भारत में सूखा (Drought) एक आवर्ती और बहुआयामी आपदा है। देश के ~68% भौगोलिक क्षेत्र सूखे के खतरे में हैं। सूखा न केवल कृषि बल्कि जल सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित करता है।
सूखे के प्रकार
- मौसमी सूखा (Meteorological): वर्षा सामान्य से 25%+ कम।
- जल विज्ञान सूखा (Hydrological): नदी-झील-भूजल में कमी।
- कृषि सूखा (Agricultural): मृदा नमी कम — फसल क्षति।
- सामाजिक-आर्थिक सूखा: माँग-आपूर्ति असंतुलन।
भारत में सूखे के कारण
- मानसून की अनिश्चितता और El Niño।
- भूजल का अत्यधिक दोहन।
- वनों की कटाई।
- जलवायु परिवर्तन — तापमान वृद्धि, अनियमित वर्षा।
सूखे के प्रभाव
- कृषि: फसल नुकसान, किसान संकट।
- जल संकट: पेयजल की कमी।
- पलायन: ग्रामीण से शहरी।
- आर्थिक: GDP पर असर; बजट पर दबाव।
सूखा प्रबंधन ढाँचा
NDM Framework (2016)
- जिला-स्तर पर सूखा घोषणा का मानक।
- राहत: SDRF (State Disaster Relief Fund) और NDRF।
- MGNREGS — रोजगार गारंटी।
दीर्घकालिक उपाय
- PMKSY — प्रत्येक खेत में जल।
- अटल भूजल योजना — भूजल प्रबंधन।
- सूखा-प्रतिरोधी किस्में — ICAR।
- PMFBY — फसल बीमा।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- 2023: El Niño के कारण दक्षिण और पश्चिम भारत में सूखा।
- IMD ने 2025 में सामान्य मानसून का पूर्वानुमान दिया।
- NICRA के तहत 151 जलवायु-संवेदनशील जिलों में विशेष योजनाएँ।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-III: आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, कृषि।
- प्रारंभिक: सूखे के प्रकार, NDRF-SDRF, PMKSY।
- मुख्य: “भारत में सूखे के कारण और प्रबंधन रणनीति।”
सूखा प्रबंधन में तत्काल राहत और दीर्घकालिक जलवायु अनुकूलन दोनों जरूरी हैं। PMKSY, PMFBY, NICRA और जल संरक्षण अभियान — सही रास्ते हैं, क्रियान्वयन की गति बढ़ानी होगी।