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भारत में गरीबी रेखा अनुमान (यूपीएससी अर्थव्यवस्था)

भारत में गरीबी रेखा कैसे मापी जाती है? तेंदुलकर, रंगराजन समितियाँ, बहुआयामी गरीबी सूचकांक, HCES 2022-23 और यूपीएससी GS-III संदर्भ।

Poverty Line Estimates in India (UPSC Economy) — UPSC featured image

भारत में गरीबी रेखा (Poverty Line) वह न्यूनतम व्यय स्तर है जिसके नीचे एक व्यक्ति को गरीब माना जाता है। गरीबी रेखा का निर्धारण सामाजिक नीति, बजट आवंटन और कल्याण लक्ष्यीकरण के लिए अनिवार्य है।

प्रमुख समितियाँ और अनुमान

तेंदुलकर समिति (2009)

  • कैलोरी से आगे बढ़कर कुल उपभोग व्यय को आधार बनाया।
  • 2011-12: ग्रामीण — ₹816/माह; शहरी — ₹1,000/माह।
  • गरीबी अनुपात: ~21.9%।

रंगराजन समिति (2014)

  • उच्च रेखा: ग्रामीण — ₹972/माह; शहरी — ₹1,407/माह।
  • गरीबी अनुपात: ~29.5% — तेंदुलकर से अधिक।

बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI)

UNDP और OPHI द्वारा जारी; स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 10 संकेतकों पर आधारित।

  • 2005-06 में 55.1% बहुआयामी गरीब।
  • 2019-21 में: ~14.96%।
  • 2005-2021 के बीच 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर।

विश्व बैंक की गरीबी रेखा

  • अत्यधिक गरीबी: $2.15/दिन (PPP 2017)।
  • निम्न-मध्यम आय: $3.65/दिन।

प्रमुख कार्यक्रम

  • MGNREGS — 100 दिन रोजगार गारंटी।
  • PM-KISAN — ₹6,000/वर्ष।
  • PMGKAY — मुफ्त राशन (दिसंबर 2028 तक बढ़ाया)।
  • Ayushman Bharat — स्वास्थ्य बीमा।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

  • HCES 2022-23 (घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण) — 2024 में जारी; 11 वर्ष बाद।
  • नई MPI पद्धति पर विचार।

यूपीएससी प्रासंगिकता

  • GS-III: समावेशी वृद्धि, सरकारी बजट।
  • प्रारंभिक: तेंदुलकर और रंगराजन रेखाएँ; MPI के तीन आयाम।
  • मुख्य: “भारत में गरीबी मापन की विधियों की तुलना करें।”

भारत ने 41.5 करोड़ लोगों को MPI गरीबी से बाहर निकालने में उल्लेखनीय सफलता पाई है। परंतु मापन पद्धति नवीनीकरण, शहरी गरीबी और आय असमानता नीतिगत प्राथमिकताएँ बनी हुई हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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