संप्रभु क्रेडिट रेटिंग (Sovereign Credit Rating) किसी देश की सरकार की ऋण दायित्वों को समय पर चुकाने की इच्छा और क्षमता का स्वतंत्र मूल्यांकन है। यह अंतर्राष्ट्रीय पूँजी बाजारों में निवेशकों का विश्वास और उधारी लागत निर्धारित करती है।
प्रमुख रेटिंग एजेंसियाँ (“बिग थ्री”)
- Moody’s: Aaa से C तक। BBB-/Baa3+ = निवेश-ग्रेड (Investment Grade)।
- S&P Global Ratings: AAA से D तक।
- Fitch Ratings: AAA से D तक।
रेटिंग की पद्धति
मात्रात्मक कारक
- GDP वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय।
- राजकोषीय घाटा और सरकारी ऋण (GDP का %)।
- चालू खाता घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार।
गुणात्मक कारक
- राजनीतिक स्थिरता और शासन गुणवत्ता।
- संस्थागत ताकत और नीतिगत विश्वसनीयता।
भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग
- Moody’s: Baa3 (स्थिर) — निवेश-ग्रेड की न्यूनतम सीमा।
- S&P: BBB- (स्थिर)।
- Fitch: BBB- (स्थिर)।
उच्च सरकारी ऋण-GDP अनुपात (~83-84%) रेटिंग उन्नयन में बाधा है।
भारत की आलोचनाएँ
- भारत का तर्क: रेटिंग एजेंसियाँ घरेलू बचत, $600+ अरब विदेशी मुद्रा भंडार और स्थानीय मुद्रा ऋण को उचित महत्व नहीं देतीं।
- 2008 वित्तीय संकट में एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल।
रेटिंग सुधार के उपाय
- राजकोषीय समेकन — बजट 2025-26 में घाटा GDP का 4.4% लक्ष्य।
- संरचनात्मक सुधार — GST, IBC, श्रम कानून।
- पारदर्शिता और डेटा प्रकटीकरण।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-III: बाह्य क्षेत्र, वित्तीय बाजार, विदेश नीति।
- प्रारंभिक: निवेश-ग्रेड = BBB- और ऊपर।
- मुख्य: “संप्रभु क्रेडिट रेटिंग का महत्व और भारत के अनुभव पर टिप्पणी करें।”
संप्रभु क्रेडिट रेटिंग अंतर्राष्ट्रीय वित्त का थर्मामीटर है। भारत के लिए राजकोषीय मजबूती, संरचनात्मक सुधार और पारदर्शिता ही रेटिंग उन्नयन की राह है।