भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। 2024-25 में 7% से अधिक की वृद्धि दर के साथ भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इस विकास के पीछे अनेक संरचनात्मक और नीतिगत चालक हैं।
भारतीय GDP के प्रमुख घटक
GDP = C (उपभोग) + I (निवेश) + G (सरकारी व्यय) + NX (शुद्ध निर्यात)।
उपभोग (C)
भारत की GDP में निजी उपभोग ~60% है। बढ़ती मध्यम वर्ग की आबादी, शहरीकरण और डिजिटल भुगतान ने उपभोग को बढ़ाया है।
पूँजी निर्माण (I)
पूँजीगत व्यय (CapEx) में वृद्धि — सरकार का बुनियादी ढाँचे पर ₹11.11 लाख करोड़ (2024-25 बजट)। FDI, FPI और निजी निवेश आकर्षित करना प्रमुख लक्ष्य है।
सरकारी व्यय (G)
PM Gati Shakti, National Infrastructure Pipeline (NIP) और पूँजीगत व्यय गुणक (Multiplier Effect) के माध्यम से समग्र माँग बढ़ाना।
क्षेत्रवार विकास चालक
डिजिटल अर्थव्यवस्था
UPI, ONDC, India Stack। स्टार्टअप पारिस्थितिकी — 1 लाख से अधिक DPIIT-पंजीकृत स्टार्टअप। Fintech, Ed-tech, Health-tech क्षेत्र।
विनिर्माण
PLI योजना 14 क्षेत्रों में। China+1 रणनीति से भारत को फायदा। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, रक्षा उपकरण।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
PM-KISAN, MNREGA, फसल बीमा। कृषि GDP ~18%। खाद्य प्रसंस्करण में निवेश।
संरचनात्मक सुधार
- GST: एकीकृत बाज़ार।
- IBC 2016: दिवाला समाधान।
- RERA: रियल एस्टेट पारदर्शिता।
- Ease of Doing Business सुधार।
चुनौतियाँ
- रोज़गार की गुणवत्ता — अनौपचारिक क्षेत्र का वर्चस्व।
- कृषि संकट — MSP, कृषि ऋण।
- स्वास्थ्य और शिक्षा में कम सार्वजनिक व्यय।
- असमानता — Gini coefficient बढ़ रहा है।
यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
- विकास दर: 7%+ (FY25)।
- चालक: उपभोग, CapEx, PLI, डिजिटल।
- संरचनात्मक सुधार: GST, IBC, RERA।
- चुनौती: रोज़गार, असमानता, कृषि।
- लक्ष्य: 2030 तक $7 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था।