अंतरिक्ष क्षेत्र का व्यावसायीकरण वैश्विक रुझान है। SpaceX, Blue Origin, Amazon Kuiper जैसी निजी कंपनियाँ अंतरिक्ष अन्वेषण और उपग्रह सेवाओं में सरकारी एजेंसियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। भारत ने भी 2020-23 के बीच महत्त्वपूर्ण नीतिगत सुधारों के ज़रिए अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोला है।
भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023
अप्रैल 2023 में जारी भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 अंतरिक्ष विभाग का ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। इसमें:
- ISRO को अनुसंधान और विकास पर केंद्रित करना
- IN-SPACe के माध्यम से निजी क्षेत्र को प्रवेश की अनुमति
- NewSpace India Ltd (NSIL) का व्यावसायिक भूमिका में विस्तार
- भारतीय अंतरिक्ष उद्योग को $44 बिलियन तक पहुँचाने का लक्ष्य (2033 तक)
IN-SPACe
IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) एक स्वायत्त नियामक निकाय है जो:
- निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देता है
- ISRO की सुविधाओं के उपयोग को सुगम बनाता है
- अंतरिक्ष स्टार्टअप को प्रोत्साहित करता है
FDI नीति
2024 में सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में FDI नीति उदार बनाई:
- उपग्रह निर्माण और संचालन: 74% तक स्वत: मार्ग से FDI
- लॉन्च वाहन: 49% तक स्वत: मार्ग
- अंतरिक्ष बुनियादी ढाँचा: 100% सरकारी मार्ग
भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप
नई नीति के बाद भारत में 200 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं। प्रमुख उदाहरण:
- Skyroot Aerospace: Vikram-S — भारत का पहला निजी रॉकेट (2022)
- Agnikul Cosmos: 3D प्रिंटेड रॉकेट इंजन
- Pixxel: पृथ्वी अवलोकन उपग्रह
चुनौतियाँ
- ISRO और निजी क्षेत्र के बीच सुविधाएँ साझा करने की जटिलता
- अंतरिक्ष मलबा (Space Debris) प्रबंधन
- विदेशी उपग्रह कंपनियों से प्रतिस्पर्धा
- प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी
यूपीएससी की दृष्टि से
अंतरिक्ष क्षेत्र का व्यावसायीकरण GS-III (विज्ञान, प्रौद्योगिकी) के लिए महत्त्वपूर्ण है। ISRO, IN-SPACe, NSIL और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 — इनके बीच संबंध और भूमिकाएँ स्पष्ट करें।