गरीबी — भोजन, वस्त्र, आवास जैसी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति में असमर्थता — भारत की सबसे बड़ी विकास चुनौती रही है। स्वतंत्रता के बाद से भारत ने गरीबी कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) — जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर शामिल हैं — एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
गरीबी का मापन: विभिन्न पद्धतियाँ
| समिति/पद्धति | गरीबी रेखा | अनुमान |
|---|---|---|
| तेंदुलकर समिति (2009) | ग्रामीण ₹816/माह, शहरी ₹1,000/माह (2011-12) | 21.9% (2011-12) |
| रंगराजन समिति (2014) | ग्रामीण ₹972/माह, शहरी ₹1,407/माह (2011-12) | 29.5% (2011-12) |
| NITI Aayog MPI (2023) | स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर — 12 सूचक | 11.28% (2022-23) |
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI)
NITI Aayog द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक में 3 आयाम (स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर) और 12 सूचक शामिल हैं। 2022-23 रिपोर्ट के अनुसार:
- 2013-14 में 29.17% से घटकर 2022-23 में 11.28% हो गई।
- 24.82 करोड़ लोग 10 वर्षों में गरीबी से बाहर निकले।
- बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश में अभी भी उच्च गरीबी।
गरीबी के कारण
- कृषि पर अत्यधिक निर्भरता: ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा छोटी और कम उत्पादक जोत पर निर्भर।
- शिक्षा और स्वास्थ्य का अभाव: मानव पूँजी की कमी आजीविका के अवसर सीमित करती है।
- जाति और लिंग आधारित भेदभाव: SC, ST और महिलाएँ गरीबी में अधिक।
- भूमि-हीनता और परिसंपत्ति असमानता।
गरीबी उन्मूलन की प्रमुख योजनाएँ
| योजना | उद्देश्य |
|---|---|
| MGNREGA | 100 दिन रोजगार गारंटी |
| PM-KISAN | किसानों को ₹6,000/वर्ष |
| PM आवास योजना | गरीबों को आवास |
| PM-JAY (आयुष्मान भारत) | ₹5 लाख तक मुफ्त स्वास्थ्य बीमा |
| NFSA/पीडीएस | सब्सिडीयुक्त अनाज |
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS II और GS III दोनों में गरीबी भारतीय समाज, समावेशी विकास, कल्याण योजनाएँ और सामाजिक न्याय के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण है। तेंदुलकर समिति, रंगराजन समिति, MPI डेटा और योजनाओं की आलोचना — सभी परीक्षा में आते हैं।