अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice — ICJ) संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। इसकी स्थापना 1945 में UN चार्टर के तहत की गई और यह 1946 से कार्यरत है। यह हेग (नीदरलैंड्स) में स्थित है।
संरचना
ICJ में 15 न्यायाधीश होते हैं जो संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा निर्वाचित होते हैं। कार्यकाल 9 वर्ष (नवीकरणीय)। पाँच वर्षों में एक-तिहाई न्यायाधीश चुने जाते हैं। कोई दो न्यायाधीश एक ही राष्ट्र के नहीं हो सकते।
क्षेत्राधिकार
1. विवादास्पद क्षेत्राधिकार (Contentious Jurisdiction)
केवल राज्यों के बीच विवादों में निर्णय। दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक। निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होते हैं — परंतु UN सुरक्षा परिषद ही प्रवर्तन कर सकती है।
2. सलाहकारी क्षेत्राधिकार (Advisory Jurisdiction)
UN अंगों और विशेष एजेंसियों के अनुरोध पर कानूनी प्रश्नों पर गैर-बाध्यकारी राय।
भारत और ICJ के प्रमुख मामले
कुलभूषण जाधव मामला (2017-2019)
पाकिस्तान ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को “जासूस” कहकर फाँसी की सज़ा सुनाई। भारत ने ICJ में अपील की। ICJ ने 2019 में भारत के पक्ष में फैसला दिया — पाकिस्तान को विएना कन्वेंशन के तहत कांसुलर पहुँच देने और सज़ा की समीक्षा करने का आदेश दिया।
निकारागुआ बनाम कोलंबिया (सांकेतिक)
ICJ में समुद्री विवादों के निपटारे का उदाहरण — भारत के लिए हिंद महासागर में EEZ विवादों के संदर्भ में प्रासंगिक।
ICJ की सीमाएँ
- कोई स्वतः क्षेत्राधिकार नहीं — दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक
- निर्णय का प्रवर्तन कठिन — P5 देश सुरक्षा परिषद में वीटो कर सकते हैं
- व्यक्तियों, कंपनियों पर अधिकार क्षेत्र नहीं — केवल राज्य
ICJ बनाम ICC
ICJ राज्यों के बीच विवाद सुलझाता है। ICC (International Criminal Court) व्यक्तियों के अपराधों — नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध — की सुनवाई करती है। भारत ICC का सदस्य नहीं है।
यूपीएससी की दृष्टि से
ICJ GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ) के लिए महत्त्वपूर्ण है। जाधव मामले को विस्तार से समझें। ICJ और ICC का अंतर, क्षेत्राधिकार और सीमाएँ परीक्षा में पूछे जाते हैं।