भारत में प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, किंतु इसका केवल 20-25% ही वैज्ञानिक तरीके से निपटाया जाता है। शेष कचरा अनियंत्रित लैंडफिल, नदियों और सार्वजनिक स्थानों में फेंका जाता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
ठोस अपशिष्ट के प्रकार
- घरेलू अपशिष्ट — रसोई कचरा, पैकेजिंग सामग्री।
- वाणिज्यिक अपशिष्ट — बाज़ार, दुकानें।
- औद्योगिक अपशिष्ट — कारखाने।
- जैव-चिकित्सा अपशिष्ट — अस्पताल।
- ई-अपशिष्ट — इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
- निर्माण अपशिष्ट — भवन निर्माण/ध्वंस।
SWM नियम 2016
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम 2016 भारत का प्रमुख नीतिगत दस्तावेज़ है। इसके मुख्य प्रावधान:
- अपशिष्ट का स्रोत पर पृथक्करण (गीला, सूखा, खतरनाक)।
- उत्पादक दायित्व — निर्माता, आयातक और ब्रांड मालिकों की जिम्मेदारी।
- डंपसाइट बंद कर वैज्ञानिक लैंडफिल की स्थापना।
- कचरा बीनने वालों (ragpickers) को कार्यबल में शामिल करना।
स्वच्छ भारत अभियान
2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में जागरूकता बढ़ाई। इसके तहत:
- शौचालय निर्माण।
- खुले में शौच से मुक्ति (ODF)।
- शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुधार।
प्रबंधन की प्रमुख विधियाँ
- खाद बनाना (Composting) — जैविक अपशिष्ट को उर्वरक में बदलना।
- बायोगैस — जैविक अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन।
- ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (Waste-to-Energy) — अपशिष्ट जलाकर बिजली उत्पादन।
- पुनर्चक्रण — धातु, प्लास्टिक, कागज़ का पुनर्उपयोग।
- लैंडफिल — अंतिम विकल्प।
चुनौतियाँ
- नागरिकों में जागरूकता का अभाव।
- स्रोत पर पृथक्करण का कमज़ोर क्रियान्वयन।
- अनौपचारिक क्षेत्र (कचरा बीनने वाले) का अपर्याप्त एकीकरण।
- ई-अपशिष्ट और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट का अनुचित निपटान।
- शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता की कमी।
यूपीएससी प्रासंगिकता
यूपीएससी GS III और पर्यावरण पेपर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन महत्त्वपूर्ण है। SWM नियम 2016, स्वच्छ भारत अभियान, ई-अपशिष्ट और प्लास्टिक प्रदूषण से जोड़कर उत्तर दें।
सामान्य प्रश्न
SWM नियम 2016 के मुख्य प्रावधान क्या हैं?
SWM नियम 2016 में स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण, उत्पादक दायित्व, वैज्ञानिक लैंडफिल और कचरा बीनने वालों को कार्यबल में शामिल करने के प्रावधान हैं।
भारत में ठोस अपशिष्ट की मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
स्रोत पर पृथक्करण का कमज़ोर क्रियान्वयन, जागरूकता की कमी, ई-अपशिष्ट का अनुचित निपटान और शहरी निकायों की सीमित क्षमता प्रमुख चुनौतियाँ हैं।