2026 के UPSC समाजशास्त्र वैकल्पिक के दोनों पेपर नीचे पूरे हैं: पेपर I (समाजशास्त्र के मूल सिद्धांत) और पेपर II (भारतीय समाज: संरचना और परिवर्तन), हर सवाल के नंबर और सिलेबस यूनिट के साथ। हर पेपर में 8 सवाल छपते हैं, कुल 400 नंबर के; आपको तीन घंटे में 5 सवाल करने होते हैं, 250 नंबर के लिए। सवाल 1 और 5 अनिवार्य हैं, और बाकी तीन में हर खंड से कम से कम एक सवाल होना चाहिए।
सवाल वैसे ही हैं जैसे UPSC ने छापे थे। हर पेपर की शुरुआत में डाउनलोड लिंक है और आख़िर में यूनिट के हिसाब से नंबरों का बँटवारा। तैयारी की योजना बनानी हो तो यही बँटवारा सबसे काम का है, क्योंकि इससे साफ़ दिखता है कि 2026 में परीक्षक ने ज़ोर कहाँ दिया।
समाजशास्त्र वैकल्पिक 2026 पेपर I
आधिकारिक प्रश्न-पत्र: समाजशास्त्र वैकल्पिक 2026 पेपर I (UPSC PDF)। समय तीन घंटे, अधिकतम अंक 250।
पेपर I में पद्धति का दबदबा रहा। विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र, शोध पद्धति और एक विषय के रूप में समाजशास्त्र, इन तीन यूनिटों से 400 में से 110 नंबर आए, प्रत्यक्षवाद बनाम निर्वचनवाद से लेकर ग्राउंडेड थ्योरी और प्रतिच्छेदात्मकता तक। क्लासिकल विचारकों से 70 नंबर और आए, जिनमें मार्क्स की उत्पादन-पद्धति दो बार (2a और 6b) पूछी गई, जबकि नातेदारी से सिर्फ़ एक 10 नंबर का सवाल आया।
खंड A
| प्र. | सवाल | अंक | यूनिट |
|---|---|---|---|
| 1(a) | किन तरीकों से वर्ग तथा जाति सामाजिक संरचना को आकार देने में एक दूसरे का अंतरानुभाग एवं परस्पर व्याप्ति करते हैं ? | 10 | स्तरीकरण और गतिशीलता |
| 1(b) | अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में महिलाओं की स्थिति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। | 10 | कार्य और आर्थिक जीवन |
| 1(c) | सामाजिक परिवर्तन एवं विकास में भौगोलिक कारकों की भूमिका की विवेचना कीजिए। | 10 | आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन |
| 1(d) | यद्यपि समाजशास्त्र, अध्ययन के एक विषय के रूप में, समाजविज्ञानों के सभी विषयों को सर्व समावेशित करता है, तो भी यह अपनी विशिष्टताओं को बनाये हुए है। टिप्पणी कीजिये। | 10 | एक विषय के रूप में समाजशास्त्र |
| 1(e) | सामाजिक एवं राजनीतिक परिवर्तन लाने में सामाजिक आन्दोलन, सामूहिक क्रिया एवं क्रान्ति के सम्बन्धों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिये। | 10 | राजनीति और समाज |
| 2(a) | समाज पर उत्पादन के पूँजीवादी तरीके के प्रभाव का वर्णन कीजिए। | 20 | समाजशास्त्रीय विचारक |
| 2(b) | सामाजिक संस्तरण एवं सामाजिक अपवर्जन में विभेद कीजिए तथा जाति व्यवस्था के संदर्भ में, अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए। | 20 | स्तरीकरण और गतिशीलता |
| 2(c) | ‘आंकड़े बिना सिद्धान्त के निरुद्देश्य होते हैं एवं सिद्धान्त बिना आकड़ों के निष्फल (रिक्त) होता है।’ टिप्पणी कीजिये। | 10 | शोध पद्धति और विश्लेषण |
| 3(a) | आधुनिक समाज में धर्म तथा विज्ञान के सम्बन्धों की विवेचना कीजिए। क्या वे अनिवार्य रूप से द्वन्द्व में रहते हैं ? | 20 | धर्म और समाज |
| 3(b) | क्या सामाजिक वास्तविकता के विश्लेषण में ‘प्रत्यक्षवाद’ के सापेक्ष ‘निर्वचन वाद’ अधिक प्रभावशाली है ? विवेचना कीजिए। | 20 | विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र |
| 3(c) | इमाईल डरखाईम किस प्रकार से धर्म को एक ‘सामाजिक तथ्य’ के रूप में अवधारणीकृत करता है ? व्याख्या कीजिये। | 10 | समाजशास्त्रीय विचारक |
| 4(a) | शक्ति के प्रमुख सिद्धान्तों की विस्तार से व्याख्या कीजिए। आधुनिक समाज में शक्ति अभिजन किस तरह राजनैतिक प्रक्रिया को आकार (स्वरूप) प्रदान करता है ? | 20 | राजनीति और समाज |
| 4(b) | ग्रामीण गृहस्थी पर प्रवास के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन कीजिये। | 20 | आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन |
| 4(c) | ‘जटिल सामाजिक घटनाओं को समझने में समाजशास्त्र की पद्धतियाँ अपर्याप्त हैं’। विवेचना कीजिये। | 10 | विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र |
खंड B
| प्र. | सवाल | अंक | यूनिट |
|---|---|---|---|
| 5(a) | समाजशास्त्र के शोधार्थियों के समक्ष प्रमुख चुनौती सामाजिक वास्तविकता का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण करने की है। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये। | 10 | विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र |
| 5(b) | समाजशास्त्र में ‘परिस्थिति की परिभाषा’ की अवधारणा तथा इसके महत्व की व्याख्या कीजिए। | 10 | समाजशास्त्रीय विचारक |
| 5(c) | किस तरह से ‘पितृसत्तात्मक सौदा’ की अवधारणा को विवाह संस्था को समझने के लिये प्रयोग किया जा सकता है ? टिप्पणी कीजिये। | 10 | नातेदारी व्यवस्था |
| 5(d) | मैक्स वेबर का ‘सत्ता का सिद्धान्त’ किस तरह नौकरशाही को आकार (स्वरूप) प्रदान करता है ? विश्लेषण कीजिये। | 10 | समाजशास्त्रीय विचारक |
| 5(e) | विभिन्न सिद्धान्त सामाजिक आन्दोलनों के आयामों की व्याख्या किस प्रकार करते हैं ? विवेचना कीजिए। | 10 | राजनीति और समाज |
| 6(a) | समाजशास्त्र के बौद्धिक उद्भव तथा इसके उद्विकास के ऐतिहासिक पूर्ववृत्तों की विवेचना एक अलग अध्ययन क्षेत्र के रूप में कीजिए। | 20 | एक विषय के रूप में समाजशास्त्र |
| 6(b) | ‘उत्पादन की प्रणाली’ विमर्श का विभिन्न परिप्रेक्ष्य से समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये। | 20 | समाजशास्त्रीय विचारक |
| 6(c) | किस तरह नये ‘पंथों’ एवं ‘संप्रदायों’ का उदय अन्तर्जातीय सम्बन्धों को प्रभावित करता है ? | 10 | धर्म और समाज |
| 7(a) | समाजशास्त्र में ‘सिद्धान्त केन्द्रित अनुसंधान’ (थ्योरी ड्रिवेन रिसर्च) विधियों के साथ ‘अधिष्ठानित सिद्धान्त’ (ग्राउन्डेड थ्योरी) की तुलना कीजिये तथा समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये। | 20 | विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र |
| 7(b) | वेबर के अनुसार कैसे वर्ग, प्रस्थिति तथा शक्ति की अंतर्क्रिया सामाजिक असमानता का निर्माण एवं पोषण करते हैं ? | 20 | स्तरीकरण और गतिशीलता |
| 7(c) | ‘औद्योगिक पूँजीवाद’ एवं ‘प्लेटफॉर्म पूँजीवाद’ में कार्य के सामाजिक संगठन की तुलना कीजिए। | 10 | कार्य और आर्थिक जीवन |
| 8(a) | एक प्रजातंत्र में राष्ट्र, राज्य तथा नागरिकता की अवधारणाएं किस तरह अन्तर्सम्बन्धित हैं ? विस्तार से बताइये। | 20 | राजनीति और समाज |
| 8(b) | सामाजिक परिवर्तन के चक्रीय सिद्धान्त की समकालीन समाजों को समझने में सार्थकता का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। | 20 | आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन |
| 8(c) | सामाजिक अनुसंधान में ‘प्रतिच्छेदात्मकता’ के महत्व एवं सीमाओं की विवेचना कीजिए। | 10 | शोध पद्धति और विश्लेषण |
2026 पेपर I: नंबर कहाँ रहे
| यूनिट | अंक | पेपर में हिस्सा |
|---|---|---|
| समाजशास्त्रीय विचारक | 70 | 17.5% |
| राजनीति और समाज | 60 | 15.0% |
| विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र | 60 | 15.0% |
| आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन | 50 | 12.5% |
| स्तरीकरण और गतिशीलता | 50 | 12.5% |
| धर्म और समाज | 30 | 7.5% |
| एक विषय के रूप में समाजशास्त्र | 30 | 7.5% |
| शोध पद्धति और विश्लेषण | 20 | 5.0% |
| कार्य और आर्थिक जीवन | 20 | 5.0% |
| नातेदारी व्यवस्था | 10 | 2.5% |
समाजशास्त्र वैकल्पिक 2026 पेपर II
आधिकारिक प्रश्न-पत्र: समाजशास्त्र वैकल्पिक 2026 पेपर II (UPSC PDF)। समय तीन घंटे, अधिकतम अंक 250।
सिलेबस का पहला हिस्सा, यानी घुर्ये, श्रीनिवास और देसाई के परिप्रेक्ष्य और औपनिवेशिक शासन का असर, 400 में से 130 नंबर ले गया। घुर्ये और देसाई दो-दो बार आए, 4(c) में दोनों की सीधी तुलना भी है, और 8(a) पूछता है कि उपनिवेश के बिना भारतीय समाज कैसा होता। जनसंख्या गतिकी से 40 नंबर आए, और 4(b) में भारत का मौजूदा जनसंख्या पिरामिड बनाना है, यानी साफ़ चित्र उत्तर का हिस्सा है।
खंड A
| प्र. | सवाल | अंक | यूनिट |
|---|---|---|---|
| 1(a) | एम० एन० श्रीनिवास के भारतीय ग्रामीण समाज का अध्ययन किस अर्थ में संरचनात्मक तथा प्रकार्यात्मक उपागम पर आधारित है? विश्लेषण कीजिए। | 10 | भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य |
| 1(b) | आपके अनुसार, कौन-से सामाजिक सुधार का समाज के एक विशिष्ट भाग पर दीर्घकालीन प्रभाव पड़ा है? अपने उत्तर की उचित उदाहरण द्वारा पुष्टि कीजिए। | 10 | औपनिवेशिक शासन का असर |
| 1(c) | महिला आन्दोलनों एवं कानूनों की पृष्ठभूमि में क्या आप सोचते/सोचती हैं कि मातृसत्तात्मकता समय की माँग है? विस्तार से विवेचना कीजिए। | 10 | आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन |
| 1(d) | भारत में धर्म को समझने के लिए ‘कर्तव्य’ तथा ‘पूजा’ की अवधारणाओं पर होने वाले वाद-विवाद की विवेचना कीजिए। | 10 | धर्म और समाज |
| 1(e) | भारत जैसे बहुलवादी समाज में ‘पंथनिरपेक्ष’ की अवधारणा किस प्रकार किसी भी धर्म के परे जाती है? विश्लेषण कीजिए। | 10 | राजनीति और समाज |
| 2(a) | जी० एस० घुर्ये द्वारा प्रतिपादित भारतीय विद्या उपागम, भारतीय ग्रन्थों के अध्ययन के माध्यम से भारतीय समाज के अध्ययन पर केन्द्रित है। अन्य समाज के अध्ययन में भारतीय विद्या उपागम किस प्रकार उपयोगी हो सकता है? विस्तार से टिप्पणी कीजिए। | 20 | भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य |
| 2(b) | परीक्षण कीजिए कि भारतीय राष्ट्रवाद किस प्रकार से ‘अखण्ड भारत’/भारतीय उपमहाद्वीप की सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनैतिक चेतना का परिणाम था। | 20 | औपनिवेशिक शासन का असर |
| 2(c) | ए० आर० देसाई यह तर्क कैसे देते हैं कि भारतीय सामाजिक वर्गों का अध्ययन, उपनिवेशिक उत्पादन-रीति के द्वारा किया जाना चाहिए? स्पष्ट कीजिए। | 10 | भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य |
| 3(a) | भारतीय समाज के बृहत्-स्तरीय ग्राम संरचना में सूक्ष्म-स्तरीय ग्राम अध्ययन को प्रयोग करने में आने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। | 20 | ग्रामीण और कृषक सामाजिक संरचना |
| 3(b) | भारत में कृषक समाज में मध्य वर्ग के उद्भव की व्याख्या कीजिए। इस मध्य वर्ग के उद्भव के सामाजिक-संरचनात्मक प्रभाव क्या रहे हैं? | 20 | भारत में सामाजिक वर्ग |
| 3(c) | जबकि भूमि सुधार एक प्रतिमानात्मक स्थानान्तरण था, तब आप भारतीय समाज को अधिक न्यायसंगत बनाने के लिए किस प्रकार के भूमि सुधारों की अनुशंसा करेंगे/करेंगी? | 10 | ग्रामीण और कृषक सामाजिक संरचना |
| 4(a) | भारतीय संविधान किस प्रकार शिक्षा को प्रोत्साहित करता है? क्या आप सोचते/सोचती हैं कि सामाजिक परिवर्तन के लिए शिक्षा एक प्रमुख यंत्र हो सकती है? स्पष्ट कीजिए। | 20 | सामाजिक परिवर्तन की दृष्टियाँ |
| 4(b) | भारत की वर्तमान जनसंख्या का पिरामिड बनाइए। धारणीयता प्राप्त करने के लिए आप जनसंख्या में परिवर्तन लाने के कौन-से नीतिगत उपायों की अनुशंसा करेंगे/करेंगी? | 20 | जनसंख्या गतिकी |
| 4(c) | जी० एस० घुर्ये तथा ए० आर० देसाई द्वारा भारतीय समाज को समझने के लिए प्रयुक्त उपागमों की तुलना कीजिए। | 10 | भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य |
खंड B
| प्र. | सवाल | अंक | यूनिट |
|---|---|---|---|
| 5(a) | वृद्धों द्वारा ‘वृद्ध-देखभाल’ प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों की विवेचना कीजिए। | 10 | जनसंख्या गतिकी |
| 5(b) | 21वीं शताब्दी के भारत के सामाजिक आन्दोलनों में भौतिक आन्दोलनों से आभासी आन्दोलनों की ओर परिवर्तनों का परीक्षण कीजिए। | 10 | आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन |
| 5(c) | स्पष्ट कीजिए कि परिवार नियोजन कार्यक्रमों ने वर्तमान भारत में किस प्रकार एक राजनैतिक ‘U’-मोड़ (टर्न) लिया है। | 10 | जनसंख्या गतिकी |
| 5(d) | भारत में जाति-व्यवस्था को समझने में लुई ड्यूमो तथा आन्द्रे बेतेई अपनी पद्धतियों में किस प्रकार भिन्न हैं? व्याख्या कीजिए। | 10 | जाति व्यवस्था |
| 5(e) | भारतीय समाज को समझने के लिए ‘इन्साइडर’ तथा ‘आउटसाइडर’ उपागमों पर होने वाले वाद-विवाद का विवरण दीजिए। | 10 | भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य |
| 6(a) | विरोध (प्रतिवाद) तथा आन्दोलन में अन्तर कीजिए। कुछ उन आन्दोलनों की विवेचना कीजिए, जिन्होंने उपनिवेश काल में भारतीय कृषक समाज के ढाँचे को परिवर्तित किया था। | 20 | औपनिवेशिक शासन का असर |
| 6(b) | भारत में विकास कार्यक्रमों तथा सामाजिक परिवर्तन को समक्रमित कीजिए तथा उनका प्रकट और जीवित अनुभवों द्वारा वर्णन कीजिए। | 20 | सामाजिक परिवर्तन की दृष्टियाँ |
| 6(c) | भारत में उपनिवेश काल में कानून द्वारा ‘अपराधी जनजाति’ की श्रेणी क्यों निर्मित की गई थी? इसके प्रभावों की विवेचना कीजिए। | 10 | भारत के जनजातीय समुदाय |
| 7(a) | स्वतंत्र भारत में नगरीकरण को अत्यधिक नगरीकरण तथा ग्रामीण आघात के रूप में विशेषीकृत किया जाता है। इसकी जनसंख्यात्मक तथा समाजशास्त्रीय आयामों से व्याख्या कीजिए। | 20 | औद्योगीकरण और नगरीकरण |
| 7(b) | भारत में महिलाओं के प्रति हिंसा की समाजशास्त्रीय व्याख्या कीजिए। इन हिंसाओं को कम करने के लिए आप क्या सुझाव देंगे/देंगी? | 20 | सामाजिक बदलाव की चुनौतियाँ |
| 7(c) | समाज के सीमान्त वर्गों के हितों की रक्षा करने के लिए अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिक क्षेत्र में परिवर्तन करने की प्रक्रिया का परीक्षण कीजिए। | 10 | औद्योगीकरण और नगरीकरण |
| 8(a) | उपनिवेशिक शासन ने भारतीय समाज को किस प्रकार परिवर्तित किया है? यदि भारतीय समाज ने उपनिवेश शासन का अनुभव नहीं किया होता, तब यह (भारतीय समाज) किस प्रकार का होता? विस्तार से उत्तर दीजिए। | 20 | औपनिवेशिक शासन का असर |
| 8(b) | महिला आन्दोलनों ने किस प्रकार प्रत्येक क्षण में महिलाओं की उपस्थिति का अनुभव कराया और महिलाओं को विभिन्न कार्य-क्षेत्रों में अधिक सहभागी बना दिया है? विवेचना कीजिए। | 20 | आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन |
| 8(c) | भारत की वर्ण-व्यवस्था में, जनजाति समुदाय को आप कहाँ स्थित करेंगे/करेंगी? विवेचना कीजिए। | 10 | भारत के जनजातीय समुदाय |
2026 पेपर II: नंबर कहाँ रहे
| यूनिट | अंक | पेपर में हिस्सा |
|---|---|---|
| औपनिवेशिक शासन का असर | 70 | 17.5% |
| भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य | 60 | 15.0% |
| जनसंख्या गतिकी | 40 | 10.0% |
| आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन | 40 | 10.0% |
| सामाजिक परिवर्तन की दृष्टियाँ | 40 | 10.0% |
| औद्योगीकरण और नगरीकरण | 30 | 7.5% |
| ग्रामीण और कृषक सामाजिक संरचना | 30 | 7.5% |
| सामाजिक बदलाव की चुनौतियाँ | 20 | 5.0% |
| भारत में सामाजिक वर्ग | 20 | 5.0% |
| भारत के जनजातीय समुदाय | 20 | 5.0% |
| जाति व्यवस्था | 10 | 2.5% |
| राजनीति और समाज | 10 | 2.5% |
| धर्म और समाज | 10 | 2.5% |
2026 के समाजशास्त्र पेपर में ज़ोर कहाँ रहा
पेपर I में विषय-वस्तु से ज़्यादा पद्धति पर सवाल थे। चार सवाल सीधे इस पर थे कि समाजशास्त्र कोई बात जानता कैसे है: प्रत्यक्षवाद बनाम निर्वचनवाद (3b), वस्तुनिष्ठता (5a), ग्राउंडेड थ्योरी बनाम सिद्धांत-केंद्रित शोध (7a), और क्या समाजशास्त्र की पद्धतियाँ जटिल सामाजिक घटनाओं को समझ पाती हैं (4c)। जो अभ्यर्थी पद्धति को जल्दी निपटाने वाला पहला अध्याय मानते हैं, उनके लिए 2026 में चुनने को कम सवाल बचते।
पेपर II उल्टी दिशा में गया, संस्थाओं से ज़्यादा भारत के समाजशास्त्रियों की ओर। परिप्रेक्ष्यों से 60 और औपनिवेशिक शासन के असर से 70 नंबर आए, जबकि जाति व्यवस्था की यूनिट से सिर्फ़ एक 10 नंबर का सवाल आया, ड्यूमो बनाम बेतेई। कई सवाल आपकी अपनी राय माँगते हैं: किस समाज सुधार का असर सबसे लंबा रहा (1b), क्या मातृसत्ता समय की माँग है (1c), आप कौन-से भूमि सुधार सुझाएँगे (3c)। ऐसे सवालों में एक साफ़ राय और उसके पीछे एक-दो नामी अध्ययन काम आते हैं, हर चीज़ का सर्वे नहीं।
मौजूदा नीति से जुड़े सवाल छोटे नोट्स में आए: परिवार नियोजन का राजनीतिक U-टर्न (5c), बुज़ुर्गों की देखभाल (5a), भौतिक से वर्चुअल आंदोलनों की ओर बदलाव (5b) और अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक बनाना (7c)। चारों 10 नंबर के हैं।
पेपर I में ‘राजनीति और समाज’ सबसे स्थिर यूनिट है: 2023, 2024 और 2025 में हर साल 50 नंबर, और 2026 में 60। ‘एक विषय के रूप में समाजशास्त्र’ चारों साल ठीक 30 नंबर पर रहा। ‘विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र’ 2023 और 2024 में 20 पर था, फिर 2025 में 50 और 2026 में 60 तक पहुँचा। उसी दौरान ‘शोध पद्धति और विश्लेषण’ 2025 के 50 से गिरकर 2026 में 20 पर आ गया। ‘नातेदारी व्यवस्था’ 30, 40, 50 तक चढ़ी, फिर 2026 में सिर्फ़ 10 रह गई। ‘समाजशास्त्रीय विचारक’ में सबसे ज़्यादा उतार-चढ़ाव है: 50, 60, 30 और फिर 2026 में 70, जो चार साल में सबसे ऊँचा है। ‘कार्य और आर्थिक जीवन’ 2023 के 50 से घटकर 2025 और 2026 में 20 पर रहा।
पेपर II में 2026 का पेपर Section A की शुरुआती यूनिट पर ज़्यादा टिका। ‘भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य’ 2023 में 10 पर था, 2024 और 2025 में 20 पर, और 2026 में 60 पर पहुँचा। ‘औपनिवेशिक शासन का असर’ हर साल बढ़ा: 10, 20, 60, 70। ‘सामाजिक बदलाव की चुनौतियाँ’ 2024 के 80 से गिरकर 2026 में 20 पर आ गई। इस टेबल में नातेदारी, विवाह और पितृसत्ता वाले सवाल भी इसी यूनिट में गिने गए हैं, क्योंकि उनकी अलग पंक्ति नहीं है। 2023, 2024 और 2025 के इसके कुल नंबरों में इनका हिस्सा 30, 40 और 10 था। ‘जाति व्यवस्था’ 2023 के 40 से 2025 में शून्य पर आई, फिर 2026 में 10 पर रही। ‘आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन’ 2025 में 10 पर गिरा, फिर 2026 में 40 पर लौटा।
पेपर I: यूनिट के हिसाब से अंक, 2023 से 2026
| यूनिट | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|
| एक विषय के रूप में समाजशास्त्र | 30 | 30 | 30 | 30 |
| विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र | 20 | 20 | 50 | 60 |
| शोध पद्धति और विश्लेषण | 50 | 40 | 50 | 20 |
| समाजशास्त्रीय विचारक | 50 | 60 | 30 | 70 |
| स्तरीकरण और गतिशीलता | 50 | 30 | 40 | 50 |
| कार्य और आर्थिक जीवन | 50 | 40 | 20 | 20 |
| राजनीति और समाज | 50 | 50 | 50 | 60 |
| धर्म और समाज | 40 | 50 | 30 | 30 |
| नातेदारी व्यवस्था | 30 | 40 | 50 | 10 |
| आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन | 30 | 40 | 50 | 50 |
पेपर II: यूनिट के हिसाब से अंक, 2023 से 2026
| यूनिट | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|
| भारतीय समाज के अध्ययन के परिप्रेक्ष्य | 10 | 20 | 20 | 60 |
| औपनिवेशिक शासन का असर | 10 | 20 | 60 | 70 |
| ग्रामीण और कृषक सामाजिक संरचना | 70 | 30 | 40 | 30 |
| जाति व्यवस्था | 40 | 20 | 0 | 10 |
| भारत के जनजातीय समुदाय | 20 | 20 | 10 | 20 |
| भारत में सामाजिक वर्ग | 40 | 20 | 50 | 20 |
| धर्म और समाज | 20 | 20 | 0 | 10 |
| सामाजिक परिवर्तन की दृष्टियाँ | 10 | 40 | 40 | 40 |
| औद्योगीकरण और नगरीकरण | 20 | 30 | 50 | 30 |
| राजनीति और समाज | 10 | 40 | 30 | 10 |
| आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन | 50 | 40 | 10 | 40 |
| जनसंख्या गतिकी | 40 | 20 | 30 | 40 |
| सामाजिक बदलाव की चुनौतियाँ | 60 | 80 | 60 | 20 |
पूरा सिलेबस, हर बिंदु के साथ, <a href=”/sociology-optional-syllabus/”>समाजशास्त्र वैकल्पिक सिलेबस</a> पेज पर है (अंग्रेज़ी में), और ऊपर की यूनिटें उसी के शीर्षकों पर हैं। तैयारी के लिए <a href=”/sociology-optional-notes/”>समाजशास्त्र वैकल्पिक नोट्स</a> (अंग्रेज़ी में) दोनों पेपर टॉपिक-दर-टॉपिक कवर करते हैं।
विषय अभी तय नहीं किया है तो पहले <a href=”/hindi-notes/samajashastr-vaikalpik-vishay-puri-guide/”>समाजशास्त्र वैकल्पिक विषय की पूरी गाइड</a> पढ़िए।
सामान्य प्रश्न
UPSC समाजशास्त्र वैकल्पिक 2026 में क्या पूछा गया?
पेपर I पद्धति और क्लासिकल विचारकों पर टिका रहा: प्रत्यक्षवाद और निर्वचनवाद, ग्राउंडेड थ्योरी, धर्म पर दुर्खीम, सत्ता पर वेबर और मार्क्स की उत्पादन-पद्धति। पेपर II में भारतीय समाज के परिप्रेक्ष्य और औपनिवेशिक शासन का असर सबसे बड़ा हिस्सा रहे, घुर्ये और देसाई दो-दो बार आए, और साथ में जनसंख्या, नगरीकरण, महिला आंदोलन और जनजाति पर सवाल थे।
समाजशास्त्र के हर पेपर में कितने सवाल और कितने नंबर होते हैं?
हर पेपर में दो खंडों में 8 सवाल होते हैं, हर सवाल 50 नंबर का, और आपको तीन घंटे में 5 सवाल करने होते हैं, 250 नंबर के लिए। सवाल 1 और 5 अनिवार्य हैं, दोनों में 10-10 नंबर के पाँच हिस्से होते हैं, और बाकी तीन में हर खंड से कम से कम एक सवाल ज़रूरी है।
2026 के आधिकारिक समाजशास्त्र प्रश्न-पत्र कहाँ से डाउनलोड करें?
UPSC अपनी वेबसाइट upsc.gov.in के previous question papers पेज पर मुख्य परीक्षा के आधिकारिक प्रश्न-पत्र PDF में डालता है, और 2026 के दोनों समाजशास्त्र पेपर वहीं हैं। इस पेज पर भी हर पेपर की शुरुआत में डाउनलोड लिंक है।
2026 के पेपर से तैयारी में कैसे मदद लें?
पहले एक पूरा पेपर घड़ी लगाकर लिखिए, तीन घंटे में पाँच सवाल। फिर यूनिट वाले बँटवारे से अपने नोट्स जाँचिए: जिस यूनिट से इस साल 50-60 नंबर आए और आपके नोट्स में उस पर दो ही पन्ने हैं, पहले वही कमी पूरी कीजिए।
2026 का समाजशास्त्र पेपर सिलेबस के हिसाब से कैसा रहा?
पेपर I ने 400 में से 110 नंबर विषय, वैज्ञानिक पद्धति और शोध पद्धति पर रखे, और नातेदारी पर सिर्फ़ 10। पेपर II ने 130 नंबर परिप्रेक्ष्यों और औपनिवेशिक शासन पर रखे, जबकि जाति व्यवस्था की यूनिट से एक ही 10 नंबर का सवाल आया। किसी झुकाव को ट्रेंड मानने से पहले पिछले सालों के पेपर में यही बँटवारा देख लीजिए।
क्या 2026 में किसी सवाल में चित्र बनाना था?
हाँ। पेपर II के सवाल 4(b) में नीति सुझाने से पहले भारत का मौजूदा जनसंख्या पिरामिड बनाना है, इसलिए साफ़, लेबल वाला चित्र 20 नंबर के उत्तर का हिस्सा है। इसे एक बार अभ्यास कर लीजिए ताकि परीक्षा में दो मिनट से ज़्यादा न लगे।