पारंपरिक रेडियो तरंगों की जगह लेजर प्रकाश (Laser Communication) का उपयोग करके अंतरिक्ष यानों और पृथ्वी के बीच डेटा प्रसारित करने की तकनीक अंतरिक्ष संचार में क्रांति ला रही है। NASA के लेजर कम्युनिकेशन रिले डेमोन्स्ट्रेशन (LCRD) मिशन ने यह साबित किया है कि लेजर संचार रेडियो की तुलना में 10 से 100 गुना अधिक डेटा गति से प्रसारित कर सकता है।
लेजर संचार क्यों?
| विशेषता | रेडियो तरंग | लेजर (ऑप्टिकल) |
|---|---|---|
| तरंगदैर्ध्य | सेंटीमीटर-मीटर | माइक्रोमीटर (बहुत छोटा) |
| डेटा दर | कम (Mbps) | बहुत अधिक (Gbps) |
| ऊर्जा दक्षता | कम | अधिक |
| बैंडविड्थ | सीमित | व्यापक |
| बीम विस्तार | व्यापक | अत्यंत संकीर्ण (सटीक) |
प्रमुख मिशन और प्रयोग
- NASA LCRD (2021): भूस्थिर कक्षा से ऑप्टिकल संचार का पहला दीर्घकालिक प्रयोग।
- NASA LLCD (Lunar Laser Communication Demonstration, 2013): चंद्रमा से पृथ्वी तक 622 Mbps डेटा।
- ESA TESAT: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का ऑप्टिकल अंतर-उपग्रह संचार।
चुनौतियाँ
- बादल और वायुमंडलीय अशांति: लेजर बीम को बादल अवरुद्ध कर सकते हैं।
- सटीक दिशा-निर्धारण: अंतरिक्ष यान की गति के साथ लेजर बीम का सटीक संरेखण आवश्यक।
- ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क: विश्वसनीयता के लिए एकाधिक स्टेशन आवश्यक।
भारत के लिए महत्त्व
ISRO के गगनयान मिशन और भविष्य के चंद्र/मंगल मिशनों में उच्च-बैंडविड्थ संचार की आवश्यकता होगी। लेजर संचार इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा क्वांटम क्रिप्टोग्राफी में भी ऑप्टिकल लिंक का उपयोग होता है।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS III (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी) में लेजर संचार प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए प्रासंगिक है। LCRD, ऑप्टिकल संचार के लाभ और चुनौतियाँ — ये प्रश्न पूछे जा सकते हैं।