UPSC विधि वैकल्पिक 2026 के दोनों पेपर नीचे पूरे दिए गए हैं, सवाल-दर-सवाल, हर सवाल के नंबर और सिलेबस यूनिट के साथ। हर पेपर में दो खंडों में 8 सवाल छपे, कुल 400 नंबर के, और आपको तीन घंटे में 5 सवाल करने होते हैं, 250 नंबर के लिए। सवाल 1 और 5 ज़रूरी हैं, और बाकी तीन में हर खंड से कम से कम एक सवाल होना चाहिए।
पेपर I में खंड A संवैधानिक और प्रशासनिक विधि का है और खंड B अंतरराष्ट्रीय विधि का। पेपर II में खंड A अपराध और अपकृत्य विधि पर है, और खंड B संविदा, वाणिज्यिक विधि और समकालीन कानूनी मुद्दों पर; इस पेपर में हर उत्तर को कानूनी प्रावधानों और अदालती फ़ैसलों से साबित करने को कहा गया है। हर पेपर के बाद यूनिट के हिसाब से नंबरों का बँटवारा दिया है, जिससे दिखता है कि 2026 में ज़ोर कहाँ था।
विधि वैकल्पिक 2026 पेपर I
आधिकारिक प्रश्न-पत्र: विधि वैकल्पिक 2026 पेपर I (UPSC PDF)। समय तीन घंटे, अधिकतम अंक 250।
सबसे ज़्यादा नंबर (55) प्रशासनिक विधि और सेवाओं पर गए: प्रत्यायोजित विधायन, प्राकृतिक न्याय, लोकपाल और प्रसाद का सिद्धांत। न्यायपालिका और मूल ढाँचे पर 50 नंबर रहे, जिनमें केशवानन्द बनाम गोलकनाथ वाला सवाल अकेले 20 नंबर का था। खंड B में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (GATT और ब्रेटन वुड्स) और राष्ट्रीयता, शरण व मानवाधिकार पर 40-40 नंबर गए, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य वाला सवाल UNCLOS की निर्दोष यात्रा को एक ताज़ा विवाद से जोड़ता है।
खंड A
| प्र. | सवाल | अंक | यूनिट |
|---|---|---|---|
| 1(a) | ”भारत में ‘प्रसाद के सिद्धान्त’ का पूर्णतः अनिर्बंधित उपयोग अस्तित्व में नहीं है।” सेवा विधिशास्त्र के सम्बन्ध में विशदीकरण कीजिए। | 10 | प्रशासनिक विधि और सेवाएँ |
| 1(b) | ”यदि विधायन और प्रशासनिक कार्यों के न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति को निराकृत अथवा अपहृत कर (हटा) दिया जाए, तो संविधान जैसा है, वैसा ही समाप्त हो जाएगा।” आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। | 10 | न्यायपालिका और मूल ढाँचा |
| 1(c) | विधायी प्रक्रिया से आप क्या समझते हैं? संविधान के अन्तर्गत ऐसे किसी राज्यक्षेत्र, जो किसी राज्य में सम्मिलित नहीं है, के लिए किसी भी सूची में, किसी भी विषय पर, विधि-निर्माण किए जाने हेतु संसद को सशक्त किया गया है। व्याख्या कीजिए। | 10 | संघ-राज्य विधायी शक्तियाँ |
| 1(d) | ‘निदेशक तत्त्वों’ में प्रयुक्त शब्द ‘राज्य’ का वही अर्थ है जैसा कि अनुच्छेद 12 द्वारा मूलभूत अधिकारों के प्रवर्तन के उद्देश्यों हेतु दिया गया है। यदि कोई अपवाद हो, तो उसके प्रकाश में परीक्षण कीजिए। | 10 | मौलिक अधिकार और निदेशक तत्त्व |
| 1(e) | भारत में राष्ट्रपति का निर्वाचन लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति द्वारा किया जाता है। व्याख्या कीजिए। यदि किसी कारणवश राष्ट्रपति के निर्वाचन के सम्बन्ध में कोई विवाद हो जाता है, तब उसका निपटारा कौन करेगा? विवेचना कीजिए। | 10 | राष्ट्रपति और आपातकालीन उपबंध |
| 2(a) | ”संविधान के अनुच्छेद 21 का निर्वचन करते समय उच्चतम न्यायालय ने ‘विधि की सम्यक् प्रक्रिया’ की अवधारणा को अप्रत्यक्ष (परोक्ष) रूप से भारतीय संविधान में प्रविष्ट किया है, जिसके कारण इसकी परिधि का अत्यन्त ही विस्तार हो गया।” निदर्शक (प्रमुख) वाद-विधियों की सहायता से अपने उत्तर का समर्थन कीजिए। | 20 | मौलिक अधिकार और निदेशक तत्त्व |
| 2(b) | ” ‘संविधानवाद’ का मूल रूप में अर्थ होता है—’परिसीमित सरकार’ अथवा ‘सरकार पर परिसीमा’। यह मनमानी करने की शक्तियों की प्रतिस्थापना (ऐन्टीथीसिस) है।” विवेचना कीजिए। | 15 | संविधानवाद और संवैधानिक शासन |
| 2(c) | ”विधायिका को प्रत्यायोजित अधिनियम में ही आवश्यक नीति अथवा नीतिगत मानकों का निरूपण कर देना चाहिए, तत्पश्चात् प्रत्यायुक्त (प्रतिनिधि) विधायी नीति के अग्रसारण में विधि-निर्माण करेगा।” सुसंगत वाद-विधियों की सहायता से उक्त कथन की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए। | 15 | प्रशासनिक विधि और सेवाएँ |
| 3(a) | केशवानन्द, न्यायिक सृजनात्मकता तथा नीति-निर्माण में उच्चतम न्यायालय की उच्च-स्तरीय भूमिका का दृष्टान्त है और इसे गोलकनाथ के विनिश्चय में सुधार के रूप में देखा जा सकता है। सुसंगत तर्कों की सहायता से परीक्षण कीजिए। | 20 | न्यायपालिका और मूल ढाँचा |
| 3(b) | ‘सांविधानिक शासन’ एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें सरकार का प्राधिकार सीमित, परिभाषित तथा एक सर्वोच्च लिखित अथवा अलिखित संविधान द्वारा रचित है। भारतीय संविधान की छठवीं अनुसूची के विशेष सन्दर्भ में विश्लेषण कीजिए। | 15 | संविधानवाद और संवैधानिक शासन |
| 3(c) | ” ‘प्राकृतिक न्याय’ की अवधारणा भिन्नता की विषय-वस्तुओं की है तथा यह अलग-अलग मामलों में विभिन्न प्रक्रियात्मक मानक आरोपित करती है।” व्याख्या कीजिए। | 15 | प्रशासनिक विधि और सेवाएँ |
| 4(a) | ”भारत का उच्चतम न्यायालय एक बहु-अधिकारिता का न्यायालय है तथा इसे विश्व का सर्वशक्तिशाली शीर्ष न्यायालय कहा जा सकेगा।” उक्त कथन की सुसंगत संवैधानिक उपबन्धों की सहायता से न्यायसंगत पुष्टि कीजिए। | 20 | न्यायपालिका और मूल ढाँचा |
| 4(b) | ”भारत में आपातकाल की उद्घोषणा के लिए वांछित सन्तुष्टि राष्ट्रपति की होनी चाहिए, न कि केन्द्रीय कैबिनेट की।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा उद्घोषणा के प्रभावों की भी विवेचना कीजिए। | 15 | राष्ट्रपति और आपातकालीन उपबंध |
| 4(c) | ” ‘ऑम्बुड्समैन’ विधायी कार्य से उत्पन्न, प्रशासन पर पर्यवेक्षण की व्यवस्था है।” उक्त कथन का भारत के परिप्रेक्ष्य में उदाहरणों की सहायता से विशदीकरण कीजिए। | 15 | प्रशासनिक विधि और सेवाएँ |
खंड B
| प्र. | सवाल | अंक | यूनिट |
|---|---|---|---|
| 5(a) | क्या अन्तर्राष्ट्रीय विधि, ‘विधि’ शब्द के सही अर्थों में विधि है, अथवा नहीं? परीक्षण कीजिए। | 10 | अंतरराष्ट्रीय विधि का स्वरूप |
| 5(b) | उन सिद्धान्तों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए, जिन्हें अन्तर्राष्ट्रीय विधि तथा देशज (राष्ट्रीय) विधि के मध्य सम्बन्ध की व्याख्या हेतु प्रतिपादित किया गया है। | 10 | अंतरराष्ट्रीय विधि का स्वरूप |
| 5(c) | ‘आश्रय (शरण)’ क्या है? क्या किसी व्यक्ति को किसी अन्य देश में ‘शरण का अधिकार’, अभियोजन से बचने के लिए मौलिक अधिकार है? व्याख्या कीजिए। | 10 | राष्ट्रीयता, शरण और मानवाधिकार |
| 5(d) | संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य द्वारा ‘दोहरा वीटो’ लगाए जाने से आप क्या समझते हैं? संयुक्त राष्ट्र के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर इसके प्रभाव की विवेचना भी कीजिए। | 10 | संयुक्त राष्ट्र |
| 5(e) | ‘राज्य उत्तराधिकार’ तथा ‘राज्य मान्यता’ से आप क्या समझते हैं? दोनों के मध्य अन्तर स्थापित कीजिए। | 10 | राज्य मान्यता और उत्तराधिकार |
| 6(a) | ”वर्तमान विश्व आर्थिक व्यवस्था, मुक्त बाजार की ताकतों के प्रभाव में दिशा-निर्देशित एवं मुक्त प्रतिस्पर्धा द्वारा चालित है। यह वस्तुओं तथा सेवाओं, जिसमें तकनीकी भी सम्मिलित है, के मुक्त आवागमन पर आधारित है।” इस सन्दर्भ में टैरिफ तथा व्यापार के सामान्य समझौता (GATT) के अन्तर्गत गैर-भेदभाव और मुक्त व्यापार के सिद्धान्तों की भूमिका की विवेचना कीजिए। | 20 | अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था |
| 6(b) | ‘हस्तक्षेप’ के आधारों तथा इसके प्रकारों की विवेचना कीजिए। उन परिस्थितियों का वर्णन कीजिए, जिनके अन्तर्गत आत्म-प्रतिरक्षा के लिए विधि-सम्मत रूप से बल प्रयोग किया जा सकेगा। इसकी परिसीमाएँ भी दीजिए। | 15 | बल प्रयोग और हस्तक्षेप |
| 6(c) | ”अन्तर्राष्ट्रीय विधि को उस विधि के समूह के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो प्रमुखतः उन सिद्धान्तों तथा आचरण के नियमों पर आधारित होता है, जिन्हें राज्य स्वयं को अनुपालन करने के लिए बाध्य मानते हैं और इसी कारण वे अपने पारस्परिक सम्बन्धों में सामान्यतया उनका अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।” व्याख्या कीजिए। | 15 | अंतरराष्ट्रीय विधि का स्वरूप |
| 7(a) | राज्यक्षेत्रीय समुद्र तथा संलग्न क्षेत्र के सन्दर्भ में ‘कॉर्फ़ू चैनल प्रकरण’ में आए तथ्यों तथा समुद्र विधि के सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए। वर्तमान होरमुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होरमुज़) समस्या के सन्दर्भ में अपना अभिमत दीजिए कि किस हद तक विदेशी जहाजों की ‘निर्दोष यात्रा’ के सिद्धान्त के प्रकाश में समुद्र विधि के संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (1982) के अन्तर्गत, उक्त समस्या का निराकरण किया जा सकता है। समझाइए। | 20 | समुद्री विधि |
| 7(b) | अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् के गठन, शक्तियों तथा कार्यों की विवेचना कीजिए। | 15 | संयुक्त राष्ट्र |
| 7(c) | ‘राष्ट्रीयता’ पद को परिभाषित कीजिए। किसी व्यक्ति द्वारा राष्ट्रीयता अर्जित किए जाने के विभिन्न तरीकों का वर्णन कीजिए। ‘राष्ट्रीयता’ तथा ‘अधिवास’ में अन्तर बताइए। | 15 | राष्ट्रीयता, शरण और मानवाधिकार |
| 8(a) | ”ब्रेटन वुड्स सम्मेलन, 1944 द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय सहयोग और आर्थिक विकास के लिए, नयी अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा दिए जाने हेतु, दो संस्थाओं के परिनियमों को अपनाया गया।” उपर्युक्त कथन की अन्तर्राष्ट्रीय मंच के सम्बन्ध में विवेचना कीजिए। | 20 | अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था |
| 8(b) | मानव पर्यावरण के संरक्षण तथा बेहतरी के लिए वैश्विक उष्णता (ग्लोबल वार्मिंग) के क्योटो पर्यावरण समिट, 1997 के ‘पूर्व तथा पश्चात्वर्ती’ विकास की संक्षिप्त विवेचना कीजिए। | 15 | मानव पर्यावरण |
| 8(c) | मानवाधिकारों से आप क्या समझते हैं? किसी व्यक्ति के मानवाधिकारों के प्रवर्तन हेतु, अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अन्तर्गत, निर्धारित प्रक्रिया की विवेचना कीजिए। | 15 | राष्ट्रीयता, शरण और मानवाधिकार |
2026 पेपर I: नंबर कहाँ रहे
| यूनिट | अंक | पेपर में हिस्सा |
|---|---|---|
| प्रशासनिक विधि और सेवाएँ | 55 | 13.8% |
| न्यायपालिका और मूल ढाँचा | 50 | 12.5% |
| अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था | 40 | 10.0% |
| राष्ट्रीयता, शरण और मानवाधिकार | 40 | 10.0% |
| अंतरराष्ट्रीय विधि का स्वरूप | 35 | 8.8% |
| संविधानवाद और संवैधानिक शासन | 30 | 7.5% |
| मौलिक अधिकार और निदेशक तत्त्व | 30 | 7.5% |
| राष्ट्रपति और आपातकालीन उपबंध | 25 | 6.2% |
| संयुक्त राष्ट्र | 25 | 6.2% |
| समुद्री विधि | 20 | 5.0% |
| मानव पर्यावरण | 15 | 3.8% |
| बल प्रयोग और हस्तक्षेप | 15 | 3.8% |
| राज्य मान्यता और उत्तराधिकार | 10 | 2.5% |
| संघ-राज्य विधायी शक्तियाँ | 10 | 2.5% |
विधि वैकल्पिक 2026 पेपर II
आधिकारिक प्रश्न-पत्र: विधि वैकल्पिक 2026 पेपर II (UPSC PDF)। समय तीन घंटे, अधिकतम अंक 250।
पेपर II में अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण 65 नंबर के साथ सबसे आगे रहे। नए आपराधिक कानून तीन हिस्सों में आए, कुल 45 नंबर: राजद्रोह से BNS तक का बदलाव, शादी का झूठा वादा और BNS में चोरी। दोनों समस्या-आधारित सवाल, 4(a) और 4(c), सवाल 4 में ही हैं और 35 नंबर के हैं, इसलिए तथ्य-आधारित सवालों से बचना हो तो खंड A की शर्त सवाल 2 या 3 से पूरी हो सकती है। खंड B में भागीदारी और अभिकरण अकेले 45 नंबर के रहे।
खंड A
| प्र. | सवाल | अंक | यूनिट |
|---|---|---|---|
| 1(a) | क्या ‘रेस इप्सा लॉकिटर’, ‘साबित करने के भार (बर्डन ऑफ प्रूफ)’ को पूर्णतः उलट (प्रतिकूल कर) देता है ? टिप्पणी कीजिए। | 10 | अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण |
| 1(b) | ‘सामुदायिक सेवा’ को दण्ड के प्रकार के रूप में स्थानीय समस्याओं को हल करने के लिए किस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है ? विवेचना कीजिए। | 10 | आपराधिक दायित्व के सिद्धांत और दंड |
| 1(c) | ‘उपभोक्ता’ की परिवर्तित परिभाषा आधुनिक बाज़ार पद्धति यथा ‘ई-कॉमर्स’ के साथ किस प्रकार सरेखित (अलाइन) करती है ? विवेचना कीजिए। | 10 | अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण |
| 1(d) | क्या किसी ‘एकल (एक ही) कृत्य’ को लोक उपताप एवं निजी उपताप दोनों माना जा सकता है ? उदाहरणों की सहायता से व्याख्या कीजिए। | 10 | अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण |
| 1(e) | भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अंतर्गत ‘राजद्रोह’ से लेकर भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत ‘भारत की संप्रभुता, एकता और अखण्डता को खतरे में डालने वाले कृत्य’ तक विधि में किस प्रकार परिवर्तन हुए हैं ? व्याख्या कीजिए। | 10 | राज्य के विरुद्ध अपराध |
| 2(a) | ” ‘प्रतिनिधिक उत्तरदायित्व’ का सिद्धांत दोष की अपेक्षा लोक नीति पर आधारित है।” विनिर्णीत वादों के आलोक में उपर्युक्त कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। | 20 | अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण |
| 2(b) | भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 को प्रभाव देने के लिए अस्पृश्यता-विरोधी विधि किस प्रकार विकसित हुई ? संगत विधायी अधिनियमों और न्यायिक निर्णयों के आलोक में विवेचना कीजिए। | 15 | विशेष कानून और प्ली-बार्गेनिंग |
| 2(c) | अपकृत्यात्मक दायित्व की प्रतिरक्षा के रूप में ‘वोलेंटी नॉन फिट इन्जुरिया’ के सिद्धांत की विवेचना कीजिए। इस सिद्धांत के विषय क्षेत्र (दायरे) की क्या परिसीमाएँ हैं ? | 15 | अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण |
| 3(a) | ‘पूर्व-विचारित मृत्यु कारित करने’ तथा ‘अचानक झगड़ा-जनित हत्या’ के मध्य विधि कितने प्रभावपूर्ण तरीके से विभेद स्थापित करती है ? सुसंगत सांविधिक प्रावधानों के आलोक में व्याख्या कीजिए। | 20 | मानव शरीर के विरुद्ध अपराध |
| 3(b) | ‘तथ्य की भूल’ किस सीमा तक दुराशय (आपराधिक मनःस्थिति) को नकारती है ? क्या यह न्यायोचितता के रूप में या क्षम्यता (माफ़ी) के रूप में प्रवर्तित होता है, और क्या इसे कठोर दायित्व के अपराधों में प्रतिरक्षा के रूप में अनुमत किया जाना चाहिए ? व्याख्या कीजिए। | 15 | आपराधिक दायित्व के सिद्धांत और दंड |
| 3(c) | ‘समझौता-अभिवाक्’ (प्ली-बार्गेनिंग) में पक्षकारों की स्वैच्छिक भागीदारी को सुनिश्चित करने में विधि द्वारा प्रदत्त प्रक्रियात्मक रक्षोपायों के साथ-साथ न्यायपालिका की भूमिका की विवेचना कीजिए। | 15 | विशेष कानून और प्ली-बार्गेनिंग |
| 4(a) | ‘X’, एक 25 वर्ष का लड़का, ‘Y’, एक 18 वर्ष की लड़की को वचन देता है कि यदि वह उसके साथ ‘इन्द्रिय-समागम’ करे तो वह उससे विवाह कर लेगा। लड़की अनिच्छुक है, किन्तु लड़के के विवाह करने के पुनरावृत्त आश्वासन पर सहमत हो जाती है। कृत्य के पंद्रह दिन पश्चात्, लड़का उसको एक संदेश भेजता है कि वह अपना वचन नहीं निभा सकता क्योंकि यह उसकी आजीविका की योजना से मेल नहीं खाता और वह एक एनआरआई लड़की से विवाह करके विदेश में व्यवस्थित होना चाहता है। लड़के के द्वारा कौन-सा अपराध, यदि कोई हो, कारित किया गया है ? विवेचना कीजिए। इस सम्बन्ध में, भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों को, अब तक के हुए हाल के यौन अपराध संबंधी संशोधनों के आलोक में, व्याख्यायित कीजिए। | 20 | महिलाओं के विरुद्ध अपराध |
| 4(b) | “चोरी कब्जा के विरुद्ध अपराध है, न कि स्वामित्व के विरुद्ध।” टिप्पणी कीजिए। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों में चोरी से संबंधित विधि में किए गए परिवर्तनों की व्याख्या भी कीजिए। | 15 | संपत्ति के विरुद्ध अपराध |
| 4(c) | ‘X’, एक लोक सेवक, ‘Y’ नामक व्यक्ति के खाना पकाने के गैस संयोजन (कनेक्शन) के लिए ‘Y’ के नियमित आवेदन को समय से अग्रसारित करने के एवज में दस हजार रुपए की राशि की माँग करता है। ‘X’ ने कौन-सा, यदि कोई हो, अपराध किया है ? सुसंगत सांविधिक प्रावधानों के आलोक में व्याख्या कीजिए। निदर्शक वादों को संदर्भित कीजिए। | 15 | विशेष कानून और प्ली-बार्गेनिंग |
खंड B
| प्र. | सवाल | अंक | यूनिट |
|---|---|---|---|
| 5(a) | भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 किस तरह से एकाधिकार के विनियमन से उपभोक्ता हितों के संरक्षण की तरफ परिवर्तन को प्रतिबिंबित करता है ? विवेचना कीजिए। | 10 | प्रतिस्पर्धा, साइबर और बौद्धिक संपदा विधि |
| 5(b) | “सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में यथा उपबंधित ‘साइबर उल्लंघनों’ एवं ‘साइबर अपराधों’ में विधिशास्त्रीय अन्तर है।” विवेचना कीजिए। | 10 | प्रतिस्पर्धा, साइबर और बौद्धिक संपदा विधि |
| 5(c) | भागीदारी के लाभों में हिस्सा प्राप्त करने वाले ‘गैर-भागीदारों’ पर टिप्पणी लिखिए। | 10 | भागीदारी और अभिकरण |
| 5(d) | ‘भाटक-क्रय (किराया-खरीद)’ के आवश्यक तत्त्व क्या हैं ? यह ‘खरीदने (क्रय) के करार’ से किस प्रकार भिन्न है ? | 10 | माल विक्रय और किराया-खरीद |
| 5(e) | ‘असम्यक् असर’ के आधार पर एक संविदा को शून्य घोषित करवाने की कार्यवाही के लिए वादी को क्या सिद्ध करना होगा ? किन परिस्थितियों में ‘असम्यक् असर’ की उपधारणा की जा सकती है ? | 10 | संविदा विधि |
| 6(a) | “लाभ में हिस्सा प्राप्त करना, भागीदारी के अस्तित्व का प्रथम-दृष्ट्या प्रमाण माना जाता है। किन्तु ‘पारस्परिक-अभिकरण’ इसका निश्चायक परीक्षण है।” उपर्युक्त कथन के आलोक में भागीदारी के आवश्यक तत्त्वों की विवेचना कीजिए। | 20 | भागीदारी और अभिकरण |
| 6(b) | भारत में ‘संविदा की पक्षकारिता’ के नियम की प्रयोज्यता की व्याख्या कीजिए। उन परिस्थितियों की भी विवेचना कीजिए जिनमें यह नियम ग़ैर पक्षकार को संविदा को प्रवर्तित कराने से नहीं रोकता है। | 15 | संविदा विधि |
| 6(c) | “विक्रेता, अपवर्जन खण्ड के सहारे घटिया सामान बेचकर अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग अब नहीं कर सकते। अब उनका कर्तव्य है कि उपयुक्त माल (सामान/वस्तु) प्रदान करें।” सांविधिक प्रावधानों एवं विनिश्चित निर्णयों की सहायता से उपर्युक्त कथन की व्याख्या कीजिए। | 15 | माल विक्रय और किराया-खरीद |
| 7(a) | क्या ‘वैकल्पिक विवाद निस्तारण’ (ADR) प्रणाली लोक विधि के तत्त्वों, संवैधानिक अधिकारों, अथवा महत्त्वपूर्ण लोक हित के मामलों में प्रभावपूर्ण तरीके से विवादों का विनिर्णयन कर सकती है ? माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 में प्रदत्त परिसीमाओं के आलोक में वैकल्पिक विवाद निस्तारण (ADR) प्रणाली की भूमिका की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए। | 20 | ADR और माध्यस्थम् |
| 7(b) | अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय विधिशास्त्र में, ‘पूर्वावधानी के सिद्धांत’ का अभ्युदय आत्मसात् क्षमता के सिद्धांत से पूर्वावधानी के सिद्धांत की ओर परिवर्तन को सूचित करता है। ‘पोषणीय विकास’ की अवधारणा के आलोक में इस कथन का विशदीकरण कीजिए। | 15 | पर्यावरण विधि |
| 7(c) | “‘मीडिया द्वारा विचारण’ एक जटिल परिघटना है जो लोकतंत्र के दो मौलिक सिद्धांतों अर्थात् ‘निष्पक्ष विचारण के अधिकार’ तथा ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ के बीच संघर्ष उत्पन्न करता है।” इन दोनों के मध्य कैसे संतुलन स्थापित किया जा सकता है ? व्याख्या कीजिए। | 15 | मीडिया ट्रायल |
| 8(a) | “बौद्धिक सम्पदा विधियाँ रचनाकर्ता को आत्यंतिक (अनन्य) अधिकार प्रदान करती हैं; हालाँकि ऐसे अधिकार आत्यंतिक नहीं हैं।” लोकहित के मुकाबले (बनाम) प्रतिलिप्याधिकार की दृष्टि से इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। | 20 | प्रतिस्पर्धा, साइबर और बौद्धिक संपदा विधि |
| 8(b) | ‘मानक रूपी संविदा’ में अंतर्निहित शोषण की संभावना के विरुद्ध व्यक्ति को न्यायालय द्वारा कैसे सुरक्षा प्रदान की जाती है ? विवेचना कीजिए और विनिर्णीत वादों को संदर्भित कीजिए। | 15 | संविदा विधि |
| 8(c) | “प्रत्येक व्यक्ति जो दूसरे के लिए कार्य करता है अभिकर्ता नहीं माना जाता है। प्रतिनिधित्व के गुण तथा मालिक से प्राप्त शक्ति संक्षेप में अभिकर्ता के विशेष (सुभेदक) लक्षण कहे जाते हैं।” उपर्युक्त को दृष्टिगत करके अभिकरण के स्वरूप की विवेचना कीजिए। | 15 | भागीदारी और अभिकरण |
2026 पेपर II: नंबर कहाँ रहे
| यूनिट | अंक | पेपर में हिस्सा |
|---|---|---|
| अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण | 65 | 16.2% |
| भागीदारी और अभिकरण | 45 | 11.2% |
| विशेष कानून और प्ली-बार्गेनिंग | 45 | 11.2% |
| प्रतिस्पर्धा, साइबर और बौद्धिक संपदा विधि | 40 | 10.0% |
| संविदा विधि | 40 | 10.0% |
| आपराधिक दायित्व के सिद्धांत और दंड | 25 | 6.2% |
| माल विक्रय और किराया-खरीद | 25 | 6.2% |
| ADR और माध्यस्थम् | 20 | 5.0% |
| मानव शरीर के विरुद्ध अपराध | 20 | 5.0% |
| महिलाओं के विरुद्ध अपराध | 20 | 5.0% |
| पर्यावरण विधि | 15 | 3.8% |
| संपत्ति के विरुद्ध अपराध | 15 | 3.8% |
| मीडिया ट्रायल | 15 | 3.8% |
| राज्य के विरुद्ध अपराध | 10 | 2.5% |
2026 के विधि पेपर से क्या समझ आता है
दोनों पेपर का ढाँचा साफ़ रहा और किसी एक यूनिट पर पूरा ज़ोर नहीं था। पेपर I में सबसे बड़ी यूनिट को 400 में से 55 नंबर मिले और पेपर II में 65। इसका सीधा मतलब है कि कुछ हिस्से छोड़कर तैयारी करना यहाँ महँगा पड़ता है, क्योंकि सवाल 1 और 5 ज़रूरी हैं और हर पेपर के दोनों खंडों से 50-50 नंबर करवा ही लेते हैं।
इस बार ताज़ा कानूनी जानकारी भी परखी गई। पेपर II में IPC के राजद्रोह से BNS तक का बदलाव, यौन अपराधों से जुड़े BNS प्रावधान, BNS में चोरी और ई-कॉमर्स के दौर में उपभोक्ता की बदली परिभाषा पूछी गई। पेपर I में होर्मुज़ जलडमरूमध्य की समस्या को UNCLOS के तहत सुलझाने पर सवाल था। जिसकी तैयारी पुरानी IPC और पुराने केस तक रुकी थी, उसके नंबर दोनों पेपर में कटे।
चार साल में पेपर I का ज़ोर काफ़ी बदला। संघ-राज्य विधायी शक्तियों पर 2023 से 2025 तक 40, 50 और 45 नंबर आए, पर 2026 में सिर्फ़ 10। बल प्रयोग और हस्तक्षेप (इसमें विवाद निपटारा, परमाणु हथियार और ICC के सवाल भी गिने हैं) 25 से बढ़कर 50 और 55 तक गया, फिर 2026 में 15 पर आ गया। 2026 में ज़ोर खंड A की प्रशासनिक और न्यायिक यूनिट पर लौटा: प्रशासनिक विधि और सेवाएँ 55 पर पहुँची (पहले 50, 20 और 45) और न्यायपालिका और मूल ढाँचा 50 पर (पहले 15, 45 और 25)। अंतरराष्ट्रीय विधि का स्वरूप 2023 में 70 नंबर पर था, उसके बाद 35 से ऊपर नहीं गया।
पेपर II में सबसे बड़ा बदलाव खंड B में है। संविदा विधि पर 2023 में 60 और 2024 और 2025 में 90-90 नंबर आए, फिर 2026 में 40, जबकि भागीदारी और अभिकरण 2025 के 10 से बढ़कर 45 पर पहुँचा। खंड A में चारों साल अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण सबसे आगे रहे: 80, 70, 85 और 65 नंबर। राज्य के विरुद्ध अपराध पर सवाल सिर्फ़ 2026 में आया, 10 नंबर का, और विशेष कानून और प्ली-बार्गेनिंग 2025 के 20 से बढ़कर 45 पर पहुँचे।
पेपर I: यूनिट के हिसाब से अंक, 2023 से 2026
| यूनिट | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|
| प्रशासनिक विधि और सेवाएँ | 50 | 20 | 45 | 55 |
| न्यायपालिका और मूल ढाँचा | 15 | 45 | 25 | 50 |
| राष्ट्रीयता, शरण और मानवाधिकार | 15 | 40 | 35 | 40 |
| अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था | 20 | 35 | 15 | 40 |
| अंतरराष्ट्रीय विधि का स्वरूप | 70 | 25 | 15 | 35 |
| संविधानवाद और संवैधानिक शासन | 30 | 15 | 10 | 30 |
| मौलिक अधिकार और निदेशक तत्त्व | 35 | 40 | 40 | 30 |
| राष्ट्रपति और आपातकालीन उपबंध | 30 | 30 | 35 | 25 |
| संयुक्त राष्ट्र | 20 | 30 | 30 | 25 |
| समुद्री विधि | 25 | 10 | 25 | 20 |
| बल प्रयोग और हस्तक्षेप | 25 | 50 | 55 | 15 |
| मानव पर्यावरण | 15 | 0 | 0 | 15 |
| संघ-राज्य विधायी शक्तियाँ | 40 | 50 | 45 | 10 |
| राज्य मान्यता और उत्तराधिकार | 10 | 10 | 25 | 10 |
पेपर II: यूनिट के हिसाब से अंक, 2023 से 2026
| यूनिट | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|
| अपकृत्य विधि और उपभोक्ता संरक्षण | 80 | 70 | 85 | 65 |
| विशेष कानून और प्ली-बार्गेनिंग | 30 | 35 | 20 | 45 |
| भागीदारी और अभिकरण | 25 | 20 | 10 | 45 |
| संविदा विधि | 60 | 90 | 90 | 40 |
| प्रतिस्पर्धा, साइबर और बौद्धिक संपदा विधि | 30 | 25 | 30 | 40 |
| आपराधिक दायित्व के सिद्धांत और दंड | 20 | 50 | 40 | 25 |
| माल विक्रय और किराया-खरीद | 15 | 10 | 10 | 25 |
| मानव शरीर के विरुद्ध अपराध | 30 | 25 | 20 | 20 |
| महिलाओं के विरुद्ध अपराध | 20 | 0 | 15 | 20 |
| ADR और माध्यस्थम् | 30 | 40 | 25 | 20 |
| संपत्ति के विरुद्ध अपराध | 20 | 20 | 20 | 15 |
| पर्यावरण विधि | 10 | 0 | 15 | 15 |
| मीडिया ट्रायल | 30 | 15 | 20 | 15 |
| राज्य के विरुद्ध अपराध | 0 | 0 | 0 | 10 |
विधि को वैकल्पिक विषय चुनने से पहले <a href=”/hindi-notes/upsc-vidhi-vaikalpik-vishay-puri-guide/”>विधि वैकल्पिक की पूरी गाइड</a> पढ़िए; उसमें किताबें, 24 हफ्ते की तैयारी योजना और उत्तर लिखने की रणनीति है। सिलेबस की हर धारा अंग्रेज़ी में <a href=”/law-optional-syllabus/”>Law optional syllabus</a> पेज पर है।
दूसरे विषयों से तुलना करनी हो तो <a href=”/upsc-optional-subjects/”>सभी UPSC वैकल्पिक विषयों की सूची</a> (अंग्रेज़ी में) देखिए।
सामान्य प्रश्न
UPSC विधि वैकल्पिक 2026 में क्या पूछा गया?
पेपर I के खंड A में संवैधानिक और प्रशासनिक विधि थी, जैसे अनुच्छेद 21, केशवानन्द, आपातकाल और लोकपाल; खंड B में अंतरराष्ट्रीय विधि थी, जैसे सुरक्षा परिषद, शरण और होर्मुज़ जलडमरूमध्य। पेपर II में अपराध, अपकृत्य, संविदा, वाणिज्यिक विधि और समकालीन कानूनी मुद्दे थे, और तीन हिस्से भारतीय न्याय संहिता पर थे।
विधि वैकल्पिक के हर पेपर में कितने सवाल और नंबर होते हैं?
हर पेपर 250 नंबर का है और तीन घंटे का होता है। पेपर में दो खंडों में 50-50 नंबर के 8 सवाल छपते हैं और आपको 5 करने होते हैं। सवाल 1 और 5 ज़रूरी हैं, बाकी तीन में हर खंड से कम से कम एक सवाल होना चाहिए।
विधि वैकल्पिक 2026 का आधिकारिक पेपर कहाँ से डाउनलोड करें?
आधिकारिक प्रश्न-पत्र UPSC की वेबसाइट upsc.gov.in के पिछले प्रश्न-पत्र वाले पेज पर मिलते हैं, और ये हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में छपते हैं। इस पेज पर हर पेपर के साथ उसका डाउनलोड लिंक भी दिया है।
इस पेपर का तैयारी में इस्तेमाल कैसे करें?
हर सवाल को उसकी यूनिट के साथ पढ़िए और देखिए कि आपके नोट्स से उस पर कम से कम एक प्रावधान और एक केस के साथ जवाब लिखा जा सकता है या नहीं। फिर एक पूरा पेपर घड़ी लगाकर लिखिए, क्योंकि पेपर II हर जवाब में प्रावधान और फ़ैसले माँगता है। जिन यूनिट में आपके पास लिखने को कुछ नहीं था, पहले उन्हीं को ठीक कीजिए।
2026 का विधि पेपर पिछले सालों से कैसा है?
यह पेज सिर्फ़ 2026 के पेपर पर है, इसलिए यहाँ सही तुलना दोनों पेपर के बीच ही है। पेपर I में नंबर बराबर बँटे और कोई यूनिट 55 से ऊपर नहीं गई, जबकि पेपर II में अपकृत्य विधि और नए आपराधिक कानूनों पर ज़्यादा ज़ोर रहा। पुराने सालों के लिए UPSC के पिछले प्रश्न-पत्र वाले पेज पर आधिकारिक पेपर सबसे भरोसेमंद हैं।
विधि पेपर II 2026 में IPC पूछी गई या भारतीय न्याय संहिता?
दोनों की जानकारी चाहिए थी। 45 नंबर के तीन हिस्से भारतीय न्याय संहिता, 2023 पर थे: IPC के राजद्रोह से BNS तक का बदलाव, यौन अपराधों के प्रावधान और चोरी। इसलिए पुरानी IPC धाराएँ और उनके BNS वाले रूप साथ-साथ याद रखिए।