के रूप में, दूसरी बार प्रहसन के रूप मेंदार्शनिक
2021शोध और कुछ नहीं, ज्ञान के साथ एक अनदेखी भेंट ही तो हैदार्शनिक
2021जो हाथ पालना झुलाता है, वही संसार पर शासन करता हैसामाजिक
2021जो यथार्थ है वही विवेकसंगत है और जो विवेकसंगत है वही यथार्थ हैदार्शनिक
2021इच्छाहीनता का दर्शन काल्पनिक है, जबकि भौतिकवाद एक मृगतृष्णा हैदार्शनिक
2021मेरे प्रति तुम्हारी धारणा तुम्हारा ही प्रतिबिंब है; तुम्हारे प्रति मेरी प्रतिक्रिया मेरी अपनी जागरूकता हैदार्शनिक
2021आत्म-खोज की प्रक्रिया अब प्रौद्योगिकी को आउटसोर्स कर दी गई हैतकनीक एवं नीतिशास्त्र
2022विकल्प होने का अर्थ यह नहीं कि उनमें से कोई सही ही होदार्शनिक
2022मुस्कान ही सभी अस्पष्टताओं का चुना हुआ वाहन हैदार्शनिक
2022एक ही नदी में दो बार पैर नहीं रखा जा सकतादार्शनिक
2022छत की मरम्मत का समय वही है जब धूप खिली होदार्शनिक
2022बंदरगाह में जहाज़ सुरक्षित रहता है, पर जहाज़ इसलिए नहीं बनादार्शनिक
2022इतिहास वैज्ञानिक मनुष्य की स्वप्नदर्शी मनुष्य पर विजयों की एक शृंखला हैदार्शनिक
2022कवि संसार के अनस्वीकृत विधायक हैंदार्शनिक
2022वन आर्थिक उत्कृष्टता के सर्वोत्तम उदाहरण-अध्ययन हैंपर्यावरण
2023शिक्षा वह है जो विद्यालय में सीखी बातें भूल जाने के बाद शेष रह जाती हैदार्शनिक
2023अधिक न्याय वाले समाज को कम दान की आवश्यकता होती हैसामाजिक
2023गणित तर्क का संगीत हैदार्शनिक
2023रचनात्मकता की प्रेरणा सामान्य में असाधारण को खोजने के प्रयास से जन्म लेती हैदार्शनिक
2023लड़कियाँ प्रतिबंधों के बोझ तले और लड़के अपेक्षाओं के बोझ तलेसामाजिक
2023हर भटकने वाला खोया नहीं होतादार्शनिक
2023दूरदर्शी निर्णय अंतर्ज्ञान और तर्क के संगम पर होता हैदार्शनिक
2023चिंतन एक खेल की तरह है, यह तब तक शुरू नहीं होता जब तक कोई विरोधी दल न होदार्शनिक
2024ग़लत होने की क़ीमत कुछ न करने की क़ीमत से कम हैदार्शनिक
2024बड़े परिणाम देने वाले सभी विचार हमेशा सरल होते हैंदार्शनिक
2024चरित्र की परख करनी हो तो मनुष्य को शक्ति दे दोदार्शनिक
2024संदेह करने वाला ही सच्चा विज्ञान-पुरुष होता हैदार्शनिक
2024सोशल मीडिया, FOMO और युवा एकाकीपनतकनीक एवं नीतिशास्त्र
2024प्रसन्नता तक कोई मार्ग नहीं; प्रसन्नता ही मार्ग हैदार्शनिक
2024भविष्य के साम्राज्य मस्तिष्क के साम्राज्य होंगेदार्शनिक
2024वन सभ्यताओं से पहले आते हैं और मरुस्थल उनके पीछेपर्यावरण
2025संतोष ही स्वाभाविक संपत्ति है; विलासिता कृत्रिम निर्धनता हैदार्शनिक
2025जीवन को मंज़िल नहीं, यात्रा के रूप में देखना ही श्रेष्ठ हैदार्शनिक
2025वर्ष वह बहुत कुछ सिखाते हैं जो दिनों को कभी ज्ञात नहीं होतादार्शनिक
2025गंदला पानी उसे अकेला छोड़ देने से ही सबसे अच्छा साफ़ होता हैदार्शनिक
2025सर्वश्रेष्ठ सीख कड़वे अनुभवों से ही मिलती हैदार्शनिक
2025विचार एक संसार ढूँढ़ता है और एक संसार रचता भी हैदार्शनिक
2025युद्ध की सर्वोच्च कला शत्रु को बिना लड़े वश में करना हैदार्शनिक
2025सत्य का कोई रंग नहीं होतादार्शनिक

सबसे पहले किन विषयों पर लिखें?

अभ्यास को उसी अनुपात में बाँटिए जिस अनुपात में विषय पूछे जाते हैं। नीचे की तालिका 20 रूपरेखाओं और 8 पूर्ण निबंधों को पिछले तेरह वर्षों के भार के हिसाब से बाँटती है — यानी आधे से ज़्यादा मेहनत दार्शनिक विषयों पर।

विषय-वर्ग2013–2025 में पूछे गएयहाँ दिए गएरूपरेखाएँपूर्ण निबंध
दार्शनिक एवं अमूर्त581084
सामाजिक मुद्दे13842
विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नीतिशास्त्र9831
आर्थिक एवं विकास8821
शासन एवं लोकतंत्र5610
अंतर्राष्ट्रीय एवं सभ्यतागत4410
पर्यावरण एवं संधारणीयता3610
कुल10050208

चार महीने का तैयारी कैलेंडर

यूपीएससी निबंध की चार महीने की तैयारी योजना: पढ़ना, रूपरेखा, समयबद्ध लेखन और समीक्षा
चार महीने का अभ्यास क्रम — लक्ष्य 20 रूपरेखाएँ और 8 पूर्ण निबंध

लिखना शुरू करने से पहले निबंध लेखन की 15 आम ग़लतियाँ एक बार देख लेना बेहतर है — इनमें से ज़्यादातर पहले ड्राफ़्ट में ही पकड़ी जा सकती हैं।

सामान्य प्रश्न

निबंध पेपर कितने अंक का होता है?

निबंध पेपर 250 अंकों का होता है। इसमें दो निबंध लिखने होते हैं और हर निबंध 125 अंकों का होता है। पेपर की अवधि तीन घंटे है, यानी प्रति निबंध लगभग 90 मिनट।

एक निबंध कितने शब्दों का लिखना चाहिए?

प्रश्नपत्र पर दिया निर्देश 1000 से 1200 शब्द का है। 1200 शब्द सीमा है, लक्ष्य नहीं — 1050 शब्दों में कसा हुआ निबंध अक्सर 1200 शब्दों के भरे-भरे निबंध से बेहतर अंक लाता है।

क्या निबंध हिंदी में लिख सकते हैं?

हाँ। निबंध हिंदी या अंग्रेज़ी, दोनों में लिखा जा सकता है। माध्यम आप डीएएफ़ भरते समय चुनते हैं और वही पूरी मुख्य परीक्षा पर लागू होता है। हिंदी माध्यम से निबंध में अंक कम मिलने का कोई प्रमाण नहीं है।

मुझे कितने विषयों का अभ्यास करना चाहिए?

20 विषयों की रूपरेखा बनाइए और उनमें से 8 पर पूर्ण निबंध लिखिए। संख्या बढ़ाने से ज़्यादा फ़र्क़ रूपरेखा की गुणवत्ता से पड़ता है — हर रूपरेखा में छह आयाम और दो ठोस उदाहरण होने चाहिए।

क्या दार्शनिक विषय सचमुच पूछे जाते हैं?

2013 से 2025 तक पूछे गए 100 विषयों में से 58 दार्शनिक या अमूर्त थे। 2021 के बाद यह अनुपात 82% हो गया और 2025 में तो आठों विषय अमूर्त थे। यह अब अपवाद नहीं, पेपर की मुख्य प्रवृत्ति है।

क्या पिछले वर्षों के विषय दोबारा पूछे जाते हैं?

हू-ब-हू वही विषय कभी नहीं दोहराया गया। पर विषयवर्ग हर तीन से पाँच वर्षों में लौटते हैं — जैसे वन 2022 और 2024 दोनों में आए, अलग-अलग रूपकों के साथ। इसीलिए विषय रटने के बजाय वर्ग समझना काम आता है।

परीक्षा-दिवस पर दो विषयों में से किसे चुनूँ?

उसे चुनिए जिसके लिए आपके पास अलग-अलग क्षेत्रों से छह या उससे ज़्यादा ठोस उदाहरण हैं — न कि वह जो आपको सबसे गहरा लगे। गहराई उदाहरणों से आती है, विषय की कठिनाई से नहीं।

क्या मुझे निबंध रटने चाहिए?

नहीं। रटकर लिखे गए निबंध यांत्रिक लगते हैं और परीक्षक उन्हें पहचान लेते हैं। याद रखने लायक़ चीज़ें दो हैं — ढाँचे (फ्रेमवर्क) और उदाहरण। बाक़ी परीक्षा-कक्ष में सोचकर लिखना होता है।

क्या निबंध का कोई निर्धारित पाठ्यक्रम है?

नहीं, यूपीएससी निबंध पेपर के लिए कोई पाठ्यक्रम अधिसूचित नहीं करता। निर्देश केवल इतना है कि विषय के निकट रहें, विचारों को क्रम में रखें और संक्षेप में लिखें। प्रभावी और सटीक अभिव्यक्ति के लिए अंक दिए जाते हैं।