पुरानी पेंशन योजना (OPS) भारत की पुरानी तय-लाभ (defined benefit) वाली रिटायरमेंट व्यवस्था है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों को आख़िरी बेसिक पे का 50% और महँगाई भत्ता (DA) ज़िंदगी भर पेंशन के तौर पर मिलता था — और पूरा पैसा सरकार देती थी। केंद्र सरकार में नई भर्तियों के लिए 1 जनवरी 2004 को इसकी जगह बाज़ार से जुड़ी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) ने ले ली। अगस्त 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को मंज़ूरी दी — एक मिला-जुला मॉडल, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू है।
पेंशन की बहस अब कर्मचारी की भलाई, पीढ़ियों के बीच इंसाफ़ और ख़ज़ाने की सेहत — तीनों के चौराहे पर खड़ी है, और UPSC मुख्य परीक्षा में यह सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले नीतिगत मुद्दों में से एक है।
पेंशन व्यवस्थाओं के प्रकार समझ लीजिए
| पहलू | तय लाभ (OPS) | तय अंशदान (NPS) |
|---|---|---|
| कितना मिलेगा | पहले से तय फ़ॉर्मूला (आख़िरी वेतन का 50%) | बाज़ार के रिटर्न पर निर्भर |
| पैसा कौन डालता है | पूरा ख़र्च सरकार उठाती है | कर्मचारी + नियोक्ता दोनों डालते हैं |
| जोखिम किस पर | सरकार (यानी करदाता) पर | कर्मचारी पर |
| महँगाई से जुड़ाव | DR महँगाई के साथ बढ़ता है | एन्युटी रिटायरमेंट पर तय हो जाती है |
| परिवार पेंशन | व्यवस्था में ही शामिल | एन्युटी के विकल्प से |
पुरानी पेंशन योजना (OPS) — मुख्य बातें
आज़ादी के बाद से सरकारी कर्मचारियों के लिए OPS ही भारत की आम पेंशन व्यवस्था रही है।
| पहलू | ब्योरा |
|---|---|
| किसे मिलती है | 1 जनवरी 2004 से पहले भर्ती हुए केंद्र/राज्य कर्मचारी |
| पेंशन कितनी | आख़िरी बेसिक पे का 50% + DA |
| कम से कम नौकरी | पेंशन के लिए 10 साल; पूरी पेंशन के लिए 33 साल (छठे वेतन आयोग के बाद बदला गया) |
| महँगाई राहत (DR) | साल में दो बार महँगाई के हिसाब से बढ़ती है |
| परिवार पेंशन | पति/पत्नी या आश्रितों को आख़िरी बेसिक का 30% |
| ग्रेच्युटी | ₹20 लाख तक (टैक्स-मुक्त) |
| कम्यूटेशन | पेंशन का 40% तक एकमुश्त लिया जा सकता है |
| कर्मचारी का अंशदान | कुछ नहीं (पूरा पैसा सरकार का) |
| GPF (सामान्य भविष्य निधि) | कर्मचारी GPF में पैसा डालते थे, जो रिटायरमेंट पर मिलता था |
OPS क्यों बंद हुई
1990 के दशक के आख़िर तक बढ़ती पेंशन देनदारी राज्यों की जेब पर भारी पड़ने लगी थी:
- कई राज्यों में पेंशन पर ख़र्च कमाई से तेज़ रफ़्तार से बढ़ा
- भट्टाचार्य समिति (2001) और OASIS रिपोर्ट (2000) ने अंशदान वाले मॉडल की सिफ़ारिश की
- अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली NDA सरकार दिसंबर 2003 में NPS लाई, जो 1 जनवरी 2004 से लागू हुई
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) — 2004 का सुधार
NPS तय अंशदान वाली, बाज़ार से जुड़ी पेंशन व्यवस्था है, जिसका नियमन पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) करता है। PFRDA PFRDA अधिनियम, 2013 के तहत बना है।
| पहलू | ब्योरा |
|---|---|
| शुरुआत | 1 जनवरी 2004 के बाद केंद्र सरकार में भर्ती होने वालों के लिए ज़रूरी |
| दायरा | 2009 में सभी नागरिकों (18–70) के लिए खोला गया |
| कर्मचारी का अंशदान | बेसिक + DA का 10% |
| सरकार का अंशदान | 14% (2019 में 10% से बढ़ाया गया) |
| खाते का ढाँचा | टियर-I (ज़रूरी, 60 साल तक बंद) + टियर-II (मर्ज़ी की बात) |
| निवेश का विकल्प | ऑटो/एक्टिव; इक्विटी, कॉर्पोरेट कर्ज़, सरकारी बॉन्ड |
| रिटायरमेंट पर जमा रकम | 60% एकमुश्त (टैक्स-मुक्त); 40% से एन्युटी लेना ज़रूरी |
| नियामक | PFRDA |
| टैक्स | धारा 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की छूट |
NPS पर उठने वाले सवाल
- पेंशन कितनी मिलेगी, पक्का नहीं — यह शेयर और बॉन्ड बाज़ार पर टिकी है
- रिटायरमेंट के बाद महँगाई के हिसाब से बढ़ोतरी नहीं
- भारत में एन्युटी की दरें कम हैं (क़रीब 5–6%)
- उसी कैडर से रिटायर हो रहे OPS वाले साथियों के मुक़ाबले कर्मचारी ख़ुद को घाटे में महसूस करते हैं
OPS की सियासी वापसी
2022 से 2024 के बीच कई राज्यों ने OPS पर लौटने का ऐलान किया:
| राज्य | ऐलान |
|---|---|
| राजस्थान | अप्रैल 2022 — लौटने वाला पहला राज्य |
| छत्तीसगढ़ | मई 2022 |
| झारखंड | सितंबर 2022 |
| हिमाचल प्रदेश | अप्रैल 2023 |
| पंजाब | नवंबर 2022 |
इससे अर्थशास्त्रियों में हड़कंप मच गया:
- RBI की चेतावनी (2023): OPS पर लौटना ख़ज़ाने के लिए तबाही होगी; राज्यों का पेंशन ख़र्च 2040 तक 4.5 गुना बढ़ सकता है
- एन.के. सिंह (15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष): OPS की वापसी को “पीछे ले जाने वाला क़दम” कहा
- CAG की रिपोर्टों ने बिना पैसे वाली पेंशन देनदारी पर उँगली रखी
एकीकृत पेंशन योजना (UPS) — 2024 का बीच का रास्ता
कर्मचारियों की उम्मीदों और ख़ज़ाने की हक़ीक़त के बीच संतुलन बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 अगस्त 2024 को एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को मंज़ूरी दी, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू है।
UPS की मुख्य बातें
| पहलू | ब्योरा |
|---|---|
| किस तरह की | मिली-जुली — अंशदान वाले ढाँचे के भीतर तय लाभ |
| पक्की पेंशन | आख़िरी 12 महीनों के औसत बेसिक पे का 50% (25+ साल की नौकरी पर) |
| कम से कम नौकरी | न्यूनतम पेंशन के लिए 10 साल |
| न्यूनतम पेंशन | ₹10,000 प्रति महीना (10+ साल की नौकरी पर) |
| परिवार पेंशन | कर्मचारी की पेंशन का 60% |
| महँगाई से जुड़ाव | अखिल भारतीय CPI (औद्योगिक कामगार) से जुड़ी |
| कर्मचारी का अंशदान | बेसिक + DA का 10% (NPS जितना ही) |
| सरकार का अंशदान | 18.5% (NPS के 14% से बढ़ाकर) |
| एकमुश्त रकम | नौकरी के हर पूरे 6 महीने पर महीने के बेसिक + DA का 1/10वाँ हिस्सा |
| चुनने का विकल्प | मौजूदा NPS ग्राहकों (केंद्र सरकार) के लिए खुला — एक बार चुना तो बदला नहीं जा सकता |
| अनुमानित लाभार्थी | केंद्र सरकार के क़रीब 23 लाख कर्मचारी |
UPS में नौकरी के हिसाब से पेंशन
- 25+ साल की नौकरी → आख़िरी 12 महीनों के औसत बेसिक का 50%
- 10 से 25 साल के बीच → उसी अनुपात में रकम
- 10 साल से कम → कोई पक्की पेंशन नहीं; सिर्फ़ जमा किया गया अंशदान वापस
OPS बनाम NPS बनाम UPS — एक नज़र में
| पैमाना | OPS | NPS | UPS |
|---|---|---|---|
| किस्म | तय लाभ | तय अंशदान | मिली-जुली |
| कर्मचारी का अंशदान | शून्य | 10% | 10% |
| सरकार का अंशदान | पूरा पैसा सरकार का | 14% | 18.5% |
| पेंशन | आख़िरी बेसिक का 50% | बाज़ार से जुड़ी | आख़िरी 12 महीनों के औसत बेसिक का 50% |
| महँगाई से जुड़ाव | हाँ (DR) | नहीं | हाँ (CPI-IW) |
| न्यूनतम पेंशन | ₹9,000 | बाज़ार से जुड़ी | ₹10,000 |
| परिवार पेंशन | हाँ (30%) | एन्युटी से | हाँ (60%) |
| ख़ज़ाने का जोखिम | सरकार पर | कर्मचारी पर | दोनों पर बँटा |
ख़ज़ाने पर असर — असली बहस यहीं है
OPS पर लौटने के ख़िलाफ़ तर्क
- RBI का अनुमान: अगर सारे राज्य OPS पर लौट आएँ, तो 2040 तक कुल पेंशन बोझ GDP का 4.5% तक पहुँच सकता है
- यह बिना पैसे वाली देनदारी खड़ी करती है — आज के करदाता पुराने कर्मचारियों का बोझ उठाते हैं
- पीढ़ियों के बीच नाइंसाफ़ी — नौजवान नागरिक पिछली पीढ़ी की पेंशन की सब्सिडी भरते हैं
- स्वास्थ्य, शिक्षा और पूँजीगत ख़र्च के लिए बची जगह सिकुड़ जाती है
कर्मचारियों के बचाव में तर्क
- निजी क्षेत्र के मुक़ाबले सरकारी नौकरी में तनख़्वाह कम रहती है — पेंशन उसी की भरपाई है
- NPS का रिटर्न ऊपर-नीचे होता रहा है — कुछ रिटायर लोगों की पेंशन गुज़ारे लायक़ भी नहीं
- सरकार और कर्मचारियों के बीच का सामाजिक अनुबंध एकतरफ़ा नहीं बदला जाना चाहिए
UPSC में यह विषय कहाँ आता है
GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था): सार्वजनिक वित्त, राजकोषीय नीति, सरकारी बजट, पेंशन देनदारी।
GS पेपर 2 (शासन): कल्याणकारी नीतियाँ, सामाजिक सुरक्षा में केंद्र-राज्य संबंध।
निबंध पेपर: पीढ़ियों के बीच इंसाफ़, कल्याणकारी राज्य, राजकोषीय संघवाद।
प्रीलिम्स के मुख्य तथ्य:
- OPS बंद हुई: 1 जनवरी 2004
- NPS का नियामक: PFRDA (PFRDA अधिनियम, 2013)
- NPS में अंशदान: 10% कर्मचारी + 14% सरकार
- UPS का ऐलान: 24 अगस्त 2024; लागू 1 अप्रैल 2025 से
- UPS की पेंशन: आख़िरी 12 महीनों के औसत बेसिक का 50% (25+ साल की नौकरी पर)
- UPS की न्यूनतम पेंशन: ₹10,000 प्रति महीना (10+ साल की नौकरी पर)
- UPS में सरकार का अंशदान: 18.5% (NPS के 14% के मुक़ाबले)
- OPS पर लौटने वाला पहला राज्य: राजस्थान (अप्रैल 2022)
- RBI की चेतावनी का साल: 2023 — राज्यों के OPS पर लौटने को लेकर
- नियामक: पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA)
- NPS का टैक्स फ़ायदा: धारा 80CCD(1B) के तहत ₹50,000