भारत सरकार ने 2024 में आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक प्रस्तुत किया। यह मूल आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में संशोधन करता है। 2005 से अब तक आपदा परिदृश्य काफी बदला है — जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और COVID-19 ने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं।
प्रमुख संशोधन
- शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UDMA) — बड़े शहरों में अलग आपदा प्रबंधन ढाँचा।
- राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) को वैधानिक दर्जा — पहले यह अनौपचारिक थी।
- आपदा डेटाबेस — आपदाओं का केंद्रीकृत डेटाबेस।
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की भूमिका स्पष्ट।
- आपदा प्रबंधन योजनाओं का अनिवार्य पुनरीक्षण।
2005 के मूल अधिनियम की संरचना
- NDMA (National Disaster Management Authority) — राष्ट्रीय स्तर।
- SDMA (State Disaster Management Authority) — राज्य स्तर।
- DDMA (District Disaster Management Authority) — जिला स्तर।
- NDRF (National Disaster Response Force)।
- SDRF (State Disaster Response Force)।
संशोधन की आवश्यकता क्यों?
- शहरी बाढ़ (चेन्नई 2015, मुंबई 2005) जैसी घटनाओं से सीख।
- COVID-19 — स्वास्थ्य आपदा प्रबंधन में अनुभव।
- जलवायु परिवर्तन से बढ़ती आपदाओं की आवृत्ति।
- समन्वय में सुधार की आवश्यकता।
आलोचनाएँ
- केंद्रीकरण की प्रवृत्ति — राज्यों की स्वायत्तता पर प्रश्न।
- स्थानीय निकायों की भूमिका पर्याप्त नहीं।
- सामुदायिक भागीदारी पर ज़ोर कम।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS III में आपदा प्रबंधन एक महत्त्वपूर्ण विषय है। 2005 के मूल अधिनियम, NDMA, NDRF और 2024 के संशोधनों को जानना आवश्यक है।