UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

चंद्रयान-3 मिशन: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की ऐतिहासिक लैंडिंग (यूपीएससी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

चंद्रयान-3 पर यूपीएससी मार्गदर्शिका — विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर, पेलोड, वैज्ञानिक उपलब्धियां तथा 2024-26 तक की अनुवर्ती गतिविधियां, जिनमें चंद्रयान-4 शामिल है।

Chandrayaan-3 Mission: India's Historic Lunar South Pole Landing (UPSC Science & Tech) — UPSC featured image

23 अगस्त 2023 को, ISRO के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग की और इस तरह भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ और चीन के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बना — और दक्षिणी ध्रुव के निकट ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश। चंद्रयान-3 ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत अगली पीढ़ी के चंद्र मिशनों के लिए मजबूत आधार तैयार किया। यूपीएससी जीएस पेपर III की दृष्टि से यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण समकालीन उपलब्धियों में से एक है।

चंद्रयान-3 क्या है?

चंद्रयान-3 चंद्रयान-2 (2019) का अनुवर्ती मिशन था, जिसका विक्रम लैंडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें निम्नलिखित घटक शामिल थे:

  • एक स्वदेशी प्रोपल्शन मॉड्यूल (Propulsion Module) जो लैंडर-रोवर युगल को चंद्र कक्षा तक पहुंचाने वाला था।
  • चार थ्रस्टर्स तथा उन्नत हैज़र्ड डिटेक्शन प्रणाली से युक्त विक्रम लैंडर
  • चंद्र सतह पर गति के लिए छह पहियों वाला 26 किलोग्राम का प्रज्ञान रोवर

प्रोपल्शन मॉड्यूल ISRO की एकीकृत मॉड्यूलर प्रणोदन प्रणाली से व्युत्पन्न था और इसमें पृथ्वी का बाह्य-ग्रह सादृश्य के रूप में अध्ययन करने हेतु एक समर्पित वैज्ञानिक पेलोड (SHAPE) भी सम्मिलित था।

मिशन के उद्देश्य

  • चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग का प्रदर्शन।
  • चंद्रमा पर रोवर परिचालन करना।
  • स्थल पर वैज्ञानिक प्रयोगों का संचालन।

लैंडिंग स्थल

लैंडिंग स्थल चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से लगभग 600 किलोमीटर दूर, निकट पक्ष पर स्थित है। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने बाद में इस स्थल का नाम “शिव शक्ति प्वाइंट” (Statio Shiv Shakti) स्वीकृत किया। इस सफलता के स्मरणार्थ प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाता है।

मिशन समयरेखा

  • 14 जुलाई 2023 — सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से LVM3-M4 के माध्यम से प्रक्षेपण।
  • 5 अगस्त 2023 — चंद्र कक्षा में प्रवेश।
  • 23 अगस्त 2023 — विक्रम का संचालित अवतरण और सॉफ्ट लैंडिंग।
  • 24 अगस्त 2023 — प्रज्ञान रोवर की तैनाती।
  • 2-4 सितंबर 2023 — एक चंद्र दिवस (लगभग 14 पृथ्वी दिवस) के समापन पर विक्रम और प्रज्ञान को स्लीप मोड में रखा गया। चंद्र रात्रि के बाद दोनों पुनः सक्रिय नहीं हो सके।

चंद्रयान-3 की उन्नत प्रौद्योगिकियां

प्रोपल्शन मॉड्यूल पेलोड

  • SHAPE (Spectro-polarimetry of Habitable Planet Earth) — पृथ्वी से परावर्तित ध्रुवीकृत प्रकाश का अध्ययन करता है ताकि रहने योग्य बाह्य-ग्रहों की खोज को अंशशोधित किया जा सके।

लैंडर पेलोड

  • ChaSTE (Chandra’s Surface Thermophysical Experiment) — चंद्र रेगोलिथ की ऊपरी कुछ सेंटीमीटर परतों में तापीय चालकता और तापमान प्रवणता मापी।
  • ILSA (Instrument for Lunar Seismic Activity) — चंद्र भूकंपों का पता लगाया, और विशेष रूप से अगस्त 2023 के अंत में एक स्पष्ट प्राकृतिक चंद्र भूकंपीय घटना दर्ज की।
  • RAMBHA (Radio Anatomy of Moon Bound Hypersensitive Ionosphere and Atmosphere) — सतह के निकट प्लाज़्मा घनत्व का मापन।
  • Langmuir Probe — प्लाज़्मा एवं इलेक्ट्रॉन घनत्व में परिवर्तनों का आकलन।
  • Laser Retroreflector Array (NASA से) — चंद्र गतिकी के दीर्घकालिक अध्ययन हेतु लेज़र रेंजिंग को संभव बनाता है।

रोवर पेलोड

  • APXS (Alpha Particle X-ray Spectrometer) — चंद्र मृदा का तत्व विश्लेषण।
  • LIBS (Laser Induced Breakdown Spectroscopy) — चंद्र रेगोलिथ में सल्फर, एल्युमीनियम, लोहा, कैल्शियम, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन का पता लगाया। विशेष रूप से सल्फर की उपस्थिति की स्थल पर पुष्टि की।

वैज्ञानिक परिणाम

  • चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सल्फर की पहली स्थलीय पुष्टि — यह स्थल पर संसाधन उपयोग (ISRU) के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रासंगिक खोज है।
  • सतह की तापीय रूपरेखा का प्रत्यक्ष मापन, जिसमें सतह और कुछ सेंटीमीटर नीचे के बीच लगभग 60 डिग्री सेल्सियस का तापीय अंतर देखा गया।
  • संभावित प्राकृतिक चंद्र भूकंपीय घटना का पता लगाना।
  • ऐसे प्रौद्योगिकी प्रदर्शन जो चंद्रयान-4 तथा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन में सहायक होंगे।

महत्व

  • भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला राष्ट्र बनाया — यह क्षेत्र जल बर्फ और स्थायी रूप से छायांकित गड्ढों के लिए विशेष रूप से रुचि का है।
  • उल्लेखनीय रूप से कम लागत में ISRO की क्षमता का प्रदर्शन — यह मिशन 75 मिलियन अमेरिकी डॉलर से कम में पूरा हुआ।
  • द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अंतरिक्ष सहयोगों में भारत की स्थिति सशक्त की (जून 2023 में Artemis Accords पर हस्ताक्षर)।
  • भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स में निजी निवेश की लहर पैदा की।

भारत की स्थिति

चंद्रयान-3 ने भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के साथ चंद्रमा पर लैंडिंग करने वाले एकमात्र राष्ट्रों की श्रेणी में स्थापित किया, साथ ही कम लागत के गहन अंतरिक्ष मिशनों में नेतृत्व को भी सुदृढ़ किया। इसने एक सतत चंद्र कार्यक्रम की नींव रखी।

नैतिक एवं नीतिगत चिंताएं

  • ग्रहीय सुरक्षा — चंद्रमा को जैविक या रासायनिक संदूषण से बचाना।
  • संसाधन शासन — Outer Space Treaty के अ-अधिग्रहण सिद्धांत को स्थलीय संसाधन उपयोग तक विस्तारित करना।
  • अंतरिक्ष मलबा — समाप्त प्रोपल्शन मॉड्यूल और दुर्घटना क्षेत्रों का प्रबंधन।
  • विकासशील देशों के शोधकर्ताओं के लिए चंद्र विज्ञान संबंधी आंकड़ों तक समान पहुंच

हाल के घटनाक्रम (2024-26)

  • AI Action Summit, पेरिस (फरवरी 2025) — भारत ने अनुप्रयुक्त गहन-अंतरिक्ष विज्ञान के उदाहरण के रूप में चंद्रयान-3 के आंकड़ों के AI विश्लेषण को प्रदर्शित किया।
  • India Semiconductor Mission — चंद्रयान-3 के इलेक्ट्रॉनिक्स से प्राप्त सबक धोलेरा और साणंद संयंत्रों में अंतरिक्ष-श्रेणी चिप डिज़ाइन रोडमैप का आधार बन रहे हैं।
  • चंद्रयान-4 — सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2,104.06 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित; यह दोहरे प्रक्षेपण वाला चंद्र नमूना-वापसी मिशन है, जिसका लक्ष्य लगभग 2027 है। इसमें दो LVM3 प्रक्षेपण, चंद्र मिलन एवं डॉकिंग सम्मिलित होंगे।
  • गगनयान — चंद्रयान की लैंडिंग गतिकी से प्राप्त विरासत मानव-रेटेड पुनःप्रवेश डिज़ाइन में सहायक है।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन — भविष्य के चंद्र QKD प्रयोगों पर विचार चल रहा है।
  • DPDP Act चंद्र आंकड़ों पर सीधे प्रभाव नहीं डालता, परंतु ISRO की डेटा साझा करने की प्रथाओं को निर्देशित करता है।
  • चंद्रयान-5 / LUPEX — जापान की JAXA के साथ संयुक्त मिशन, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जल बर्फ पर केंद्रित है, 2024 में घोषित।

यूपीएससी प्रासंगिकता

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रक्षेपण यान (LVM3), लैंडिंग तिथि (23 अगस्त 2023), लैंडिंग क्षेत्र (दक्षिणी ध्रुव के निकट), स्थल का नाम (शिव शक्ति प्वाइंट) तथा पेलोड के संक्षिप्ताक्षर (ChaSTE, ILSA, RAMBHA, APXS, LIBS, SHAPE) स्मरण रखें। जीएस III मुख्य परीक्षा में चंद्रयान-3 स्वदेशी क्षमता, मितव्ययी नवाचार, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तथा रणनीतिक अंतरिक्ष मुद्रा के लिए एक आदर्श उत्तर-टेम्पलेट है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (23 अगस्त) भी प्रारंभिक एवं निबंध के लिए उपयोगी सामग्री है। नीतिशास्त्र तथा जीएस II के लिए ग्रहीय सुरक्षा एवं अंतरिक्ष शासन के पहलू उत्तरों में गहराई जोड़ते हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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