नेट-जीरो उत्सर्जन (Net Zero Emissions) का अर्थ है — वायुमंडल में उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा और अवशोषित मात्रा के बीच संतुलन स्थापित करना। यह पेरिस समझौते (Paris Agreement) के 1.5°C लक्ष्य का आधार है।
नेट-जीरो और ग्रॉस-जीरो में अंतर
- ग्रॉस-जीरो: सभी उत्सर्जन समाप्त — व्यावहारिक रूप से कठिन।
- नेट-जीरो: उत्सर्जन = अवशोषण (Carbon Dioxide Removal — CDR के माध्यम से)।
वैश्विक नेट-जीरो लक्ष्य
- IPCC AR6: 2050 तक नेट-जीरो — 1.5°C लक्ष्य के लिए।
- EU: 2050; अमेरिका: 2050; चीन: 2060; भारत: 2070।
भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ (Panchamrit)
- 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता।
- 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में 50% गैर-जीवाश्म।
- 2030 तक GDP की कार्बन तीव्रता में 45% कमी (2005 की तुलना में)।
- 2030 तक 2.5-3 अरब टन CO₂ अतिरिक्त वन आवरण से अवशोषण।
- 2070 तक नेट-जीरो।
कार्बन डाइऑक्साइड हटाने (CDR) के तरीके
- प्राकृतिक: वनीकरण, मिट्टी कार्बन, मैंग्रोव, महासागर वनीकरण।
- तकनीकी: DAC (Direct Air Capture), BECCS (Bioenergy + CCS)।
भारत के लिए चुनौतियाँ
- ऊर्जा सुरक्षा और विकास — कोयले पर निर्भरता (60%+ बिजली)।
- वित्तपोषण — $1 ट्रिलियन/वर्ष की जरूरत बनाम विकसित देशों की $100 अरब प्रतिबद्धता।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।
- न्यायसंगत परिवर्तन — कोयला खनिकों का रोजगार।
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
- COP29 (बाकू, 2024): NCQG — विकसित देशों की $300 अरब/वर्ष प्रतिबद्धता।
- भारत की नवीकरणीय क्षमता — मार्च 2025 तक 220+ GW।
- Green Hydrogen Mission — 2030 तक 5 MT उत्पादन।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-III: पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा।
- GS-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध — Paris Agreement, UNFCCC, NDC।
- प्रारंभिक: Panchamrit, 2070 नेट-जीरो, CDR तकनीकें।
- मुख्य: “भारत की 2070 नेट-जीरो प्रतिबद्धता — अवसर और चुनौतियाँ।”
नेट-जीरो तक पहुँचने की यात्रा में ऊर्जा परिवर्तन, वन संरक्षण, हरित वित्त और न्यायसंगत परिवर्तन — सभी आवश्यक हैं। भारत की 2070 की प्रतिबद्धता विकास और जलवायु न्याय के बीच संतुलन का प्रयास है।