UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत-UK रिश्ते: CETA, विजन 2035 और प्रवास का सवाल

CETA जुलाई 2026 में लागू हुआ और 99 प्रतिशत भारतीय सामान को ब्रिटेन में पहुंच मिली। जानिए दोहरा अंशदान समझौता, विजन 2035, जेट इंजन तकनीक और प्रवास की असली अड़चन।

Westminster and the Thames in London

भारत-UK व्यापार समझौते के तहत 99 प्रतिशत भारतीय सामान को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त या घटे हुए शुल्क पर पहुंच मिलती है, जबकि ब्रिटिश सामान को भारत में यही सुविधा 90 प्रतिशत पर मिलती है। यह नौ अंक का फर्क भारत-UK रिश्तों का सबसे बताने वाला आंकड़ा है, क्योंकि यह दिखाता है कि ब्रेक्जिट के बाद का ब्रिटेन इस सौदे का भारत से ज्यादा जरूरतमंद था, और उसने उसी हिसाब से कीमत चुकाई।

CETA जुलाई 2026 में लागू हुआ और उम्मीद है कि लंबी अवधि में यह द्विपक्षीय व्यापार को करीब 25.5 अरब पाउंड बढ़ा देगा।

रिश्ते की विरासत

भारत और UK का रिश्ता औपनिवेशिक इतिहास, राष्ट्रमंडल के संबंध, संसदीय लोकतंत्र, अंग्रेजी भाषा, कानूनी परंपराओं, प्रवास, शिक्षा और व्यापार से गढ़ा गया है। यह विरासत जितनी पूंजी है, लगभग उतनी ही उलझन भी।

ब्रेक्जिट के बाद UK ने दुनिया में ज्यादा स्वतंत्र भूमिका तलाशी। इधर भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था, तकनीक का केंद्र और हिंद-प्रशांत का खिलाड़ी बनकर उभरा। 2021 में रिश्ते को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला, जो जानबूझकर व्यावहारिक रखा गया और साझा इतिहास के बजाय व्यापार, तकनीक, रक्षा, जलवायु, शिक्षा, आवाजाही और प्रवासी समुदाय पर केंद्रित है।

भारत के लिए: बाजार पहुंच, वित्तीय सेवाएं, शिक्षा, तकनीक, रक्षा सहयोग, हरित वित्त, प्रवासी समुदाय का असर और बहुपक्षीय संस्थाओं में समर्थन।

UK के लिए: एक बड़ा लोकतांत्रिक बाजार, कुशल कार्यबल वाला साझेदार, ब्रेक्जिट के बाद व्यापार का मौका, हिंद-प्रशांत में साझेदार और ग्लोबल साउथ का एक प्रमुख देश।

CETA असल में क्या देता है

भारत को फायदा: कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और MSME क्षेत्र। ये सब श्रम पर टिके क्षेत्र हैं, और रोजगार पैदा करने के लिए भारत को निर्यात की बढ़त ठीक यहीं चाहिए।

UK को फायदा: गाड़ियां, व्हिस्की, चिकित्सा तकनीक, उन्नत विनिर्माण, उपभोक्ता सामान और सेवाएं। सुर्खियां स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क घटने ने बटोरीं, पर असली बड़ा इनाम चिकित्सा तकनीक और सेवाएं हैं।

दोहरा अंशदान समझौता (Double Contribution Convention) शायद भारत के लिए इस सौदे का सबसे कीमती अकेला प्रावधान है। यह UK में अस्थायी तौर पर काम कर रहे भारतीय पेशेवरों का सामाजिक सुरक्षा अंशदान घटा देता है, यानी वह खर्च हटा देता है जो भारतीय IT और परामर्श कर्मचारियों की थोड़े समय की तैनाती को दिखने से कहीं ज्यादा महंगा बना देता था।

व्यापार से आगे

विजन 2035. 2030 के रोडमैप की जगह लेने वाला नया ढांचा, जो व्यापार, तकनीक, रक्षा, जलवायु, शिक्षा, कौशल और लोगों के आपसी रिश्तों को समेटता है।

प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल। भविष्य का दूरसंचार, AI, महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर, क्वांटम, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री। 2025 में दोनों देशों ने 6G, गैर-स्थलीय नेटवर्क और साइबर सुरक्षा के लिए भारत-UK संपर्क एवं नवाचार केंद्र, AI के लिए एक संयुक्त केंद्र, और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में सहयोग की घोषणा की।

रक्षा। 2015 की रक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा साझेदारी, जिसमें अब सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए दस साल का रक्षा औद्योगिक रोडमैप जुड़ गया है। इसमें नौसैनिक प्लेटफॉर्म के लिए विद्युत प्रणोदन, जेट इंजन तकनीक, जटिल हथियार और रक्षा उद्योग में साझेदारी की पहचान की गई है।

जेट इंजन तकनीक पर खास जोर देना चाहिए। यह एयरोस्पेस में सबसे कसकर पकड़ी गई क्षमता है, और भारत दशकों से इसे हासिल करने में नाकाम रहा है। यहां कोई सच्चा तकनीक हस्तांतरण कई बड़े खरीद अनुबंधों से ज्यादा मायने रखेगा।

हिंद-प्रशांत। हिंद-प्रशांत महासागर पहल के तहत सहयोग, जिसमें गैर-पारंपरिक समुद्री खतरों से निपटने की क्षमता के लिए क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र भी शामिल है।

जलवायु। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, एक सूर्य एक विश्व एक ग्रिड, जलवायु वित्त, स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक गतिशीलता, जिन्हें UK-भारत हरित विकास इक्विटी फंड सहारा देता है।

शिक्षा, आवाजाही और राजनीतिक अड़चन

UK भारतीय छात्रों की पसंदीदा जगह बना हुआ है, और भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विदेशी विश्वविद्यालयों के भारतीय परिसरों के लिए जगह खोल दी है। प्रवास एवं गतिशीलता साझेदारी का मकसद कानूनी आवाजाही आसान करना और अवैध प्रवास पर लगाम लगाना है।

रिश्ता सबसे ज्यादा कमजोर यहीं है, और इसकी वजह साफ कहनी चाहिए। ब्रिटेन में प्रवास एक घरेलू राजनीतिक मुद्दा है, व्यापार नहीं। छात्र वीजा और पेशेवरों की आवाजाही पर वादे अलग-अलग सरकारों में बार-बार किए गए, बदले गए और सीमित किए गए, यानी भारत अपनी योजना बनाते समय निरंतरता मान ही नहीं सकता। दोहरा अंशदान समझौता इसलिए टिकाऊ है कि वह एक संधि के भीतर बैठा है। वीजा नीति नहीं बैठती।

ईमानदार आकलन

CETA भारत के लिए सचमुच अच्छा समझौता है, उसके ज्यादातर पुराने समझौतों से बेहतर, क्योंकि ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन को एक बड़े व्यापार सौदे की जो जरूरत थी, उसने भारत को असामान्य मोलभाव की ताकत दे दी।

पर किसी शुल्क समझौते का मूल्य इस पर टिका होता है कि निर्यातक उसका इस्तेमाल कर पाता है या नहीं। भारत के श्रम पर टिके क्षेत्रों को ऐसे बाजार में पहुंच मिली है जहां उन्हें मानकों, टिकाऊपन और आपूर्ति की पूरी छानबीन (traceability) से जुड़ी गैर-शुल्क बाधाएं झेलनी हैं, जिन्हें शुल्क समझौते ने छुआ ही नहीं। अगले तीन साल में असली पैमाना यही होगा कि मिली हुई पहुंच और इस्तेमाल हुई पहुंच के बीच कितना फासला रहता है।

आगे का रास्ता

  • कपड़ा, चमड़ा और समुद्री उत्पादों में मानकों और छानबीन के पालन की क्षमता बनाएं, क्योंकि फायदा वहीं शर्तों से बंधा है।
  • रक्षा औद्योगिक रोडमैप के तहत जेट इंजन और प्रणोदन तकनीक के हस्तांतरण पर दबाव बनाएं, क्योंकि इस क्षमता का कोई विकल्प नहीं है।
  • आवाजाही को नीतिगत घोषणाओं के बजाय संधि के प्रावधानों में बांधें।
  • महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल का इस्तेमाल करें, जहां UK के पास वह विशेषज्ञता है जो भारत के पास नहीं।
  • राजनीतिक खिड़की खुली रहने तक NEP के प्रावधानों के तहत UK के विश्वविद्यालयों को भारत लाएं।

सामान्य प्रश्न

CETA क्या है और यह कब लागू हुआ?

भारत-UK व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता, जो जुलाई 2026 से लागू है। यह UK जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय सामान और भारत आने वाले 90 प्रतिशत ब्रिटिश सामान को शुल्क-मुक्त या घटे हुए शुल्क पर पहुंच देता है, और उम्मीद है कि लंबी अवधि में यह द्विपक्षीय व्यापार करीब 25.5 अरब पाउंड बढ़ा देगा।

CETA से किन क्षेत्रों को फायदा है?

भारत के लिए: कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और MSME क्षेत्र। UK के लिए: गाड़ियां, व्हिस्की, चिकित्सा तकनीक, उन्नत विनिर्माण, उपभोक्ता सामान और सेवाएं।

दोहरा अंशदान समझौता क्या है?

यह CETA के भीतर का वह प्रावधान है जो UK में काम कर रहे अस्थायी भारतीय पेशेवरों पर सामाजिक सुरक्षा अंशदान का बोझ घटाता है, ताकि उन्हें एक ही अवधि के लिए दो-दो व्यवस्थाओं में पैसा न भरना पड़े। भारतीय सेवा निर्यातकों के लिए यह सौदे के सबसे कीमती हिस्सों में से एक है।

भारत-UK विजन 2035 क्या है?

यह पहले वाले 2030 रोडमैप की जगह लेने वाला नया ढांचा है, जो व्यापार, तकनीक, रक्षा, जलवायु, शिक्षा, कौशल और लोगों के आपसी रिश्तों को समेटता है। इसमें सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए दस साल का रक्षा औद्योगिक रोडमैप भी शामिल है।

प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल क्या है?

यह एक द्विपक्षीय ढांचा है जो भविष्य के दूरसंचार, AI, महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर, क्वांटम, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री को कवर करता है। 2025 में दोनों पक्षों ने 6G, गैर-स्थलीय नेटवर्क और साइबर सुरक्षा के लिए भारत-UK संपर्क एवं नवाचार केंद्र, AI के लिए एक संयुक्त केंद्र, और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में सहयोग की घोषणा की।

रक्षा सहयोग में क्या-क्या शामिल है?

रक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा साझेदारी 2015 की है। विजन 2035 इसमें दस साल का रक्षा औद्योगिक रोडमैप जोड़ता है, जो सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए नौसैनिक प्लेटफॉर्म के लिए विद्युत प्रणोदन, जेट इंजन तकनीक, जटिल हथियार और रक्षा उद्योग में साझेदारी की पहचान करता है।

प्रवास एवं गतिशीलता साझेदारी क्या है?

यह ऐसी व्यवस्था है जो दोनों देशों के बीच कानूनी आवाजाही आसान बनाना और अवैध प्रवास पर लगाम कसना चाहती है। इसमें छात्रों और पेशेवरों की वैध आवाजाही के साथ-साथ वापसी पर सहयोग भी जुड़ा है, और यही वजह है कि प्रवास इस रिश्ते का सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील हिस्सा बना रहता है।

भारत और UK बहुपक्षीय मंचों पर कैसे साथ काम करते हैं?

UK सुधरी हुई UN सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है। दोनों देश राष्ट्रमंडल, G20, WTO, WHO, IMF, विश्व बैंक, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और एक सूर्य एक विश्व एक ग्रिड जैसे जलवायु मंचों पर साथ काम करते हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

  1. CETA के तहत UK में शुल्क-मुक्त या घटे शुल्क पर पहुंच पाने वाले भारतीय सामान का हिस्सा लगभग कितना है?
    (a) 75 प्रतिशत
    (b) 85 प्रतिशत
    (c) 90 प्रतिशत
    (d) 99 प्रतिशत
    उत्तर: (d) 99 प्रतिशत भारतीय सामान को पहुंच मिलती है, जबकि भारत आने वाले UK के सामान के लिए यह आंकड़ा 90 प्रतिशत है।
  2. दोहरे अंशदान समझौते से मुख्य रूप से किसे फायदा होता है?
    (a) UK के व्हिस्की निर्यातकों को
    (b) UK में काम कर रहे अस्थायी भारतीय पेशेवरों को
    (c) भारतीय कपड़ा निर्माताओं को
    (d) ब्रिटिश चिकित्सा उपकरण कंपनियों को
    उत्तर: (b) यह UK में अस्थायी तैनाती पर गए भारतीय पेशेवरों का दोहरा सामाजिक सुरक्षा अंशदान हटा देता है।
  3. भारत-UK रिश्ते को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा कब मिला?
    (a) 2015
    (b) 2018
    (c) 2021
    (d) 2024
    उत्तर: (c) यह दर्जा 2021 में मिला, जिसने रिश्ते को व्यापार, तकनीक, रक्षा, जलवायु, शिक्षा और आवाजाही पर केंद्रित कर दिया।
  4. भारत और UK के बीच रक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर कब हुए?
    (a) 2010
    (b) 2015
    (c) 2019
    (d) 2022
    उत्तर: (b) यह 2015 की है; बाद में विजन 2035 ने इसमें दस साल का रक्षा औद्योगिक रोडमैप जोड़ा।
  5. भारत-UK रक्षा औद्योगिक रोडमैप में इनमें से किसकी पहचान नहीं की गई है?
    (a) नौसैनिक प्लेटफॉर्म के लिए विद्युत प्रणोदन
    (b) जेट इंजन तकनीक
    (c) जटिल हथियार
    (d) परमाणु पनडुब्बी निर्माण
    उत्तर: (d) इसमें बताए गए क्षेत्र विद्युत प्रणोदन, जेट इंजन तकनीक, जटिल हथियार और रक्षा उद्योग में साझेदारी हैं।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. CETA शुल्क मदों के मामले में भारत के पक्ष में असंतुलित है, पर आर्थिक मूल्य के मामले में जरूरी नहीं कि ऐसा ही हो। जांच कीजिए। (250 शब्द)
  2. विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ तकनीकी साझेदारी के एक नमूने के तौर पर भारत-UK प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)
  3. प्रवास भारत-UK रिश्ते का सबसे संवेदनशील राजनीतिक पहलू है। चर्चा कीजिए कि दोनों पक्षों ने इसे संभालने की कैसे कोशिश की है। (150 शब्द)
  4. ब्रेक्जिट के बाद का ब्रिटेन और उभरता भारत ऐसे हित रखते हैं जो मिलते तो हैं, पर बराबर नहीं हैं। आलोचनात्मक जांच कीजिए। (250 शब्द)
  5. भारत के रक्षा स्वदेशीकरण के लिए जेट इंजन तकनीक में सहयोग के महत्व पर चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

Share this

PDF

Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

Specialises in · Writing, web development, design — UPSC prep tooling Experience · 16+ years Visit website ↗

UPSC की तैयारी हिंदी माध्यम में — एक निशुल्क डेमो क्लास

न कोई सेल्स कॉल, न कोई ब्रोशर। सोमवार सुबह की असली GS क्लास देखिए — हमारे अनुभवी शिक्षकों के साथ।