शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation — SCO) एशिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग संगठन है। इसकी स्थापना 2001 में शंघाई में हुई। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने। यह संगठन यूपीएससी अंतर्राष्ट्रीय संबंध के लिए एक महत्त्वपूर्ण विषय है।
इतिहास और गठन
SCO से पहले “शंघाई पाँच” (1996) था — चीन, रूस, कज़ाकिस्तान, किर्गिज़िस्तान और ताजिकिस्तान। 2001 में उज़्बेकिस्तान के शामिल होने से यह SCO बना। 2017 में भारत और पाकिस्तान पूर्ण सदस्य बने। 2023 में ईरान पूर्ण सदस्य बना।
सदस्य देश
पूर्ण सदस्य: चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, कज़ाकिस्तान, किर्गिज़िस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ईरान। पर्यवेक्षक: अफगानिस्तान, बेलारूस, मंगोलिया। संवाद भागीदार: तुर्की, श्रीलंका, सऊदी अरब आदि।
मुख्य उद्देश्य
- क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना
- आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद (“तीन बुराइयाँ”) से लड़ना
- आर्थिक सहयोग और व्यापार को बढ़ावा देना
- सांस्कृतिक एवं मानवतावादी सहयोग
RATS — क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना
RATS (Regional Anti-Terrorist Structure) SCO का एक स्थायी निकाय है जो ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) में स्थित है। यह सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने में सूचना साझाकरण और समन्वय करता है।
भारत और SCO
भारत के लिए SCO कई कारणों से महत्त्वपूर्ण है:
- मध्य एशिया तक पहुँच — ऊर्जा और व्यापार के लिए
- आतंकवाद-रोधी सहयोग
- अफगानिस्तान नीति में भागीदारी
- रूस के साथ रणनीतिक संतुलन
भारत-पाकिस्तान तनाव
SCO में भारत और पाकिस्तान दोनों की उपस्थिति से द्विपक्षीय तनाव संगठन में भी परिलक्षित होता है। भारत के प्रधानमंत्री ने अक्टूबर 2023 के SCO शिखर सम्मेलन में भौतिक रूप से भाग नहीं लिया।
SCO की संरचना
- राज्याध्यक्षों की परिषद (CHG): सर्वोच्च निकाय
- सरकार प्रमुखों की परिषद: आर्थिक नीतियाँ
- सचिवालय: बीजिंग में
- RATS: ताशकंद में
यूपीएससी की दृष्टि से
SCO GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। भारत की एक्ट ईस्ट और कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति के संदर्भ में SCO का विश्लेषण करें।