UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत में सौर ऊर्जा: क्षमता, PV अपशिष्ट और यूपीएससी नोट्स (यूपीएससी पर्यावरण)

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता, राष्ट्रीय सौर मिशन, PV अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ और यूपीएससी पर्यावरण तथा GS III के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु।

Solar Energy in India: Potential, PV Waste and UPSC Notes (UPSC Environment) — UPSC featured image

भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। 300 से अधिक धूप के दिनों और विशाल भूमि क्षेत्र के साथ, भारत की सौर क्षमता 5,000 ट्रिलियन kWh प्रति वर्ष आंकी गई है। यह नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की नेट-ज़ीरो (Net-Zero) प्रतिबद्धताओं का केंद्रीय स्तंभ है।

भारत की सौर ऊर्जा यात्रा

राष्ट्रीय सौर मिशन (NSM)

2010 में शुरू की गई राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission) जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (JNNSM) के नाम से भी जानी जाती है। इसका लक्ष्य 2022 तक 100 GW सौर क्षमता स्थापित करना था। भारत ने 2023 तक 70 GW से अधिक सौर क्षमता स्थापित कर ली।

2030 के लक्ष्य

भारत ने COP26 में 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 2030 तक 50% ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने का वादा किया है। 2070 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य है।

सौर ऊर्जा के प्रकार

फोटोवोल्टिक (PV) प्रणाली

सौर पैनलों से सीधे बिजली उत्पादन। आवासीय, वाणिज्यिक और उपयोगिता-स्तर (Utility-Scale) पर उपयोग। भारत में यह सर्वाधिक व्यापक प्रकार है।

केंद्रित सौर ऊर्जा (CSP)

दर्पणों से सूर्य के प्रकाश को एकत्र कर भाप उत्पन्न करना और टर्बाइन चलाना। राजस्थान में कुछ परियोजनाएँ हैं।

प्रमुख परियोजनाएँ

  • भाड़ला सौर पार्क (Bhadla Solar Park), राजस्थान: 2,245 MW — विश्व का सबसे बड़ा सौर पार्क
  • पावागड़ा सौर पार्क, कर्नाटक: 2,050 MW
  • PM-KUSUM योजना: किसानों के लिए सौर पंप और कृषि भूमि पर सौर पैनल
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत की पहल, 2015 में स्थापित

PV अपशिष्ट की चुनौती

सौर पैनलों की औसत आयु 25-30 वर्ष है। 2030 के दशक तक भारत में भारी मात्रा में पुराने सौर पैनल अपशिष्ट बनेंगे। इनमें सीसा, कैडमियम और सेलेनियम जैसे विषैले पदार्थ होते हैं।

भारत में अभी PV अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कोई समर्पित नीति नहीं है। ई-वेस्ट नियमों के तहत कुछ व्यवस्था है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं।

चुनौतियाँ

  • भूमि अधिग्रहण विवाद
  • चीन पर सौर सेल और मॉड्यूल आयात निर्भरता
  • ग्रिड एकीकरण और भंडारण (Storage) की चुनौती
  • जल और पारिस्थितिकी पर बड़े सौर फार्मों का प्रभाव

यूपीएससी की दृष्टि से

सौर ऊर्जा GS-III (पर्यावरण, ऊर्जा सुरक्षा), GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध — ISA) और GS-I (भूगोल — विकिरण) तीनों के लिए महत्त्वपूर्ण है। 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य के संदर्भ में परीक्षा में इसका महत्त्व बढ़ रहा है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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