आपदा प्रबंधन के लिए पर्याप्त वित्तपोषण अनिवार्य है। भारत में आपदा वित्तपोषण का एक बहुस्तरीय ढाँचा है जिसमें केंद्र और राज्य दोनों स्तर शामिल हैं। यूपीएससी के लिए NDRF, SDRF और NDMF के बीच अंतर और उनकी कार्यप्रणाली समझना महत्त्वपूर्ण है।
SDRF — राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि
SDRF (State Disaster Response Fund) राज्यों के पास उपलब्ध प्राथमिक निधि है। इसका गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत हुआ। सामान्य श्रेणी के राज्यों के लिए केंद्र-राज्य अनुपात 75:25 है और पहाड़ी/विशेष राज्यों के लिए 90:10।
खर्च की पात्रता
- खोज और बचाव अभियान
- राहत शिविर और तत्काल राहत
- घर, फसल, पशुधन की क्षति पर मुआवज़ा
- स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल
NDRF — राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि
NDRF (National Disaster Response Fund) उन स्थितियों में उपयोग होती है जब आपदा का पैमाना SDRF की क्षमता से अधिक हो। केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित। वित्त मंत्रालय द्वारा केंद्रीय बजट से आवंटित।
NDMF — राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण निधि
NDMF (National Disaster Mitigation Fund) — DM Act 2005 में प्रावधान था परंतु लंबे समय तक सक्रिय नहीं था। यह आपदा-पूर्व शमन (Mitigation) और तैयारी के लिए है — जैसे बाढ़ सुरक्षा, भूकंपरोधी भवन, पूर्व चेतावनी प्रणाली।
15वें वित्त आयोग की सिफारिशें
15वें वित्त आयोग (2021-26) ने आपदा प्रबंधन के लिए ₹1.60 लाख करोड़ आवंटित किए। प्रमुख सिफारिशें:
- SDRF आवंटन बढ़ाना
- शहरी आपदाओं को SDRF में शामिल करना
- NDMF को सक्रिय करना
- COVID-19 स्वास्थ्य आपातकाल को भी कवर करना
आपदा बीमा
भारत में Sovereign Catastrophe Risk Pool की आवश्यकता पर चर्चा है। पड़ोसी देश जैसे फिलीपींस में ऐसी व्यवस्था है। कृषि बीमा (PMFBY) इसी दिशा में एक कदम है।
यूपीएससी की दृष्टि से
NDRF/SDRF/NDMF का अंतर और 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें परीक्षा में पूछे जाते हैं। आपदा वित्तपोषण को आपदा प्रबंधन के समग्र ढाँचे के साथ समझें।