वनाग्नि (Forest Fire) एक प्राकृतिक और मानव-जनित दोनों प्रकार की आपदा है। भारत में प्रत्येक वर्ष मार्च-मई में वनाग्नि की घटनाएँ बढ़ जाती हैं। FSI (Forest Survey of India) के अनुसार भारत का 36% वन क्षेत्र आग के प्रति संवेदनशील है।
भारत में वनाग्नि के प्रमुख क्षेत्र
- उत्तराखंड — चीड़ के पेड़ों की सूखी पत्तियाँ (Pirul) आग का प्रमुख कारण।
- हिमाचल प्रदेश।
- पूर्वोत्तर भारत — झूम खेती।
- ओडिशा और मध्य प्रदेश।
- पश्चिमी घाट।
वनाग्नि के कारण
प्राकृतिक कारण
- गर्मी और सूखा।
- बिजली गिरना।
- जलवायु परिवर्तन — तापमान वृद्धि।
मानव-जनित कारण
- झूम खेती (Jhum Cultivation) — पूर्वोत्तर में जंगल जलाकर खेती।
- शिकारियों द्वारा जंगल जलाना।
- वन उपज एकत्र करने वालों की लापरवाही।
- आगजनी।
- रेलवे इंजन की चिंगारी।
वनाग्नि के प्रभाव
- जैव-विविधता का नुकसान — वन्यजीव, वनस्पति।
- कार्बन उत्सर्जन — जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा।
- मृदा क्षरण और भूस्खलन।
- जल स्रोतों का क्षरण।
- वायु प्रदूषण।
- स्थानीय समुदायों की आजीविका पर असर।
वनाग्नि प्रबंधन
- VIIRS (Visible Infrared Imaging Radiometer Suite) — उपग्रह से निगरानी।
- Forest Fire Alert System — FSI का अलर्ट तंत्र।
- फायर लाइन — आग की गति रोकने के लिए पट्टी।
- जन-भागीदारी — ग्राम वन समितियाँ।
- नियंत्रित जलाई (Controlled Burning) — निर्धारित क्षेत्रों में।
यूपीएससी प्रासंगिकता
पर्यावरण पेपर और GS III में वनाग्नि, जैव-विविधता क्षरण और जलवायु परिवर्तन के प्रश्नों में यह विषय प्रासंगिक है।