UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

जे.एस. मिल — गुणात्मक उपयोगितावाद, क्षति सिद्धांत और UPSC नोट्स

जॉन स्टुअर्ट मिल ने बेन्थम के परिमाणात्मक उपयोगितावाद को गुणात्मक रूप दिया। उनका क्षति सिद्धांत (Harm Principle), नियम-उपयोगितावाद और स्वतंत्र अभिव्यक्ति की रक्षा UPSC GS-IV के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

J.S. Mill and Qualitative Utilitarianism (UPSC Ethics — GS IV) — UPSC featured image

जॉन स्टुअर्ट मिल (John Stuart Mill) को जेरेमी बेन्थम की परियोजना पूरी करने के लिए तैयार किया गया था, किंतु उन्होंने उसे चुपचाप पुनर्लिखित कर दिया। घर पर अपने पिता जेम्स मिल द्वारा बेन्थमवादी पाठ्यक्रम में शिक्षित होकर वे “महत्तम सुख के सिद्धांत” को बचपन से ही आत्मसात करते रहे। वयस्क होने पर उन्होंने कुछ असुविधाजनक प्रश्न पूछे — क्या सभी सुख वास्तव में समान हैं? क्या एक सामान्य व्यक्ति हर कार्य से पहले उपयोगितावादी गणना करे? उनके उत्तरों ने उपयोगितावाद को एक मात्रात्मक सिद्धांत से एक गुणात्मक, स्वतंत्रता-प्रेमी नैतिकता में बदल दिया।

परिमाणात्मक गणना से असहमति

मिल बेन्थम से सहमत थे कि सुख ही नैतिक कार्य का अंतिम लक्ष्य है। किंतु वे सुखों की समानता पर असहमत थे। मिल के अनुसार जो मनुष्य दोनों प्रकार के सुख जानते हैं, वे “उच्च” सुखों को निम्न सुखों से श्रेष्ठ पाते हैं।

  • उच्च सुख — बुद्धि, कल्पना और नैतिक भावनाओं को संलग्न करते हैं: कविता लिखना, संगीत में डूबना, कठिन समस्या से जूझना, नागरिक जीवन में भाग लेना।
  • निम्न सुख — मुख्यतः शारीरिक: खाना, पीना, इंद्रिय तृप्ति।

“असंतुष्ट मनुष्य होना, संतुष्ट सूअर होने से बेहतर है; असंतुष्ट सुकरात होना, संतुष्ट मूर्ख होने से बेहतर है।”

इसका अर्थ है कि जो नीति नागरिकों को भोजन तो देती है पर बौद्धिक रूप से दरिद्र रखती है, वह मिल की दृष्टि में पूर्णतः उपयोगितावादी नहीं है। इसीलिए शिक्षा, पुस्तकालय, सार्वजनिक प्रसारण और सांस्कृतिक जीवन में निवेश कल्याण-वृद्धि माना जाता है।

नियम-उपयोगितावाद (Rule Utilitarianism)

मिल ने एक व्यावहारिक समस्या का समाधान खोजा — एक सामान्य व्यक्ति हर कार्य से पहले हेडोनिक गणना नहीं चला सकता। उनका उत्तर था नियम-उपयोगितावाद। प्रत्येक कार्य का मूल्यांकन करने के बजाय हमें ऐसे नियम अपनाने चाहिए जो, यदि सामान्यतः पालन किए जाएँ, तो दीर्घकाल में सुख को अधिकतम करते हों।

“झूठ मत बोलो,” “वायदा निभाओ,” “दूसरों को चोट मत पहुँचाओ” — ये नियम उपयोगितावादी परीक्षा में उत्तीर्ण होते हैं क्योंकि इन्हें मानने वाले समाज फलते-फूलते हैं। एक लोकसेवक जो गोपनीयता के नियम इसलिए मानता है क्योंकि वे सार्वजनिक हित में हैं, वह एक उत्तम नियम-उपयोगितावादी है।

क्षति सिद्धांत (The Harm Principle)

मिल की सबसे स्थायी देन है On Liberty (1859) में व्यक्त क्षति सिद्धांत:

“किसी सभ्य समाज के सदस्य पर, उसकी इच्छा के विरुद्ध, शक्ति का प्रयोग केवल एक ही उद्देश्य के लिए न्यायसंगत है — दूसरों को क्षति से बचाना।”

यह सिद्धांत तीन बातें एक साथ कहता है:

  1. व्यक्ति अपने ऊपर, अपने शरीर और मन पर संप्रभु हैं।
  2. राज्य केवल उन्हीं कार्यों को नियंत्रित कर सकता है जो दूसरों को क्षति पहुँचाते हैं।
  3. किसी विकल्प को नापसंद करना उसे प्रतिबंधित करने का औचित्य नहीं है।

भारत में, क्षति सिद्धांत उच्चतम न्यायालय के नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018) निर्णय (धारा 377 का विखंडन), जोसेफ शाइन निर्णय (व्यभिचार विखंडन) और भोजन, वेशभूषा, रिश्तों से जुड़ी व्यक्तिगत-स्वतंत्रता की बहसों का आधार है।

मिल का प्रकृतिवाद और पर्यावरण नैतिकता

मिल ने क्षति सिद्धांत को एक प्रायः अनदेखी दिशा में विस्तारित किया। यदि दूसरों को क्षति पहुँचाना गलत है, और अन्य प्रजातियाँ एवं पारिस्थितिकी तंत्र भी मानवीय लोभ से क्षतिग्रस्त होते हैं, तो नैतिक चिंता प्रजाति-सीमा से परे जाती है। भारतीय पर्यावरण विधिशास्त्र का एहतियाती सिद्धांत और नदियों व वनों को कुछ निर्णयों में मान्यता — इन्हें मिल के प्रकृतिवाद में दूर की जड़ें मिलती हैं।

परोपकारी/सार्वभौमिक सुखवाद

मिल ने आग्रह किया कि व्यक्तिगत सुख की खोज समाज को हानि पहुँचाने का बहाना नहीं बन सकती। यदि सभी ऐसे नियमों पर चलें जो दूसरों के हितों का सम्मान करते हुए अपना सुख अधिकतम करें, तो परोपकारी सुखवाद का उदय होता है — व्यक्ति के हित और समाज के हित टकराते नहीं, मिलते हैं।

स्वतंत्र अभिव्यक्ति की रक्षा

मिल ने मुक्त अभिव्यक्ति का चार आधारों पर बचाव किया:

  • प्राप्त मत की अचूकता का भ्रम: कोई भी प्राधिकरण अचूक होने का दावा नहीं कर सकता।
  • सत्य की खोज: गलत विचार भी, खंडन के माध्यम से, सत्य की समझ को पैना बनाते हैं।
  • अल्पसंख्यक स्वरों की रक्षा: स्वतंत्र अभिव्यक्ति के बिना प्रतिनिधि सरकार आत्म-सुधार की क्षमता खो देती है।
  • व्यक्तिगत विकास: स्वतंत्र अभिव्यक्ति रचनात्मकता और आत्म-साक्षात्कार की शर्त है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) की व्याख्या में “उचित प्रतिबंध” के परीक्षण — सार्वजनिक व्यवस्था, मानहानि, नैतिकता, उकसावा — मिल के क्षति सिद्धांत को व्यावहारिक रूप देने के प्रयास हैं।

भारतीय प्रशासन के लिए मिल की प्रासंगिकता

  • क्षति को नियंत्रित करें, रुचियों को नहीं। व्यक्तिगत जीवन-शैली में राज्य का हस्तक्षेप, यदि दूसरों को कोई क्षति नहीं हो रही, तो मिल की दृष्टि में अनुचित है।
  • उच्च सुखों में निवेश। कल्याण केवल जीवित रहना नहीं है — शिक्षा, पुस्तकालय, सांस्कृतिक संस्थाएँ जीवन की गुणवत्ता उठाती हैं।
  • असहमति की रक्षा। बहुलतावादी लोकतंत्र को अपने असहमतों की ज़रूरत है।
  • नियम अपनाएँ, उनकी रक्षा करें, संशोधित करें। नियम आम तौर पर कल्याण बेहतर जोड़ते हैं; पर जब प्रमाण बदलें तो संशोधन करें।

आलोचनाएँ

मिल के ढाँचे में कठिनाइयाँ भी हैं। आलोचक पूछते हैं — उच्च सुखों का निर्धारण कौन करता है? क्षति की परिभाषा विवादास्पद है। नियम-उपयोगितावाद पर आरोप है कि नियम का पालन करना जब उसे तोड़ने से अधिक सुख मिले, वह वास्तव में उपयोगितावादी नहीं है। और एल्गोरिदमिक वायरलिटी के युग में मिल का तर्कसंगत बहस में विश्वास भोला लग सकता है।

UPSC प्रासंगिकता

मिल GS-IV के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण विचारक हैं। स्वतंत्रता, सहिष्णुता, स्वतंत्र अभिव्यक्ति, पर्यावरण नैतिकता और राज्य के पितृत्ववाद (paternalism) की सीमाओं पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। उनकी शब्दावली — उच्च-निम्न सुख, क्षति सिद्धांत, नियम-उपयोगितावाद — निबंध-पत्र और केस स्टडी के लिए आदर्श है।

सामान्य प्रश्न

मिल का क्षति सिद्धांत (Harm Principle) क्या है?

मिल के अनुसार किसी व्यक्ति पर, उसकी इच्छा के विरुद्ध, शक्ति का वैध प्रयोग केवल दूसरों को क्षति से बचाने के लिए किया जा सकता है। व्यक्ति अपने जीवन, शरीर और मन के स्वयं संप्रभु हैं।

बेन्थम और मिल के उपयोगितावाद में मुख्य अंतर क्या है?

बेन्थम का उपयोगितावाद परिमाणात्मक था — सभी सुख बराबर। मिल का उपयोगितावाद गुणात्मक था — उच्च सुख (बौद्धिक) निम्न सुख (शारीरिक) से श्रेष्ठ हैं।

नियम-उपयोगितावाद क्या है?

मिल के नियम-उपयोगितावाद के अनुसार हर कार्य की गणना करने के बजाय ऐसे नियम अपनाने चाहिए जो, सामान्यतः पालन किए जाने पर, दीर्घकाल में सर्वाधिक सुख उत्पन्न करें।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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