भारत और ईरान के संबंध सहस्राब्दियों पुराने हैं — सांस्कृतिक, भाषाई और व्यापारिक संबंधों की गहरी जड़ें हैं। आज के संदर्भ में ऊर्जा, कनेक्टिविटी, मध्य एशिया पहुँच और भू-रणनीति इन संबंधों को परिभाषित करते हैं।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
चाबहार बंदरगाह
- ओमान की खाड़ी पर स्थित; पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच।
- भारत ने शहीद बेहेश्ती टर्मिनल में निवेश किया।
- मई 2024: दीर्घकालिक चाबहार समझौता — 10 वर्षीय परिचालन अनुबंध।
INSTC (अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा)
- मुंबई–ईरान–रूस–यूरोप तक माल परिवहन।
- पारंपरिक स्वेज मार्ग से 30% सस्ता, 40% तेज।
ऊर्जा
- ऐतिहासिक रूप से भारत ईरान का बड़ा तेल ग्राहक।
- अमेरिकी प्रतिबंधों (2018) से तेल आयात शून्य।
फरज़ाद-B गैस क्षेत्र
- ONGC Videsh द्वारा खोजा गया; विकास के लिए भारत की रुचि।
चुनौतियाँ
- अमेरिकी प्रतिबंध — CAATSA, IFCA; भारतीय कंपनियों पर खतरा।
- ईरान-इज़राइल तनाव — क्षेत्रीय अस्थिरता।
- INR में भुगतान — ईरान रुपया खर्च नहीं कर सकता।
- पाकिस्तान-ईरान संबंध — जटिलता।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- मई 2024: चाबहार 10-वर्षीय समझौता — अमेरिकी चिंताओं के बावजूद।
- राष्ट्रपति रईसी की मृत्यु (मई 2024) — नए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान के साथ निरंतरता।
- INSTC के माध्यम से माल ढुलाई शुरू।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-II: भारत की विदेश नीति, पड़ोसी देश।
- प्रारंभिक: चाबहार, INSTC, ONGC-Videsh।
- मुख्य: “भारत-ईरान संबंधों में अवसर और चुनौतियाँ।”
भारत-ईरान संबंध रणनीतिक स्वायत्तता का परीक्षण है — अमेरिकी दबाव के बावजूद चाबहार और INSTC में निवेश भारत की बहु-केंद्रित विदेश नीति का प्रमाण है।