UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत में धार्मिक दृष्टिकोण पर सर्वेक्षण — Pew Research निष्कर्ष और UPSC विश्लेषण

Pew Research सर्वेक्षण "भारत में धर्म: सहिष्णुता और पृथक्करण" के मुख्य निष्कर्ष, धार्मिक राष्ट्रवाद, आहार पहचान, सांप्रदायिकता और 2024-26 के घटनाक्रम पर UPSC भारतीय समाज गाइड।

Survey on Religious Attitudes in India — Pew Research Findings and UPSC Analysis (UPSC Indian Society) — UPSC featured image

जब वाशिंगटन स्थित Pew Research Centre ने 2021 में “भारत में धर्म: सहिष्णुता और पृथक्करण” रिपोर्ट जारी की, तो उसने एक ऐसा निष्कर्ष प्रस्तुत किया जिस पर भारतीय समाजशास्त्रियों ने लंबे समय से बहस की थी परंतु शायद ही कभी मात्रा में आंकी थी: भारत में सभी धर्मों के लोग खुद को गहरे धार्मिक और गहरे सहिष्णु बताते हैं, फिर भी वे अपने धार्मिक समुदाय के भीतर रहना, खाना, विवाह करना और मित्रता करना पसंद करते हैं। 17 भाषाओं में लगभग 30,000 आमने-सामने साक्षात्कारों पर आधारित यह सर्वेक्षण भारत में धार्मिक जीवन के बड़े पोस्ट-स्वतंत्रता अध्ययनों में से एक है।

Pew सर्वेक्षण — पद्धति और दायरा

Pew ने नवंबर 2019 से मार्च 2020 के बीच 26 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैनों का सर्वेक्षण किया। रिपोर्ट का केंद्रीय वाक्यांश — “सहिष्णुता और पृथक्करण” — एक असहज विरोधाभास प्रकट करता है: भारतीय सर्वाधिक धार्मिक स्वतंत्रता का दावा करते हैं, फिर भी धार्मिक अलगाव की सबसे मजबूत पसंद भी रखते हैं।

मुख्य निष्कर्ष 1 — धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता

सभी छह प्रमुख धार्मिक समूहों में भारी बहुमत ने बताया कि वे अपने धर्म का पालन करने के लिए “बहुत स्वतंत्र” महसूस करते हैं, अन्य धर्मों के लोग भी स्वतंत्र हैं, और सभी धर्मों का सम्मान सच्चे भारतीय होने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह संविधान की धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25-28) और नेहरूवादी सर्व धर्म समभाव की दृष्टि से मेल खाता है।

मुख्य निष्कर्ष 2 — सहिष्णुता के साथ पृथक्करण

  • अंतर-धार्मिक विवाह: अधिकांश हिंदुओं (66%), मुस्लिमों (80%), सिखों और अन्य का कहना था कि अपने धर्म में विवाह बहुत महत्वपूर्ण है।
  • मित्रता: अधिकांश का कहना था कि उनके करीबी दोस्त मुख्यतः उनके ही धर्म के हैं।
  • आहार पहचान: हिंदुओं में गोमांस न खाना और मुस्लिमों में सूअर का मांस न खाना धार्मिक पहचान के मज़बूत चिह्न।

मुख्य निष्कर्ष 3 — धर्म और राष्ट्रीय पहचान

  • हिंदू धर्म और भारतीयता: 64% हिंदुओं ने कहा कि सच्चे भारतीय होने के लिए हिंदू होना जरूरी है।
  • हिंदी और पहचान: 59% हिंदुओं ने हिंदी बोलना सच्चे भारतीय होने के लिए महत्वपूर्ण माना।
  • ये आँकड़े धार्मिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच की धुंधली रेखा दिखाते हैं।

UPSC प्रासंगिकता

GS I (भारतीय समाज) और GS II (शासन) के लिए Pew सर्वेक्षण के आँकड़े “सहिष्णुता और पृथक्करण” के विरोधाभास, सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता पर प्रश्नों में उपयोगी हैं। प्रश्न पूछ सकते हैं: “Pew सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आलोक में भारतीय समाज में सहिष्णुता और विभाजन की प्रकृति का विश्लेषण करें।”

सामान्य प्रश्न

Pew Research सर्वेक्षण कब आयोजित हुआ?

Pew Research सर्वेक्षण नवंबर 2019 से मार्च 2020 के बीच 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 30,000 साक्षात्कारों पर आधारित था।

सर्वेक्षण का केंद्रीय विरोधाभास क्या है?

भारतीय सर्वाधिक धार्मिक स्वतंत्रता का दावा करते हैं, फिर भी अपने धर्म के भीतर रहने, खाने और विवाह करने की सबसे मजबूत पसंद रखते हैं — ‘सहिष्णुता और पृथक्करण’।

अंतर-धार्मिक विवाह पर क्या निष्कर्ष था?

अधिकांश हिंदुओं (66%), मुस्लिमों (80%) का मानना था कि अपने धर्म में विवाह बहुत महत्वपूर्ण है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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