UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

अभिवृत्ति के प्रकार: नैतिक, राजनीतिक, सामाजिक और मूल्यों से संबंध (यूपीएससी नीतिशास्त्र — GS IV)

नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्तियों के प्रकार, स्पष्ट और अंतर्निहित अभिवृत्ति, अभिवृत्ति बनाम मूल्य का अंतर, और यूपीएससी GS IV के लिए संवैधानिक नैतिकता की अवधारणा।

Types of Attitude: Moral, Political, Social and the Link with Values (UPSC Ethics — GS IV) — UPSC featured image

यूपीएससी GS-IV पाठ्यक्रम में नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्तियों की स्पष्ट समझ आवश्यक है — यह उप-विषय अक्सर अभ्यर्थियों को उलझाता है क्योंकि इनमें बारीक अंतर हैं। नैतिक अभिवृत्ति (Moral attitude) यह है कि व्यक्ति किसे सही या गलत मानता है। राजनीतिक अभिवृत्ति (Political attitude) यह है कि व्यक्ति राजनीतिक व्यवस्था के प्रति कहाँ खड़ा है। दोनों को गहरे मूल्य आकार देते हैं। यह मार्गदर्शिका प्रकारों को स्पष्ट करती है, अभिवृत्ति और मूल्य के बीच अंतर बताती है और GS-IV में प्रयुक्त स्पष्ट/अंतर्निहित, सकारात्मक/नकारात्मक/तटस्थ आयामों की व्याख्या करती है।

नैतिक बनाम राजनीतिक अभिवृत्ति — स्पष्ट अंतर

नैतिक अभिवृत्तिराजनीतिक अभिवृत्ति
संबंधसमाज में नैतिक रूप से बहस वाले मामलों में आप क्या सही या गलत मानते हैंराजनीतिक मुद्दों या विचारधाराओं के प्रति आपकी स्थिति
उदाहरणइच्छामृत्यु, मृत्युदंड, समलैंगिक विवाह, गर्भपात, लिव-इन संबंधउदारवादी, रूढ़िवादी, प्रगतिशील, आमूलवादी, प्रतिक्रियावादी, उग्रवादी, शांतिवादी
अभिव्यक्तिराय व्यक्त करना, नैतिक जनमत संग्रह में मतदान, वकालतमतदान, पार्टी सदस्यता, नारेबाज़ी, सार्वजनिक चर्चाएं, सोशल मीडिया पोस्ट, समाचार-पत्र लेख
आकार देने वाले कारकधर्म, परिवार, दर्शन, तर्कसामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा, चुनाव अभियान, सोशल मीडिया

नैतिक अभिवृत्तियाँ — एक प्रकार-विन्यास

एक सिविल सेवक जो नैतिक अभिवृत्तियाँ रख सकता है या जिनसे सामना कर सकता है:

  • सहानुभूतिपूर्ण (Empathetic)
  • विनम्र (Humble)
  • उदार (Generous)
  • ईमानदार (Honest)
  • सदाचारी (Virtuous)
  • सहायक (Helping)
  • सहयोगी (Cooperative)
  • दृढ़वादी (Assertive)
  • आक्रामक (Aggressive)
  • अधीनस्थ (Submissive)
  • अज्ञानी (Ignorant)

इस सूची की सभी अभिवृत्तियाँ नैतिक रूप से सकारात्मक नहीं हैं; आक्रामक और अज्ञानी अभिवृत्तियाँ सार्वजनिक प्रशासन में अनुभवसिद्ध वास्तविकताएं हैं, और उन्हें पहचानना परिपक्व नैतिक समझ का हिस्सा है।

राजनीतिक अभिवृत्तियाँ — उदारवादी-रूढ़िवादी स्पेक्ट्रम

  • उदारवादी (Liberal) / मध्यमार्गी (Moderate): स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का समर्थन, संवैधानिक तरीके से सुधारों के माध्यम से।
  • रूढ़िवादी (Conservative): सुधार की तुलना में यथास्थिति को प्राथमिकता।
  • प्रगतिशील (Progressive): धीमे, क्रमिक सुधार का समर्थन।
  • आमूलवादी (Radical): तत्काल, व्यापक सुधार का समर्थन।
  • प्रतिक्रियावादी (Reactionary): पिछली व्यवस्था में लौटना चाहता है जो बेहतर मानी जाती थी।
  • उग्रवादी (Extremist): वर्तमान व्यवस्था से अत्यधिक असंतुष्ट, हिंसक बदलाव के लिए तैयार।
  • शांतिवादी (Pacifist): वर्तमान व्यवस्था से असंतुष्ट, अहिंसक बदलाव के प्रति प्रतिबद्ध।

ये श्रेणियाँ सरलीकृत हैं; वास्तविक व्यक्ति अक्सर तत्वों को मिलाते हैं। एक सिविल सेवक संवैधानिक मामलों में उदारवादी राजनीतिक अभिवृत्ति और राजकोषीय नीति में रूढ़िवादी अभिवृत्ति रख सकता है। इन स्थितियों की आत्म-जागरूकता तकनीकी निर्णय को वैचारिक प्राथमिकता से अलग करने में मदद करती है।

अभिवृत्ति और मूल्य — दो अक्सर भ्रमित शब्दों को अलग करना

  • अभिवृत्ति किसी विशेष वस्तु से संबंधित होती है। उदारवादी अभिवृत्ति वाला व्यक्ति जाति, लिंग, LGBTQ+ अधिकारों या पहनावे के बारे में उदारवादी हो सकता है — लेकिन उदारवाद उस विशेष वस्तु की ओर निर्देशित है।
  • मूल्य सामान्य और वस्तु-पारगामी होते हैं। जो व्यक्ति स्वतंत्रता को मूल्य के रूप में मानता है वह हर चीज़ के प्रति उदारवादी होगा, क्योंकि मूल्य आयोजक सिद्धांत है।
  • अभिवृत्तियाँ परिस्थिति के साथ बदल सकती हैं। मूल्य अधिक स्थिर होते हैं।
  • तीव्र जीवन घटनाएं मूल्यों को बदल सकती हैं। कलिंग के बाद अशोक, बुद्ध से मिलने के बाद अंगुलिमाल, वाल्मीकि, कालिदास — ये मूल्य परिवर्तन हैं, केवल अभिवृत्ति परिवर्तन नहीं।

अतः — मूल्य अभिवृत्तियों से अधिक शक्तिशाली, तीव्र और टिकाऊ होते हैं। एक सिविल सेवक के मूल्य उसकी धुरी परिभाषित करते हैं; उसकी अभिवृत्तियाँ उस धुरी पर विशिष्ट वस्तुओं पर उसकी स्थिति बताती हैं।

“अंततः, यह हमारा चरित्र है जो हमें परिभाषित करता है, न कि विशेष मामलों पर हमारी राय।” — अरस्तू के सद्गुण पर विचार का भावानुवाद।

भाव के अनुसार अभिवृत्ति के प्रकार

सकारात्मक / नकारात्मक / तटस्थ

किसी भी वस्तु के प्रति कोई भी अभिवृत्ति हो सकती है:

  • सकारात्मक — समर्थनकारी।
  • नकारात्मक — अस्वीकारकारी।
  • तटस्थ / द्विविभाजित — न समर्थन न अस्वीकार।

द्विविभाजन (Ambivalence) वास्तव में सामान्य है — एक नागरिक एक ही नीति, व्यक्ति या संस्था के प्रति एक साथ आकर्षित और विकर्षित हो सकता है।

स्पष्ट बनाम अंतर्निहित अभिवृत्तियाँ

  • स्पष्ट अभिवृत्ति (Conscious): व्यक्ति अभिवृत्ति और उसके व्यवहार पर प्रभाव से अवगत है। स्पष्ट अभिवृत्तियाँ सचेत रूप से बनती हैं — विचार-मंथन, अध्ययन, सोच-समझकर जीवन विकल्पों से।
  • अंतर्निहित अभिवृत्ति (Sub-conscious): व्यक्ति अभिवृत्ति या उसके व्यवहार पर प्रभाव से अनजान है। अंतर्निहित अभिवृत्तियाँ अवचेतन रूप से बनती हैं — बार-बार संपर्क, सांस्कृतिक आत्मसात, अनजानी शर्त-प्रतिक्रिया से।

यह अंतर एक सिविल सेवक के लिए महत्वपूर्ण है। अंतर्निहित पूर्वाग्रह (Implicit Bias) — किसी विशेष जाति के साथ आपराधिक आशय का अचेतन जुड़ाव, या किसी विशेष लिंग के साथ अक्षमता — तब भी अनुचित प्रशासनिक परिणाम उत्पन्न करता है जब अधिकारी की स्पष्ट अभिवृत्तियाँ समतावादी हों। हार्वर्ड शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इम्प्लिसिट एसोसिएशन टेस्ट (IAT) अंतर्निहित पूर्वाग्रह मापने का मानक उपकरण है।

नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्तियाँ एक साथ — संवैधानिक ढाँचा

भारत का संविधान प्रत्येक लोकसेवक से नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्तियों का एक विशेष समुच्चय अपेक्षित करता है।

  • नैतिक अभिवृत्तियाँ: मानवीय गरिमा का सम्मान (अनुच्छेद 21), सभी व्यक्तियों की समानता (अनुच्छेद 14), बंधुत्व, न्याय।
  • राजनीतिक अभिवृत्तियाँ: संसदीय लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद, विधि के शासन और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता।

एक सिविल सेवक व्यक्तिगत रूप से विशेष मुद्दों पर विपरीत अभिवृत्तियाँ रख सकता है, लेकिन उसकी व्यावसायिक अभिवृत्ति संवैधानिक ढाँचे के अनुरूप होनी चाहिए। संविधान व्यक्तिगत नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्तियों की एकरूपता की माँग नहीं करता; यह संवैधानिक नैतिकता माँगता है — अधिकारी की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं की परवाह किए बिना संवैधानिक मूल्यों के अनुसार नागरिकों की सेवा करने की व्यावसायिक प्रतिबद्धता।

केस स्टडी

केस 1: समलैंगिक जोड़े का कल्याण दावा

एक समलैंगिक जोड़ा आपके कार्यालय में एक ऐसे संयुक्त लाभ के लिए आता है जो उनके संबंध के बारे में औपचारिक रूप से चुप है। आपके अधीनस्थ — कुछ रूढ़िवादी नैतिक अभिवृत्तियों वाले — तर्क देते हैं कि लाभ “स्पष्ट रूप से ऐसे आवेदकों के लिए नहीं था।”

समाधान ढाँचा:

  1. अभिवृत्ति को संवैधानिक नैतिकता से अलग करें। व्यक्तिगत नैतिक अभिवृत्तियाँ निजी हैं; व्यावसायिक कर्तव्य संविधान और न्यायालय की व्याख्या का अनुसरण करता है।
  2. संवैधानिक नैतिकता लागू करें। अनुच्छेद 14, 15, 21 और नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ (2018) निर्णय समान गरिमा की पुष्टि करते हैं।
  3. कार्रवाई का तरीका: दावे को गुण-दोष के आधार पर संसाधित करें। फ़ाइल नोट में कानूनी आधार दर्ज करें।

केस 2: कार्यालय में राजनीतिक नारा

एक जूनियर अधिकारी ने कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर जोरदार राजनीतिक नारा लगाया है। कुछ सहकर्मी आहत हैं; कुछ समर्थक हैं। आपको निर्णय लेना है।

समाधान ढाँचा:

  1. प्रासंगिक मूल्य: सिविल सेवा तटस्थता, व्यक्तिगत अभिव्यक्ति स्वतंत्रता, कार्यस्थल सद्भाव।
  2. ढाँचा: सिविल सेवा आचरण नियम सरकारी परिसरों में राजनीतिक प्रदर्शन प्रतिबंधित करते हैं।
  3. कार्रवाई का तरीका: अधिकारी से नारा हटाने का अनुरोध करें। अनुरोध को लिखित में दर्ज करें। तटस्थता अभिवृत्तियों का दमन नहीं है; यह संस्थागत स्थान में उन्हें न दिखाने का व्यावसायिक अनुशासन है।

यूपीएससी प्रासंगिकता

GS IV मैपिंग: यह विषय सीधे नामित है — “नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्तियाँ” — और अभिवृत्ति, सामाजिक प्रभाव और अनुनय, मूल्य, और सिविल सेवाओं के मूलभूत मूल्यों से जुड़ता है।

उत्तरों के लिए मुख्य शब्द: नैतिक अभिवृत्ति, राजनीतिक अभिवृत्ति, उदारवादी, रूढ़िवादी, प्रगतिशील, आमूलवादी, प्रतिक्रियावादी, उग्रवादी, शांतिवादी, स्पष्ट अभिवृत्ति, अंतर्निहित अभिवृत्ति, द्विविभाजन, IAT, संवैधानिक नैतिकता, अभिवृत्ति बनाम मूल्य, कलिंग के बाद अशोक का परिवर्तन।

वास्तविक जीवन के उदाहरण:

  • कलिंग के बाद अशोक का परिवर्तन — मूल्य परिवर्तन, केवल अभिवृत्ति परिवर्तन नहीं।
  • नवतेज सिंह जोहर (2018) — यौन अभिविन्यास पर लोकप्रिय नैतिक अभिवृत्ति पर संवैधानिक नैतिकता की जीत।
  • सबरीमाला विवाद (2018-19) — नैतिक अभिवृत्ति बनाम संवैधानिक नैतिकता।
  • सिविल सेवा आचरण नियम — राजनीतिक अभिवृत्ति प्रदर्शन पर व्यावसायिक अनुशासन।

नैतिक और राजनीतिक अभिवृत्तियाँ वह मानवीय ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जिनमें सिविल सेवक काम करते हैं। इन्हें — अपने भीतर, सहकर्मियों में और नागरिकों में — समझना निष्पक्ष प्रशासन की मनोवैज्ञानिक नींव है। मूल्यों की दृढ़ भूमि और संवैधानिक नैतिकता को पहचानना जो व्यक्तिगत नैतिक और राजनीतिक प्राथमिकता दोनों को पार करती है, वह अनुशासन है जो एक गणराज्य अपने लोकसेवकों से चाहता है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

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