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PLI योजना — डिज़ाइन, लाभ, चुनौतियाँ और UPSC नोट्स

उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना — 14 क्षेत्र, डिज़ाइन की ख़ूबियाँ, चुनौतियाँ, हालिया प्रगति और UPSC GS III के लिए विस्तृत नोट्स।

PLI Scheme - Design, Benefits, Challenges and UPSC Notes — UPSC featured image

उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production Linked Incentive, PLI) योजना 1991 के सुधारों के बाद भारत द्वारा किया गया सबसे बड़ा विनिर्माण-नीति बदलाव है। 2020-21 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत घोषित और 14 प्राथमिकता क्षेत्रों में विस्तारित PLI ने सब्सिडी डिज़ाइन को इनपुट-आधारित प्रोत्साहन से आउटपुट-आधारित पुरस्कार की दिशा में मोड़ा है। UPSC GS-III के लिए PLI औद्योगिक नीति, आयात प्रतिस्थापन, निर्यात प्रोत्साहन और वैश्विक मूल्य शृंखला (GVC) एकीकरण के प्रश्नों में केंद्रीय है।

PLI क्या है

उद्देश्य: घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, बड़े निवेश आकर्षित करना, और भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़ना।

रणनीति: कंपनियों को आधार वर्ष (आम तौर पर 2019-20) के ऊपर भारत में निर्मित वस्तुओं की वृद्धिशील बिक्री (incremental sales) पर नक़द प्रोत्साहन देना, बशर्ते वे न्यूनतम निवेश और उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करें।

प्रोत्साहन संरचना: 5 वर्ष की अवधि में वृद्धिशील बिक्री पर 4-7 प्रतिशत (क्षेत्रीय भिन्नता के साथ — एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल के लिए 1 प्रतिशत, और कुछ विशिष्ट मोबाइल फ़ोन श्रेणियों के लिए 10-20 प्रतिशत तक)।

पात्रता: सब्सिडी पाने के लिए कंपनी को पूर्व-निर्धारित वृद्धिशील निवेश और बिक्री दोनों मानकों को पार करना होगा।

अवधि: 5 वर्ष, क्षेत्र के अनुसार भिन्न।

14 PLI क्षेत्र

  1. मोबाइल विनिर्माण और निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक घटक
  2. महत्वपूर्ण की स्टार्टिंग मटेरियल, ड्रग इंटरमीडिएट्स, APIs
  3. चिकित्सा उपकरण
  4. फार्मास्यूटिकल्स
  5. दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पाद
  6. खाद्य प्रसंस्करण
  7. वस्त्र उत्पाद (मानव-निर्मित रेशे — MMF, और तकनीकी वस्त्र)
  8. श्वेत वस्तुएँ (एयर कंडीशनर, LED)
  9. उच्च-दक्षता सौर PV मॉड्यूल
  10. ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक
  11. एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी
  12. विशेष इस्पात (Speciality Steel)
  13. इलेक्ट्रॉनिक/IT हार्डवेयर (लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर)
  14. ड्रोन और ड्रोन घटक

सेमीकंडक्टर विनिर्माण को PLI ढाँचे के बजाय समानांतर Semicon India कार्यक्रम के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाता है।

PLI डिज़ाइन के लाभ

आउटपुट-लिंक्ड सब्सिडी

पहले की योजनाएँ — जैसे चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (Phased Manufacturing Programme, PMP) — तैयार माल पर सीमा शुल्क बढ़ाती थीं, जिससे छिपा हुआ किराया (rent) और संरक्षित अकुशलता पैदा होती थी। PLI केवल तभी सब्सिडी देती है जब कंपनी वास्तव में उत्पादन और बिक्री करती है — यानी प्रोत्साहन परिणामों से जुड़े होते हैं।

परिणाम-केंद्रित वितरण

प्रोत्साहन तभी जारी होता है जब भारत में उत्पादन हो चुका हो। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार PLI पाँच वर्षों में विनिर्माण उत्पादन में लगभग ₹37 लाख करोड़ (लगभग $520 बिलियन) जोड़ेगी।

प्रशासनिक रूप से सरल

वितरण उद्देश्यपरक मानकों — निवेश और वृद्धिशील बिक्री — पर आधारित है, जिनकी पुष्टि प्रमाणित ऑडिटर करते हैं। इससे विवेकाधीन निर्णयों का जोखिम घटता है।

GVC के लिए चैंपियन तैयार करना

PLI उन्हीं कंपनियों को चुनती है जो बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकें, जिससे ऐसे लीड फर्म तैयार होते हैं जो वैश्विक मूल्य शृंखलाओं को अपने इर्द-गिर्द समेट सकें।

तकनीकी अंगीकरण

PLI के विनिर्देश अक्सर उन्नत तकनीक के उपयोग की शर्त रखते हैं — ऑटो में EV और ACC बैटरी, दूरसंचार में 5G क्षमता, वस्त्रों में MMF — जिससे भारतीय कंपनियाँ मूल्य-शृंखला में ऊपर बढ़ती हैं।

MSME के साथ जुड़ाव

लीड फर्म (टियर-1 आपूर्तिकर्ता) टियर-2 और टियर-3 MSME से ख़रीद करते हैं, जिससे आपूर्तिकर्ता पारिस्थितिकी-तंत्र की गहराई में रोज़गार और पीछे की कड़ियाँ (backward linkages) बनती हैं।

आत्मनिर्भरता

API, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिस्प्ले पैनल, महत्वपूर्ण सामग्रियों और एडवांस्ड बैटरियों में आयात प्रतिस्थापित कर PLI रणनीतिक स्वायत्तता को मज़बूत करती है।

रोज़गार सृजन

पारंपरिक श्रम-सघन क्षेत्रों (खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, श्वेत वस्तुएँ) के साथ-साथ पूँजी-सघन क्षेत्रों को भी प्रोत्साहित करती है।

चीन से निकलती कंपनियों को आकर्षित

“चाइना प्लस वन” पुनःआवंटन से भारत को लाभ हुआ है, जहाँ PLI + कॉरपोरेट कर कटौती + बुनियादी ढाँचा निवेश एक साथ काम करते हैं। Apple द्वारा iPhone उत्पादन का बड़ा हिस्सा भारत में स्थानांतरित करना इसका प्रमुख उदाहरण है।

PLI से जुड़ी चुनौतियाँ

उच्च विनिर्माण लागत

PLI संरचनात्मक रूप से ऊँची लागतों — भूमि, लॉजिस्टिक्स, श्रम, पूँजी — का आंशिक प्रतिकार ही है। बुनियादी कारक-बाज़ार सुधारों के बिना, यह सब्सिडी भी भारत को वियतनाम या थाईलैंड के मुक़ाबले प्रतिस्पर्धी नहीं बना सकती।

घरेलू कंपनियों पर जोखिम

प्रोत्साहन भारत में निगमित घरेलू और विदेशी कंपनियों दोनों पर समान रूप से लागू होते हैं। बड़ी जेब वाली MNCs अधिकांश सब्सिडी पूल पर क़ब्ज़ा कर सकती हैं, जिससे घरेलू चैंपियन पर दबाव बढ़ता है।

प्रोत्साहन की सीमा

प्रोत्साहन प्रति क्षेत्र अधिसूचित वित्तीय परिव्यय से अधिक नहीं हो सकते। एक बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनी अपना आवंटन समय से पहले समाप्त कर सकती है।

सीमित कवरेज

  • कई श्रम-सघन क्षेत्र (चमड़ा, जूते, खिलौने, फ़र्नीचर, परिधान) शुरू में बाहर रखे गए। बाद में कुछ (वस्त्र MMF) जोड़े गए।
  • हर क्षेत्र में कुछ ही कंपनियाँ चुनी जाती हैं — मोबाइल विनिर्माण के लिए मात्र 10 — जिससे प्रतिस्पर्धा और संकेंद्रण पर सवाल उठते हैं।

किराया-वसूली का जोखिम

उदारीकरण-पूर्व अनुभव से पता चलता है कि बड़ी सब्सिडी योजनाएँ किराया-वसूली (rent-seeking) को जन्म दे सकती हैं। PLI के शुरुआती अनुभव में भी प्रमुख मोबाइल निर्माताओं ने प्रथम वर्ष की सीमाओं में ढील की माँग की थी।

अंतर्मुखी संरक्षणवाद

PLI-समर्थित उत्पादन को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए सरकार ने कई इलेक्ट्रॉनिक घटकों, EV इनपुट्स और दूरसंचार उपकरणों पर सीमा शुल्क बढ़ाया है। इससे संरक्षणवाद पुनर्जीवित होता है, डाउनस्ट्रीम उपयोगकर्ताओं के लिए क़ीमतें विकृत होती हैं और WTO विवादों का जोखिम बढ़ता है।

राजकोषीय लागत

14 क्षेत्रों में पाँच वर्षों के लिए PLI ने लगभग ₹1.97 लाख करोड़ की प्रतिबद्धता दी है। राजकोषीय आलोचक तर्क देते हैं कि यही धन यदि बुनियादी ढाँचे, शिक्षा या स्वास्थ्य पर ख़र्च हो तो सामाजिक प्रतिफल अधिक हो सकता है।

हालिया घटनाक्रम (2024-26)

  • संचयी प्रभाव (2025 की शुरुआत तक)। 14 क्षेत्रों में 750+ कंपनियाँ अनुमोदित। संचयी निवेश लगभग ₹1.5 लाख करोड़, उत्पादन/बिक्री ₹12.5 लाख करोड़, निर्यात ₹4 लाख करोड़, रोज़गार 9 लाख से अधिक।
  • मोबाइल फ़ोन। Apple के अनुबंध-निर्माता Foxconn, Pegatron और Wistron (अब Tata) ने उत्पादन तेज़ किया है। FY25 में भारत से iPhone निर्यात $17 बिलियन के पार।
  • फार्मा और API। पेनिसिलिन G, क्लैवुलैनिक एसिड और सेफ़ालोस्पोरिन इंटरमीडिएट जैसे अणुओं में घरेलू API उत्पादन शुरू।
  • खाद्य प्रसंस्करण। F&B ब्रांडों द्वारा मज़बूत भागीदारी; श्रम-सघन निर्यात बढ़ रहा।
  • Semicon India। पाँच परियोजनाएँ (Tata धोलेरा, Tata मोरिगाँव, Micron साणंद, CG-Renesas, Kaynes साणंद) क्रियान्वयन में। दूसरी Semicon India क़िस्त सितंबर 2024 में स्वीकृत।
  • ACC बैटरी PLI 2.0। 2024 में दूसरा दौर समाप्त; विजेताओं में Ola, Reliance, Rajesh Exports।
  • IT हार्डवेयर। लैपटॉप, टैबलेट और सर्वर के लिए PLI 2.0 मई 2023 में ₹17,000 करोड़ परिव्यय के साथ स्वीकृत; Dell, HP, Lenovo, Foxconn, Acer सहित 27 कंपनियाँ शामिल।
  • ड्रोन। ड्रोन और ड्रोन घटक PLI ने FY25 तक ₹3,000 करोड़ का उद्योग खड़ा किया।
  • वस्त्र PLI में धीमी गति। MMF खंड में मामूली निवेश; सरकार सीमाओं की समीक्षा कर रही है।
  • इस्पात PLI चरण II मूल्य-वर्धित ग्रेड के लिए परामर्श चरण में।
  • राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (बजट 2025-26) स्वच्छ-प्रौद्योगिकी, MSME ऐंकर और ग़ैर-PLI सुधारों के साथ PLI का पूरक।

आगे का रास्ता

  • श्रम-सघन क्षेत्रों तक PLI का विस्तार — चमड़ा, परिधान, खिलौने, फ़र्नीचर, रत्न-आभूषण।
  • स्तरीकृत प्रोत्साहन जो MSME और घरेलू चैंपियनों के लिए संशोधित हो ताकि MNC संकेंद्रण रोका जा सके।
  • स्वतः समीक्षा वाला सूर्यास्त खंड (sunset clause) — डिफ़ॉल्ट रूप से नवीनीकरण नहीं।
  • पूरक सुधार — लॉजिस्टिक्स (DFC, मल्टीमॉडल पार्क), कौशल विकास, भूमि (NIMZ), श्रम संहिताएँ — जिनके बिना PLI एक रिसती हुई बाल्टी है।
  • घटक-स्तरीय PLI — केवल तैयार माल नहीं, बल्कि गहरे आपूर्तिकर्ता पारिस्थितिकी-तंत्र के निर्माण हेतु।
  • निर्यात अभिमुखीकरण — केवल आयात-प्रतिस्थापन नहीं — संरक्षित परंतु अप्रतिस्पर्धी उद्योगों के जाल से बचाव।

UPSC प्रासंगिकता

GS-III के लिए (औद्योगिक नीति; संसाधन जुटाव; बुनियादी ढाँचा; रोज़गार):

  • संकल्पनात्मक: इनपुट-आधारित बनाम आउटपुट-आधारित सब्सिडी; 1991 से पूर्व की औद्योगिक नीति से PLI का अंतर।
  • क्षेत्रीय: मोबाइल फ़ोन (Apple का उदाहरण), फार्मा, सेमीकॉन, ACC बैटरी — उदाहरण के लिए दो चुनें।
  • आलोचनात्मक: संकेंद्रण जोखिम, संरक्षणवाद, राजकोषीय लागत, WTO अनुकूलता।
  • समसामयिक: नवीनतम परिणाम, PLI 2.0 रोलआउट, सेमीकॉन घोषणाएँ।

एक मज़बूत मेन्स उत्तर PLI की डिज़ाइन-शक्ति को इसकी संरचनात्मक सीमाओं (कारक-बाज़ार की कमियाँ) के साथ जोड़ेगा और श्रम-सघन क्षेत्रों, घटक-गहराई और निर्यात-अभिमुखता पर केंद्रित PLI 2.0 की वकालत करेगा।

निष्कर्ष

PLI योजना तीन दशकों में भारत का सबसे विश्वसनीय विनिर्माण-नीति प्रयोग है। मोबाइल फ़ोन, API और सौर मॉड्यूल में इसके प्रत्यक्ष परिणाम दिख रहे हैं। परंतु इसकी अंतिम परीक्षा निवेश के सुर्ख़ी-योग्य आँकड़े नहीं हैं — असली प्रश्न यह है कि क्या यह प्रोत्साहन वास्तविक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में परिणत होगा, या स्थायी सब्सिडी निर्भरता में फँसा रहेगा। इसके लिए PLI को इमारत नहीं, उसका मचान बनना होगा।

सामान्य प्रश्न

PLI योजना क्या है?

उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना केंद्र सरकार द्वारा 2020-21 में शुरू की गई एक विनिर्माण-नीति है, जो भारत में निर्मित वस्तुओं की वृद्धिशील बिक्री पर 4-7% की नक़द सब्सिडी देती है, बशर्ते कंपनियाँ निवेश और उत्पादन के पूर्व-निर्धारित लक्ष्य पूरे करें।

PLI के अंतर्गत कितने क्षेत्र शामिल हैं?

PLI के तहत कुल 14 क्षेत्र शामिल हैं — मोबाइल विनिर्माण, API, चिकित्सा उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, श्वेत वस्तुएँ, सौर PV, ऑटो, ACC बैटरी, विशेष इस्पात, IT हार्डवेयर और ड्रोन।

PLI की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

उच्च विनिर्माण लागत, MNC संकेंद्रण, सीमित कवरेज, किराया-वसूली का जोखिम, बढ़ता संरक्षणवाद और ₹1.97 लाख करोड़ की राजकोषीय लागत — मुख्य चिंताएँ हैं।

PLI का अब तक क्या असर हुआ है?

2025 की शुरुआत तक 750+ कंपनियाँ अनुमोदित, ₹1.5 लाख करोड़ निवेश, ₹12.5 लाख करोड़ उत्पादन/बिक्री, ₹4 लाख करोड़ निर्यात और 9 लाख+ रोज़गार। iPhone निर्यात $17 बिलियन के पार।

PLI और पुरानी सब्सिडी योजनाओं में क्या अंतर है?

पुरानी योजनाएँ इनपुट-आधारित थीं — आयात पर शुल्क बढ़ाकर घरेलू उत्पादन को संरक्षण देती थीं। PLI आउटपुट-आधारित है — सब्सिडी केवल वास्तविक उत्पादन और बिक्री के बाद मिलती है।

क्या PLI WTO के अनुकूल है?

PLI में निर्यात-शर्तें न होने के कारण यह सीधे WTO सब्सिडी नियमों का उल्लंघन नहीं करती, परंतु बढ़ते सीमा शुल्क और आयात-प्रतिस्थापन झुकाव के कारण WTO विवादों का जोखिम है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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