भारत विश्व की सर्वाधिक भाषाई विविधता वाले देशों में से एक है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 121 करोड़ से अधिक लोग 121 मातृभाषाएँ बोलते हैं जिनमें 10,000 से अधिक बोलने वालों की संख्या है। भाषायी अल्पसंख्यक (Linguistic Minorities) वे हैं जो किसी राज्य में बहुसंख्यक भाषा से अलग भाषा बोलते हैं।
8वीं अनुसूची
भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं। वर्तमान में 22 भाषाएँ इसमें शामिल हैं:
- मूल 14 भाषाएँ (1950): असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू।
- बाद में जोड़ी गईं: सिंधी (1967), कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली (1992), बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली (2003)।
भाषायी अल्पसंख्यकों के अधिकार
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| अनुच्छेद 29 | अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति संरक्षित करने का अधिकार |
| अनुच्छेद 30 | अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थाएँ स्थापित और संचालित करने का अधिकार |
| अनुच्छेद 350A | भाषायी अल्पसंख्यक बच्चों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा |
| अनुच्छेद 350B | भाषायी अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति |
राज्यों के भाषायी पुनर्गठन का इतिहास
1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) की सिफारिशों पर भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ। यह एक अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया थी — आंध्र (1953), गुजरात-महाराष्ट्र (1960), पंजाब-हरियाणा (1966) आदि उदाहरण हैं।
चुनौतियाँ
- भाषाई पहचान और राष्ट्रीय एकता: भाषाई क्षेत्रवाद बनाम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत”।
- हिंदी थोपने का भय: दक्षिण भारतीय राज्यों में त्रिभाषा फार्मूला विवाद।
- लुप्त होती भाषाएँ: UNESCO के अनुसार भारत की 196 भाषाएँ संकटापन्न हैं।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS II में भाषायी अल्पसंख्यक भारतीय समाज, सांस्कृतिक विविधता, संवैधानिक प्रावधान और भाषाई पहचान के अंतर्गत आते हैं। 8वीं अनुसूची में भाषाओं की संख्या, अनुच्छेद 350A और 350B — ये सीधे प्रश्नों में पूछे जाते हैं।