UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

जॉन लॉक — प्राकृतिक अधिकार, सामाजिक अनुबंध और UPSC नोट्स

जॉन लॉक स्वतंत्रता के दार्शनिक हैं। उनके जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति के प्राकृतिक अधिकार, सीमित सरकार का सिद्धांत और सहिष्णुता की अवधारणा ने भारतीय संविधान के मूल अधिकारों को प्रभावित किया है।

John Locke: Natural Rights and Limited Government (UPSC Ethics — GS IV) — UPSC featured image

यदि हॉब्स व्यवस्था के दार्शनिक हैं, तो जॉन लॉक (John Locke) स्वतंत्रता के दार्शनिक हैं। लॉक ने अपने पूर्ववर्ती की सामाजिक अनुबंध की वास्तुकला तो साझा की, किंतु उसे बिल्कुल अलग सामग्री से भरा। लॉक के लिए राज्य व्यक्ति को निगल नहीं लेता; वह व्यक्ति के पूर्व-अस्तित्वी अधिकारों की रक्षा के लिए अस्तित्व में आता है। इस उलटाव ने अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा, फ्रांसीसी मानव अधिकारों की घोषणा और भारतीय संविधान के मूल अधिकार अध्याय को आकार दिया। UPSC GS-IV के लिए लॉक अपरिहार्य हैं।

लॉक का अनुभववाद: तबुला रासा (Tabula Rasa)

अरस्तू की तरह लॉक अनुभववादी थे। उन्होंने कहा कि जन्म के समय मन tabula rasa — एक कोरी स्लेट — होती है। हमारे चरित्र का हर पहलू समाज में बढ़ते हुए इंद्रियों द्वारा अवलोकित और सीखा जाता है।

  • तबुला रासा की अवधारणा प्रकृति बनाम पालन-पोषण की बहस में पालन-पोषण की ओर झुकती है — शिक्षा, संस्थाएँ और लोक विमर्श नैतिक महत्त्व पाते हैं।
  • यह स्वतंत्र इच्छा की संभावना भी खोलती है — हम पूर्वनिर्धारित नहीं हैं; हम सीख और चुन सकते हैं।

प्राकृतिक अधिकार: जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति

लॉक के अधिकारों का सिद्धांत स्वयं से आरम्भ होता है। व्यक्ति को स्वयं पर शासन करने का अधिकार है। बाह्य रूप से संपत्ति का अधिकार श्रम में निहित है — जब कोई व्यक्ति प्रकृति की देन के साथ अपना श्रम मिलाता है, तो उत्पाद उसका बन जाता है।

  1. जीवन का अधिकार।
  2. स्वतंत्रता का अधिकार।
  3. संपत्ति का अधिकार।

अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा ने इस त्रिक को थोड़े संशोधन के साथ लिया — “सुख की खोज” ने संपत्ति का स्थान लिया। भारत में अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता), अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 300A (संपत्ति) में लॉक का प्रभाव स्पष्ट है।

सहिष्णुता पर लॉक

लॉक की सहिष्णुता की अवधारणा धार्मिक संघर्ष की पृष्ठभूमि में उभरी। उन्होंने सहिष्णुता को परिभाषित किया — किसी चीज़ से आधारभूत असहमति के बावजूद उसे दबाने से इनकार। क्योंकि आत्मा व्यक्ति की है, किसी और को उस पर शासन करने का अधिकार नहीं। सहिष्णुता में सहमति की ज़रूरत नहीं; सम्मान की भी नहीं। जो मना है वह है — जबरदस्ती।

लॉक का सहिष्णुता पर निबंध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी का पूर्वज है।

सामाजिक अनुबंध: सीमित सरकार

लॉक का हॉब्स से तीव्रतम विरोध सामाजिक अनुबंध की व्याख्या में है। लॉक ने एक सीमित आकार और क्षेत्र की नम्र सरकार का तर्क दिया। उन्होंने सरकार की आवश्यकता स्वीकार की — बिना प्राधिकरण के, उन्होंने माना, राज्य हिंसा में लौट जाएँगे। इसलिए सामाजिक अनुबंध एक आपसी समझौता है जिसमें लोग अपने कुछ (सभी नहीं) अधिकार सुरक्षा और कानूनी सह-अस्तित्व के बदले सरकार को सौंपते हैं।

यही लॉक की अंतर्दृष्टि है जिसे आधुनिक संविधानवाद ने आत्मसात किया: राज्य अपने नागरिकों के अधिकारों का ट्रस्टी है, स्वामी नहीं।

सरकार एक निष्पक्ष न्यायाधीश के रूप में

लॉक के अनुसार सरकार को कानून का निष्पक्ष न्यायाधीश होना चाहिए — गुटीय हितों से ऊपर। यह तटस्थता भारतीय सिविल सेवा की तटस्थता की नैतिक नींव है।

उत्तरदायी सरकार और क्रांति का अधिकार

लॉक का सबसे कट्टरपंथी दावा था: सभी वैध सामाजिक प्राधिकरण के लिए शासितों की सहमति आवश्यक है। यदि सरकार विश्वासघात करे और अधिकार कुचले, तो लोगों के पास उसे बदलने की शक्ति है — यही क्रांति का अधिकार है।

भारतीय लोकतंत्र इस अधिकार को सौम्य रूप में संस्थागत करता है: आवधिक चुनाव, स्वतंत्र अभिव्यक्ति, याचिका का अधिकार, न्यायिक उपचार।

भारतीय शासन के लिए लॉक की प्रासंगिकता

  • सीमित सरकार — अत्यधिक नियमन और लाइसेंस-परमिट राज की लॉकीय आलोचना।
  • उदार राज्य का नैतिक आधार — अधिकारों की गारंटी राज्य की कृपा नहीं; यही कारण है कि राज्य अस्तित्व में है।
  • लोग परम प्राधिकरण हैं — लोकसेवक नागरिक की सेवा करता है, मंत्री लोगों की।
  • सार्वजनिक कर्तव्य के रूप में सहिष्णुता — राज्य को बहुमत की असहमति के बावजूद विभिन्न आस्थाओं के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का स्थान बचाना है।

UPSC प्रासंगिकता

लॉक GS-IV में सर्वाधिक परीक्षा-योग्य विचारकों में हैं। अधिकार, सहिष्णुता, धर्मनिरपेक्षता, सीमित सरकार, संवैधानिक नैतिकता, या सहमति पर कोई भी प्रश्न सीधे उन्हें छूता है। उनका जीवन-स्वतंत्रता-संपत्ति का त्रिक नीति-मूल्यांकन का त्वरित विश्लेषण ढाँचा है।

सामान्य प्रश्न

लॉक की तबुला रासा (Tabula Rasa) अवधारणा क्या है?

लॉक के अनुसार जन्म के समय मन एक कोरी स्लेट होती है। हमारे व्यक्तित्व का हर पहलू अनुभव, इंद्रियों और समाज से सीखा जाता है। इससे शिक्षा और संस्थाओं का नैतिक महत्त्व बढ़ जाता है।

लॉक के तीन प्राकृतिक अधिकार कौन से हैं?

जॉन लॉक ने तीन अविच्छेद्य प्राकृतिक अधिकार बताए: (1) जीवन, (2) स्वतंत्रता, (3) संपत्ति। अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा में ‘संपत्ति’ के स्थान पर ‘सुख की खोज’ रखी गई।

लॉक का सहिष्णुता का सिद्धांत क्या है?

लॉक के अनुसार सहिष्णुता का अर्थ है — किसी विचार या आस्था से मूलभूत असहमति के बावजूद उसे जबरदस्ती दबाने से इनकार। आत्मा व्यक्ति की है, कोई बाहरी शक्ति उस पर अधिकार नहीं जमा सकती।

लॉक की ‘क्रांति का अधिकार’ की अवधारणा क्या है?

लॉक के अनुसार यदि सरकार अपने ट्रस्ट का उल्लंघन करे और नागरिकों के अधिकारों को कुचले, तो लोगों को उसे बदलने का अधिकार है। भारतीय लोकतंत्र इसे आवधिक चुनावों और न्यायिक उपचारों के रूप में संस्थागत करता है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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