UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

शहरी ताप द्वीप (UHI) — यूपीएससी पर्यावरण नोट्स

शहरी ताप द्वीप प्रभाव को समझें — कारण, स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी पर प्रभाव, भारतीय शहरों पर असर और शमन उपाय, यूपीएससी पर्यावरण के लिए।

Urban Heat Island (UHI) — UPSC Environment Notes — UPSC featured image

शहरी ताप द्वीप (Urban Heat Island — UHI) वह घटना है जिसमें शहरी क्षेत्र आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म होते हैं। यह अंतर कुछ डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है और रात में अधिक स्पष्ट होता है। यह जलवायु परिवर्तन का एक स्थानीय रूप है जो सीधे शहरी जनस्वास्थ्य, ऊर्जा खपत और पारिस्थितिकी को प्रभावित करता है।

कारण

1. भूमि उपयोग में बदलाव

हरियाली और जल निकायों को कंक्रीट, डामर और भवनों से बदलना UHI का प्रमुख कारण है। वृक्ष और वनस्पति वाष्पोत्सर्जन (Evapotranspiration) के ज़रिए तापमान कम करते हैं। उनके हटने से यह शीतलन प्रभाव समाप्त हो जाता है।

2. सौर विकिरण का अवशोषण

डामर और कंक्रीट की सतहें सौर विकिरण को अधिक अवशोषित और कम परावर्तित करती हैं। इससे दिन के दौरान सतह का तापमान बहुत अधिक हो जाता है।

3. मानवजनित ऊष्मा

वाहन, एयर कंडीशनर, उद्योग और बिजली उपकरण भारी मात्रा में ऊष्मा उत्सर्जित करते हैं। यह अतिरिक्त ऊष्मा शहरी तापमान बढ़ाती है।

4. ऊँची इमारतों की ज्यामिति

घनी इमारतें हवा के प्रवाह को अवरुद्ध करती हैं और विकिरण को पकड़ लेती हैं — जैसे ‘कैनियन प्रभाव’। इससे गर्मी बाहर निकल नहीं पाती।

प्रभाव

स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • लू (Heat stroke) और गर्मी से संबंधित बीमारियाँ
  • श्वसन समस्याएँ — वायु प्रदूषण के साथ UHI का मिश्रण
  • रात में नींद में बाधा, मानसिक स्वास्थ्य पर असर
  • मृत्युदर में वृद्धि — विशेष रूप से वृद्ध और गरीब आबादी में

ऊर्जा पर प्रभाव

अधिक गर्मी के कारण एयर कंडीशनिंग का उपयोग बढ़ता है, जिससे बिजली की माँग और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन दोनों बढ़ते हैं।

पारिस्थितिकी पर प्रभाव

जल निकायों का तापमान बढ़ना, जलीय जीवन पर दबाव, स्थानीय वर्षा पैटर्न में बदलाव।

भारतीय शहरों में UHI

दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में UHI प्रभाव स्पष्ट है। अध्ययनों के अनुसार दिल्ली का तापमान आसपास के क्षेत्रों से 5-8°C तक अधिक हो सकता है। 2010 में अहमदाबाद में हीट वेव ने सैकड़ों जानें लीं — इसके बाद हीट एक्शन प्लान (Heat Action Plan) लागू किया गया।

शमन उपाय

  • हरित छत (Green Roofs) और हरित दीवारें: इमारतों पर वनस्पति से तापमान कम करना
  • शीतल छतें (Cool Roofs): परावर्तक सामग्री का उपयोग
  • शहरी वन और पार्क: अधिक वृक्षारोपण
  • पारगम्य फुटपाथ: वर्षाजल अवशोषण से भूमि शीतलन
  • जल निकायों का संरक्षण: तालाब, झील जो तापमान नियंत्रित करते हैं
  • NDMA दिशानिर्देश: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के हीट वेव प्रोटोकॉल

यूपीएससी की दृष्टि से

UHI GS-I (भूगोल), GS-II (शहरी शासन) और GS-III (पर्यावरण, आपदा प्रबंधन) तीनों के लिए प्रासंगिक है। जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के संदर्भ में यह एक उभरता हुआ परीक्षा विषय है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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