संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (UNFCCC) का 28वाँ सम्मेलन (COP28) नवंबर-दिसंबर 2023 में दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित हुआ। यह शिखर सम्मेलन कई ऐतिहासिक कारणों से उल्लेखनीय था, जिनमें पेरिस समझौते की प्रथम वैश्विक स्टॉकटेक (Global Stocktake) और जीवाश्म ईंधनों से संक्रमण पर एक अभूतपूर्व सहमति शामिल है।
COP28 की पृष्ठभूमि
UNFCCC जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक संधि है जिसे 1992 में अपनाया गया था। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला COP (Conference of Parties — पक्षों का सम्मेलन) इसके अंतर्गत वार्षिक वैश्विक वार्ता मंच है। COP21 में 2015 का पेरिस समझौता हुआ जिसमें तापमान वृद्धि को 1.5°C से नीचे रखने का लक्ष्य रखा गया।
प्रथम वैश्विक स्टॉकटेक
COP28 में पेरिस समझौते के तहत पहली वैश्विक स्टॉकटेक संपन्न हुई। यह एक ऐसी समीक्षा प्रक्रिया है जिसमें देश अपने जलवायु प्रतिबद्धताओं की प्रगति का मूल्यांकन करते हैं। निष्कर्ष निराशाजनक था: वैश्विक उत्सर्जन में पर्याप्त कमी नहीं आई है और 1.5°C का लक्ष्य गंभीर खतरे में है।
जीवाश्म ईंधन समझौता
COP28 की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि जीवाश्म ईंधनों से संक्रमण पर पहली बार औपचारिक सहमति बनाना था। 198 देशों ने एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें 2050 तक शुद्ध-शून्य (Net Zero) उत्सर्जन हासिल करने के लिए जीवाश्म ईंधनों से “दूरी” बनाने का आह्वान किया गया।
मुख्य बिंदु:
- “Phase out” (समाप्ति) की जगह “transitioning away” (दूरी बनाना) शब्दावली का उपयोग — यह जीवाश्म ईंधन उत्पादक देशों की माँग पर हुआ।
- 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तीन गुनी करने का लक्ष्य।
- 2030 तक ऊर्जा दक्षता में दोगुनी वृद्धि।
- हानि एवं क्षति (Loss and Damage) कोष का शुभारंभ — पहली बार विकासशील देशों के लिए औपचारिक वित्तपोषण।
हानि एवं क्षति कोष
COP28 में हानि एवं क्षति कोष (Loss and Damage Fund) की स्थापना हुई। यह उन विकासशील देशों को सहायता देने के लिए है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सबसे अधिक पीड़ित हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने 100 मिलियन डॉलर का प्रारंभिक योगदान दिया।
COP28 पर भारत का रुख
भारत ने COP28 में अपना नेतृत्वकारी रुख बनाए रखा:
- विकसित देशों से बड़ी जलवायु वित्त की माँग।
- 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य पर प्रतिबद्धता।
- जीवनशैली परिवर्तन (LiFE — Lifestyle for Environment) के एजेंडे को आगे बढ़ाना।
- विकासशील देशों के लिए न्यायसंगत संक्रमण (Just Transition) की वकालत।
- कोयले पर निर्भरता तुरंत समाप्त करने की बजाय चरणबद्ध कमी की माँग।
यूपीएससी के लिए प्रमुख बिंदु
- COP28 में पहली वैश्विक स्टॉकटेक और जीवाश्म ईंधन संक्रमण समझौता।
- Loss and Damage Fund की औपचारिक स्थापना।
- 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा तीन गुनी करने का लक्ष्य।
- भारत का न्यायसंगत संक्रमण और विकासशील देशों की जरूरतों पर जोर।
- पेरिस समझौते के 1.5°C लक्ष्य पर वर्तमान प्रगति की समीक्षा।
सामान्य प्रश्न
COP28 में क्या हुआ?
COP28 दुबई में 2023 में हुआ। इसमें पहली वैश्विक स्टॉकटेक, जीवाश्म ईंधन से संक्रमण समझौता, हानि एवं क्षति कोष की स्थापना और 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा तीन गुनी करने का लक्ष्य शामिल था।
वैश्विक स्टॉकटेक क्या है?
वैश्विक स्टॉकटेक (Global Stocktake) पेरिस समझौते की एक समीक्षा प्रक्रिया है जिसमें देश अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं की प्रगति का मूल्यांकन करते हैं। पहली स्टॉकटेक COP28 में हुई।
हानि एवं क्षति कोष क्या है?
हानि एवं क्षति कोष उन विकासशील देशों की सहायता के लिए है जो जलवायु परिवर्तन के अपरिहार्य प्रभावों से पीड़ित हैं। COP28 में इसे औपचारिक रूप दिया गया।