चक्रवात (Cyclone) उष्णकटिबंधीय महासागरों में विकसित होने वाला एक शक्तिशाली निम्न दाब तंत्र है जो तेज हवाओं, भारी वर्षा और तटीय विनाश का कारण बनता है। भारत विश्व के सबसे अधिक चक्रवात-प्रभावित देशों में से एक है।
चक्रवात निर्माण की शर्तें
- समुद्री तापमान: 26.5°C से अधिक।
- कोरिओलिस बल: भूमध्य रेखा के 5° पर्याप्त।
- वातावरणीय अस्थिरता और निम्न विंड शियर।
- उच्च सापेक्ष आर्द्रता।
चक्रवात की संरचना
- नेत्र (Eye): केंद्र में शांत, स्वच्छ क्षेत्र — कम दाब।
- नेत्र-दीवार (Eyewall): सबसे तेज हवाएँ और भारी वर्षा।
- बाहरी बैंड: वर्षा और तूफान।
भारत में चक्रवात की प्रवृत्ति
- बंगाल की खाड़ी और अरब सागर — दोनों ओर से।
- ओडिशा, आंध्र, तमिलनाडु, गुजरात सबसे प्रभावित।
- मानसून-पूर्व (अप्रैल-मई) और मानसून-पश्चात (अक्टूबर-नवंबर) में अधिक।
नामकरण प्रक्रिया
- WMO (World Meteorological Organisation) के क्षेत्रीय समूह।
- हिंद महासागर: RSMC New Delhi (IMD) नाम तय करती है।
- 13 देश — 169 नामों की सूची।
चक्रवात प्रबंधन
- IMD: पूर्व चेतावनी — 5 दिन पहले।
- NDMA: राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण।
- ODRAF, NDRF: बचाव दल।
- मैंग्रोव वन — प्राकृतिक सुरक्षा दीवार।
जलवायु परिवर्तन और चक्रवात
- समुद्री तापमान वृद्धि से चक्रवातों की तीव्रता बढ़ रही है।
- अरब सागर में चक्रवातों की आवृत्ति बढ़ी।
- Rapid Intensification की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- 2024: चक्रवात Dana (ओडिशा) और चक्रवात Fengal (तमिलनाडु)।
- NDMA: चक्रवात आश्रय और तटीय सुरक्षा में बड़ा निवेश।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-I: भूगोल — उष्णकटिबंधीय चक्रवात।
- GS-III: आपदा प्रबंधन।
- प्रारंभिक: Eye, Eyewall; नामकरण (IMD-RSMC)।
- मुख्य: “भारत में चक्रवात प्रबंधन में प्रगति और चुनौतियाँ।”
भारत ने चक्रवात प्रबंधन में उल्लेखनीय प्रगति की है — Odisha model को विश्व का आदर्श माना जाता है। परंतु जलवायु परिवर्तन से बढ़ती चक्रवात तीव्रता के सामने पूर्व चेतावनी, निकासी और तटीय बुनियादी ढाँचे में और निवेश जरूरी है।