इंडो-पैसिफिक आर्थिक ढाँचा (Indo-Pacific Economic Framework for Prosperity — IPEF) मई 2022 में अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन द्वारा टोक्यो में लॉन्च किया गया। यह एक बहुपक्षीय आर्थिक पहल है जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को संतुलित करने का प्रयास करती है।
IPEF के चार स्तंभ
स्तंभ 1: व्यापार (Trade)
श्रम मानक, पर्यावरण, डिजिटल व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला पारदर्शिता। भारत ने इस स्तंभ में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया — चिंता: बाजार पहुँच बाधाओं पर नियंत्रण।
स्तंभ 2: आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain)
महत्त्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर, फार्मा की आपूर्ति श्रृंखला में विविधता और लचीलापन। भारत इसमें शामिल है।
स्तंभ 3: स्वच्छ अर्थव्यवस्था (Clean Economy)
नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु प्रौद्योगिकी और कार्बन बाज़ार सहयोग। भारत इसमें शामिल है।
स्तंभ 4: उचित अर्थव्यवस्था (Fair Economy)
कर, भ्रष्टाचार-विरोध और पारदर्शिता। भारत इसमें शामिल है।
सदस्य देश
14 सदस्य: अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, फिजी, भारत, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, न्यूज़ीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम।
IPEF का महत्त्व
भारत के लिए
- अमेरिका और इंडो-पैसिफिक भागीदारों के साथ आर्थिक एकीकरण
- आपूर्ति श्रृंखला में चीन का विकल्प बनने का अवसर
- स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी तक पहुँच
रणनीतिक महत्त्व
IPEF चीन के BRI (Belt and Road Initiative) के जवाब में एक लोकतांत्रिक, नियम-आधारित आर्थिक व्यवस्था का प्रस्ताव है।
आलोचनाएँ
- यह एक पारंपरिक FTA नहीं — बाजार पहुँच की गारंटी नहीं
- अमेरिकी कांग्रेस में अनुसमर्थन की आवश्यकता नहीं — प्रतिबद्धता कमज़ोर
- विकासशील देशों के लिए वास्तविक लाभ अस्पष्ट
यूपीएससी की दृष्टि से
IPEF GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध — भारत-अमेरिका, इंडो-पैसिफिक) के लिए महत्त्वपूर्ण है। Quad, AUKUS, IPEF और इंडो-पैसिफिक रणनीति को एक समग्र दृष्टिकोण से समझें।