भूस्खलन (Landslide) एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जिसमें पहाड़ी ढलान पर स्थित मिट्टी, शैल या मलबा तेज़ी से नीचे खिसकता है। भारत विश्व में सर्वाधिक भूस्खलन-प्रभावित देशों में से एक है। हिमालय, पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
भूस्खलन के कारण
प्राकृतिक कारण
- अत्यधिक वर्षा: मानसूनी वर्षा से मिट्टी में जल संतृप्ति।
- भूकंप: ढलान का अस्थिर होना।
- ढलान की प्रकृति: तीव्र ढलान, कमज़ोर शैल संरचना।
- हिमनद पिघलना: हिमालय में।
मानवजनित कारण
- वनों की कटाई: जड़ें मिट्टी को बाँधती हैं; वनों के बिना मिट्टी अस्थिर।
- अनियोजित निर्माण: ढलानों पर सड़क, भवन।
- खनन: पहाड़ों को खोखला करना।
- जलविद्युत परियोजनाएँ: विस्फोटक का उपयोग।
भारत के संवेदनशील क्षेत्र
| क्षेत्र | राज्य | विशेषता |
|---|---|---|
| हिमालय क्षेत्र | उत्तराखंड, हिमाचल, J&K | युवा भूगर्भीय संरचना, भूकंप-प्रवण |
| पूर्वोत्तर | असम, मेघालय, मणिपुर | अत्यधिक वर्षा, नाज़ुक भूगोल |
| पश्चिमी घाट | केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक | घना वन, मानसूनी वर्षा |
| नीलगिरि | तमिलनाडु | चाय-बागान, तीव्र ढलान |
हालिया प्रमुख घटनाएँ
- 2013: केदारनाथ आपदा — उत्तराखंड में व्यापक भूस्खलन।
- 2021: चमोली ग्लेशियर आपदा।
- 2023: जोशीमठ भू-धँसाव।
- 2024: वायनाड भूस्खलन — केरल।
प्रबंधन और न्यूनीकरण उपाय
- वनीकरण: ढलानों पर वृक्षारोपण।
- भू-उपयोग नियोजन: संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण प्रतिबंध।
- पूर्व चेतावनी प्रणाली: ISRO और GSI द्वारा भूस्खलन मानचित्रण।
- बायो-इंजीनियरिंग: जड़-मज़बूत पौधों से ढलान स्थिरीकरण।
- NDMA दिशानिर्देश: भूस्खलन जोखिम प्रबंधन।
यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
- भूस्खलन के कारण: वर्षा, भूकंप, वनों की कटाई, निर्माण।
- संवेदनशील क्षेत्र: हिमालय, पूर्वोत्तर, पश्चिमी घाट।
- हालिया आपदाएँ: केदारनाथ 2013, चमोली 2021, वायनाड 2024।
- GSI: भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत — भूस्खलन मानचित्रण।
- NDMA दिशानिर्देश: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण।
सामान्य प्रश्न
भूस्खलन के प्रमुख कारण क्या हैं?
अत्यधिक वर्षा, भूकंप, तीव्र ढलान, वनों की कटाई और अनियोजित निर्माण भूस्खलन के प्रमुख कारण हैं।
भारत में सर्वाधिक भूस्खलन-प्रवण क्षेत्र कौन-से हैं?
हिमालय (उत्तराखंड, हिमाचल), पूर्वोत्तर (मेघालय, असम) और पश्चिमी घाट (केरल, कर्नाटक) सर्वाधिक भूस्खलन-संवेदनशील क्षेत्र हैं।