जवाहरलाल नेहरू (1889-1964) आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक हैं और उनकी नैतिक दृष्टि उस राज्य को आज भी आकार देती रही है जिसे उन्होंने बनाने में मदद की। 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में जन्मे, वे 1919 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय सहयोगी बने। 1947 में ब्रिटिश शासन समाप्त होने पर वे स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने — एक पद जो उन्होंने 27 मई 1964 को नई दिल्ली में निधन तक संभाला। UPSC GS-IV के लिए नेहरू का लोकतांत्रिक समाजवाद, स्वतंत्रता की समन्वित परिकल्पना और धर्मनिरपेक्षता विशेष महत्त्व रखते हैं।
लोकतांत्रिक समाजवाद पर विचार
नेहरू की राजनैतिक नैतिकता दो चीजों को एक साथ थामे रखने का सतत प्रयास था — लोकतंत्र और समाजवाद। उनकी स्थिति यह थी कि ये दोनों प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार हैं।
- लोकतंत्र और समाजवाद एक और अविभाज्य हैं।
- सच्चे समाजवाद के बिना सच्चा लोकतंत्र नहीं हो सकता।
- सच्चे लोकतंत्र के बिना सच्चा समाजवाद नहीं हो सकता।
नेहरू के अनुसार जो लोकतंत्र अपने अधिकांश नागरिकों को आर्थिक रूप से आश्रित छोड़ देता है, वह औपचारिक रूप से मुक्त तो है, किंतु वास्तव में खोखला है। और जो समाजवाद नागरिक स्वतंत्रताओं, स्वतंत्र चुनावों और स्वतंत्र न्यायपालिका को दबाता है, वह ज़बरदस्ती का नया रूप बन जाता है।
इस दर्शन ने स्वतंत्र भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था को आकार दिया — पंचवर्षीय योजनाएँ, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, भूमि सुधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा, और प्रगतिशील कराधान।
स्वतंत्रता पर विचार
नेहरू ने स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्त्व दिया। उनके लिए स्वतंत्रता एकल नहीं, बहुस्तरीय वास्तविकता थी:
- वाणी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
- संगठन की स्वतंत्रता।
- बौद्धिक, कलात्मक, वैज्ञानिक और राजनैतिक सृजनशीलता की स्वतंत्रता।
नेहरू ने राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता की समन्वित परिकल्पना प्रस्तुत की। कोई आर्थिक रूप से दरिद्र होते हुए राजनैतिक रूप से स्वतंत्र नहीं हो सकता। तीनों स्वतंत्रताएँ परस्पर निर्भर हैं। यह परिकल्पना अमर्त्य सेन की सामर्थ्य-दृष्टि (capabilities approach) और सकारात्मक स्वतंत्रता की अवधारणाओं का पूर्वाभास करती है।
धर्मनिरपेक्षता पर विचार
तर्कवाद और मानवीय मूल्य
नेहरू शास्त्रीय अर्थ में तर्कवादी थे। उन्हें ज्ञात था कि मानवीय मूल्य धार्मिक रूढ़ियों से श्रेष्ठ हैं। इस प्रतिबद्धता के लिए धर्म के प्रति शत्रुता की आवश्यकता नहीं थी — वे धार्मिक भावनाओं के प्रति सम्मानजनक थे। किंतु उनकी स्पष्ट मान्यता थी कि राज्य का शासन तर्क, प्रमाण और नागरिकों के कल्याण पर आधारित होना चाहिए।
वैज्ञानिक चेतना (Scientific Temper)
नेहरू की सबसे स्थायी नैतिक देन है वैज्ञानिक चेतना की अवधारणा। यह केवल प्रयोगशालाओं के प्रति रवैया नहीं है — यह एक नैतिक दृष्टिकोण है: बिना प्रमाण के न मानना, प्रमाण बदलने पर मन बदलने की तैयारी रखना। यह वाक्यांश संविधान में अनुच्छेद 51A(h) के माध्यम से स्थायी हुआ — वैज्ञानिक चेतना, मानवतावाद और जिज्ञासा व सुधार की भावना विकसित करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
समान नागरिक संहिता
नेहरू की धर्मनिरपेक्षता की परिकल्पना में भारत के लिए एक समान नागरिक संहिता का स्थान था। वे विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग कानूनों को अपने धर्मनिरपेक्ष समाज के आदर्श के साथ असंगत मानते थे। संविधान के अनुच्छेद 44 (DPSP) में समान नागरिक संहिता के प्रयास की परिकल्पना इसी विचार को प्रतिध्वनित करती है।
लोकसेवक के लिए नेहरू
- समन्वय बनाए रखें। किसी एकल मूल्य — गति, दक्षता, निष्ठा — को समानता, गरिमा या विधिसम्मतता पर हावी न होने दें।
- स्वतंत्रता को बहुस्तरीय मानें। जो नीति राजनैतिक स्वतंत्रता देती है पर आर्थिक सुरक्षा को कमजोर करती है, वह सफल नहीं है।
- वैज्ञानिक चेतना विकसित करें। विभागीय कार्य में साक्ष्य-आधारित तर्क को डिफ़ॉल्ट बनाएँ।
- धर्मनिरपेक्ष लोक-नीति की रक्षा करें। प्रशासनिक निर्णय धार्मिक पूर्वाग्रह से मुक्त हों।
UPSC प्रासंगिकता
नेहरू GS-IV में लोकतांत्रिक मूल्यों, समाजवाद, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, वैज्ञानिक चेतना और भारतीय लोक प्रशासन की नैतिक नींव पर आने वाले प्रश्नों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। जो उम्मीदवार नेहरू की समन्वित स्वतंत्रता की परिकल्पना, वैज्ञानिक चेतना और लोकतंत्र-समाजवाद की अविभाज्यता का कुशलता से उपयोग कर सके, वह परीक्षक की अपेक्षाओं पर खरा उतरता है।
सामान्य प्रश्न
नेहरू के लोकतांत्रिक समाजवाद का क्या अर्थ है?
नेहरू का मानना था कि लोकतंत्र और समाजवाद एक और अविभाज्य हैं। सच्चे लोकतंत्र के बिना सच्चा समाजवाद नहीं, और सच्चे समाजवाद के बिना सच्चा लोकतंत्र नहीं। यह दृष्टिकोण स्वतंत्र भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था का आधार बना।
नेहरू की वैज्ञानिक चेतना (Scientific Temper) क्या है?
वैज्ञानिक चेतना बिना प्रमाण के न मानने, प्रमाण बदलने पर मन बदलने, और सार्वजनिक रूप से परखे जा सकने वाले तर्क-पद्धति की प्रतिबद्धता है। यह अनुच्छेद 51A(h) के तहत संविधान में मौलिक कर्तव्य के रूप में स्थापित है।
नेहरू की स्वतंत्रता की समन्वित परिकल्पना क्या थी?
नेहरू ने राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता को परस्पर निर्भर बताया। कोई आर्थिक दरिद्रता में राजनैतिक रूप से वास्तव में स्वतंत्र नहीं हो सकता। यह दृष्टि अमर्त्य सेन की सामर्थ्य-दृष्टि का पूर्वाभास करती है।