UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

UPSC दर्शनशास्त्र वैकल्पिक प्रश्न-पत्र 2026: पेपर I और पेपर II, सभी सवाल

UPSC दर्शनशास्त्र वैकल्पिक 2026 के पेपर I और II के सभी सवाल, नंबर और सिलेबस यूनिट के साथ। पश्चिमी, भारतीय दर्शन और धर्म-दर्शन में नंबर कहाँ गए, यहाँ देखिए।

UPSC दर्शनशास्त्र वैकल्पिक प्रश्न-पत्र 2026, पेपर I और पेपर II

UPSC दर्शनशास्त्र वैकल्पिक 2026 के दोनों पेपर यहाँ पूरे हैं, हर सवाल उसके नंबर और सिलेबस यूनिट के साथ। दोनों पेपर तीन घंटे और 250 नंबर के थे। हर पेपर में दो खंडों में 50-50 नंबर के 8 सवाल थे, जिनमें से 5 करने थे; सवाल 1 और 5 ज़रूरी थे, और बाकी तीन में हर खंड से कम से कम एक।

पेपर I का खंड A पश्चिमी दर्शन और खंड B भारतीय दर्शन का था। पेपर II का खंड A सामाजिक-राजनीतिक दर्शन और खंड B धर्म-दर्शन का था। हर पेपर के बाद यूनिट के हिसाब से नंबरों का बँटवारा है, जिससे दिखता है कि 2026 में किस विचारक और किस दर्शन पर ज़ोर रहा।

दर्शनशास्त्र वैकल्पिक 2026 पेपर I

आधिकारिक प्रश्न-पत्र: दर्शनशास्त्र वैकल्पिक 2026 पेपर I (UPSC PDF)। समय तीन घंटे, अधिकतम अंक 250।

खंड A में कोई एक विचारक हावी नहीं था: कान्ट और हेगेल को मिलाकर 40 नंबर गए, और विश्लेषणात्मक परंपरा (मूर, पूर्ववर्ती और उत्तरवर्ती विटगेन्स्टाइन, तार्किक भाववादी और स्ट्रॉसन) ने खंड A के 200 में से 80 नंबर लिए। खंड B में वेदांत सबसे आगे रहा, 45 नंबर, निम्बार्क, रामानुज और द्वैत के पंचविधभेद के ज़रिए; न्याय-वैशेषिक और सांख्य-योग 40-40 नंबर पर रहे।

खंड A

प्र.सवालअंकयूनिट
1(a)स्पिनोज़ा मनस् की दशाओं तथा शारीरिक क्रियाओं के बीच संबंध की किस प्रकार व्याख्या करते हैं?10बुद्धिवाद और अनुभववाद
1(b)लॉक द्वारा प्रतिपादित अंतःप्रज्ञात्मक ज्ञान तथा निदेशात्मक ज्ञान के बीच भेद की व्याख्या कीजिए।10बुद्धिवाद और अनुभववाद
1(c)हेगेल के इस सम्प्रत्यय की व्याख्या कीजिए कि सत्ता के रूप में निरपेक्ष की अवधारणा, स्व-विकास की प्रक्रिया के रूप में निरपेक्ष के संभवन की अवधारणा है।10कान्ट और हेगेल
1(d)अरस्तू तथा लाइब्निज़ के दर्शन में प्रस्तुत अन्तस्तत्त्व (एन्टेलेची) की अवधारणा में तुलना तथा विभेद कीजिए।10प्लेटो और अरस्तू
1(e)”उदाहरणतः मैं अभी यह सिद्ध कर सकता हूँ कि दो मानव हाथ विद्यमान हैं।” मूर इस उदाहरण से बाह्य जगत् की सत्ता को कैसे सिद्ध करते हैं? आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।10मूर, रसेल और पूर्ववर्ती विटगेन्स्टाइन
2(a)अरस्तू के अनुसार तत्त्वमीमांसा की मूलभूत समस्या क्या है? अरस्तू के जगत् के तत्त्वसार के विवरण के सम्बन्ध में इसकी विवेचना कीजिए, जिसमें वे परमाणुवादियों तथा प्लेटो दोनों के मत को नकार देते हैं।20प्लेटो और अरस्तू
2(b)ह्यूम तर्क के संप्रत्ययों का विवरण किस प्रकार देते हैं? इस संबंध में कान्ट, ह्यूम के विचारों का किस प्रकार प्रत्युत्तर देते हैं? आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।15कान्ट और हेगेल
2(c)सार्त्र की चेतना की ‘शून्य (नथिंग)’ के रूप में अवधारणा का वर्णन कीजिए। यह किस प्रकार हुसर्ल की चेतना की अवधारणा से भिन्न है? विवेचना कीजिए।15परिघटनाविज्ञान और अस्तित्ववाद
3(a)चेतना की अवस्थाओं को हम किसी भी वस्तु पर क्यों आरोपित करते हैं तथा हम इन्हें उन्हीं वस्तुओं पर क्यों आरोपित करते हैं, जिन पर हम भौतिक गुणों का भी आरोपण करते हैं? स्ट्रॉसन अपनी पुस्तक इन्डिविजुअल्स में इन प्रश्नों का किस प्रकार उत्तर देते हैं?20क्वाइन और स्ट्रॉसन
3(b)मानव-अस्तित्व के पर्यायों के रूप में हाइडेगर की प्रामाणिकता (ऑथेन्टिसिटी) तथा अप्रामाणिकता (इनऑथेन्टिसिटी) की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।15परिघटनाविज्ञान और अस्तित्ववाद
3(c)क्या शब्दों की उनका प्रयोग करने वाले व्यक्ति के मनस् में स्थित प्रत्ययों के रूप में अवधारणा की जा सकती है? उत्तरवर्ती विटगेन्स्टाइन के दर्शन के संदर्भ में उत्तर दीजिए।15उत्तरवर्ती विटगेन्स्टाइन
4(a)”विटगेन्स्टाइन की किसी भाषा की संरचना के विषय में उसी भाषा में कुछ न कह पाने की अक्षमता की समस्या को भाषा की सोपानिकी (हाइराकी) के प्रत्यय/अवधारणा से हल किया जा सकता है।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क तथा प्रमाण प्रस्तुत कीजिए।20मूर, रसेल और पूर्ववर्ती विटगेन्स्टाइन
4(b)कान्ट तथा हेगेल यथार्थता तथा यथार्थता विषयक हमारी सोच के बीच सम्बन्ध की जिन विभिन्न प्रकारों से अवधारणा करते हैं, उसका विश्लेषण तथा विवेचना कीजिए।15कान्ट और हेगेल
4(c)तार्किक भाववादियों ने किस प्रकार दर्शनशास्त्र को विज्ञान के दृष्टि-अनुरूप बनाने का प्रयास किया तथा विज्ञान की एकीकृत भाषा की स्थापना की? उनकी यह योजना क्यों असफल हुई? विवेचना कीजिए।15तार्किक भाववाद

खंड B

प्र.सवालअंकयूनिट
5(a)न्याय के अनुमान विषयक मतानुसार वे क्या विशेषताएँ हैं, जो हेतु की वैधता को सुनिश्चित करती हैं? विवेचना कीजिए।10न्याय-वैशेषिक
5(b)बौद्धों का क्षणिकवाद किस प्रकार मानव कर्म तथा उत्तरदायित्व-सम्बन्धी विषय का समस्यायीकरण कर देता है? समालोचनात्मक व्याख्या कीजिए।10जैन और बौद्ध दर्शन
5(c)क्या ‘पुरुष’ एक है या अनेक? इस संदर्भ में सांख्य दर्शन की मान्यताओं की व्याख्या तथा परीक्षण कीजिए।10सांख्य और योग
5(d)वैशेषिक दर्शन में प्रतिपादित ‘समवाय’ के स्वरूप की समालोचनात्मक व्याख्या कीजिए।10न्याय-वैशेषिक
5(e)‘सम्प्रज्ञात समाधि’ तथा ‘असम्प्रज्ञात समाधि’ के बीच विभेद के विशेष संदर्भ में योग दर्शन में ‘समाधि’ के स्वरूप की व्याख्या कीजिए।10सांख्य और योग
6(a)”आम का वृक्ष, आम के बीज से विकसित होता है।” अपने विरोधी परिप्रेक्ष्यों का प्रतिकार करते हुए सांख्य दार्शनिक इस प्रक्रिया की किस प्रकार अपने कारणता सिद्धान्त से व्याख्या करते हैं?20सांख्य और योग
6(b)त्रिरूपान्तरण के माध्यम से अतिमानसिक चेतना की प्राप्ति हेतु श्री अरविन्द के सकल योग की मूलभूत विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।15श्री अरविन्द
6(c)शब्दों द्वारा ज्ञान (शाब्दबोध) के संदर्भ में नैयायिकों तथा प्रभाकर मीमांसकों के बीच विवाद के प्रमुख बिन्दुओं को उजागर कीजिए।15मीमांसा
7(a)अख्यातिवादियों द्वारा भ्रांत संज्ञान की व्याख्या के लिए प्रस्तुत युक्तियों की समालोचनात्मक व्याख्या कीजिए। अन्यथाख्यातिवादियों द्वारा अख्यातिवादियों के विरुद्ध दिए गए तर्कों का मूल्यांकन कीजिए।20मीमांसा
7(b)‘सप्तभंगीनय’ के अर्थ तथा ‘अनेकान्तवाद’ को सिद्ध करने हेतु जैनों के ‘स्याद्वाद’ में इसके अनुप्रयोग की व्याख्या कीजिए।15जैन और बौद्ध दर्शन
7(c)क्या आप निम्बार्क द्वारा दी गई ईश्वर, आत्मा तथा जड़ के स्वरूप की व्याख्या से सहमत हैं? अपने उत्तर का औचित्य सिद्ध कीजिए।15वेदांत
8(a)उपमान का एक प्रमाण के रूप में विवरण दीजिए। उपमान के विषय में न्याय मत किस प्रकार मीमांसा मत से भिन्न है? विवेचना कीजिए।20न्याय-वैशेषिक
8(b)ब्रह्म के ‘चित्’ तथा ‘अचित्’ से संबंध की व्याख्या में आने वाली कठिनाइयों के विशेष संदर्भ में रामानुज की ब्रह्म की अवधारणा की समालोचनात्मक व्याख्या कीजिए।15वेदांत
8(c)वेदांत का द्वैतवादी मत यह क्यों मानता है कि ‘भेदों’ की पृथक् सत्ता है तथा वे वस्तुओं के अद्वितीय स्वरूप की निर्मिति करते हैं? ‘पंचविधभेद’ सिद्धांत के संदर्भ में उत्तर दीजिए।15वेदांत

2026 पेपर I: नंबर कहाँ रहे

यूनिटअंकपेपर में हिस्सा
वेदांत4511.2%
कान्ट और हेगेल4010.0%
न्याय-वैशेषिक4010.0%
सांख्य और योग4010.0%
मीमांसा358.8%
मूर, रसेल और पूर्ववर्ती विटगेन्स्टाइन307.5%
परिघटनाविज्ञान और अस्तित्ववाद307.5%
प्लेटो और अरस्तू307.5%
जैन और बौद्ध दर्शन256.2%
क्वाइन और स्ट्रॉसन205.0%
बुद्धिवाद और अनुभववाद205.0%
उत्तरवर्ती विटगेन्स्टाइन153.8%
तार्किक भाववाद153.8%
श्री अरविन्द153.8%

दर्शनशास्त्र वैकल्पिक 2026 पेपर II

आधिकारिक प्रश्न-पत्र: दर्शनशास्त्र वैकल्पिक 2026 पेपर II (UPSC PDF)। समय तीन घंटे, अधिकतम अंक 250।

खंड A के 200 नंबर सात यूनिट में बँटे और चार यूनिट पर 35-35 नंबर गए: सामाजिक-राजनीतिक आदर्श, संप्रभुता, शासन के रूप और विचारधाराएँ, और लैंगिक व जातिगत भेदभाव। खंड B में धर्म और नैतिकता 35 नंबर के साथ आगे रहा, जिसमें गांधी का ईश्वर सत्य है से सत्य ईश्वर है तक का बदलाव भी था; धार्मिक भाषा, बहुलवाद और ईश्वर की अवधारणाएँ 30-30 पर रहीं। भारतीय विचारक दोनों खंडों में आए: कौटिल्य, आंबेडकर, गांधी और मध्वाचार्य।

खंड A

प्र.सवालअंकयूनिट
1(a)रॉल्स क्यों न्याय के दो सिद्धान्तों को कोशीय क्रम में प्रयुक्त करना आवश्यक समझते हैं ? व्याख्या कीजिए।10सामाजिक-राजनीतिक आदर्श
1(b)क्या प्लेटो के आदर्श राज्य की परिकल्पना की नागरिक विशेष के अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं के साथ संगतता है ? विवेचना कीजिए।10सामाजिक-राजनीतिक आदर्श
1(c)अराजकतावाद अपने आप में एक स्वतंत्र राजनीतिक विचारधारा नहीं है, बल्कि यह एक ओर स्वतंत्रतावाद एवं दूसरी ओर समाजवाद से प्रेरित है। विश्लेषण कीजिए।10शासन के रूप और विचारधाराएँ
1(d)किन आधारों पर मार्क्सवाद विशुद्ध लोकतंत्र की आलोचना करता है ?10शासन के रूप और विचारधाराएँ
1(e)मूल्य आधारित शिक्षा किस प्रकार भ्रष्टाचार की समस्या को संबोधित करती है ?10अपराध और दंड
2(a)सम्प्रभुता के संदर्भ में कौटिल्य के राजमण्डल के सिद्धान्त के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।20संप्रभुता
2(b)क्या महिलाओं को भूमि एवं संपत्ति अधिकार प्रदान करना लिंगों के बीच सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक शर्त अथवा पर्याप्त शर्त अथवा दोनों हैं ? विवेचना कीजिए।15लैंगिक और जातिगत भेदभाव
2(c)समूह अधिकारों एवं व्यक्तिगत अधिकारों के बीच सामंजस्यपूर्ण संतुलन स्थापित करने में बहुसांस्कृतिक समाज द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।15मानववाद, धर्मनिरपेक्षता और बहुसंस्कृतिवाद
3(a)प्रतिकारात्मकतावाद मृत्युदण्ड के लिए परिणाम निरपेक्ष औचित्य प्रस्तुत करता है, जबकि निवारण इसके लिए परिणाम सापेक्ष औचित्य प्रदान करता है। व्याख्या कीजिए।20अपराध और दंड
3(b)”राज्य की संरचना के दो परस्पर विरोधी विचार – राजतंत्र एवं प्रजातंत्र, दोनों ही तानाशाही के कुछ लक्षण सामान्य रूप से साझा करते हैं”। क्या आप इस विचार से सहमत हैं ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क तथा प्रमाण प्रस्तुत कीजिए।15शासन के रूप और विचारधाराएँ
3(c)नकारात्मक स्वतंत्रता परम व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विचार को अवतरित करती प्रतीत होती है, जबकि सकारात्मक स्वतंत्रता व्यक्तियों को उनके समग्र क्षमता को प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। विवेचना कीजिए।15सामाजिक-राजनीतिक आदर्श
4(a)किस प्रकार अंबेडकर ने ‘सामाजिक अंतःसरण’ की अवधारणा को जाति निवारण के लिए प्रयुक्त किया है ? पहचान एवं भेद की राजनीति पर समकालीन वाद-विवाद में इसकी प्रासंगिकता का मूल्यांकन कीजिए।20लैंगिक और जातिगत भेदभाव
4(b)सम्प्रभुता के एकत्ववादी एवं बहुलवादी दृष्टिकोणों के बीच अंतर्विरोध की व्याख्या कीजिए।15संप्रभुता
4(c)प्रजातंत्र एवं विकास के संबंध का परीक्षण कीजिए। क्या प्रजातंत्र विकास को उन्नत करता है या बाधित करता है ?15विकास और सामाजिक प्रगति

खंड B

प्र.सवालअंकयूनिट
5(a)विलियम जेम्स किन आधारों पर रहस्यवादी अवस्थाओं को धार्मिक अनुभव की वास्तविक अभिव्यक्ति के रूप में वर्णित करते हैं ? स्पष्ट कीजिए।10आस्था, तर्क और धार्मिक अनुभव
5(b)एक्विनास द्वारा ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए दिए गये जगत की आपातिकता पर आधारित तर्क की विवेचना कीजिए।10ईश्वर के अस्तित्व के प्रमाण
5(c)किस प्रकार पॉल टिलिच का परम सरोकार के रूप में आस्था का विचार, आस्था, संदेह एवं तर्क के बीच संबंध को संबोधित करता है ? मूल्यांकन कीजिए।10आस्था, तर्क और धार्मिक अनुभव
5(d)धार्मिक भाषा के स्वरूप पर आर. बी. ब्रेथवेट के विचारों की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।10धार्मिक भाषा
5(e)”यदि धर्म केवल तर्क का विषय होता तो वह आनुभाविक विवरण से रहित होता।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क प्रस्तुत कीजिए।10आस्था, तर्क और धार्मिक अनुभव
6(a)किस अर्थ में संत अगस्टाईन द्वारा पाप या पाप के दंड के रूप में सभी अशुभों का तादात्म्य नैतिक एवं प्राकृतिक अशुभ में सुसंगतता प्रदान करने में सफल या असफल है। मूल्यांकन कीजिए।20अशुभ की समस्या
6(b)नैतिक स्वायत्तता का मुद्दा किस प्रकार धर्म की नैतिकता के स्रोत के रूप में अवधारणा से विवादित होता है ? आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।15धर्म और नैतिकता
6(c)क्या धार्मिक बहुलवाद के सम्प्रत्यय में नैतिक सापेक्षवाद अनिवार्य रूप से अनुलागित है ? आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।15धार्मिक बहुलवाद
7(a)आर. एम. हेयर की ‘ब्लिक’ की अवधारणा का विश्लेषण कीजिए। क्या यह सफलतापूर्वक धार्मिक भाषा की अर्थवत्ता को संरक्षित करता है, इसका आकलन कीजिए।20धार्मिक भाषा
7(b)ईश्वर की वैयक्तिकीय तथा गैर वैयक्तिकीय अवधारणाओं के विभेद की भक्ति के संदर्भ में विवेचना कीजिए।15ईश्वर की अवधारणाएँ
7(c)क्या विभिन्न धर्मों के बीच परस्पर विरोधी सत्य के दावों को धार्मिक बहुलवादी ढांचे के भीतर समन्वित किया जा सकता है ? आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।15धार्मिक बहुलवाद
8(a)धर्म और नैतिकता के बीच अंतर्संबंध के संदर्भ में गांधी के ‘ईश्वर ही सत्य है’ से ‘सत्य ही ईश्वर है’ के मत में आए परिवर्तन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।20धर्म और नैतिकता
8(b)मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित ईश्वर के अस्तित्व के लिए दिए गये तर्कों की व्याख्या एवं परीक्षण कीजिए।15ईश्वर के अस्तित्व के प्रमाण
8(c)ईश्वर के गुणों के रूप में सर्वज्ञता तथा सर्वशक्तिमत्ता की समालोचनाओं का विवरण प्रस्तुत कीजिए।15ईश्वर की अवधारणाएँ

2026 पेपर II: नंबर कहाँ रहे

यूनिटअंकपेपर में हिस्सा
शासन के रूप और विचारधाराएँ358.8%
लैंगिक और जातिगत भेदभाव358.8%
धर्म और नैतिकता358.8%
सामाजिक-राजनीतिक आदर्श358.8%
संप्रभुता358.8%
अपराध और दंड307.5%
आस्था, तर्क और धार्मिक अनुभव307.5%
ईश्वर की अवधारणाएँ307.5%
धार्मिक भाषा307.5%
धार्मिक बहुलवाद307.5%
ईश्वर के अस्तित्व के प्रमाण256.2%
अशुभ की समस्या205.0%
विकास और सामाजिक प्रगति153.8%
मानववाद, धर्मनिरपेक्षता और बहुसंस्कृतिवाद153.8%

2026 के दर्शनशास्त्र पेपर से क्या समझ आता है

पेपर I के सभी 28 हिस्सों में किसी विचारक या दर्शन का नाम था, और कई हिस्सों में दो मतों की टक्कर पूछी गई: ह्यूम और कान्ट, सार्त्र और हुसर्ल, नैयायिक और प्राभाकर मीमांसक, अख्यातिवादी और अन्यथाख्यातिवादी। ऐसे सवाल में मोटा सार लिखने से काम नहीं चलता; हर मत को उसकी अपनी शब्दावली में रखना और फिर विरोधी मत से तुलना करना पड़ता है।

पेपर II का मिज़ाज अलग था। खंड A में ज़्यादातर अवधारणाएँ और बहसें पूछी गईं, जैसे रॉल्स का कोशीय क्रम, नकारात्मक और सकारात्मक स्वतंत्रता, प्रतिकारवाद बनाम निवारण और समूह अधिकार बनाम व्यक्तिगत अधिकार, और कुछ को कौटिल्य और आंबेडकर जैसे भारतीय विचारकों से जोड़ा गया। यहाँ साफ़ तर्क और एक समकालीन उदाहरण जवाब का बड़ा हिस्सा बनते हैं, जबकि पेपर I में पाठ की सटीकता ज़्यादा काम आती है।

पेपर I के पश्चिमी हिस्से में बुद्धिवाद और अनुभववाद के नंबर 2023 से 2025 तक 45 से 50 के बीच रहे, लेकिन 2026 में 20 रह गए। 2026 में प्लेटो और अरस्तू को 30 नंबर मिले। कान्ट और हेगेल को 40 नंबर मिले। दोनों के लिए यह चार साल का सबसे ऊँचा आँकड़ा है। भारतीय हिस्से में सबसे ज़्यादा उतार-चढ़ाव वेदांत में दिखा: 55, 10, 65, फिर 45। सांख्य और योग के नंबर 2025 के 15 से बढ़कर 2026 में 40 हो गए। जैन और बौद्ध दर्शन में यहाँ चार्वाक के सवाल भी गिने गए हैं। इसके नंबर 2024 के 60 से घटकर 2026 में 25 रह गए।

पेपर II में धर्म और नैतिकता पर 2023 में 10 नंबर थे, 2024 में भी 10। फिर 2025 में 25 नंबर आए, 2026 में 35। धार्मिक बहुलवाद के नंबर 2024 के 10 से बढ़कर 2026 में 30 हो गए। संप्रभुता के नंबर पहले तीन साल 15 से 20 के बीच रहे, 2026 में 35। ‘ईश्वर की अवधारणाएँ’ यूनिट के नंबर 80 से 30 पर गिरते दिखते हैं। लेकिन 2023 से 2025 के इसके ज़्यादातर नंबर आत्मा, पुनर्जन्म, मोक्ष, अज्ञेयवाद और ईश्वर-रहित धर्म वाले सवालों के हैं। 2026 की यूनिट सूची में इनके लिए कोई अलग यूनिट नहीं है। सिर्फ़ ईश्वर के स्वरूप वाले सवाल गिनें, तो इस यूनिट के नंबर 25, 30, 0 और 30 रहते हैं।

पेपर I: यूनिट के हिसाब से अंक, 2023 से 2026

यूनिट2023202420252026
वेदांत55106545
कान्ट और हेगेल30252540
न्याय-वैशेषिक60354040
सांख्य और योग15351540
मीमांसा30452535
प्लेटो और अरस्तू15102030
मूर, रसेल और पूर्ववर्ती विटगेन्स्टाइन15302530
परिघटनाविज्ञान और अस्तित्ववाद40453030
जैन और बौद्ध दर्शन30604025
बुद्धिवाद और अनुभववाद45505020
क्वाइन और स्ट्रॉसन20151520
तार्किक भाववाद20151515
उत्तरवर्ती विटगेन्स्टाइन15102015
श्री अरविन्द10151515

पेपर II: यूनिट के हिसाब से अंक, 2023 से 2026

यूनिट2023202420252026
सामाजिक-राजनीतिक आदर्श25554535
संप्रभुता20151535
शासन के रूप और विचारधाराएँ55204035
लैंगिक और जातिगत भेदभाव40303035
धर्म और नैतिकता10102535
अपराध और दंड20153030
ईश्वर की अवधारणाएँ70803530
आस्था, तर्क और धार्मिक अनुभव40404530
धार्मिक बहुलवाद15102030
धार्मिक भाषा25302530
ईश्वर के अस्तित्व के प्रमाण20153525
अशुभ की समस्या20151520
मानववाद, धर्मनिरपेक्षता और बहुसंस्कृतिवाद25502515
विकास और सामाजिक प्रगति15151515

विषय आपके लिए ठीक है या नहीं, यह <a href=”/hindi-notes/darshanashastr-vaikalpik-vishay-puri-guide/”>दर्शनशास्त्र वैकल्पिक की पूरी गाइड</a> में देखिए; उसमें किताबें, 24 हफ्तों की तैयारी योजना और दोनों पेपर के लिए उत्तर लिखने की रणनीति है।

दूसरे विषयों से तुलना के लिए <a href=”/upsc-optional-subjects/”>सभी UPSC वैकल्पिक विषयों की सूची</a> (अंग्रेज़ी में) देखिए।

सामान्य प्रश्न

UPSC दर्शनशास्त्र वैकल्पिक 2026 में क्या पूछा गया?

पेपर I के खंड A में अरस्तू और स्पिनोज़ा से लेकर हाइडेगर, स्ट्रॉसन और उत्तरवर्ती विटगेन्स्टाइन तक पश्चिमी दार्शनिक थे, और खंड B में न्याय, सांख्य, जैन, मीमांसा और वेदांत जैसे भारतीय दर्शन। पेपर II में सामाजिक-राजनीतिक दर्शन और धर्म-दर्शन था, जिसमें रॉल्स, कौटिल्य, आंबेडकर, ऑगस्टीन, आर. एम. हेयर और गांधी आए।

दर्शनशास्त्र के हर पेपर में कितने सवाल और नंबर होते हैं?

हर पेपर 250 नंबर का है और तीन घंटे चलता है। दो खंडों में 50-50 नंबर के 8 सवाल छपते हैं और आपको 5 करने होते हैं। सवाल 1 और 5 ज़रूरी हैं, और बाकी तीन में से कम से कम एक हर खंड से होना चाहिए।

दर्शनशास्त्र 2026 का आधिकारिक पेपर कहाँ से डाउनलोड करें?

UPSC आधिकारिक पेपर हिंदी और अंग्रेज़ी में upsc.gov.in के पिछले प्रश्न-पत्र वाले पेज पर डालता है। इस पेज पर भी हर पेपर के साथ उसका डाउनलोड लिंक है।

इस पेपर का तैयारी में इस्तेमाल कैसे करें?

हर सवाल को अपने नोट्स से मिलाइए और देखिए कि क्या आप विचारक का मत उसी की शब्दावली में लिखकर फिर विरोधी मत से तुलना कर सकते हैं, क्योंकि 2026 के कई हिस्से इसी तुलना पर बने थे। पेपर II के लिए कोशीय क्रम या सामाजिक अंतःसरण जैसी किसी अवधारणा को एक समकालीन उदाहरण के साथ 150 शब्दों में लिखने का अभ्यास कीजिए।

2026 का दर्शनशास्त्र पेपर पिछले सालों से कैसा है?

यह पेज सिर्फ़ 2026 पर है। दोनों पेपर में से पेपर I ने अपने सभी 28 हिस्सों में नाम लेकर विचारक और दर्शन पूछे, जबकि पेपर II में अवधारणाएँ और बहसें ज़्यादा थीं। पुराने सालों के लिए UPSC के पिछले प्रश्न-पत्र वाले पेज पर आधिकारिक पेपर सबसे भरोसेमंद हैं।

पेपर I 2026 में किस भारतीय दर्शन पर सबसे ज़्यादा नंबर गए?

वेदांत पर 45 नंबर गए, निम्बार्क, रामानुज और द्वैत के पंचविधभेद के ज़रिए। न्याय-वैशेषिक और सांख्य-योग 40-40 नंबर पर रहे, और मीमांसा 35 पर, भ्रम के सिद्धांतों और शाब्दबोध के ज़रिए।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

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