भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक और चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा जलकृषि राष्ट्र है। मत्स्य पालन क्षेत्र प्राथमिक स्तर पर लगभग 1.6 करोड़ मछुआरों को रोजगार देता है। सकल मूल्य संवर्धन (GVA) में इसका योगदान 1950-51 के 0.40% से बढ़कर हाल के वर्षों में ~1.1% तक पहुँच गया है। फिर भी केवल 78% समुद्री और 58% अंतर्देशीय मत्स्य पालन क्षमता का ही दोहन हो रहा है। पूर्ण क्षमता साकार करने के लिए सरकार ने नीली क्रांति कार्यक्रम और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) लॉन्च की है।
नीली क्रांति क्यों?
नीली क्रांति वैज्ञानिक जलकृषि, मत्स्य-बेड़े के आधुनिकीकरण और कटाई-पश्चात बुनियादी ढाँचे के विकास के माध्यम से मछली उत्पादन में तीव्र वृद्धि को दर्शाती है। यह जलीय समकक्ष है — हरित क्रांति और श्वेत क्रांति का।
- भारत की तटरेखा 8,118 किमी, अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) 20.2 लाख वर्ग किमी।
- मछली उत्पादन 1950-51 में 0.75 मिलियन टन से बढ़कर 2022-23 में 175 लाख टन से अधिक।
- अंतर्देशीय मत्स्य पालन अब कुल उत्पादन का ~75% योगदान करता है।
- भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा मछली निर्यातक; समुद्री निर्यात USD 7-8 बिलियन के पार।
मत्स्य पालन क्षेत्र की बाधाएँ
समुद्री मत्स्य पालन: अपर्याप्त मत्स्य बंदरगाह, कोल्ड चेन की कमी, कमजोर ट्रेसेबिलिटी और प्रमाणन, कुशल जनशक्ति की कमी।
अंतर्देशीय मत्स्य पालन: मौसमी प्रकृति, प्राकृतिक जलों में घटते भंडार, पुरानी तकनीक, कम पूँजी निवेश।
संवर्धन मत्स्य पालन: प्रजाति विविधीकरण का अभाव, खराब जल गुणवत्ता, रोग प्रकोप, संस्थागत ऋण की कमी।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY)
सितंबर 2020 में ₹20,050 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू, PMMSY नीली क्रांति की प्रमुख योजना है। इसके उद्देश्य:
- मछली उत्पादन, उत्पादकता और गुणवत्ता में महत्त्वपूर्ण कमियों को दूर करना।
- मूल्य श्रृंखला का आधुनिकीकरण और ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करना।
- मछुआरों का कल्याण — बीमा, आजीविका सहायता और प्रशिक्षण।
PMMSY का लक्ष्य 2024-25 तक 22 मिलियन मीट्रिक टन मछली उत्पादन, ₹1,00,000 करोड़ का निर्यात और 55 लाख रोजगार अवसर।
नीली क्रांति को बढ़ावा देने की रणनीतियाँ
- क्षैतिज विस्तार: खारे पानी की जलकृषि, ठंडे पानी की मत्स्य पालन, सजावटी मत्स्य पालन, धान-सह-मत्स्य संस्कृति।
- ऊर्ध्वाधर विस्तार: प्रजाति विविधीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली, जैविक जलकृषि।
- गहरे समुद्र में मत्स्य पालन और खुले समुद्री पिंजरे।
- मत्स्य-आधारित FPO के माध्यम से किसानों का संगठन।
- सागर मित्रों के माध्यम से विस्तार और ई-मार्केट।
प्रमुख योजनाएँ और संस्थाएँ
| योजना/संस्था | भूमिका |
|---|---|
| PMMSY | मूल्य श्रृंखला विकास की छत्र-योजना |
| FIDF | ₹7,522 करोड़ का बुनियादी ढाँचा कोष |
| NFDB | समन्वय का नोडल एजेंसी |
| MPEDA | निर्यात संवर्धन |
| KCC (मत्स्य) | कार्यशील पूँजी ऋण |
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
केंद्रीय बजट 2024-25 ने झींगा पालन, न्यूक्लियस ब्रीडिंग केंद्रों और NaBFID वित्त पोषण के माध्यम से झींगा निर्यात को समर्थन दिया। सरकार ने 2024 में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) को ~₹6,000 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी — मत्स्य पालन क्षेत्र के औपचारिकीकरण, जलकृषि बीमा के विस्तार और सूक्ष्म-लघु उद्यमों के समर्थन के लिए।
केंद्रीय बजट 2025-26 में गहरे समुद्र मिशन, एकीकृत एक्वापार्क और झींगा पालन के लिए समर्थन जारी रहा। FY 2023-24 में भारत का समुद्री निर्यात USD 7.38 बिलियन रहा — जमा हुआ झींगा शीर्ष वस्तु।
UPSC प्रासंगिकता
GS प्रश्नपत्र III: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित मुद्दे; खाद्य प्रसंस्करण; समावेशी विकास और आजीविका सृजन। निबंध और साक्षात्कार: खाद्य सुरक्षा, तटीय समुदाय की आजीविका, जलवायु अनुकूलन और सागरमाला-नीली अर्थव्यवस्था का अभिसरण।
सामान्य प्रश्न
PMMSY क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) सितंबर 2020 में ₹20,050 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू की गई। इसका लक्ष्य 2024-25 तक 22 मिलियन मीट्रिक टन मछली उत्पादन, ₹1 लाख करोड़ का निर्यात और 55 लाख रोजगार सृजन है।
भारत की मत्स्य पालन क्षमता कितनी है?
भारत की पहचान की गई जलविद्युत क्षमता 1,45,320 MW है। मत्स्य पालन में — 2022-23 में 175 लाख टन से अधिक उत्पादन; भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक; समुद्री निर्यात USD 7.38 बिलियन (FY 2023-24)।
नीली क्रांति (Blue Revolution) क्या है?
नीली क्रांति वैज्ञानिक जलकृषि, मत्स्य-बेड़े के आधुनिकीकरण और कटाई-पश्चात बुनियादी ढाँचे के विकास के माध्यम से मछली उत्पादन में तीव्र वृद्धि की संकल्पना है — जैसे कृषि में हरित क्रांति।