भारत ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों की दिशा में परमाणु ऊर्जा को एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ मानता है। डॉ. होमी भाभा द्वारा कल्पित तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम भारत की ऊर्जा रणनीति का केंद्र है।
तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम
चरण 1: दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR)
इस चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग होता है। यह भारत के घरेलू यूरेनियम भंडार पर निर्भर है। प्रयुक्त ईंधन से प्लूटोनियम निकाला जाता है जो दूसरे चरण का ईंधन बनता है।
चरण 2: द्रुत प्रजनन रिएक्टर (FBR)
इस चरण में प्लूटोनियम और थोरियम का उपयोग होता है। थोरियम से यूरेनियम-233 उत्पन्न होता है जो तीसरे चरण का ईंधन है। Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) कलपक्कम में स्थापित।
चरण 3: उन्नत परमाणु ऊर्जा प्रणाली
यूरेनियम-233 और थोरियम चक्र पर आधारित। भारत के विशाल थोरियम भंडार (विश्व का ~30%) का पूर्ण उपयोग। दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता का लक्ष्य।
भारत के प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र
| संयंत्र | स्थान | राज्य |
|---|---|---|
| तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र | तारापुर | महाराष्ट्र |
| राजस्थान परमाणु ऊर्जा केंद्र | रावतभाटा | राजस्थान |
| मद्रास परमाणु ऊर्जा केंद्र | कलपक्कम | तमिलनाडु |
| नरौरा परमाणु ऊर्जा केंद्र | नरौरा | उत्तर प्रदेश |
| काकरापार परमाणु ऊर्जा केंद्र | काकरापार | गुजरात |
| कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र | कुडनकुलम | तमिलनाडु |
परमाणु ऊर्जा के लाभ
- कम कार्बन उत्सर्जन — जलवायु लक्ष्यों के अनुकूल।
- उच्च क्षमता उपयोग (Capacity Factor ~90%)।
- भूमि उपयोग सौर/पवन से बहुत कम।
- आधार-भार विद्युत (Baseload Power) की निरंतर आपूर्ति।
चुनौतियाँ
- उच्च प्रारंभिक पूंजी लागत।
- परमाणु कचरे का सुरक्षित निपटान।
- परमाणु दुर्घटना का भय — फुकुशिमा, चेर्नोबिल।
- स्थानीय जनता का विरोध (कुडनकुलम आंदोलन)।
- परमाणु दायित्व अधिनियम 2010 के कारण विदेशी निवेश कम।
नीतिगत पहल
- 2008 का भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (Civil Nuclear Deal)।
- परमाणु ऊर्जा को 2070 तक नेट-ज़ीरो रणनीति का हिस्सा बनाना।
- लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) पर शोध।
यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
- तीन चरण: PHWR → FBR → थोरियम चक्र।
- भारत के पास विश्व का ~30% थोरियम भंडार।
- PFBR: कलपक्कम; NPCIL: परिचालन संस्था।
- 2008 परमाणु समझौता: NSG छूट।
- चुनौती: दायित्व कानून, जनविरोध।
सामान्य प्रश्न
भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम क्या हैं?
चरण 1 में PHWR से प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग, चरण 2 में प्लूटोनियम-आधारित FBR, और चरण 3 में थोरियम-यूरेनियम-233 चक्र — यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता की रणनीति है।
भारत के परमाणु ऊर्जा की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
उच्च पूंजी लागत, परमाणु कचरा, दुर्घटना का भय, जनविरोध और 2010 का परमाणु दायित्व अधिनियम जो विदेशी निवेश को सीमित करता है।