पीएम धन धान्य कृषि योजना (PMDDKY) की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में हुई थी। इसका मक़सद देश भर के 100 ऐसे ज़िलों को खेती के मज़बूत इलाक़ों में बदलना है जहाँ पैदावार भी कम है और किसानों की कमाई भी। योजना खेती में लंबे समय से चली आ रही इलाक़ाई खाई को पाटने की कोशिश करती है, और इसके लिए फ़सलों में विविधता, सिंचाई, कर्ज़ तक पहुँच, फ़सल कटने के बाद का ढाँचा और तकनीक अपनाने पर ज़ोर देती है। यह सरकार की उस सोच को दिखाती है जिसमें हर पात्र तक पहुँचने की कोशिश होती है — पिछड़े ज़िले चुनकर, वहाँ कई मौजूदा योजनाओं को एक साथ लाकर नतीजे गिनने लायक़ बनाना। PMDDKY UPSC प्रीलिम्स और GS पेपर III (कृषि) दोनों के लिए काम की है।
पृष्ठभूमि और ज़रूरत

भारत दूध, दलहन और मसालों का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक है और चावल, गेहूँ और फलों का दूसरा सबसे बड़ा, फिर भी ज़िले दर ज़िले खेती की पैदावार में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है:
- ऊपर के 50 ज़िले कुल उपज में अपने हिस्से से कहीं ज़्यादा योगदान देते हैं।
- 100 से ज़्यादा ज़िलों में फ़सल की पैदावार, किसानों की कमाई और फ़सलों की विविधता लगातार देश के औसत से नीचे रहती है।
- ये ज़िले ज़्यादातर पूर्वी भारत, आदिवासी इलाक़ों, बारिश पर निर्भर क्षेत्रों और सरहदी इलाक़ों में हैं।
PMDDKY इसी खाई को चुने हुए कम पैदावार वाले ज़िलों में तय समय के भीतर, एक जगह पर टिके काम से पाटना चाहती है।
मुख्य मक़सद
| मक़सद | क्या करना है |
|---|---|
| फ़सल की पैदावार बढ़ाना | चुने हुए ज़िलों में मुख्य फ़सलों (अनाज, दलहन, तिलहन) की पैदावार देश के औसत तक लाना |
| फ़सलों में विविधता | रकबा ज़्यादा क़ीमत वाली फ़सलों — दलहन, तिलहन, बाग़वानी — की तरफ़ मोड़ना, ताकि सिर्फ़ अनाज पर निर्भरता घटे |
| किसान की कमाई बढ़ाना | वाजिब दाम दिलाना और खेती की लागत घटाना |
| फ़सल कटने के बाद का ढाँचा मज़बूत करना | भंडारण, कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग की सुविधाएँ खड़ी करना |
| सिंचाई का दायरा बढ़ाना | चुने हुए ज़िलों में हर खेत तक सूक्ष्म सिंचाई पहुँचाना |
| डिजिटल खेती अपनाना | मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मौसम की सलाह और सटीक खेती के औज़ार पहुँचाना |
कौन से ज़िले

ये 100 ज़िले एक मिले-जुले सूचकांक से चुने गए हैं, जिसमें ये बातें देखी जाती हैं:
- फ़सल की पैदावार (प्रति हेक्टेयर उपज देश के औसत से कम)
- किसानों की कमाई (खेती से प्रति व्यक्ति आमदनी)
- फ़सल विविधता सूचकांक (एक ही फ़सल पर कितनी निर्भरता है)
- सिंचाई का दायरा (कुल बोए गए रकबे का कितना हिस्सा सिंचित है)
- कर्ज़ की पहुँच (प्रति हेक्टेयर खेती का कर्ज़)
ये ज़िले क़रीब 20 राज्यों में फैले हैं, और सबसे ज़्यादा यहाँ हैं:
| इलाक़ा | जिन राज्यों में सबसे ज़्यादा ज़िले |
|---|---|
| पूर्वी भारत | बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल |
| मध्य भारत | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ |
| पूर्वोत्तर | असम, मेघालय, मणिपुर |
| पश्चिमी भारत | राजस्थान (सूखे/अर्ध-सूखे ज़िले) |
योजना के मुख्य हिस्से
1. फ़सल की पैदावार बढ़ाना
- ज़्यादा उपज देने वाले (HYV) बीज और मौसम की मार झेल सकने वाली क़िस्में बाँटना।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर पोषक तत्वों का इंतज़ाम — खाद उतनी ही, जितनी ज़रूरत हो।
- एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के तरीक़े अपनाना।
- खेत पर सिखाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के कर्मचारियों को उतारना।
2. फ़सलों में विविधता
- कौन सी फ़सलें: दलहन (तुअर, मूँग, मसूर), तिलहन (सरसों, सोयाबीन, मूँगफली) और बाग़वानी (सब्ज़ियाँ, फल)।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की जानकारी फैलाने के अभियान, ताकि किसान वे फ़सलें उगाएँ जिनकी सरकारी ख़रीद होती है।
- पीएम किसान संपदा योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों (FPUs) के साथ अनुबंध खेती का जुड़ाव।
3. सिंचाई और पानी का इंतज़ाम
- हर खेत तक सूक्ष्म सिंचाई — पीएम कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर।
- गाँव के साझा सिंचाई ढाँचे — चेक डैम, खेत तालाब और जलग्रहण संरचनाएँ।
- पानी बचाने के कामों के लिए MGNREGS के साथ तालमेल।
4. फ़सल कटने के बाद और बाज़ार से जुड़ाव
- कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के तहत गोदाम और कोल्ड स्टोरेज बनाना।
- दाम का सही पता चलने के लिए e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाज़ार) से जुड़ाव मज़बूत करना।
- हर चुने हुए ज़िले में किसान उत्पादक संगठन (FPO) खड़े करना।
5. कर्ज़ और बीमा
- हर किसान के पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) — इन 100 ज़िलों में कोई किसान छूटे नहीं।
- पीएम फ़सल बीमा योजना (PMFBY) में जोड़ने के अभियान।
- छोटी अवधि के फ़सल कर्ज़ पर ब्याज में छूट।
6. डिजिटल खेती
- Agri Stack से जुड़ाव — किसानों की डिजिटल पहचान, ज़मीन के रिकॉर्ड से जुड़ी हुई।
- सैटेलाइट के आँकड़ों से मौसम आधारित फ़सल बीमा।
- फ़सल की सेहत देखने और कीटनाशक छिड़कने के लिए ड्रोन।
अमल का ढाँचा
| स्तर | ज़िम्मेदारी |
|---|---|
| राष्ट्रीय | कृषि एवं किसान कल्याण विभाग; निगरानी NITI Aayog की |
| राज्य | राज्य कृषि विभाग; मुख्य सचिव के स्तर पर निगरानी |
| ज़िला | ज़िला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट नोडल अधिकारी; ज़िला कृषि योजना |
| ब्लॉक/गाँव | KVK के वैज्ञानिक, कृषि विस्तार अधिकारी, FPO के मुखिया |
योजना तालमेल के मॉडल पर चलती है — यह बजट में कोई नई अलग मद नहीं बनाती, बल्कि पहले से चल रही योजनाओं (PMKSY, PMFBY, AIF, KCC, e-NAM, MGNREGS) को एक जगह जोड़ती है और जहाँ कमी रह जाए वहाँ थोड़ा और पैसा डालती है।
बजट और पैसा कहाँ से
PMDDKY की घोषणा में 2025-26 से 2028-29 तक फैला हुआ अनुमानित अतिरिक्त ख़र्च बताया गया था। इसके अलावा पैसा इन योजनाओं से जुड़कर आता है:
| योजना | सालाना रकम (लगभग) |
|---|---|
| पीएम कृषि सिंचाई योजना | ₹10,000 करोड़ |
| कृषि अवसंरचना कोष | ₹1,00,000 करोड़ (5 साल में) |
| पीएम फ़सल बीमा योजना | ₹15,000 करोड़ |
| तिलहन एवं ऑयल पाम पर राष्ट्रीय मिशन | ₹10,000 करोड़ (5 साल में) |
मिलती-जुलती योजनाओं से तुलना
| बात | PMDDKY (2025) | आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम (2018) | PM-AASHA |
|---|---|---|---|
| किस पर ज़ोर | 100 ज़िलों में खेती की पैदावार | 112 ज़िलों में कई क्षेत्रों का विकास | दलहन, तिलहन, खोपरा के लिए दाम का सहारा |
| तरीक़ा | तालमेल + थोड़ा अतिरिक्त पैसा | तालमेल + रैंकिंग की होड़ | सीधी ख़रीद + दाम के अंतर का भुगतान |
| नोडल मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण | NITI Aayog | कृषि एवं किसान कल्याण |
| लक्ष्य | फ़सल की पैदावार, किसान की कमाई | स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बुनियादी ढाँचा | किसानों को वाजिब दाम |
क्या नतीजे उम्मीद हैं
- चुने हुए ज़िलों में 3 साल के भीतर फ़सल की पैदावार में 15-20% बढ़ोतरी।
- विविधता — दलहन और तिलहन का रकबा 10-15% बढ़ना।
- KCC हर किसान तक — पात्र किसानों में 100% कवरेज।
- गोदाम और कोल्ड चेन बनाकर फ़सल कटने के बाद होने वाला नुक़सान घटाना।
- किसानों की कमाई में बढ़ोतरी, जो किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य से मेल खाती हो।
UPSC से नाता
GS पेपर III: कृषि — मुख्य फ़सलें, सिंचाई, कृषि विपणन और उससे जुड़े मुद्दे; खाद्य प्रसंस्करण और उससे जुड़े उद्योग।
GS पेपर II: अलग-अलग क्षेत्रों के विकास के लिए सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप।
प्रीलिम्स के लिए ज़रूरी बातें:
- पीएम धन धान्य कृषि योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में 100 कम पैदावार वाले ज़िलों के लिए हुई।
- यह तालमेल पर टिकी योजना है, बजट में कोई अलग मद नहीं।
- मुख्य ज़ोर: फ़सलों में विविधता, सूक्ष्म सिंचाई, हर किसान तक KCC, फ़सल कटने के बाद का ढाँचा, डिजिटल खेती।
- निशाने पर दलहन, तिलहन और बाग़वानी हैं — यानी सिर्फ़ अनाज उगाने की आदत तोड़ना।
- यह योजना NITI Aayog के 2018 में शुरू किए गए आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम के मॉडल पर बनी है।
- ज़िले के स्तर पर ज़िला कलेक्टर नोडल अधिकारी होता है।
- यह PMKSY, PMFBY, AIF, e-NAM और MGNREGS से जुड़कर चलती है।