जलविद्युत शक्ति (Hydroelectric Power) गिरते या तेज़ बहते जल की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग करके टर्बाइन घुमाती है और बिजली उत्पन्न करती है। यह एकमात्र बड़े पैमाने का नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है जो मिनटों में घटाया-बढ़ाया जा सकता है — ग्रिड लचीलेपन के लिए अनिवार्य। भारत की पहचान की गई जलविद्युत क्षमता 1,45,320 MW है, जिसका केवल एक-तिहाई ही स्थापित है। टीस्ता-III आपदा (2023) और पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के पुनरुत्थान के साथ, जलविद्युत UPSC GS-III चर्चाओं के केंद्र में वापस आ गई है।
जलविद्युत शक्ति क्या है?
जलविद्युत उत्पादन दो रूपों में होता है:
- भंडारण-प्रकार परियोजनाएँ — जलाशय वाली (बहुउद्देशीय बाँध, पम्प्ड स्टोरेज)।
- प्रवाह-आधारित (Run-of-the-River) परियोजनाएँ — बिना बड़े भंडारण के प्राकृतिक नदी प्रवाह से।
जलविद्युत विकास को प्रभावित करने वाले कारक
जल-शीर्ष (Head of Water)
जल-ग्रहण बिंदु और टर्बाइन के बीच ऊँचाई का अंतर (शीर्ष) अनिवार्य है। प्राकृतिक झरने, रैपिड्स और घाटियाँ आदर्श हैं। कृत्रिम बाँध जलाशय के माध्यम से शीर्ष बनाते हैं।
बड़ी मात्रा में जल
टर्बाइन से गुजरने वाले जल की मात्रा के अनुपात में विद्युत उत्पन्न होती है। बड़ी निर्वहन वाली नदियाँ — जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु — आकर्षक हैं।
नियमित और विश्वसनीय आपूर्ति
बारहमासी नदियाँ बेहतर हैं। दीर्घकालिक सूखे और हिमालयी ग्लेशियरों से जुड़े परिवर्तन आधारप्रवाह को बदल रहे हैं।
पर्याप्त पूँजी
भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, बाँध निर्माण, ट्रांसमिशन और रख-रखाव से प्रारंभिक लागत बहुत अधिक होती है। NHPC, SJVN, THDC जैसे CPSU इन परियोजनाओं को क्रियान्वित करते हैं।
पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाएँ (PSP)
PSP भारतीय ग्रिड की नई सीमा हैं — विशाल ग्रिड-पैमाने की बैटरियों की तरह कार्य करती हैं:
- दो भिन्न ऊँचाइयों पर जलाशय।
- ऑफ-पीक समय में (अतिरिक्त सौर ऊर्जा से) जल ऊपर पंप।
- पीक माँग पर टर्बाइन से जल नीचे छोड़कर बिजली उत्पादन।
भारत का 2030 तक 60 GW PSP का लक्ष्य है। Greenko, JSW, NHPC और Adani सक्रिय हैं। पिन्नापुरम (आंध्र प्रदेश), शरावती और कदंपराई प्रमुख परियोजनाएँ हैं।
भारत में जलविद्युत
2024 तक भारत की स्थापित जलविद्युत क्षमता लगभग 47 GW (बड़ी जलविद्युत) और लगभग 5 GW लघु जलविद्युत है। प्रमुख स्टेशन: टेहरी (2,400 MW), कोयना (1,960 MW), नाथपा झाकड़ी (1,500 MW), सरदार सरोवर (1,450 MW), भाखड़ा-नांगल (1,325 MW)।
भौगोलिक संकेंद्रण: हिमालयी नदियाँ (गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु बेसिन) में सबसे बड़ी शेष क्षमता है। अकेले पूर्वोत्तर भारत में भारत की अप्रयुक्त जलविद्युत क्षमता का 34% है — मुख्यतः अरुणाचल प्रदेश में।
जलविद्युत खरीद दायित्व (HPO): 2022 में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा शुरू — बड़ी जलविद्युत से विद्युत का एक निर्दिष्ट हिस्सा DISCOMs के लिए अनिवार्य।
पर्यावरण और सामाजिक चिंताएँ
- जैव विविधता हानि और पारिस्थितिकी व्यवधान।
- विस्थापन और पुनर्वास: आदिवासी समुदायों के लिए अधूरा।
- जलाशय-प्रेरित भूकंपीयता: कोयना (1967, रिक्टर 6.3)।
- हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (GLOF): अक्तूबर 2023 में टीस्ता-III बाँध नष्ट।
- अवसाद अवरोधन: डाउनस्ट्रीम डेल्टाओं को प्रभावित करता है।
- बाँध सुरक्षा: बाँध सुरक्षा अधिनियम 2021 के तहत समाधान।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- टीस्ता-III आपदा (अक्तूबर 2023): South Lhonak झील से GLOF ने 1,200 MW परियोजना नष्ट की; 90+ मृत; हिमनद क्षेत्रों में जलविद्युत स्थापना की समीक्षा।
- बाँध सुरक्षा अधिनियम 2021 कार्यान्वयन: NDSA ने 2024 में बाध्यकारी निरीक्षण प्रोटोकॉल जारी किए।
- पम्प्ड स्टोरेज: 2026 की शुरुआत तक लगभग 25 GW निर्माण और बोली के विभिन्न चरणों में।
- सुबनसिरी लोअर (2,000 MW): लंबे विलंब के बाद चालू होने की प्रक्रिया।
- पोलावरम परियोजना: गोदावरी पर बहुउद्देशीय बाँध; 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित लागत पुनः स्वीकृत की।
- COP29 बाकू (2024): भारत के अद्यतन NDC में 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य के लिए जलविद्युत को आवश्यक बताया।
UPSC प्रासंगिकता
प्रीलिम्स: स्थापित जलविद्युत क्षमता, प्रमुख केंद्र (टेहरी, भाखड़ा-नांगल), PSP ढाँचा और 60 GW लक्ष्य, HPO (2022), बाँध सुरक्षा अधिनियम 2021, CPSU — NHPC, SJVN, THDC, NEEPCO।
मेन्स GS-III: टीस्ता-III के बाद हिमालय में नई जलविद्युत के पक्ष-विपक्ष, नवीकरणीय एकीकरण में PSP की भूमिका, बड़े बाँधों की पर्यावरण और सामाजिक लागत।
सामान्य प्रश्न
भारत की जलविद्युत क्षमता कितनी है?
भारत की पहचान की गई जलविद्युत क्षमता 1,45,320 MW है। 2024 तक लगभग 47 GW (बड़ी जलविद्युत) + 5 GW (लघु जलविद्युत) स्थापित है। अप्रयुक्त क्षमता का 34% अकेले पूर्वोत्तर में है।
पम्प्ड स्टोरेज परियोजना (PSP) क्या है?
PSP दो अलग-अलग ऊँचाइयों पर जलाशय होते हैं। ऑफ-पीक समय में (अतिरिक्त सौर ऊर्जा से) जल ऊपर पंप किया जाता है और पीक माँग पर टर्बाइन से छोड़कर बिजली उत्पन्न की जाती है — ग्रिड-स्तरीय बैटरी की तरह।
टीस्ता-III आपदा क्या थी?
अक्तूबर 2023 में सिक्किम में South Lhonak हिमनद झील से GLOF (हिमनद झील विस्फोट बाढ़) आई जिसने 1,200 MW की टीस्ता-III जलविद्युत परियोजना को नष्ट कर दिया और 90 से अधिक लोगों की जान ली। इससे हिमालयी क्षेत्रों में जलविद्युत स्थापना की समीक्षा की माँग उठी।