भारत विश्व के सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित देशों में से एक है। राष्ट्रीय बाढ़ आयोग के अनुसार, लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर भूमि बाढ़-ग्रस्त है — भारत की भौगोलिक क्षेत्रफल का ~12.5%। वार्षिक बाढ़ क्षति: औसत ₹5,000-10,000 करोड़; उच्च वर्षों में ₹25,000 करोड़+ तक। UPSC GS III के लिए बाढ़ आपदा प्रबंधन, नदी जल विवाद और जलवायु अनुकूलन से जुड़ती है।
बाढ़ के कारण
प्राकृतिक कारण
- मानसून की अनियमितता: अत्यधिक वर्षा, बादल फटना।
- हिमालयी नदियों की तीव्र बाढ़: गंगा, ब्रह्मपुत्र — तेज़ प्रवाह और उच्च अवसादन।
- चक्रवात और तूफानी लहरें: तटीय क्षेत्रों में।
मानवीय कारण
- अतिक्रमण: बाढ़ मैदानों में बस्तियाँ और निर्माण।
- वनों की कटाई: जल अवशोषण क्षमता कम।
- शहरी अभेद्यता: कंक्रीट की सतहें जल अपवाह बढ़ाती हैं।
- अनुचित जल निकासी।
बाढ़-प्रवण राज्य
असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सबसे अधिक प्रभावित। ब्रह्मपुत्र और गंगा-बेसिन में सबसे अधिक क्षति। केरल (2018, 2019), हिमाचल प्रदेश में बाढ़ की नई प्रवृत्ति।
बाढ़ प्रबंधन उपाय
संरचनात्मक उपाय
- तटबंध और बाँध: गंगा में 3,700+ km तटबंध।
- जलाशय: बाढ़ मौसम में जल संग्रह।
- नदी नहर जोड़ — NRLP (National River Linking Project)।
गैर-संरचनात्मक उपाय
- बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी: CWC (केंद्रीय जल आयोग) का नेटवर्क।
- बाढ़ क्षेत्र मानचित्रण।
- NDMA दिशानिर्देश।
UPSC प्रासंगिकता
GS III: बाढ़ के कारण, बाढ़ प्रबंधन के संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपाय, NDMA भूमिका, CWC और जलवायु परिवर्तन से बाढ़ की बढ़ती प्रवृत्ति।
सामान्य प्रश्न
भारत में बाढ़-ग्रस्त भूमि का अनुमान क्या है?
राष्ट्रीय बाढ़ आयोग के अनुसार लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर भूमि बाढ़-ग्रस्त है।
CWC की बाढ़ प्रबंधन में क्या भूमिका है?
केंद्रीय जल आयोग (CWC) बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी नेटवर्क संचालित करता है।