UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

यूपीएससी निबंध के लिए 100+ प्रसिद्ध भारतीय उद्धरण

यूपीएससी निबंध तैयारी के लिए 100+ भारतीय उद्धरणों का संग्रह — गांधी, आंबेडकर, टैगोर, विवेकानंद, कलाम, बोस — विषयवार क्रम में।

100+ famous Indian quotes for UPSC essays — theme sorted

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उद्धरण यूपीएससी निबंध के विराम-चिह्न हैं। किसी भारतीय विचारक की सटीक पंक्ति एक साधारण निबंध को यादगार बना देती है। नीचे 100+ भारतीय उद्धरणों का चुनिंदा संग्रह है, जो विषयानुसार क्रमित हैं और जिनका आरोपण (attribution) दिया गया है। 40–50 कंठस्थ कीजिए; प्रति निबंध 3–5 का प्रयोग कीजिए।

1. स्वाधीनता, स्वराज, साहस

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।

— सुभाष चंद्र बोस

यदि स्वाधीनता में ग़लती करने की स्वतंत्रता शामिल न हो, तो वह स्वाधीनता पाने योग्य नहीं।

— महात्मा गांधी

स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा।

— बाल गंगाधर तिलक

स्वयं को पाने का सर्वोत्तम उपाय है दूसरों की सेवा में स्वयं को खो देना।

— महात्मा गांधी

उठो, जागो, और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।

— स्वामी विवेकानंद

वे मेरे शरीर को यातना दे सकते हैं, हड्डियाँ तोड़ सकते हैं, मुझे मार भी सकते हैं। तब उन्हें मेरा शव मिलेगा, मेरी आज्ञाकारिता नहीं।

— महात्मा गांधी

इंकलाब ज़िंदाबाद — क्रांति बम की नहीं, विचार की है।

— भगत सिंह

मैं तूफ़ानों से नहीं डरता, क्योंकि मैं अपनी नाव खेना सीख रहा हूँ।

— लुइसा मे अल्कॉट (भारतीय निबंधों में प्रायः उद्धृत)

2. न्याय, समानता, जाति

यूपीएससी निबंध के आरंभ के लिए पाँच भारतीय उद्धरण
निबंध के आरंभ के लिए पाँच मुख्य भारतीय उद्धरण

मैं किसी समुदाय की प्रगति उस सीमा से आँकता हूँ जिस सीमा तक उसकी स्त्रियों ने प्रगति की है।

— बी. आर. आंबेडकर

जाति केवल श्रम का विभाजन नहीं है; यह श्रमिकों का विभाजन है।

— बी. आर. आंबेडकर

मन का विकास मानव अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।

— बी. आर. आंबेडकर

शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।

— बी. आर. आंबेडकर

कानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है जब तक वह जनता की इच्छा का अभिव्यक्ति हो।

— बी. आर. आंबेडकर

अंतःकरण के मामलों में बहुमत के कानून का कोई स्थान नहीं।

— महात्मा गांधी

3. सत्य, अहिंसा, नैतिक आचरण

आँख के बदले आँख पूरी दुनिया को अंधा कर देती है।

— महात्मा गांधी

सत्य कभी किसी न्यायपूर्ण कारण को क्षति नहीं पहुँचाता।

— महात्मा गांधी

दुर्बल कभी क्षमा नहीं कर सकते। क्षमा बलवानों का गुण है।

— महात्मा गांधी

अहिंसा मानवता के पास उपलब्ध सबसे बड़ी शक्ति है।

— महात्मा गांधी

जो परिवर्तन आप दुनिया में देखना चाहते हैं, वह स्वयं बनिए।

— महात्मा गांधी

4. शिक्षा और युवा

शिक्षा वह सबसे शक्तिशाली अस्त्र है जिससे आप दुनिया बदल सकते हैं।

— नेल्सन मंडेला (भारतीय निबंधों में स्थापित)

वास्तविक शिक्षा मानव की गरिमा को बढ़ाती है।

— बी. आर. आंबेडकर

बुद्धिमत्ता की असली पहचान ज्ञान नहीं, कल्पनाशीलता है।

— अल्बर्ट आइंस्टीन (टैगोर के मित्र)

सफलता की कहानियाँ मत पढ़िए, उनसे केवल संदेश मिलेगा। असफलता की कहानियाँ पढ़िए, उनसे सफल होने के सूत्र मिलेंगे।

— ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

सपना देखिए, सपना देखिए, सपना देखिए। सपने विचार बनते हैं और विचार कर्म में परिणत होते हैं।

— ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

यदि कोई देश भ्रष्टाचार-मुक्त और सुंदर मनों का राष्ट्र बनना चाहता है, तो मेरी दृढ़ मान्यता है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य अंतर ला सकते हैं — पिता, माता और शिक्षक।

— ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते, पर अपनी आदतें बदल सकते हैं, और निश्चित ही आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देंगी।

— ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

5. स्त्री, परिवार, समाज

क्या स्त्री का घर उसके पति का घर होता है? नहीं, उसका घर वहाँ है जहाँ उसका मन मुक्त है।

— रवींद्रनाथ टैगोर

कोई भी राष्ट्र तब तक गौरव की ऊँचाई तक नहीं पहुँच सकता जब तक आपकी स्त्रियाँ आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर न खड़ी हों।

— मुहम्मद अली जिन्ना (विभाजन-पूर्व भारत)

जागो, हे भारत! तुम्हारी बेटियाँ तुम्हें राह दिखाएँगी।

— सरोजिनी नायडू

साहस मानवीय गुणों में प्रथम है, क्योंकि यही वह गुण है जो शेष सभी गुणों की गारंटी देता है।

— अरस्तू (सरोजिनी नायडू प्रायः उद्धृत करती थीं)

6. प्रकृति, पर्यावरण, ब्रह्मांड

धरती के पास उनके लिए संगीत है जो सुनना जानते हैं।

— रवींद्रनाथ टैगोर

अपने जीवन को काल के किनारों पर यों हल्के से थिरकने दो जैसे पत्ते की नोक पर ओस।

— रवींद्रनाथ टैगोर

वृक्ष पृथ्वी का सुनते हुए आकाश से बात करने का निरंतर प्रयास हैं।

— रवींद्रनाथ टैगोर

शांति लाने के लिए हमें बंदूकों और बमों की नहीं, प्रेम और करुणा की आवश्यकता है।

— मदर टेरेसा

7. प्रज्ञा, चिंतन, आंतरिक जीवन

सौम्य भाव से भी आप दुनिया को हिला सकते हैं।

— महात्मा गांधी

मन ही सब कुछ है। आप जो सोचते हैं, वही बन जाते हैं।

— बुद्ध

तुम्हें कर्म करने का अधिकार है, फल का नहीं।

— भगवद्गीता

जहाँ मन भय-रहित हो और मस्तक ऊँचा उठा हो।

— रवींद्रनाथ टैगोर

कामनाएँ अशांति लाती हैं; त्याग शांति देता है।

— भगवद्गीता

मैं सोया और स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है। मैं जागा और देखा कि जीवन सेवा है। मैंने कर्म किया, और देखो — सेवा ही आनंद थी।

— रवींद्रनाथ टैगोर

8. शासन, लोकतंत्र, विधि

यूपीएससी निबंध में उद्धरणों के प्रभावी उपयोग के चार नियम
चार नियम जो उद्धरणों को ‘चिपका हुआ’ नहीं लगने देते

संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज़ नहीं; वह जीवन का वाहन है, और उसकी आत्मा सदैव युग की आत्मा होती है।

— बी. आर. आंबेडकर

लोकतंत्र सरकार का रूप नहीं, सामाजिक संगठन का रूप है।

— बी. आर. आंबेडकर

किसी राष्ट्र की महानता की नींव उसके लोगों के घरों में होती है।

— गोपाल कृष्ण गोखले

किसी राष्ट्र की संस्कृति उसके लोगों के हृदयों और आत्मा में वास करती है।

— महात्मा गांधी

9. विज्ञान, प्रगति, आधुनिकता

विज्ञान मानवता के लिए एक सुंदर उपहार है; हमें इसे विकृत नहीं करना चाहिए।

— ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

मनुष्य को कठिनाइयों की आवश्यकता है; वे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हैं।

— सी. जी. युंग (होमी भाभा द्वारा उद्धृत)

हम सभी में समान प्रतिभा नहीं होती, परंतु अपनी प्रतिभा विकसित करने के समान अवसर अवश्य होते हैं।

— ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

10. सभ्यता, संस्कृति, भारत

भारत मानव जाति का पालना है, मानव वाणी का जन्मस्थान है, इतिहास की माँ है।

— मार्क ट्वेन (भारतीय निबंधकारों द्वारा अपनाया गया)

भारत तब जागेगा जब उसका हर पुत्र और पुत्री जागेगा।

— स्वामी विवेकानंद

हमें फटी-टूटी स्वाधीनता से ही संतोष करना पड़ेगा, पर हम उसे अर्जित कर चुके होंगे।

— जवाहरलाल नेहरू

मध्यरात्रि के उस क्षण में, जब विश्व सो रहा होगा, भारत जीवन और स्वाधीनता के लिए जाग उठेगा।

— जवाहरलाल नेहरू

शक्ति ही जीवन है, दुर्बलता ही मृत्यु।

— स्वामी विवेकानंद

आप ईश्वर में तब तक विश्वास नहीं कर सकते जब तक आप स्वयं पर विश्वास न करें।

— स्वामी विवेकानंद

इन उद्धरणों का प्रयोग कैसे करें

  • ऐसा उद्धरण से आरंभ करें जो संदर्भ गढ़े, सारांश न हो
  • आयामों के बीच संधि-बिंदु के रूप में एक उद्धरण मध्य में रखें
  • निबंध का समापन ऐसे उद्धरण से करें जो प्रश्न से प्रतिध्वनित हो
  • एक ही अनुच्छेद में दो उद्धरण कभी एक साथ न रखें
  • आरोपण सदा सही दीजिए; ग़लत श्रेय विश्वसनीयता की कीमत पर आता है

अपना स्वयं का संग्रह बनाइए

इन 10 विषयों में फैले 60 उद्धरणों का 2-पृष्ठ का Google Doc तैयार रखिए। साप्ताहिक रूप से दुहराइए। परीक्षा के दिन आपका अवचेतन मन सही अनुच्छेद में सही पंक्ति निकाल लेगा — बस यही एक उपाय कारगर है।

इन उद्धरणों के पीछे की किताबें

श्रीमद्भगवद्गीता, गीता प्रेस, हिंदी अनुवाद सहित। जो संस्करण हर घर में मिलता है।

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा, महात्मा गांधी (नवजीवन, हिंदी)।

जाति का विनाश (Annihilation of Caste), डॉ. भीमराव आंबेडकर (हिंदी)।

सामान्य प्रश्न

मुझे कितने उद्धरण याद करने चाहिए?

10 विषयों में फैले 40–50। प्रति निबंध 3–5 का प्रयोग कीजिए।

क्या किसी उद्धरण को अपने शब्दों में कहना ठीक है?

नहीं। या तो सटीक शब्दों का प्रयोग करें या उद्धरण-चिह्न हटाकर विचार का श्रेय संबंधित व्यक्ति को दें।

क्या भारतीय उद्धरण विदेशी से अधिक पसंद किए जाते हैं?

दोनों का मिश्रण रखें। दो भारतीय, दो वैश्विक — यह अच्छा संतुलन है।

पहला उद्धरण कहाँ आना चाहिए?

या तो प्रारंभिक अनुच्छेद में या स्वयं ‘हुक’ के रूप में।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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