भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधार ने 2020 के बाद एक नया रूप लिया है। IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) और NSIL (NewSpace India Limited) इस सुधार के दो प्रमुख स्तंभ हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोला है।
भारत की अंतरिक्ष सुधार संरचना
| संस्था | भूमिका |
|---|---|
| अंतरिक्ष विभाग (DoS) | नीति-निर्माण, ISRO और अन्य निकायों का पर्यवेक्षण |
| ISRO | R&D, प्रौद्योगिकी विकास, मिशन निष्पादन; निजी क्षेत्र को मेंटर करना |
| IN-SPACe | निजी/गैर-सरकारी संस्थाओं (NGE) के लिए नियामक और प्रमोटर |
| NSIL | ISRO की वाणिज्यिक शाखा; प्रक्षेपण सेवाएँ, उपग्रह निर्माण |
IN-SPACe की स्थापना और कार्य
IN-SPACe की स्थापना 2020 में हुई। यह:
- निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए प्राधिकरण (Authorization) प्रदान करता है।
- ISRO की सुविधाओं — लॉन्च पैड, परीक्षण सुविधाएँ — का उचित उपयोग सक्षम करता है।
- अंतरिक्ष स्टार्टअप्स का प्रमोशन और मार्गदर्शन करता है।
- उपग्रह संचालन, रिमोट सेंसिंग, प्रक्षेपण — सभी गतिविधियों को एकल खिड़की से मंजूरी।
NSIL की भूमिका
NewSpace India Limited (NSIL) ISRO की वाणिज्यिक शाखा है जो 2019 में Antrix Corporation के विकल्प के रूप में बनाई गई। NSIL:
- वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाएँ प्रदान करती है।
- उपग्रह निर्माण और बिक्री करती है।
- PSLV और GSLV के माध्यम से विदेशी उपग्रह छोड़ती है।
अंतरिक्ष नीति 2023
भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 ने स्पष्ट किया कि:
- ISRO अब R&D और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पर केंद्रित रहेगा।
- परिचालन प्रक्षेपण और वाणिज्यिक गतिविधियाँ NSIL और निजी क्षेत्र करेंगे।
- IN-SPACe एकल नियामक की भूमिका निभाएगा।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS III में IN-SPACe, NSIL और भारत की अंतरिक्ष नीति 2023 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, आत्मनिर्भर भारत और निजी-सार्वजनिक भागीदारी के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण हैं। इन संस्थाओं के बीच अंतर और अंतरिक्ष स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रश्न पूछे जाते हैं।