UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

कृषि बीमा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — UPSC अर्थव्यवस्था नोट्स

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — पृष्ठभूमि, कवरेज, प्रीमियम संरचना, 2020 के सुधार, क्रियान्वयन चुनौतियाँ, DIGICLAIM/YES-Tech/WINDS, 2024-26 के नवीनतम बजट प्रावधान और UPSC GS-III प्रासंगिकता।

Agriculture Insurance and PMFBY (UPSC Economy) — UPSC featured image

भारत में कृषि मौसमी झटकों, कीटों और मूल्य-जोखिमों के संपर्क में है। ऐतिहासिक रूप से केवल लगभग 20-25% कृषि-क्षेत्र ही बीमित था, और दावा-निपटान अनियमित था। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), जो अप्रैल 2016 में शुरू हुई, बीमित किसानों की संख्या के आधार पर विश्व का सबसे बड़ा फसल बीमा कार्यक्रम बनकर उभरी। इसने पूर्ववर्ती योजनाओं — NAIS, MNAIS, WBCIS — का स्थान लिया। तब से इसमें कई बार सुधार हुए, जिनमें 2020 का बड़ा संशोधन सबसे महत्वपूर्ण रहा — जिसने नामांकन (enrolment) को स्वैच्छिक किया और केंद्र की प्रीमियम-हिस्सेदारी की अधिकतम सीमा तय की।

किसान-हितैषी डिज़ाइन के बावजूद PMFBY की राह सरल नहीं रही। कुछ राज्यों ने योजना से बाहर निकलकर अपनी अलग व्यवस्था बनाई, बीमा कंपनियों ने उच्च-जोखिम क्षेत्रों में 30%+ बीमांकिक प्रीमियम (actuarial premium) माँगे, और किरायेदार किसानों का समावेश आज भी एक संरचनात्मक चुनौती है। यह लेख PMFBY के तंत्र, सुधारों, चुनौतियों और 2024-26 के तकनीकी रूपांतरण की समीक्षा करता है।

पृष्ठभूमि: भारत में फसल बीमा का विकास

  • व्यापक फसल बीमा योजना (CCIS, 1985) – क्षेत्र-आधारित, ऋण से जुड़ी।
  • राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS, 1999) – व्यापक कवरेज पर विलंबित भुगतान।
  • संशोधित NAIS (MNAIS) और मौसम-आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) – 2010।
  • PMFBY (2016) – सब्सिडी-युक्त प्रीमियम, ग्राम पंचायत बीमा-इकाई के रूप में, तकनीक-आधारित उपज-आकलन।

इस विकास-रेखा से तीन रुझान दिखते हैं — कवरेज विस्तार, प्रीमियम सब्सिडी की गहराई, और भुगतान-प्रौद्योगिकी की भूमिका। PMFBY ने तीनों को एक छतरी के नीचे लाया।

PMFBY का विवरण

उद्देश्य: प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के परिणामस्वरूप किसी अधिसूचित फसल की विफलता की स्थिति में किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करना।

शामिल जोखिम (Risks covered):

  • प्रतिकूल मौसम के कारण रोकी गई बुआई / रोपाई।
  • सूखा, शुष्क-अंतराल, बाढ़, जलप्लावन, भूस्खलन, व्यापक कीट और रोग आक्रमण, अग्नि, बिजली, चक्रवात, ओलावृष्टि — गैर-निवारणीय कारणों से खड़ी फसल की हानि।
  • कटाई के बाद की हानियाँ (कटाई के 14 दिन बाद तक) — काटी और फैलाई गई स्थिति में रखी फसलों के लिए।
  • स्थानीय आपदाएँ (ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलप्लावन, बादल फटना)।
  • राज्य वन्य पशु आक्रमण के लिए कवरेज जोड़ सकते हैं।

बहिष्कृत जोखिम: युद्ध, परमाणु जोखिम, द्वेषपूर्ण क्षति और अन्य निवारणीय जोखिम।

किसानों द्वारा देय प्रीमियम

मौसम / फसलकिसान का प्रीमियम
खरीफ फसलेंबीमित राशि का 2%
रबी फसलेंबीमित राशि का 1.5%
वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलेंबीमित राशि का 5%

शेष प्रीमियम केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से बंटता है (पूर्वोत्तर में 90:10)।

कवरेज: ऋणी और गैर-ऋणी किसान, बटाईदार और किरायेदार किसान (जहाँ भूमि-पट्टे को क़ानूनी मान्यता है)।

PMFBY में क्रियान्वयन की चुनौतियाँ

किरायेदार किसान का बहिष्कार: बटाईदारों और किरायेदारों का कवरेज नगण्य है क्योंकि भूमि-पट्टे को क़ानूनी मान्यता का अभाव है। इसका अर्थ है कि वास्तविक खेती करने वाला अक्सर बीमा-लाभ से वंचित रहता है।

सीमित अधिसूचित फसलें: राज्यों द्वारा केवल चयनित फसलें बीमित हैं, जो मिश्रित खेती और विविधीकरण को हतोत्साहित करती है।

निम्न जागरूकता: लगभग 30% किसान ही PMFBY के लाभों से अवगत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में योजना-शिक्षा अभी बड़ा अंतराल है।

विलंबित दावा-निपटान: कई किसान महीनों या वर्षों तक प्रतीक्षा करते हैं; देरी का सम्बंध बीमाकर्ताओं को सरकारी सब्सिडी के विलंबित भुगतान से है।

उच्च बीमांकिक प्रीमियम: कुछ राज्यों में जोखिम-प्रवण फसलों के लिए प्रीमियम-दर 30% से ऊपर रही है।

फसल-कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiment / CCE) की कमज़ोरियाँ: श्रम-शक्ति की कमी और सत्यापन-चुनौतियों के कारण CCE डेटा की गुणवत्ता ख़राब है। PMFBY अब तकनीक-उपयोग (उपग्रह, ड्रोन, स्मार्ट सैम्पलिंग) को अनिवार्य करता है, परंतु रोलआउट असमान रहा है।

बीमा कम्पनियों की एकाग्रता: कई क्लस्टरों में केवल एक या दो कंपनियाँ बोली लगाती हैं, जो प्रतिस्पर्धी मूल्य-निर्धारण को कमज़ोर करती है।

फरवरी 2020 में किए गए मुख्य सुधार

केंद्र की प्रीमियम सब्सिडी पर सीमा: केंद्र अपनी हिस्सेदारी केवल वहाँ देता है जहाँ प्रीमियम असिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिए 30% तक और सिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिए 25% तक है। इन सीमाओं से ऊपर का अतिरिक्त प्रीमियम राज्य वहन करेगा।

स्वैच्छिक नामांकन: पहले ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य था — अब ऋणी और गैर-ऋणी दोनों के लिए स्वैच्छिक।

पूर्वोत्तर में केंद्र की उच्च हिस्सेदारी: केंद्र:राज्य अनुपात 50:50 से बढ़ाकर 90:10 किया गया।

राज्यों के लिए लचीलापन: राज्य प्रत्येक मौसम में PMFBY से ऑप्ट-इन/ऑप्ट-आउट कर सकते हैं और जोखिम-कवर डिज़ाइन कर सकते हैं (पूर्ण, मूल, बुआई-विफलता, मध्य-मौसम, स्थानीय, कटाई-पश्चात्)।

राज्यों द्वारा समय पर प्रीमियम: जो राज्य निर्धारित समय-सीमाओं से अधिक सब्सिडी में देरी करते हैं, वे अगले मौसम में योजना लागू नहीं कर सकते।

सुधारों के निहितार्थ

  • प्रीमियम-सीमा से ऊपर राज्यों पर सब्सिडी का अधिक भार
  • स्वैच्छिक नामांकन के बाद कवर क्षेत्र में कमी, जिसने उन किसानों के लिए बीमांकिक प्रीमियम और बढ़ा दिया जो योजना में बने रहे।
  • कई राज्यों का बाहर निकलना (आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल) — इनमें से कुछ बाद में लौटे या राज्य-विशिष्ट योजनाओं की ओर बढ़े।
  • नकारात्मक चयन (adverse selection) का जोखिम बढ़ा — केवल जोखिम-प्रवण किसान ही नामांकन कराते हैं।

आगे का मार्ग

प्रतिस्पर्धी मूल्य-निर्धारण को बढ़ावा: किसानों को विकल्प देने के लिए प्रति क्लस्टर कम-से-कम दो बीमा कम्पनियाँ हों।

जागरूकता: बीमाकर्ताओं द्वारा एकत्रित सकल प्रीमियम के 0.5% से वित्त-पोषित अनिवार्य सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ।

तेज़ दावा-निपटानDIGICLAIM के माध्यम से, उपग्रह और मौसम ट्रिगर से जुड़े स्वतः-भुगतान।

कवरेज विस्तार: अधिक अधिसूचित फसलें, मिश्रित खेती, और डिजिटल भूमि-अभिलेखों तथा SWAMITVA-समान सत्यापन के माध्यम से किरायेदार-किसान का समावेश।

जोखिम-न्यूनीकरण उपकरण के रूप में पुनर्डिज़ाइन: बीमा को जलवायु सलाह, संशोधित मौसम-आधारित फसल बीमा (mWBCIS) और सूचकांक-आधारित कवरों से जोड़ें।

सहभागी CCE: हानि-आकलन में राज्य सरकारों, PRIs और किसानों की क्षमता-निर्माण।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

अद्यतन संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2025 में PMFBY और पुनर्संरचित मौसम-आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) को लगभग 69,515 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ 2025-26 तक विस्तारित किया। तकनीक-संचालित योजनाओं — YES-Tech (दूरसंवेदी से उपज-आकलन), WINDS (मौसम-स्टेशन नेटवर्क), और DIGICLAIM (स्वचालित निपटान) — के लिए 824 करोड़ रुपए का नया नवाचार और प्रौद्योगिकी कोष (FIAT) बनाया गया।

वित्त वर्ष 2023-24 में 4 करोड़ से अधिक किसान आवेदन नामांकित हुए। आरंभ से अब तक संचयी रूप से 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के दावे भुगतान किए गए। तेलंगाना ने PMFBY के बजाय रायतु बीमा और रायतु बंधु के राज्य-वित्त-पोषित मॉडल को अपनाया। आंध्र प्रदेश पहले बाहर निकलने के बाद PMFBY में पुनः शामिल हुआ।

केंद्रीय बजट 2025-26 ने फसल बीमा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और कृषि के लिए DPI तथा एग्री-स्टैक (Agri Stack) के साथ एकीकरण को रेखांकित किया। धन धान्य कृषि योजना में 100 कम-उत्पादकता वाले ज़िलों के लिए स्पष्ट बीमा-घटक है।

PMFBY के तकनीकी सक्षमक — एक नज़र में

तकनीकउद्देश्यस्थिति
YES-Techदूरसंवेदी से उपज-आकलनFIAT 2025 के तहत वित्त-पोषित
WINDSस्वचालित मौसम-स्टेशन नेटवर्कराज्य-स्तरीय रोलआउट जारी
DIGICLAIMस्वचालित दावा-निपटान2024-25 में पायलट → स्केल-अप
एग्री-स्टैक (Agri Stack)एकीकृत किसान डेटा-आधारराज्यों में चरणबद्ध रूप से लागू
Crop Insurance Appस्व-सेवा नामांकन और दावाiOS/Android पर उपलब्ध

Prelims बिंदु

  • PMFBY का शुभारंभ — अप्रैल 2016।
  • नोडल मंत्रालय — कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय।
  • किसान का प्रीमियम — खरीफ 2%, रबी 1.5%, वाणिज्यिक/बागवानी 5%।
  • केंद्र की प्रीमियम सब्सिडी सीमा — असिंचित 30%, सिंचित 25% (2020 सुधार)।
  • पूर्वोत्तर में केंद्र:राज्य अनुपात — 90:10।
  • बीमा-इकाई — ग्राम पंचायत स्तर।
  • तकनीकी मॉड्यूल — YES-Tech, WINDS, DIGICLAIM (FIAT 2025)।
  • जनवरी 2025 कैबिनेट विस्तार — 2025-26 तक, 69,515 करोड़ रुपए परिव्यय।

UPSC प्रासंगिकता

GS पेपर-III से सीधे जुड़े विषय: सब्सिडी, MSP और कृषि से सम्बंधित मुद्दे; न्यूनतम समर्थन मूल्य और सुरक्षा-जाल; समावेशी विकास; खाद्य सुरक्षा।

संभावित प्रश्न (Mains):

  • PMFBY के प्रदर्शन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। दावा-निपटान और किसान-विश्वास सुधारने के उपाय सुझाइए। (15 अंक)
  • 2020 के सुधारों ने फसल बीमा योजनाओं के अंतर्गत कवरेज और राजकोषीय भार को कैसे प्रभावित किया है? (10 अंक)
  • फसल बीमा के आधुनिकीकरण में तकनीक (उपग्रह, ड्रोन, AI) की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (15 अंक)
  • ‘फसल बीमा को क्षतिपूर्ति-तंत्र से जोखिम-न्यूनीकरण उपकरण में बदलना ज़रूरी है।’ विश्लेषण कीजिए। (10 अंक)

निबंध और साक्षात्कार दृष्टिकोण में जलवायु जोखिम, कृषि लचीलापन और सार्वजनिक-निजी जोखिम-साझेदारी शामिल हैं। उम्मीदवारों को प्रीमियम संरचना, योजना परिव्यय, राज्यों के बाहर निकलने के पैटर्न और YES-Tech/DIGICLAIM याद रखने चाहिए।

सामान्य प्रश्न

PMFBY कब शुरू हुई और इसका उद्देश्य क्या है?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) अप्रैल 2016 में शुरू हुई। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण अधिसूचित फसलों की विफलता पर किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करना है।

PMFBY में किसान का प्रीमियम कितना है?

खरीफ फसलों के लिए बीमित राशि का 2%, रबी फसलों के लिए 1.5%, और वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए 5%। शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य के बीच बांटा जाता है।

2020 के सुधारों में सबसे बड़ा बदलाव क्या था?

नामांकन को ऋणी किसानों के लिए भी स्वैच्छिक बनाना सबसे बड़ा बदलाव था। साथ ही केंद्र की प्रीमियम सब्सिडी पर सीमा (असिंचित 30%, सिंचित 25%) तय की गई। पूर्वोत्तर के लिए केंद्र की हिस्सेदारी 90:10 कर दी गई।

PMFBY से कौन-कौन से राज्य बाहर निकले?

आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना PMFBY से बाहर निकले। आंध्र प्रदेश बाद में पुनः शामिल हुआ। तेलंगाना ने रायतु बीमा और रायतु बंधु जैसे राज्य-वित्त-पोषित मॉडल अपनाए।

DIGICLAIM क्या है?

DIGICLAIM PMFBY के तहत स्वचालित दावा-निपटान का तकनीकी मॉड्यूल है, जो उपग्रह डेटा और मौसम-ट्रिगर से जुड़ा है। यह दावा-निपटान में होने वाली देरी को कम करता है। 2024-25 में पायलट के बाद इसे विस्तारित किया जा रहा है।

YES-Tech और WINDS क्या हैं?

YES-Tech (Yield Estimation System using Technology) उपग्रह दूरसंवेदी (remote sensing) के माध्यम से उपज-आकलन की प्रणाली है। WINDS (Weather Information Network and Data System) स्वचालित मौसम-स्टेशनों का नेटवर्क है। दोनों जनवरी 2025 के FIAT कोष (824 करोड़ रुपए) से वित्त-पोषित हैं।

PMFBY में किरायेदार किसान शामिल क्यों नहीं हो पाते?

क्योंकि अधिकांश राज्यों में भूमि-पट्टे (land lease) को क़ानूनी मान्यता नहीं है। बटाईदार और किरायेदार बीमा-दावे के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ी प्रमाण नहीं दे पाते। SWAMITVA-समान डिजिटल भूमि-अभिलेख और एग्री-स्टैक इस अंतराल को भरने के प्रयास हैं।

क्या PMFBY में निजी बीमा कंपनियाँ भी भाग लेती हैं?

हाँ। AIC (Agriculture Insurance Company) के साथ-साथ निजी बीमाकर्ता भी क्लस्टर-आधारित बोली में भाग लेते हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए सरकार प्रति क्लस्टर कम-से-कम दो कम्पनियों की भागीदारी प्रोत्साहित करती है।

बजट 2025-26 में PMFBY के लिए क्या प्रावधान हैं?

बजट 2025-26 ने फसल बीमा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई, कृषि DPI और एग्री-स्टैक से एकीकरण रेखांकित किया, और धन धान्य कृषि योजना में 100 कम-उत्पादकता वाले ज़िलों के लिए बीमा-घटक शामिल किया।

PMFBY को ‘विश्व का सबसे बड़ा फसल बीमा कार्यक्रम’ क्यों कहा जाता है?

बीमित किसानों की संख्या के आधार पर। FY 2023-24 में 4 करोड़ से अधिक किसान आवेदन नामांकित हुए। आरंभ से अब तक 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के दावे भुगतान किए गए हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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